चुदाई का जोरदार मजा दिया बीवी बनी भाभी को-1

(Chudai Ka Jordar Maja Diya Biwi Bani Bhabhi Ko- Part 1)

कमल पाठक 2017-05-30 Comments

चुदाई की यह बात चार साल पुरानी है जो मेरे दोस्त राज किशोर के साथ गुजरी थी। उसने यह अपनी आप बीती मुझे सुनाई और मैं उसको शब्दों में आप तक पहुंचा रहा हूँ.

‘क्यों राजू, क्या हो रहा है?’ सुन्दर, मस्त माला ने जवान, करीब 25 साल के, लंबे, मज़बूत बदन वाले राजू के कमरे में आकर कहा।

राजू अपने बितर पर लेटा था और अपने कच्छे में बड़े से खड़े लंड से खेल रहा था और मुठ मारने की सोच रहा था।
‘ओह हाई भाभी, कुछ नहीं, बस ऐसे ही। खाना खाने के बाद थोड़ा सोने का सोच रहा था.’ उसने अपना खड़ा लंड अपनी जांघों के बीच दबा कर छुपाने की कोशिश करते हुए कहा।

15 दिन पहले राजू और सुन्दर गोरी-गोरी चिकनी-चिकनी माला की शादी हुई थी। माला जो की 30 साल की थी, यानि राजू से 5 साल बड़ी थी और 6 महीने पहले उस के पति के गुजर जाने के कारण विधवा हो गई थी। पर उनकी पहाड़ी रीति रिवाज़ के मुताबिक, राजू, जो शहर में काम करता था, वापिस आना पड़ा और यह शादी करनी पड़ी क्योंकि कोई और माला की और उसकी ज़मीन ज्यादाद की देख भाल करने वाला नहीं था।
परंतु दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे।

‘हाई राम राजू तू बहुत चालू है रे, मुझे मालूम है कि तेरा खड़ा है और तू मुठ मार रहा था.’ माला ने हंस कर बिस्तर पर बैठते हुए कहा। उसकी टाँगें जमीन पर थी। वो हमेशा लहँगा चोली पहनती थी।
उसकी नंगी गोरी-गोरी कमर, कसे हिलते हुए चूतड़ और चोली में खड़ी चूची देख कर राजू का खड़ा हो जाता था, और उसको अपने लंड को शांत करने के लिए मुठ मारना पड़ता था।

‘क्या करूँ भाभी तू इतनी सुन्दर है, तुझे देख कर अपना खड़ा हो जाता है तो यही करना पड़ता है.’ राजू में अपना खड़ा लंड जांघों के बीच से छोड़ दिया और माला की तरफ करवट लेकर उसके लहंगे के ऊपर से बड़े मस्त चूतड़ों के ऊपर दबा दिया। माला को उसके लंड की गर्मी और कड़कपन महसूस हो रहा था।

‘हाय राम राजू, तू तो एकदम बुद्धू है, इतना भी नहीं समझता… अब जब मेरी तुझसे शादी हो गई है, मैं तेरी लुगाई हूँ तो तू क्यों मेरी चूत में अपना लंड घुसा कर चोद डालता? माला ने अपने चूतड़ पीछे धकेलते हुए कहा और नीचे झुक कर उसको चूम लिया।

माला के उसको चूमने से राजू को बहुत अच्छा लगा और हिम्मत मिली… उसने अपना एक हाथ माला की नंगी कमर में लपेट लिया और धीरे-धीरे उसके नंगे पेट को सहलाने लगा।

‘भाभी बात यह है कि मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि तुझे यह प्यार-व्यार पसंद आएगा या नहीं। ऊपर से तू इतना व्यस्त और ग़ुस्से में रहती है कि मुझे तुझसे डर लगता है.’
वो दोनों अपनी पहाड़ी भाषा में बात कर रहे थे।

राजू ने धीरे से अपना हाथ चोली के ऊपर उसकी चूची पर रख दिया और उसके सुन्दर मुस्कराते चेहरे को देख रहा था.
‘हाय राम.. मेरे बुद्धू राजू.. क्या मतलब पसंद आएगा या नहीं… अब तू मेरा मर्द है.. अब तो तेरा अधिकार है मेरी चूत में अपना लंड घुसा कर मेरी चूत मारने का!’ उसने अपना हाथ पीछे लेजा कर कच्छे में खड़ा लंड पकड़ लिया। मस्त खड़ा लंड उसके चूतड़ों के नीचे घुस रहा था।

माला ने उसका हाथ अपनी चूची पर दबा दिया। यह इशारा था की उसको भी इस खेल में मजा आ रहा था।

‘क्या भाभी तू कैसी बात करती है, मैं यह कैसे कर सकता हूँ? अगर तुझे पसंद नहीं है, मजा नहीं आता, तुझे भी तो मजा आना चाहिए.. तेरी चूत का भी तो पानी निकलना चाहिए, नहीं तो चुदाई का क्या मजा? उससे तो अपना मुठ मारना ही सही है.’ राजू ने हल्के से चूची दबा दी।

माला के मुँह से आह निकल पड़ी- सी…ई… ई… सी… तू बुद्धू नहीं है… बहुत प्यार की बातें करता है।’
माला प्यार से मुस्करा रही थी- अगर तू मुझे मजा देना चाहता है और मेरा निकालना चाहता है… तो अपना लंड घुसा कर चोद डाल ना! बस अपनी चूत का भी पानी निकल जायगा… और तुझे भी मजा आएगा और मुठ मारने की जरुरत नहीं पड़ेगी।’ माला ने हँसते हुए राजू की तरफ मुड़ कर उसको चूम लिया और उसका दूसरा हाथ लहंगे के ऊपर से अपनी जांघों के बीच में रख दिया।

‘क्या भाभी तू भी बस… जोर से घुसा कर.. जोरदार धक्के मारने से तेरी चूत का पानी निकल जायगा क्या? अब तू बुद्धू जैसी बातें कर रही है। यह तो प्यार का खेल है.. खूब प्यार से.. धीरे-धीरे.. गर्म कर के.. आराम से.. मस्ती में चूत को गर्म और गीला करके… चूत में घुसा कर… धीरे-धीरे मजा ले लेकर चुदाई करने से मजा आता है और लंड और चूत का पानी निकलता है।’ राजू धीरे से माला का लहँगा ऊपर खिसका कर उसकी नंगी केले जैसी चिकनी-चिकनी जांघों पर सहलाते हुए उसकी काली-काली झांटों वाली गोरी गोरी चूत पर छूने लगा.. दूसरे हाथ से माला की चोली खोल उसकी गोल-गोल मुलायम नंगी चुची दबाने लगा।

माला को भी मजा आ रहा था, वो मुस्करा कर उसकी तरफ देख रही थी- हय रे! तू तो चुदाई में पूरा उस्ताद लगता है। लगता है शहर में रह कर खूब चुदाई की है।’ माला ने उसका कच्छा खोल कर नीचे खिसका दिया और उसका बड़ा मोटा खड़ा लंड हाथ में पकड़ लिया- वाह राजू.. तेरा लंड तो सच में बहुत मोटा तगड़ा है।
माला नज़दीक से लंड को देख रही थी।

राजू ने माला के लहँगे का नाड़ा खींच दिया.. माला ने खुद ही अपने चूतड़ उठा कर उसको निकाल दिया। अब दोनों पूरी तरह नंगे बिस्तर में एक दूसरे की तरफ मुँह करके लेटे थे।

राजू का खड़ा लंड माला की बड़ी खुली गर्म चूत को छू रहा था। उसका मुँह चूची चूस रहा था और खड़े निप्पल को काट रहा था और हाथ माला के बड़े चिकने दूधिया चूतड़ों को सहला रहे थे।

माला स्वर्ग में थी… सिसकार रही थी- सी… हाई… उई… अह्ह्ह… यह तो बहुत अच्छा लग रहा है राजू!
उसने अपनी एक टांग उठा कर राजू की कमर के ऊपर रख दी, इससे उसकी चूत पूरी खुल गई।

राजू ने लंड का मोटा गर्म टोपा से उसकी चूत के दाने को रगड़ दिया, माला को जोर का झटका लगा- हाय राम… राजू घुसा दे ना!
‘अभी ऐसी क्या जल्दी है भाभी, अभी तो मजा शुरु हुआ है, अभी देख क्या मस्ती चढ़ती है।’ राजू ने माला को अपने ऊपर खींच लिया और उसकी चुची को चूसने लगा, चूतड़ों को मसलने लगा।

माला मस्ती और चुदास में लहरा उठी- ई… ई… हाई मसल डाला।

‘वाह भाभी तेरी यह मस्त गदराया जिस्म तो बहुत मज़ेदार है। क्या गोरी-गोरी चिकनी-चिकनी चूत खूब गर्म-गर्म.. गीली-गीली हो रही है।’ राजू ने लंड को उसकी चूत से रगड़ कर कहा।
माला की चूत रस से भर रही थी, राजू को लग रहा था कि माला जल्दी ही झड़ जाएगी.
‘हाई राम… मरी… उफ़… सी… हाई.. इतनी गीली है तो घुसा दे ना मेरे राजा!’ माला ने खुद ही कड़क लंड पकड़ कर टोपा अपनी बड़ी सी खुली गीली चूत में घुसा लिया और उठ कर धीरे से उस पर बैठ गई- हाय मर गई राजू… बहुत मोटा है रे… साली चूत तो फट रही है.. उफ़… सी… हाई… मार डाला!

माला अपने चूतड़ हिला कर धीरे-धीरे पत्थर से लंड को अपनी रसीली चूत में अंदर बाहर कर रही थी और आँखें बंद करके मोटे तगड़े लंड का मजा ले रही थी… उसको यह मोटे लंड का स्वाद पहली बार मिला था.. बहुत मस्ती में थी। अपने पहले पति से उसे ऐसी मजेदार चुदाई नहीं मिली थी.
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‘तूने सही कहा था राजू… आज तो चूत में तेरे ये मस्त मोटे तगड़े लंड को घुसा कर बहुत मजा आ रहा है और मेरी चूत का पानी निकलने वाला है।’ माला आगे झुक कर उसको चूमने लगी।

चोदू राजू ने उसके चूतड़ पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठा नीचे से दस बारह जोरदार धक्के चूत की जड़ में ठोक दिए। उसे मालूम था कि माला पहली बार इतनी जोरदार चुदाई से झड़ने वाली है और उसे खूब मजा आ रहा है।

यह ठुकाई माला के लिए बहुत मस्त थी, वो चिल्ला उठी- ई… ई… .हाई फाड़ डाली.. निकाल डाला सारा पानी.. तेरे भाई ने कभी ऐसा मजा नहीं दिया रे…
उसने अपने नाख़ून राजू के कंधों में गड़ा कर…. होंठों को दाँतों में दबा कर….चूत भींच… जोर से झड़ गई और राजू के ऊपर गिर पड़ी, उसकी सांसें बहुत तेज़ चल रही थी।

थोड़ी देर बाद जब माला की सांसें ठीक हुई… और वो आँखें खोल कर मुस्कराते हुए राजू की तरफ देख रही थी, राजू हंस पड़ा- क्यों भाभी, आया न असली मजा मस्त चुदाई का प्यार की चुदाई में?

माला की चुची राजू के सीने में दबी थी, राजू के हाथ उसके चूतड़ों से खेल रहे थे और खड़ा लंड अभी तक माला की रस से भरी चूत में धंसा था।

‘हाय राम राजू.. ये तो गज़ब हो गया.. आज तो सच में लंड घुस कर चूत का पानी निकल गया.. तू तो सच में बहुत उस्ताद है रे…’ माला ने हँसते हुए राजू को चूम लिया।
‘पर राजा तेरा लंड तो अभी तक बहुत जोर से तन कर चूत में घुसा है।’ माला की आँखों में मस्ती और प्यार की चमक थी और शरारत से मुस्करा रही थी।

‘तो घुसा रहने दे ना.. मुझे भी अपनी इस मस्त चुदासी गर्म-गर्म झड़ी हुई चूत का मजा लेने दे। पर मेरी असली चुदाई तो अभी बाकी है मेरी प्यारी भाभी जान… अभी तो देख और क्या-क्या मजा देता हूँ.. अभी तो तेरी इस चुदासी चूत में बहुत रस बाक़ी है भाभी!’

‘तो क्या फिर से चुदाई करेगा… उफ़… लगता है आज तो सच में चूत का भोसड़ा बना कर ही दम लेगा मेरा चोदू राजा… ठीक है मेरे चोदू राजा, बना दे भोसड़ा.. और दे दे मुझे भी अपने प्यार और चुदाई का असली आनन्द… एक बार में यह तो पता चल गया कि असली मर्द के साथ चुदाई का मजा कैसा होता है।’

माला उस पर से उतर कर बराबर में लेट गई। वो सोच रही थी कि अब राजू उसके ऊपर आकर फिर से चुदाई करेगा।

पर अनुभवी राजू के दिमाग में कुछ और था… वो बिस्तर से उठ कर खड़ा हो गया और माला को खींच कर खड़ा कर दिया और बोला- चल भाभी अब घोड़ी बन जा.. तू तो खूब तगड़ी घोड़ी है… अब घोड़ी चुदाई का मजा लूटते है… क्यों भाभी देगी न चूत घोड़ी चुदाई में?

‘मेरे राजा.. पूछता क्यों है.. अब तो बिना अधिकार के भी मैं अपनी मर्जी से तेरी हूँ… तू किसी भी समय… किसी भी तरीके से… किसी भी जगह मेरी चूत मार सकता है… अब तो मैं पूरी तरह से तेरे प्यार के लिए तैयार हूँ।’ माला मुस्करा कर खुद ही बिस्तर पर हाथ टिका कर आगे को झुक गई, उसके दूधिया चमकते चूतड़ हवा में उठ गए, उसने अपनी जांघों को चुदाई के लिए खोल दिया और राजू उसके पीछे खड़ा था।

‘वाह भाभी क्या मस्त माल लग रही है.. ये सुन्दर-सुन्दर.. गोर-गोर.. चिकने-चिकने चूतड़.. ये पतली सी मस्त चिकनी कमर… और ये मस्त गोल-गोल चुची.. अह्ह्ह… अब तो सच में मस्त चुदाई का मजा आएगा। जरा चूत को ठीक से खोलना.. तभी तो ये खड़ा मोटा लंड अंदर जाएगा।’ राजू ने हंस कर उसकी चुची मसल डाली और चिकने चूतड़ पर चपत लगा दी।

माला प्यार और मस्ती में लहरा उठी- हाय साला चोदू सांड… अब क्या इरादा है साले.. इतनी तो खोल रखी है।’ माला ने अपनी झांटों को और चूत को अपने हाथ से खोल कर पीछे देख कर मुस्कराते हुए कहा।
राजू ने अपने खड़े लंड का मोटा टोपा माला की चूत के छेद पर रख दिया और दोनों हाथ से उसकी कमर पकड़ कर एक जोरदार धक्का लगा दिया। कड़क लंड राकेट की तरह गीली रसीली चूत में घुस गया और चोट मार दी।

माला तड़फ उठी- हय राम… मार डाला… उफ़… ई… ई… फाड़ डाली.. जालिम चोदू घोड़े ने… उफ़…यह कैसा चुदाई का मजा है मेरे राजा… साली चूत भी फटती है… और मजा भी आता है… सी!

‘बस भाभी…यही ख़ास बात है इस प्यार की चुदाई में.. लंड अंदर घुस कर चुदाई भी करता है.. और तेरे जैसी मस्त गदराई चुदासी को दबा कर चूस कर और भी ज्यादा मजा आता है.. क्यों है ना भाभी, मजा आ रहा है ना?’

‘हां मेरे राजा हां… बहुत मजा आ रहा है… और चूत भी फट रही है… तेरा लंड बहुत मोटा तगड़ा और दमदार है.. क्या फूल रहा है… बस अब लगा दे धक्के मेरे राजा… और निकाल दे अपने लंड का पानी मेरी चुदासी चूत में!

क्यों मेरी प्यारी भाभी जान… अपने लंड का ही क्यों… अभी तो तेरी चूत का भी एक बार और पानी निकालना है’।

राजू पूरी रफ़्तार से धक्के मारने लगा, उसकी जांघें माला के चूतड़ों से टकरा कर धप-धप कर रही थी, रसीली चूत लंड की मार से चप-चप कर रही थी। राजू पूरे जोश में था… हू… हुऊ… हू… ले मेरी जान.. ले! राजू एक हाथ से चूची मसल रहा था और दूसरे से माला की चूत का दाना रगड़ रहा था।

माला मदहोशी में थी… उसने ऐसी उतेज़ना, ऐसी चुदास कभी महसूस नहीं की थी, वो मस्ती में चिल्ला रही थी- हाई… हाई… मार दे.. निकाल दे जान… मसल डाल.. ठोक दे अपना मूसल.. और फाड़ दे चूत… अह्ह्ह… सी… हाई… यह तो फिर से झड़ने को तैयार हो गई है… हां राजा… हां!’

‘ले मेरी रानी… और ले… बस अब तो अपना भी गया.. ले… उम्म्ह… अहह… हय… याह… हुऊ… हुऊ.. हुऊ… ले गया उफ़… क्या मस्त आग है तेरी चूत में.. ले गया!’ राजू ने माला की चुची जोर से मसल लंड पूरा अंदर घुसा अपने दांत माला के कंधे पर गड़ा कर उसकी गर्म चूत की जड़ में पिचकारी मार दी।

माला ने भी अपनी जांघों को जोड़ कर भींच लिया और फिर से झड़ गई और बिस्तर पर गिर पड़ी, राजू उसके ऊपर गिर गया, दोनों पसीना-पसीना हो रहे थे और उनकी सांसें तेज़ चल रही थी।

थोड़ी देर के बाद राजू उसके ऊपर से उठ कर बिस्तर पर लेट गया।
माला मुस्कराती हुई खड़ी हो कर दरवाज़े तक गई और वापिस आ गई, उसे मालूम था कि राजू उसके नंगे मस्त गदराए जिस्म को अपनी गर्म-गर्म आँखों से घूर रहा है.

‘हाय राम राजू.. तेरा अभी तक मन नहीं भरा क्या मेरे चोदू राजा? अब थोड़ा सा आराम कर ले।’
दोनों नंगे ही एक दूसरे की बांहों में सो गए। इस चुदाई से दोनों बहुत खुश थे.. सन्तुष्ट थे… लेटते ही आँख लग गई।

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