दोस्त के साथ मिलकर उसकी बहन को पेला
(Bahan Ki Gand Marne Ki Kahani)
बहन की गांड मारने की कहानी में मैंने और मेरे दोस्त दोनों ने उसकी बहन की चूत मारी. फिर हमने दीदी की गांड भी मारी बारी बारी से. बहन की गांड मारने में उनको बहुत दर्द हुआ.
हाय दोस्तो, मैं राहुल हूँ.
यह बहन की गांड मारने की कहानी मेरे दोस्त विक्की के साथ मिलकर उसकी बड़ी बहन कामना की चुदाई की है.
ये उन दिनों की बात है जब मैं विक्की के घर उसकी कामना दीदी से पढ़ने जाता था.
कामना दीदी हम दोनों को डाइनिंग टेबल पर बैठाकर बायोलॉजी पढ़ाती थी.
एक दिन विक्की ने मुझे अपने घर की छत पर सेक्सी बुक पढ़ने को बुलाया.
सेक्स से भरपूर कहानियां पढ़ते-पढ़ते हम दोनों के लौड़े तन गए.
विक्की ने धीरे से अपना हाथ मेरे पैंट के ऊपर खड़े लौड़े पर फिरा दिया.
मुझे बहुत मज़ा आने लगा.
मैंने भी अपना हाथ उसके पैंट में तने डंडे पर फिराना शुरू कर दिया.
यह देख कर उसने मेरी पैंट की ज़िप खोली और मेरी चड्डी नीचे करके लंड को बाहर निकाल दिया.
मेरा तनतनाता लंड सात इंच लंबा और तीन इंच मोटा एकदम से पैंट से निकला और फनफनाता हुआ आसमान की ओर मुँह उठा कर उछलने लगा.
मैंने जैसे ही विक्की की पैंट की ज़िप खोली, इतने में उसकी बड़ी दीदी छत पर आ गई.
हम दोनों ने घबराहट में अपने अपने हाथ हटा लिए.
मैंने अपना लंड किताब से छिपा लिया लेकिन शायद उसकी दीदी ने देख लिया था.
कामना दीदी ने मेरी टांगों के बीच में नजर डालते हुए कहा- चलो, पढ़ना नहीं है क्या आज?
हम दोनों ने एक साथ कहा- आप जाओ, हम लोग बस अभी आते हैं!
कामना दीदी नीचे चली गई लेकिन हम दोनों को लगने लगा था कि हम दोनों पकड़े जा चुके थे.
विक्की ने कहा- अब क्या करें? दीदी से क्या कहेंगे?
मेरा तो लंड उसकी दीदी को देखकर पागल हुआ जा रहा था.
मैंने कहा- कुछ नहीं यार … दीदी को सॉरी बोलकर मना लेते हैं.
वह बोला- दीदी मानेगी!
मैंने उसे आंख मारी और कहा- वह मेरी टांगों में कुछ देखने की कोशिश कर रही थी.
यह सुनकर विक्की कुछ नहीं बोला लेकिन उसकी नजरें बता रही थीं कि वह अपनी दीदी को पेलने के मूड में आ गया है.
अब विक्की और मैं रूम में जाकर चुपचाप बैठ गए.
थोड़ी देर में उसकी दीदी आई और चेयर पर बैठ गई.
कामना दीदी के एक तरफ विक्की था और दूसरी तरफ मैं बैठा था.
कामना ने पूछा- छत पर क्या पढ़ रहे थे? मुझे दिखाओ वह बुक!
मैं दीदी का आदेश मानते हुए अपनी कमर में खोंसी हुई बुक निकालने लगा.
विक्की ने कहा- सॉरी दीदी! अब से नहीं पढ़ेंगे, आप किसी से मत कहना प्लीज़!
दीदी ने मेरे हाथ से वह किताब ली और पढ़ने लगी.
उसकी नजरें चुदाई के नंगे चित्रों पर घूमने लगीं.
मैंने कामना की छोटी स्कर्ट की ओर देखा.
उसकी गोरी जांघें देखकर मुझसे रहा नहीं गया.
मैंने अपना एक हाथ कामना दीदी की एक जांघ पर रख दिया.
कामना ने मेरी ओर देखा.
इतने में विक्की ने भी अपना हाथ उसकी दूसरी जांघ पर रखकर कहा- दीदी प्लीज़ माफ कर दो ना!
कामना ने बुक को टेबल पर रखा और अपना एक-एक हाथ हमारे खड़े लंड पर रख दिया.
विक्की और मैंने एक-दूसरे को देखा और आंख मारी.
हम दोनों ने अपने अपने हाथों को हरकत दी और कामना दीदी के स्कर्ट के अन्दर उसकी पैंटी तक ले गए.
कामना दीदी की धड़कनें तेज़ चलने लगीं, उसके बूब्स भी फूलने लगे.
हम दोनों ने अपने एक एक हाथ से उसके आम जैसे दोनों दूध पकड़ लिए.
कामना ने कहा- बस करो .. ओओह क्या कर रहे हो ओहो!’
हम दोनों समझ गए कि दीदी गर्मा गई है.
यह महसूस करते ही हम दोनों चेयर से खड़े हो गए.
विक्की अपनी दीदी के पीछे खड़ा हो गया और मैं उसके सामने आ गया.
विक्की ने दीदी की टी-शर्ट को पीछे से उठा कर उतार दिया और मैंने अपने घुटनों के बल बैठकर दीदी की स्कर्ट उतार दी.
विक्की ने पीछे से कामना दीदी के दोनों दूध पकड़ कर दबा दिए और मैं अपनी नाक दीदी की पैंटी में घुसाकर सूँघने लगा.
वाह … क्या गजब की ख़ुशबू थी यार!
कामना दीदी की कामवासना उसकी चुत से बह रही थी!
मैंने कामना दीदी की ब्रा और पैंटी को उतार दिया.
इतने में विक्की ने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.
मैंने भी अपने कपड़े उतारने शुरू किए.
इतने में विक्की ने कामना दीदी को पीछे की ओर खींचा.
उसका लंड कामना दीदी की गांड के पुट्ठों के मध्य दरार में रगड़ खाने लगा.
मैंने जैसे ही अपनी चड्डी उतारी तो कामना दीदी की नज़र मेरे लम्बे खड़े लंड पर जम गई.
उसके होंठ ओ-शेप के हो गए.
विक्की पीछे होते-होते बिस्तर पर सीधा लेट गया और कामना उसके ऊपर पीठ के बल जा गिरी.
उन दोनों की टांगें बेड पर लटकी हुई थीं.
मैंने धीरे से कामना दीदी की टांगें फैलाईं.
वाह .. क्या नज़ारा था यार!
दीदी की गुलाबी कली जैसी चुत मेरे सामने फैल सी गई थी और विक्की के सफ़ेद गोल-गोल आंड उसकी बहन की चुत के आजू बाजू से दिख रहे थे.
मैंने जैसे ही कामना दीदी की फुद्दी पर हाथ फिराया, वह मचलने लगी.
मैंने अपना मुँह उसकी फुद्दी में गाड़ सा दिया और ज़ुबान से उसकी पुत्तियों को अलग करते हुए जीभ को अन्दर डाल दिया.
कामना ‘आह्ह … आह्ह …!’ करती हुई ऊपर को खिसकने लगी.
उसने दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़ लिया और दोनों घुटनों को मोड़कर पैर बेड के किनारे पर रख दिए.
वह ऊपर की ओर सरकती हुई उछलने लगी.
अचानक विक्की का लंड कामना दीदी की गांड के पुट्ठों से रगड़ता हुआ आज़ाद हो गया और मेरे जिस्म से टकराने लगा.
कामना दीदी की चूत गीली हो चुकी थी और विक्की के लंड पर पसीना था.
मैंने विक्की का लंड पहली बार देखा, उसका लंड भी छह इंच लंबा था, बस फर्क इतना था कि उसकी चमड़ी गोरी थी और मेरे लंड की काली.
विक्की के लंड की गुलाबी टोपी देखकर मैंने उसे मुँह में लेकर चूस लिया.
विक्की ‘आह्ह्ह …!’ करता हुआ अपनी दीदी के दोनों मम्मों को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.
मेरा लंड भी कामरस की बूँदें टपकाने लगा था.
तभी मैं उठा और कामना दीदी को ज़ोरदार किस किया, लेकिन दीदी ने अपना मुँह बंद कर लिया.
विक्की ने कहा- राहुल … लौड़े को थोड़ा और चूस ना यार … निकाल क्यों दिया … बड़ा मज़ा आ रहा था!
मैंने कहा- हां मैं और चूसूँगा … पर कामना दीदी को भी मेरा लंड चूसना पड़ेगा!
कामना दीदी ने मना कर दिया, वह बोली- नहीं, मैं नहीं करूंगी … मैंने अब तक कभी ऐसा सोचा भी नहीं है.
विक्की ने कहा- प्लीज़ दीदी, चूसो ना!
कामना दीदी बोली- नहीं विक्की … बहुत हुआ, अब मुझे जाने दो!
लेकिन विक्की ने कामना दीदी को कसकर पकड़ लिया और उसके गालों को हाथों से दबाने लगा.
इससे कामना दीदी का मुँह खुल गया.
मैं मौक़ा देखकर कामना दीदी के ऊपर 69 पोजीशन में लेट गया और अपना खड़ा लंड उसके होंठों पर सटा दिया.
फिर झुककर विक्की का लंड चूसने लगा.
मेरा लंड अभी सिर्फ़ कामना के होंठों को ही चोद पा रहा था.
मैंने अपनी ज़ुबान कामना के क्लिटोरिस पर घुमाई और विक्की के लंड को उसकी छेद पर सैट कर दिया.
विक्की ने भी नीचे से ज़ोर-ज़ोर के झटके देने शुरू कर दिए.
जैसे ही विक्की के लंड की टोपी उसकी बहन की चुत के छेद में घुसी, दीदी की चीख़ निकल गई ‘आआ … आह्ह्ह …!’
उसके खुले मुँह में मेरे लंड ने एक ज़बरदस्त झटका दिया और आधा लंड कामना दीदी के मुँह में घुसता चला गया.
फिर हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से झटके मारते गए.
मेरी आंखों के ठीक सामने विक्की का लंड ‘खप-खप … खप-खप …’ करते हुए दीदी की चूत चोद रहा था.
अतिउत्तेजना के चलते मेरा लंड कामना दीदी के मुँह में ही झड़ गया.
विक्की ने भी ‘आह आह …’ करते हुए लंड की तीन मोटी पिचकारियां दीदी के अन्दर खाली कर दीं.
हम दोनों के लंड ढीले पड़ गए और फचाक-फचाक करते बाहर निकल आए.
कामना दीदी डगमगाती हुई बाथरूम की तरफ भागी और अपना मुँह-चूत धोने लगी.
इतने में हमें भी सुसु लगी.
हम दोनों बाथरूम पहुंचे तो देखा कि कामना दीदी की चुत से ‘फिश्श्श्श …’ करके मूत की तेज़ धार निकल रही थी.
वह टट्टी करने की स्टाइल में बैठकर मूत रही थी.
कामना दीदी ने हमें देखा और बोली- अब और क्या चाहिए? मेरा सब-कुछ तो लूट ही लिया तुम दोनों ने!
मैंने कहा- हमें भी पेशाब आ रही है दीदी!
कामना दीदी हंसकर बोली- तो करो ना! मुझे क्या?
विक्की ने फौरन उसका हाथ पकड़ कर अपने लटकते हुए लंड पर रखा और बोला- हां दीदी!
इतने में उसका मूत तेज़ी से निकलने लगा.
उसके मूत से दीदी का हाथ गीला हो गया.
उसके मूत लेने के बाद कामना दीदी मेरे पास आई और बोली- लाओ, तुम्हें भी करा दूँ सुसु!
मैंने कहा- नहीं दीदी! मुझे तो तुम्हारी गांड में सुसु करनी है!
कामना चौंकी- छी: कितने गंदे हो तुम!
मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया और उसके कान में फुसफुसाया- कितनी हॉट हो तुम दीदी!
उसी दौरान मेरे लंड ने उसकी नंगी गांड की दरार में सुसु करना शुरू कर दिया.
विक्की ने कहा- काश, मैंने भी बहन की गांड में सुसु की होती!
मैंने तुरंत बोला- ठीक है, तू तो गांड में लंड ही पेल दे!
ये सुनते ही कामना दीदी गिड़गिड़ाने लगी- नहीं विक्की! तुम अपनी दीदी को इस तरह नहीं सताओगे प्लीज़!
विक्की मुस्कुराया- ठीक है दीदी, पर मुझे तुम अपनी बुर चाटने दो एक बार.
कामना दीदी ने हंसते हुए कहा- ठीक है बाबा, चलो कमरे में चलते हैं.
हम सब कमरे में आ गए.
कामना दीदी ने एक पैर उठाकर पलंग पर रख दिया.
विक्की घुटनों के बल बैठकर उसकी चूत चाटने लगा.
मैंने मौक़ा देखकर दीदी के गोल-गोल पुठ्ठे फैलाए और उसकी नाजुक कोमल गांड के छेद पर ज़ुबान फेर दी.
कामना चिहुंक उठी- राहुल … हटो पीछे से यार …
मैंने कहा- दीदी, जिसकी गांड ये लेगा, उसे तो स्वर्ग ही मिल जाएगा!
विक्की ने मुझे आंख मारी.
मैंने कामना दीदी को सीधा पकड़कर उसके होंठों पर ज़ोरदार किस कर दिया और उसकी पीठ को ताकत से पकड़ कर अपने ऊपर सुला लिया.
मेरा लंड दीदी की गुलाबी चूत को रगड़ने लगा. पीछे से विक्की ने आकर कामना दीदी की गांड में उंगली ठूँस दी!
दीदी चीख़ पड़ी- छोड़ो मुझे … प्लीज़!
पर वह खुद कमर हिलाकर अपनी चुत मेरे लंड पर रगड़ रही थी.
मैंने लंड पकड़ कर उसकी खुली हुई चूत में एक झटके में घुसेड़ दिया.
उसके मुँह से ‘उफ़्फ़्फ़ …’ निकला.
इतने में विक्की भी पूरा ज़ोर लगाकर अपना लंड दीदी की मासूम गांड में घुसाने लगा.
जैसे ही विक्की का लंड छेद को चीरता हुआ अन्दर घुसा, कामना दीदी ज़ोर से चीख़ी ‘आआ आआह … नहीं ई ई …!’
मैंने फौरन दीदी का मुँह हाथ से बंद कर दिया.
वह तड़पने लगी, उसके आंसू निकल आए.
पर हम दोनों के लंड हर धक्के में और गहराई तक घुसते चले गए.
थोड़ी देर में कामना दीदी को मज़ा आने लगा और वह भी हमारे साथ ताल मिलाकर हिलने-डुलने लगी!
कमरे में बस ‘थप-थप… थप-थप…’ की जोरदार आवाज़ें गूंज रही थीं.
कामना दीदी के आम जैसे बड़े-बड़े बूब्स हवा में लहरा रहे थे!
जब विक्की ने पूरी ताकत लगाकर गांड से अपना लंड निकाला, तो कामना दीदी की गांड का छेद ‘धक-धक… धक-धक…’ करके बार-बार खुल-बंद होने लगा.
विक्की ने कहा- राहुल तुझे भी गांड मारनी है, तो आ जा यार!
कामना फौरन चिल्ला दी- नहीं-नहीं! चुत जितनी मर्ज़ी मारो, पर गांड छोड़ दो प्लीज़!
मैंने हंसते हुए कहा- ठीक है दीदी, लेकिन अबकी बार तुम्हें हम दोनों का लंड एक साथ लेना पड़ेगा!
कामना दीदी हैरान होती हुई बोली- एक साथ? वह कैसे? मैं तो मर जाऊंगी!
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा, ट्राई तो करो, बहुत मज़ा आएगा!
मैंने विक्की को नीचे लिटाया और कामना दीदी को उसके ऊपर बिठा दिया.
जैसे ही विक्की का लंड का टोपा अन्दर घुसा, मैंने कामना दीदी को विक्की के ऊपर पूरी तरह सुला दिया और खुद ऊपर चढ़ गया.
मैंने अपना लंड का टोपा विक्की के लंड पर रगड़ते हुए कामना दीदी की चूत में घुसाने की पूरी कोशिश की.
दीदी की तो आवाज़ ही नहीं निकल रही थी, उसका तो मुँह बस खुला का खुला रह गया था.
मेरा लंड जब रगड़ता हुआ विक्की के टोपे से टकराया, तो हम दोनों के टोपे एक साथ कामना दीदी की चूत में घुसे हुए थे. कभी विक्की का लंड आगे, कभी मेरा.
हम दोनों ने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए.
आख़िरी झटके में दोनों लंड एक साथ कामना दीदी की बच्चेदानी तक पहुंच गए और दोनों लंड ने मोटी मोटी पिचकारियां चुत में छोड़ दीं!
कामना दीदी को जब हमारे लंड पिचके हुए रबर की ट्यूब की तरह उसकी बुर से बाहर निकले तो उसे ज़बरदस्त राहत मिली.
हम दोनों कामना दीदी को ‘आई लव यू दीदी! कहते हुए उसकी चूचियों को चूसते-चूसते प्यार करने लगे.
कामना दीदी भी सारा दर्द भुलाकर हमारे बालों में हाथ फेरती हुई बोली- अब से तुम दोनों मेरी प्यास बुझाया करो … पर प्रॉमिस करो, मेरी गांड दोबारा नहीं मारोगे, बहुत दर्द हो रहा है!
हम दोनों ने तुरंत प्रॉमिस कर दिया.
दीदी से उठा भी नहीं जा रहा था.
हमने दीदी को कंधों से उठाया और बाथरूम ले जाकर उसकी फूल सी खुली हुई चूत और गांड अच्छे से साफ कर दी.
दीदी ने भी बदले में हमारे लंड बारी-बारी से मुँह में लेकर चूस-चूसकर साफ कर दिए.
फिर हमने दीदी से एक आख़िरी रिक्वेस्ट की- दीदी, हमें तुम्हारी चूत से मूत निकलते हुए देखना है प्लीज़!
दीदी ने मुस्कुराकर ‘ओके!’ कहा.
उसने एक पैर कमोड पर रखा और दोनों हाथों से अपनी चूत की फांकें फैलाकर खड़ी हो गई.
हम दोनों घुटनों के बल बैठ गए.
दीदी की मूत की पतली-सी धार ‘फिश्श्श…’ करने लगी, उसका छोटा-सा मूत का छेद साफ़-साफ़ दिखने लगा.
कभी-कभी पेशाब उसकी जांघों पर बहता, और जब रफ्तार तेज़ हुई तो हमारे मुँह पर भी छींटे आने लगे!
जैसे ही उसका पेशाब बंद हुआ, विक्की ने कहा- दीदी! अब तुम नीचे झुककर घोड़ी बन जाओ ना!
कामना दीदी ने हैरानी से पूछा- क्यों?
विक्की शरारती हंसी के साथ बोला- क्योंकि हमें तुम्हारी गांड में ही मूतना है दीदी.
दीदी ने बात मान ली और वह घोड़ी बन गई.
बहन की गांड का छेद हमें अपनी ओर खींच रहा था.
हम दोनों ने अपने लंड उसके छेद पर टिका दिए और ज़ोरदार मूत की गर्म धार छोड़ दी.
मूत का गर्म पानी बहन की गांड को राहत दे रहा था.
पर जैसे ही हमारे लंड उसके छेद से टकराए, दोनों फिर से टाइट हो गए.
हम प्रेशर बढ़ाकर अन्दर घुसेड़ने की कोशिश करने लगे.
कामना दीदी ‘आउच!’ चिल्ला कर ऊपर को उठी, लेकिन हमने उसे कसकर पकड़ लिया और वासना पर काबू न रख सके.
कुत्ते की तरह हम उसकी गांड पर चढ़ गए!
एक साथ तो दोनों के लंड नहीं घुस पाए, पर बारी-बारी से कभी विक्की का टोपा तो कभी मेरा टोपा कामना दीदी की गांड मारने लगा.
दीदी रोने लगी- प्लीज़ … बस करो … साले आगे की ले लो … वह तो कई बार चुद चुकी है लेकिन पीछे मत पेलो!
लेकिन हम बारी-बारी उसके पीछे चढ़ते ही चले गए.
मैं सोच रहा था कि दीदी को चोदने में कहीं देर तो नहीं कर दी, यह तो कह रही है कि कई बार चुद चुकी है!
मैंने उसका एक दूध पकड़ कर मुँह में लेकर चूसा और उससे पूछा- कई बार चुदी हो इसका क्या मतलब है दीदी … किससे चुदी हो?
वह कुछ नहीं बोली.
मैं भी चुदाई में लगा रहा.
आख़िर में हमारी वीर्य की बौछारें उसकी गांड और पुठ्ठों पर गिर गईं.
तब जाकर हमें उसके ऊपर थोड़ा तरस आया.
वह गाली दे रही थी तो हम दोनों ने वादा किया- अगली बार ये गलती नहीं होगी दीदी!
कामना दीदी ने इस बार कुछ नहीं सुना और गुस्से में बोली- अगली बार न मैं तुम्हें पढ़ाऊंगी, न अपने कपड़े भी छूने दूँगी!
वह यह कहती हुई गुस्से में बाथरूम से निकली और पैंटी-ब्रा-कपड़े पहनने लगी.
हम दोनों दीदी से माफी मांगने लगे.
कामना दीदी ने कहा- गांड मरवाने का दर्द तुम नहीं समझ सकते!
हमने बार-बार सॉरी कहा.
फिर दीदी शरारती मुस्कान के साथ बोली- अच्छा? यदि तुम दोनों अपनी-अपनी गांड मरवाओ, तो मैं माफ कर दूँगी!
मैंने हकलाते हुए कहा- हम कैसे मरवा सकते हैं दीदी? कौन मारेगा हमारी?
कामना दीदी हंस पड़ी- क्यों विक्की! तू तो बहुत शौकीन है ना अपनी दीदी की गांड का? अब तू राहुल की मार मेरे सामने!
मैंने विक्की के लंड की तरफ देखा, ये सुनते ही उसका लंड एक इंच और बड़ा हो गया.
वह उत्साह से बोला- हां दीदी! मैं तो चाहता ही हूँ!
कामना ने मुझे पकड़ा, बिस्तर पर उल्टा लिटाया और विक्की मेरे ऊपर चढ़ गया.
मुझे पता ही नहीं चला, मैंने खुद अपनी गांड ऊंची कर ली.
विक्की ने टोपा फँसा दिया.
तभी मुझे अहसास हुआ कि हमने कामना के साथ क्या किया था.
मैं दर्द से चीख पड़ा- आआ … आह्ह्ह…!’
कामना दीदी ने फौरन मेरे मुँह में अपनी फुद्दी घुसा दी और विक्की धक्के पर धक्के लगाने लगा.
जब विक्की ने जड़ तक मेरी गांड में पेल दिया, तब कामना बोली- अब इसे भी अहसास करा दे.
मैं तो गुस्से में था, मैं भी ताकत लगाकर विक्की की गांड पर चढ़ गया, पर उसकी गांड इतनी टाइट थी कि मैं घुसेड़ ही नहीं पा रहा था.
विक्की ज़ोर-ज़ोर से चीखा- सॉरी दीदी! मैं समझ गया हूँ!
लेकिन कामना ने कहा- अभी तो घुसा भी नहीं, तू समझा कैसे?
मैंने कहा- दीदी, ये नहीं घुसेगा, बहुत छोटा छेद है इसका!
कामना बाथरूम गई, तेल की बोतल लेकर आई.
उसने विक्की की गांड में उंगलियों से तेल डाला, मेरे लंड पर मसल दिया.
दीदी बोली- अब ट्राई करो!
इस बार विक्की की फट ही गई.
मुझे ज़बरदस्त मज़ा आने लगा.
विक्की अब रिलैक्स हो गया और मैं धक्के पर धक्के लगाने लगा.
कामना दीदी ने अपनी बुर विक्की के मुँह पर रखकर रगड़ना शुरू कर दिया.
दीदी की बुर से कामरस का पानी टपकने लगा और विक्की उसे चाटने लगा.
मैंने अपना सारा माल विक्की की गांड में ही खाली कर दिया!
कामना दीदी हंसती हुई बोली- चलो उठो अब!
फिर हम तीनों ने नंगे होकर साथ में नहाया और अपने अपने कपड़े पहन कर रेडी हो गए.
हम दोनों ने एक-साथ कामना दीदी को ज़ोरदार किस किया.
उसके बाद से हम रोज़ कामना दीदी को नई-नई पोजीशन में लिटाकर, आगे-पीछे, हर तरफ़ से भर-भर कर चोदते हैं!
कभी कभी दीदी की इच्छा पर हम दोनों एक दूसरे की गांड भी मारते हैं.
आपको मेरी यह बहन की गांड मारने की कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
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लेखक की पिछली कहानी थी: पहली चुदाई में चूत-गांड की सील खोली
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