ट्रेन में देवर भाभी की वासना का ज्वार

(Bhabhi Deshi Chudai Kahani)

भाभी देशी चुदाई कहानी में एक भाभी अपने देवर संग फर्स्ट ए सी में कूपे में है. उन दोनों ने सेक्स करने के लिए ही कूपे बुक किया था. भाभी पहले से अपने देवर को वासना की नजर से देखती थी.

दोपहर का समय था. ट्रेन अब स्टेशन से चल पड़ी थी.
दो पैसेंजर वाला कूपा था.

अर्पिता खिड़की के पास अकेली बैठी, बाहर के हरे-भरे गांवों का नज़ारा देख रही थी.
ट्रेन शहर से दूर निकल चुकी थी.

अचानक उसके सामने पिछले कुछ दिनों के सारे वाकिये एक-एक करके घूमने लगे.

वह सोच में डूब गई … फिर आख़िर में अपने फ़ैसले पर उसे गर्व हुआ.
उसके मासूम-से गोल चेहरे पर शरारती मुस्कान फैल गई.

अर्पिता तीस साल की जवान औरत थी.
पांच साल पहले उसकी शादी हुई थी.
उसका बदन भरा-भरा, गुदगुदा-सा … बिल्कुल रसीला. गोल-मासूम चेहरा, बड़ी-बड़ी सुंदर आंखें, कमर तक आते घने भूरे बाल … जिनमें आज उसने काले रंग की क्लिप लगाई थी.
आंखों में हल्का काजल, होंठों पर गहरी लाल लिपस्टिक, गले में मंगलसूत्र … जिसके बीच से उसका गहरा क्लीवेज झांक रहा था.

उसके बूब्स किसी खजुराहो की पत्थर की मूरत जैसे सुडौल और रसभरे थे.

गहरे भूरे निप्पल थोड़ी-सी उत्तेजना में ही कड़क हो जाते और अर्पिता की धीमी-धीमी मीठी मीठी सिसकारियां शुरू हो जातीं.

चूत पर घने काले बाल … जो उसने इसलिए बढ़ाए थे क्योंकि उसने सख़्त हुकुम दिया था … और वह इंसान अर्पिता की ज़िंदगी का सबसे करीबी था.

गांड बड़ी, चर्बी से भरी हुई … जींस पहने तो अपने आप मटकने लगती.
कानों में ट्रेंडी गोल टॉप्स, हाथ में अरमानी की चमचमाती गोल्डन घड़ी – जिसे वह बार-बार उलट-पलट कर निहार रही थी.

लंबाई पांच फुट दो इंच, पेट हल्का-सा बाहर … जो उसकी क्यूटनेस और बढ़ा रहा था.
आज उसने काले रंग का ट्रेडिशनल सूट पहना था.

ब्रा-पैंटी नहीं पहनी थी … क्योंकि उसे सख़्ती से मना किया गया था.

इस वजह से उसके गाल बार-बार सुर्ख हो रहे थे लेकिन होंठों पर शरारती मुस्कान भी खेल रही थी.

अर्पिता ने निचला होंठ दांतों से दबाया और नर्म-सी आह भरी ‘हम्म्म …’

पिछले कुछ दिनों की घटनाएं और आज यहां होने का अहसास … उसकी चूत में गीलापन बढ़ा रहा था.
वह बेसब्र हो चली थी.

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तभी अचानक कूपे का दरवाज़ा ज़ोर से खुला.

आकाश दनदनाता हुआ अन्दर घुसा.
वह हांफ रहा था लेकिन चेहरे पर गर्व भरी मुस्कान थी.

‘सुनो मैंने कंडक्टर को सैट कर दिया है … अब दिल्ली आने तक हमें कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा!’

यह कहते हुए उसने झट से दरवाज़ा बंद किया और भूखे भेड़िए की तरह अर्पिता की तरफ़ लपका.

अर्पिता ने उसकी आंखों में देखा, धीरे से मुस्कुराई और आंखें दो बार मटकाई.

ये सिग्नल था … उनकी जीत का कन्फ़र्मेशन.

आकाश ने एक पल गंवाए बिना अर्पिता के नर्म-रसीले बदन को ज़ोर से खींचकर अपनी बांहों में जकड़ लिया और भूखे शेर की तरह उसके रसीले होंठ चूसने लगा.

अर्पिता उसका पूरा साथ दे रही थी.
उसके दोनों हाथ आकाश की कमर पर कसकर लिपटे थे जबकि आकाश का एक हाथ उसके घने बालों में उलझा था और दूसरा उसकी मोटी-गोरी गांड को ज़ोर-ज़ोर से मसल रहा था.

दोनों ‘म्म्म्फ़्फ़ … म्म्म्फ़्फ़ …’ की आवाज़ें निकालते, गहरी सांसें छोड़ते पागलों की तरह एक-दूसरे को खा रहे थे.
आकाश अर्पिता के रसीले होंठों के साथ-साथ उसकी गर्दन भी जीभ से चाट रहा था, जिससे अर्पिता हल्की-हल्की मोन करने लगी- आह्ह … आह्ह …

उसके भारी-भरकम बूब्स आकाश की कसरती छाती से लगातार रगड़ खा रहे थे.
ये अहसास आकाश को पूरी तरह पागल कर रहा था.

अचानक आकाश ने सीधा हाथ अर्पिता के गहरे क्लीवेज में डाला और ज़ोर से खींचकर दोनों रसीले बूब्स बाहर निकाल दिए.

अब अर्पिता के बाल बिखरे हुए थे, लाल लिपस्टिक फैल गई थी, सूट अभी भी पहना था … लेकिन गले से दोनों भारी बूब्स बाहर लटक रहे थे.

वह प्यार भरी निगाहों से आकाश को देखकर धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी … जैसे कह रही हो- करो ना … जो करना है … जब तक हमारी आग शांत न हो जाए, रुकना मत.

आकाश ने एक पल गंवाए बिना अर्पिता को ज़ोर से अपनी तरफ़ खींचा.
एक हाथ से उसे कसकर पकड़े हुए फिर से उसके होंठ चूसने लगा और दूसरे हाथ से दोनों बूब्स को बारी-बारी से मसलने लगा.
उनकी जीभें आपस में उलझी हुई थीं.

सही जगह मसलते ही अर्पिता के गहरे भूरे निप्पल पत्थर जैसे कड़क हो गए.
अर्पिता अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी.

ठीक वही जो आकाश चाहता था … ताकि वह उसे बेदर्दी से रगड़कर चोद सके.

मौका देखते ही आकाश ने अर्पिता का सूट उतार फेंका और खुद भी शर्ट-जींस फाड़ कर अलग कर दी.

अब दोनों प्रेमी एक-दूसरे के सामने पूरी तरह नंगे थे.

अर्पिता की जंगली, घनी झांटों वाली चूत आकाश का सारा ध्यान खींच रही थी.
उसके शादीशुदा भारी बूब्स अलग से न्योता दे रहे थे.

कुछ बाल उसके गोरे-क्यूट चेहरे पर बिखर आए थे जिससे वह और भी ज़्यादा हसीन लग रही थी.
बालों में छोटी-सी काली क्लिप अभी भी फँसी हुई थी.

ट्रेन लगातार दौड़ रही थी और दोनों आंखों ही आंखों में एक-दूसरे को पी रहे थे.
बदन पर एक धागा भी नहीं.

अर्पिता दांतों से निचला होंठ दबाकर बार-बार आकाश को खिजा रही थी मानो पूछ रही हो कि कहां से शुरू करोगे जान!

आकाश को अपना दिल काबू में रखने में ज़ोर लग रहा था.
आख़िर ये पल कितने पापड़ बेलने के बाद मिला था.

जिस अर्पिता के बारे में वह सिर्फ़ सपने देखता था, अकेले में मुट्ठ मारता था … वही अर्पिता आज उसके सामने पूरी नंगी खड़ी थी … अपनी सारी ख़ूबसूरती समेटी हुई.

उसके कानों में गोल टॉप्स चमक रहे थे, गले में मंगलसूत्र अब भी दोनों रसीले बूब्स के बीच लटक रहा था, हाथ में गोल्डन अरमानी घड़ी सजी हुई थी … सेक्स की भूख में दोनों को इन सबकी सुध भी नहीं थी.

उसके बालों की छोटी-सी काली क्लिप जैसे आकाश से कह रही थी, ‘आओ ना … मुझे खोल दो!’

आकाश ने तुरंत ध्यान दिया.
अर्पिता को फिर से ज़ोर से अपनी तरफ़ खींचा और झटके से क्लिप निकाल कर दूर फेंक दिया.
अब अर्पिता के सेक्सी, गहरे भूरे लंबे बाल पूरी तरह आज़ाद होकर उसके नंगे कंधों पर बिखर गए.

इस बार का स्पर्श अलग था.
जैसे ही दोनों नंगे बदन एक-दूसरे से चिपके, एक तेज़ करंट-सा दोनों में दौड़ गया.

अर्पिता के कड़क निप्पल और भारी बूब्स अब आकाश की कसरती छाती से खेल रहे थे.
उसके दोनों हाथ आकाश की नंगी कमर पर रगड़ खा रहे थे जबकि आकाश वहशी जानवर की तरह उसे अपने बदन से दबाकर नाज़ुक कमर और मस्त गांड मसल रहा था.

दोनों अब पूरी तरह जल चुके थे.

आकाश का काला-कसरती लौड़ा बार-बार अर्पिता की जांघों के बीच टकरा रहा था, जिससे उसकी चूत मदहोश हो रही थी.
अर्पिता के जूसी बूब्स आकाश को बेक़रार कर रहे थे.

उसने दोनों बूब्स हाथों में कसकर पकड़े, पहले थप्पड़ मारे, फिर आटे की तरह गूँथने लगा.
अर्पिता की सांसें तेज़ हो गईं.

आकाश ने बायां बूब मुँह में लिया और छोटे बच्चे की तरह चूसने लगा, निप्पल को जीभ से लिक करते हुए पूरा बूब खाने लगा.

अर्पिता के मुँह से निकला- आह्ह!

फिर उसने यही क्रम दाहिने बूब के साथ दोहराया, लेकिन इस बार आंखों में आंखें डालकर अर्पिता ने ममता भरी मुस्कान दी और उसके माथे को सहलाया.
इससे आकाश का जोश दोगुना हो गया.

उसने दोनों बूब्स एक साथ कसकर पकड़े और भूखे कुत्ते की तरह दोनों निप्पल एक साथ चूसने लगा.

इस अचानक हमले से अर्पिता के रोंगटे खड़े हो गए.
उसके चेहरे पर ममता की जगह अब सिर्फ़ वासना थी.
वह सस्ती रंडी की तरह सीत्कार करने लगी- आह्ह्ह … आह्ह्ह …

आकाश और भी ज़ोर-ज़ोर से बूब्स खाने लगा.
दोनों बेशर्म होकर एक-दूसरे की आंखों में देखते हुए ज़बरदस्त फोरप्ले कर रहे थे.

उन दोनों की ‘म्म्म्म्म … म्म्म्म्म … म्म्म्म्म …’ की मादक आवाज़ें कूपे में गूँज रही थीं.

अर्पिता ने जल्दी से घड़ी और मंगलसूत्र उतार कर साइड में रख दिया.
लेकिन आकाश नहीं रुका.
बूब्स रगड़ते हुए उसने अर्पिता की गर्दन पर ज़ोरदार लव-बाइट्स दे दीं.

अर्पिता मादक सिसकारियां लेने लगी- अह्ह … अह्ह्ह … जान … म्म्म्म … हां जान … हां जान … ओह्ह!

आकाश का काला लौड़ा अब पत्थर जैसा तन चुका था.
उसका मन अब क़ाबू में नहीं था.

अर्पिता भी समझ गई थी कि अब चुदाई में ज़्यादा देर नहीं.

आकाश ने अपनी ताकतवर बाज़ुओं का नमूना दिखाते हुए अर्पिता को बर्थ पर लिटाया और खुद उसके बग़ल में लेट गया.

दाहिनी बांह पर उसने अर्पिता का सिर रखा और बायें हाथ से दोनों निप्पल की टिप एक साथ सहलाने लगा.
उसे अच्छे से पता था. ये हरकत अर्पिता को पागल कर देती है.

और हुआ भी यही!

अर्पिता बुरी तरह गर्म हो गई.
खुद ही आकाश का हाथ पकड़ कर गाइड करने लगी कि कहां-कहां मसलना है और साथ-साथ कामुक सिसकारियां भी लेने लगी ‘आह्ह … आह्ह … हां … यहीं …’

अर्पिता ने आकाश का बायां हाथ पकड़ कर सीधे अपनी नशीली, भीगी चूत पर रख दिया.
जैसे ही आकाश ने हथेली से उस स्वर्ग को सहलाया, अर्पिता के सारे अरमान जाग उठे.

उसने बड़ी आसानी से दो उंगलियां अर्पिता की शादीशुदा चूत में घुसेड़ दीं.
चूत पहले से ही रस से लबालब थी.
आकाश को वह गर्माहट और चिपचिपा रस दोनों हाथों से महसूस हो रहा था.

‘जान … अच्छे से अन्दर तक डालो ना …’
अर्पिता ने इठलाते हुए कहा तो आकाश ने झट से उंगलियां ज़ोर-ज़ोर से पेलनी शुरू कर दीं.

‘आआ आह्ह्ह …’ अर्पिता की चीख निकल गई.

‘फच-फच … फच-फच …’ की तेज़ आवाज़ें कूपे में गूँजने लगीं.
आकाश बेरहमी से उंगलियां अन्दर-बाहर कर उसकी गहराई नाप रहा था.
दोनों लवर्स वासना में डूबे फिर से पागलों की तरह किस करने लगे.

दाहिने हाथ से आकाश ने अर्पिता के नंगे बदन को कसकर अपनी तरफ़ दबाया हुआ था.

जितनी तेज़ सिसकारियां अर्पिता की निकलतीं, उतनी ही गहराई तक आकाश उंगलियां घुसेड़ता.

चालाकी से उसने उंगलियां ट्रेन के झटकों के साथ-साथ चलाने शुरू कर दीं.
अर्पिता भी उसी लय में सीत्कार करने लगी. दोनों मुस्कुराकर एक-दूसरे की आंखों में डूब गए.

‘आई लव यू अर्पिता … आई लव यू सो मच डार्लिंग …’
‘म्म्म्म्म … लव यू टू आकाश … लव यू टू मेरी जान … म्म्म्म्म …’

अर्पिता के नर्म हाथों में आकाश का तगड़ा, काला लंड आ चुका था … जिसके सपने वह तब से देखती थी, जब उसके लिए ऐसा सोचना भी पूरी तरह वर्जित था.

उसने अनुभवी उंगलियों से लंड को सहलाते हुए याद किया.
एक बार कार में सास-ससुर के साथ जा रही थी, आकाश ड्राइव कर रहा था.
सास-ससुर सो गए थे पर अर्पिता जाग रही थी.

चोर नज़रों से वह आकाश को देख रही थी.
ब्लैक शर्ट, नीली जींस में किसी मॉडल सा लग रहा था.

उसका दिल चीख-चीखकर कह रहा था: ‘ये आगे क्यों बैठा है? पीछे आकर अपना तगड़ा लंड मेरी गीली चूत पर क्यों नहीं रगड़ता? मेरी टांगें चौड़ी करके जीभ से मेरी चूत क्यों नहीं चाटता … उफ्फ़!’

उस दिन तो नींद आ गई थी … लेकिन आज वही यादों में बसा लंड उसके हाथ में था.
कड़क, गर्म और लचीला लंड जिसकी एकमात्र मंज़िल थी अर्पिता की चूत!

अर्पिता लंड सहलाते हुए धीरे से बर्थ से नीचे उतरी और मॉडर्न बीवी की तरह झट से आकाश का मोटा लौड़ा मुँह में ले लिया.

एकदम से इस सरप्राइज़ से आकाश सातवें आसमान पर पहुंच गया- ओह्ह अर्पिता … म्म्म् … यू आर ऑसम …

अर्पिता अब किसी प्रोफेशनल पोर्नस्टार की तरह पूरा लंड गले तक स्वॉलो कर रही थी.
आकाश आनन्द में तड़प रहा था.

वह भी ब्लू-फिल्म स्टाइल में अर्पिता के लंबे-सेक्सी बाल सहलाते हुए उसके सिर को अपने लंड पर गाइड कर रहा था ताकि पूरा लौड़ा उसके गले तक घुस जाए.

‘गोक-गोक … गोक-गोक …’ की गंदी आवाज़ें कूपे में गूँज रही थीं.
अर्पिता पूरी जी-जान से चलती ट्रेन में आकाश को ब्लोजॉब दे रही थी.

आकाश आंखें बंद करके स्वर्ग का मज़ा ले रहा था.

जब उसका मेल ईगो पूरी तरह सैटिस्फ़ाई हो गया, तो अन्दर का बॉयफ्रेंड जाग उठा.
उसने बड़े प्यार से अर्पिता को अपनी मज़बूत बांहों में उठाया, बर्थ पर खींच लिया और झुकी हुई आंखों में देखते हुए उसके रसीले होंठों पर धीरे-धीरे इंटेंस किस करने लगा.

‘यू आर माई डार्लिंग अर्पिता … आई एम लकी कि तुम मेरी हो जान!’

अर्पिता को खुशी हुई कि ब्लोजॉब उसे पसंद आया और उसने रफ़ भी नहीं किया.

आकाश के गाल सहलाते हुए उसने फिर से किस किया और बोली- नो बेबी … आई एम लकी और मैं सिर्फ़-सिर्फ़ तुम्हारी हूँ मेरी जान!

ये बोलते ही अर्पिता को एक अजीब-सी लस्ट वाली खुशी हुई.
अब वह सचमुच सिर्फ़ आकाश की है.
अब प्यार जताने की बारी आकाश की थी.

उसने अर्पिता की सेक्सी टांगें चौड़ी कीं और उसकी गीली-जंगली चूत को भूखी नज़रों से घूरने लगा.
उसे पता था कि ऐसा घूरना अर्पिता को पागल कर देता है.

और हुआ भी यही अर्पिता बेहद गंदे अंदाज़ में बोली- म्म्म्म्म … अच्छे से देख मेरी चूत को मादरचोद … दोनों हाथ से चौड़ा करके देख इसको साले भड़वे… देख और देखते-देखते उंगली कर इसमें चूतिए!

आकाश तैयार ही था.
उसने गुलाबी चूत का अच्छे से दीदार किया और फिर झटके से उंगलियां पेलनी शुरू कर दीं.
अर्पिता के मुँह से चीखें निकलने लगीं.

जैसे ही मौका सही लगा, उसने उंगलियां निकालीं और जीभ अर्पिता की चूत में घुसेड़ दी.
पूरी हवस से अपनी गर्लफ्रेंड की चूत खाने लगा.

अर्पिता मदमस्त होकर गहरी सांसें ले रही थी, सीत्कार कर रही थी और आकाश के सिर को सहलाते हुए अपनी चूत की तरफ़ गाइड भी कर रही थी.

चूत चाटते-चाटते आकाश ने दोनों हाथों से उसके भारी बोबे मसलने शुरू कर दिए.
अर्पिता की उत्तेजना एकदम से चरम पर पहुंच गई.

उसके दिमाग़ में गंदे-से-गंदे ख्याल आने लगे.

आकाश के सारे दोस्त मिलकर उसका गैंगबैंग कर रहे हैं.
एक साथ दो-दो लंड उसकी गांड और चूत में … तीसरा मुँह में … चौथा बोबे मसल रहा है … और साइड में आकाश मुस्कुराते हुए अपना लौड़ा हिला रहा है.

इन गंदे ख्यालों और आकाश की लगातार चूत-चटाई का असर इतना ज़बरदस्त हुआ कि अर्पिता का पहला ऑर्गेज़्म फट पड़ा.

उसकी जांघें बुरी तरह कांपने लगीं.
उसी पोज़ीशन में उसने आकाश का सिर अपनी जांघों के बीच ज़ोर से दबा लिया और ऑर्गेज़्म की लहरों में बेहद गंदी गालियां देने लगी- आआह … तू मादरचोद है साले … साले रंडी की औलाद … अह्ह्ह … तू कमीना कुत्ता है साले बहनचोद … म्म्म्म्… ये क्या कर दिया तूने अभी … लोग तो बीवी का ऑर्गेज़्म करवाते हैं … कोई अपनी गर्लफ्रेंड का करवाता है … और तूने साले चलती ट्रेन में अपनी भाभी का ऑर्गेज़्म करवा दिया चूतिए … अअह्ह!

आकाश को हद से ज़्यादा खुशी हुई कि अर्पिता का पहला ऑर्गेज़्म इतना ज़बरदस्त था.
उसने प्यार से उसके क्यूट चेहरे को सहलाया, नर्म होंठों पर लंबा किस किया और फुसफुसाया- आई लव यू भाभी… आई लव यू मेरी डार्लिंग भाभी …

अर्पिता अब थोड़ा होश में थी.
देवर की धुआंधार परफ़ॉर्मेंस पर उसका दिल भी पिघल गया- लव यू टू मेरा बच्चा … लव यू टू …

तभी ट्रेन रुकी.
शायद अंबाला आ गया था.

आकाश जानता था कि सफ़र अभी लंबा है.

उंगलियां, होंठ और जीभ का खेल तो बस ट्रेलर था.
अब उसके तगड़े लंड की असली एंट्री बाकी थी.

उसे पता था कि अर्पिता की सेक्स की भूख बहुत है, थोड़ी देर में फिर तैयार हो जाएगी.

पर पहले उसे कुछ खाना चाहिए.
ये उसकी पुरानी आदत थी, ट्रेन में बैठते ही कुछ न कुछ खाने की तलब लग जाती थी.

आकाश के चेहरे पर शरारती मुस्कान आ गई.
‘क्यों हंसे? अर्पिता ने शिकायत की.

‘कुछ नहीं … कुछ याद आ गया था. छोड़ो, बोलो क्या खाओगी आप?’
आकाश ने छेड़ते हुए पूछा.

अर्पिता के चेहरे पर भी हंसी फैल गई.
उसे वह दिन याद आया जब पहली बार आकाश के साथ ट्रेन में थी.
सास-ससुर, पति, सब साथ थे. पति सो गया था, सास-ससुर अपनी बातों में.
ट्रेन चली ही थी कि अर्पिता को कुछ खाने की तलब लगी.
बड़ी हिम्मत करके, सास की नज़रें बचाकर उसने इशारों में आकाश को बताया.

आकाश अगले स्टेशन पर उतरा और उसके लिए खाना ले आया.
सबने पूछा तो बोला- मुझे भूख लगी थी.

उस दिन आकाश उसे बेहद पसंद आ गया था … पर सिर्फ़ देवर था.
और आज? आज वह उसका सब-कुछ है.

लवर, बेस्ट फ़्रेंड, मनमीत, उसकी चूत का मालिक … सिर्फ़ वही और कोई नहीं.

‘आप बैठो … थोड़े कपड़े पहन लो, मैं बाहर देखता हूँ खाने को क्या-क्या मिल रहा है!’ आकाश कपड़े पहनते हुए बोला.

अर्पिता फिर वर्तमान में लौटी.
एक-एक कर सारी यादें फिर आंखों के सामने घूमने लगीं.

हमेशा से पति से ज़्यादा आकाश का साथ क्यों पसंद था?
क्यों आकाश उसे भाभी से ज़्यादा अपनी दोस्त मानता था?

कैसे वह दोस्ती धीरे-धीरे आकर्षण में बदली … और आकर्षण बेइंतहा प्यार में?
प्यार ऐसा कि देवर-भाभी एक-दूसरे के बिना रह ही नहीं सकते. साथ में वासना का खेल!

कितने साल छोटा था आकाश … फिर क्या हुआ कि पति से दूर होती अर्पिता अपने ही देवर के इतने करीब आ गई कि समाज, परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी … किसी की परवाह नहीं रही?
वह कौन-सा एक फ़ैसला था, जिसने सब बदल दिया?

क्या हुआ कि सब कुछ खत्म होकर भी … सब कुछ मिल गया … वह भी चाहत से कहीं-कहीं ज़्यादा!
यह सब आपकी खिदमत में आएगा लेकिन इसके पहले आपके विचार जानना जरूरी हैं कि क्या आप मेरी इस भाभी देशी चुदाई कहानी को पसंद कर रहे हैं!
[email protected]

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