अनजान अंकल से ट्रेन में चुद गयी 18 साल की लड़की
(Xxx Gand Ki Kahani)
Xxx गांड की कहानी में मैंने बुआ के बेटे के साथ ट्रेन में जाना था. उसकी नजर मेरे ग्रेम जिस्म पर थी. लेकिन ट्रेन में हमें अलग अलग केबिन मिला. मेरे कूपे में अंकल ने मेरी गांड मार ली.
यह कहानी सुनें.
दोस्तो, मैं रानी (निहारिका)।
एक बार फिर अपनी जीवन की सच्ची घटना की कहानी लेकर आपके सामने हाजिर हूँ।
ये Xxx गांड की कहानी तब की है जब मैं 12वीं में थी।
उस समय मैं पूरी 18 साल की हो चुकी थी और 19वें साल में प्रवेश कर गई थी।
जैसा कि मैंने पहले भी बताया, मेरी शक्ल-सूरत फिल्मी अभिनेत्री तब्बू जैसी है।
मेरा रंग-रूप भी गोरा है।
उन्नीस साल की जवान लड़की को देखकर हर कोई मुंह में पानी ला लेता था और लंड से पानी टपकने लगता था।
परीक्षाओं के बाद गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपनी बुआ के घर कोटा गई।
12वीं के बाद मुझे आगे क्या करना है, ये सब मुझे वहीं से पता करना था, क्योंकि कोटा एजुकेशन हब है।
तो मैं बुआ के घर जाने के लिए दिल्ली से रात 10 बजे ट्रेन में बुआ के लड़के (नरेंद्र भैया) के साथ बैठ गई।
घर से स्टेशन तक ऑटो में भैया मुझे इस तरह बार-बार पकड़ रहे थे।
उनके हाथ मेरी पीठ और पेट पर फिसल रहे थे।
मैं ऑटो में ही गीली हो गई और चुदाई के बारे में सोच-सोचकर पागल हो रही थी।
ट्रेन सुपरफास्ट थी, इसलिए हमें सुबह 3 बजे तक कोटा पहुंचना था।
सीट मेरी और भैया की वेटिंग में थी।
जब कन्फर्म हुई तो दोनों अलग-अलग केबिन में नंबर आए।
मेरे कूपे में मेरे अलावा एक अंकल बैठे थे।
वो करीब 50 साल के लग रहे थे।
भैया ने अंकल से कहा- सीट बदल लो।
अंकल ने मना कर दिया।
तब भैया ने कहा- अच्छा, इसका ध्यान रखना।
और बोलकर अपनी केबिन में चले गए।
मेरा भैया कोटा में कलेक्टर ऑफिस में डायरेक्टर के पद पर था।
लेकिन मेरी चुदाई की इच्छा खत्म हो गई।
उधर वो अंकल मुझे खा जाने वाली नजरों से देख रहे थे।
हालांकि मुझे अच्छा भी लग रहा था।
मैं सोचने लगी कि अंकल से कैसे पटाया जाए।
पर फिर भैया का ख्याल आते ही सारी बात हवा हो गई।
धीरे-धीरे मुझे नींद आने लगी।
ट्रेन अपनी गति से दौड़ रही थी।
अंकल बैठे थे, मैं अपनी बर्थ पर सो गई।
रात के तकरीबन 11:30 बजे मुझे ऐसा लगा कि मेरे पेट पर कुछ चल रहा है।
अचानक देखा तो अंकल का हाथ था।
वो आंखें बंद करके मेरे साथ सटकर सो रहे थे।
वे अपनी बर्थ पर नहीं गए थे.
मैंने भी तुरंत आंखें बंद कर लीं और कसमसाते हुए अंकल की ओर पीठ करके सोने का नाटक करने लगी।
अब अंकल के लिए मुझसे सटने में कोई परेशानी नहीं हो रही थी।
उनका लंड मेरी गांड के छेद में चुभ रहा था।
मुझे बहुत मजा आ रहा था।
तभी अंकल ने अपने हाथ मेरे बूब्स पर जमा दिए और धीरे-धीरे मसलने लगे।
मेरे दोनों बूबे भूरे-गुलाबी होकर पूरी तरह तन गए।
मैं मस्त हो गई।
तभी उन्होंने मेरी लेगिंग को घुटनों तक सरका दिया और मेरी चूत में उंगली करने लगे।
मेरी चूत बिल्कुल गीली हो रही थी।
उनकी मोटी और 4 इंच की उंगली जब अंदर गई तो मेरे मुंह से सिसकारी निकलने लगी।
अंकल समझ गए कि मैं जाग रही हूं।
फिर तो वो दुगुने जोश में उंगली अंदर-बाहर करने लगे।
मैं पागलों की तरह तड़पने लगी और मेरा पानी छूट गया।
अंकल की उंगली चिकनी-लंपट हो गई।
मैं निढाल हो गई।
पर अंकल अभी शांत नहीं हुए थे।
मुझे इस बात का जरा भी भान नहीं था कि मैं फिर चुदने वाली हूं और इस बार मेरी गांड की बारी थी।
अंकल उठे, अपने सूटकेस से एक तेल की शीशी निकाली।
फिर आकर मेरी पीठ से सटकर लेट गए।
उन्होंने हाथ में बहुत सारा तेल लिया और मेरी गांड पर लगा दिया।
मेरी गांड चिकनी हो गई।
अब अंकल ने वही मोटी उंगली तेल में डुबोकर मेरी गांड के छेद पर रख दी और गोल-गोल घुमाने लगे।
मुझे गुदगुदी होने से अधपकी नींद खुल गई लेकिन मैं चुपचाप लेटी रही क्योंकि गुदगुदी में बहुत मजा आ रहा था।
तभी अंकल की उंगली मेरी गांड के छेद में घुस गई।
मुझे बिल्कुल भी दर्द नहीं हुआ।
मैं ऐसे ही पड़ी रही।
तो अंकल ने तुरंत पूरी उंगली गांड में डाल दी।
“उई मम्मी! बाहर निकालो!” मैं जोर से बोली क्योंकि अब हल्का दर्द होने लगा था।
लेकिन अंकल और जोर से उंगली अंदर-बाहर करने लगे।
जिससे मेरी गांड चौड़ी होती गई।
अब अंकल ने अपना लंड निकाला। वो करीब 7-8 इंच लंबा था, तीर की तरह आगे से तीखा।
लंड के सुपाड़े पर टोपी तनी हुई थी।
उन्होंने टोपा मेरी गांड पर जमा दिया और हल्का सा धक्का लगाया।
मैं जोर से चिल्ला उठी।
तब उन्होंने मेरे मुंह पर हाथ रखा, अपने लंड पर खूब तेल लगाया और मेरी गांड में फिर से टोपा डाल दिया।
मुझे फिर दर्द हुआ, लेकिन अंकल ने मुझे दबोच लिया।
एक हाथ मेरे मुंह पर और दूसरा मेरी चूत में मोटी उंगली डालकर।
आव देखा न ताव! अंकल ने पूरा लंड मेरी गांड में ठेल दिया।
मेरी आंखें ऊपर चढ़ गईं। पुतलियां गायब हो गईं। सांस पूरी अटक गई।
लेकिन अंकल पागलों की तरह लंड पेलते जा रहे थे।
मोटे टोपे के कारण मेरी गांड से
फुचाक! फट! फुचाक!
फट! फुचाक! फट! फुचाक!
फट! फुचाक! फट!
जैसी आवाजे आ रही थी.
मुझे भी अजीब आनंद आ रहा था।
अंकल मेरे गले में हाथ डालकर बूब्स भी मसल रहे थे।
मेरे कान और गले पर अपनी लिसलिसी जीभ फिराकर मुझे मदहोश किए जा रहे थे।
मैं अपनी घुटी हुई आवाज में चिल्ला रही थी- उई माँ! हाय! मजा आ गया अंकल जी! ऐसे ही चोदते रहो! आह! आह! उऊउ उउउउ!”
फुच! फुच! फुच! फच! फच! फुच! फुच! फचफच! फुच! फुच! फचफच! फुच! फुच! फचफच! फुच! फुच! फच!
तभी अंकल ने मुझे कुतिया बना दिया।
बिना देर किए अपना सनसनाता कड़क, काला, मोटा लंड मेरी गांड में डाल दिया।
लंड सरसराता हुआ मेरी गांड में फिसलता गया और जड़ तक घुस गया।
अंकल कुछ देर चंद सेकंड ऐसे ही रहे।
फिर मेरे लंबे बालों को घोड़े की लगाम की तरह पकड़ लिया और मेरे पुठ्ठों पर जोर-जोर से मारते हुए मेरी गांड में शॉट मारने लगे।
पट! पट! पट! पट! पट! पट! पटाक! पटाक! पटाक! पटाक! पटाक! पटाक! पटाक!
मुझे स्वर्ग का आनंद मिल रहा था।
अंकल मेरे चूतड़ों पर चटाचट मारते भी जा रहे थे।
पट! पट! पट! पट! पट! पट!
पटाक! पटाक!
चटाचट! चटाचट! चटाचट!
चटाचट! चटाचट!
मुझे चूत में गुदगुदी होने लगी।
बहुत देर तक मैं गुदगुदी को सहन करती रही।
तभी अचानक मेरी चूत से रस बहने लगा।
लेकिन अंकल रुक ही नहीं रहे थे।
मेरे बाल पकड़कर शॉट पर शॉट मारते जा रहे थे।
पट! पट! पट!
पटाक! पटाक! पटाक! पटाक!
करीब बीस मिनट बाद अंकल मेरे ऊपर गिर गए।
मैं उनका वजन झेल नहीं पाई और कुतिया से सीधे चित लेट गई।
अंकल मेरे ऊपर थे और उनका लंड मेरी गांड में।
इतने में अंकल कपकपाने लगे और मुझे कस के पकड़ लिया।
मैं कुछ समझ पाती, इससे पहले अंकल के लंड से गर्मागर्म लावा – तकरीबन आधा कटोरी – मेरी गांड में ठेल दिया।
मेरी गांड पहले तेल से और अब चिकने वीर्य से लबालब हो चुकी थी।
मैंने भी वीर्य को गांड के अंदर ही रखने के लिए तुरंत लेगिंग पहन ली।
अंकल बोले- वॉशरूम जाकर साफ कर लो।
पर मैंने मना कर दिया और पागलों की तरह अंकल को यहां-वहां पूरे शरीर पर चूमने लगी।
अंकल ने कहा- अब सो जाओ, कोई आ सकता है।
फिर अंकल ने अपना मोबाइल नंबर दिया और कम्पार्टमेंट के बाहर चले गए।
मुझे कब नींद आ गई, पता नहीं।
सुबह 4 बजे भैया ने उठाया और बोले- चलो, उठो! अपना स्टेशन आ गया।
मैं उठी और अपना सामान लिया। भैया ने सामान ले लिया। मैं उनके पीछे चलने लगी।
तभी भैया बोले- इस तरह लंगड़ा कर, चौड़े पांव से क्यों चल रही हो?”
मैंने घबराकर कहा- रात में टॉयलेट में फिसल गई थी।
अब भैया को कैसे बताऊं कि रात भर मेरे साथ क्या-क्या हुआ!
लेकिन भैया की पारखी नजर सब समझ गई।
जिस तरह वो देख रहे थे, उससे मैं कुछ डर सी गई।
पर तुरंत ही अंदर ही अंदर खुश होने लगी और भैया को पटाकर उनसे चुदने की प्लान बनाने लगी।
Xxx गांड की कहानी पढ़कर आपको मजा आया होगा.
अपने विचार जरूर लिखें.
रानी (निहारिका)
raniaaja999@gmail.com
लेखिका की पिछली कहानी थी: मेरी कुंवारी गांड की खोपरे के तेल से चुदाई
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