चाचा चाची की चुदाई देखकर बहन चोद दी- 3

(Indian Sister Chudai Kahani)

इंडियन सिस्टर चुदाई कहानी में मेरी चचेरी बहन ने मेरे साथ अपने मम्मी पापा की चुदाई देखी. इससे हम दोनों बहुत गर्म हो गए. मेरी बहन मुझे बाहर वाली कोठरे में ले गयी.

दोस्तो, मैं आपको अपनी देसी सेक्स कहानी का मजा सुना रहा था.
कहानी के दूसरे भाग
चाचा चाची की लाइव चुदाई देखी
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि चाचा चाची की चुदाई खत्म हो गई थी. फिर जब चाची ने सबुजिया को आवाज दी तो वह झपटती हुई अन्दर आई. उसने पहले से जरूरत का सामान तैयार करके रखा हुआ था.

अब आगे इंडियन सिस्टर चुदाई कहानी:

सबुजिया एक पीतल का बड़ा सा कटोरा लेकर भीतर आई, एक गिलास और एक छोटी बाल्टी में पानी भी लाई.

चाची ने चाचा को फिर से खूब चूमा, जैसे बता रही हों कि वह चुदाई से बहुत खुश हैं.
तब चाची उस कटोरे के ऊपर उकड़ूँ बैठ गईं.

उनकी चुत से जब भीतर का सारा माल चूकर गिर गया, तो उन्होंने सबुजिया को इशारा किया.
सबुजिया ने उनकी चुत को पानी से धोकर पौंछ दिया.
उसने चाची की गांड को भी धोकर पौंछा, शायद चुत में से चूता हुआ माल वहां भी लग गया था.

फिर चाची बिछावन के पास खड़ी होकर पेटीकोट और साड़ी पहनने लगीं.
चाचा भी पैर लटका कर किनारे बैठ गए थे.
चुत के रस से और अपने ही माल से भीगा हुआ उनका सिकुड़ा हुआ लौड़ा नीचे लटक रहा था.

सबुजिया ने लौड़े के नीचे बर्तन लगाया और चाचा के लौड़े को पकड़ कर अच्छी तरह से पानी से धोकर पौंछ दिया.
अब वह बाहर चली गई.

चाचा ने अपनी धोती और गंजी पहनी.
चाची ने ब्रा या ब्लाउज पहनने की जरूरत नहीं समझी और चूचियों के ऊपर साड़ी का आंचल लपेट लिया.

तब तक सबुजिया पीने का पानी लोटा-गिलास में ले आई.
दोनों ने एक-एक गिलास पानी पिया.

चाचा थोड़ी देर बैठकर चाची के खुले हुए बालों को सहलाते रहे और बीच-बीच में चूमते भी रहे.
सब कुछ सबुजिया के सामने ही नि:संकोच हो रहा था.

फिर चाचा उठ खड़े हुए.
चाची उनसे लिपट कर उनका मुँह चूमने लगीं.

थोड़ी देर यह चुम्मा-चाटी का खेल चलता रहा, फिर चाचा बाहर निकल गए.
सबुजिया और चाची भी उनके पीछे-पीछे निकलीं.

अब बेला बोली- चलो, निकल चलो यही मौका है. नहीं तो मां लौट आएंगी!

हम दोनों दबे पांव बाहर निकल गए.
बाहर सब कोई गहरी नींद में थे, तरह-तरह के खर्राटे सुनाई दे रहे थे.

घना अंधेरा था.
हल्की-हल्की हवा भी चल रही थी.
हम लोग पसीने से तर-बतर थे इसलिए हवा बहुत अच्छी लग रही थी.

हम दोनों अपने-अपने बिछावन पर चुपचाप आकर लेट गए.

बिछावन पर लेट तो गए, लेकिन आंखों में नींद कहां थी?
मुझे चाची का बड़े पाव सा फूला हुआ भोसड़ा, उसका वह रसभरा बड़ा सा गुलाबी छेद और उसको सोंटे जैसे लंबे और मोटे लंड से चाचा द्वारा की जा रही चुदाई के दृश्य याद आ रहे थे.

फच्-फच्… थप्-थप्… की आवाज अभी तक कानों में गूँज रही थी.
लुंगी के भीतर मेरा लंड फुफकार रहा था.

मैं बेचैनी में करवटें बदल रहा था.
वहां पर मुट्ठ भी नहीं मार सकता था क्योंकि डर था कि कोई देख न ले.
मुट्ठ मारने के लिए अंधेरे सुनसान में बाहर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहा था.

उधर लग रहा था कि बेला का भी यही हाल था.
वह भी बार-बार करवटें बदल रही थी.

थोड़ी ही देर में वह उठ बैठी.
मैं अंधेरे में भी उसे देख रहा था.

उसने मुझको छुआ तो मैंने उसका हाथ दबाकर इशारा किया कि मैं भी जाग रहा हूँ.
वह मेरे कान के पास मुँह लाकर फुसफुसाई- मेरे पीछे पीछे चुपचाप आ जाओ!

ऐसा कहकर वह घर के पिछवाड़े खुलने वाले दरवाजे की तरफ बढ़ी.
पीछे का दरवाजा खोलकर बाहर निकल गई और चारों तरफ झांककर देखा.

किसी को न पाकर उसने मुझे भी बाहर निकलने का इशारा किया.
मैं उसके पीछे-पीछे चल पड़ा.

पीछे से घूमते हुए हम खलिहान के उस कोने पर पहुंच गए, जहां एक कोठरी बनी हुई थी.
उस कोठरी में गांव के मिडिल स्कूल के एक मास्टर साहब रहते थे.

अभी गर्मी की छुट्टी होने के कारण वे अपने गांव चले गए थे और कोठरी खाली ही थी.
दरवाजे में बाहर से केवल सांकल लगी हुई थी.

बेला ने बिना कोई आवाज किए सांकल नीचे गिराकर कोठरी का दरवाजा धीरे से खोल दिया और मुझे अन्दर जाने का इशारा किया.
मैं भीतर घुस गया.

वहां एक चौकी रखी हुई थी जिस पर मास्टर साहब का बिछावन मोड़कर रखा हुआ था.
भीतर जाकर मैं चौकी पर बैठ गया.

मेरा कलेजा जोर-जोर से धक-धक कर रहा था, सांसें जोर-जोर से चल रही थीं और कंठ जैसे सूख रहा था.
बेला ने चारों तरफ अच्छी तरह झांककर देखा.

जब वो निश्चिंत हो गई कि कोई हम लोगों के पीछे नहीं था, तब वह भी भीतर आकर मेरी बगल में बैठ गई.

उसकी भी सांसें जोर-जोर से चल रही थीं, जिसकी गर्मी मैं अपने गालों पर महसूस कर रहा था क्योंकि वह मेरे गालों को चूम रही थी.
थोड़ी देर हम अपनी सांसें संयत करते रहे.

फिर मैंने घूमकर उसे कसकर अपने सीने से चिपटा लिया और पीछे उसकी पीठ और चूतड़ों पर कपड़ों के ऊपर से ही हाथ फेरकर धीरे-धीरे दबाने लगा.
कुछ देर वह भी मुझसे चिपकी रही और वह भी मेरी पीठ और चूतड़ों को दबाती रही.

फिर मैंने उसका चेहरा हाथों में लेकर उसके रस भरे होंठों को चूसने लगा.
चाची की तरह उसके होंठ भी संतरे की फांक की तरह रस से भरे हुए लगते थे.
कभी मैं चूसता, तो कभी वह मेरे होंठों को चूसने लगती.

फिर उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में घुसा दी और मैं उसकी जीभ से अपनी जीभ लड़ाते हुए उसे भी चूसने लगा.
वह भी बीच-बीच में मेरी जीभ चूसने लगती थी.

फिर वह मुझसे अलग हुई, उसने अपनी समीज खोलकर अलग कर दी.
अब वह ब्रा और सलवार में थी.

उसकी बड़े-बड़े संतरे जैसी चूचियां पर मेरी नजर बहुत पहले से थी.
इसलिए जब हम दोनों पहले की तरह लिपट कर एक-दूसरे के होंठ और जीभ चूस रहे थे, तब मैंने उसकी पीठ पर हाथ फेरते हुए उसकी ब्रा के हुक खोल दिए थे.
फिर ब्रा को शरीर से अलग कर दिया और उसकी दोनों गोल-गोल चूचियों को हाथों में पकड़ कर मसलने लगा.

बीच-बीच में चूचियों की टोंटी मुँह में लेकर उनको चूसने लगता.
चाची की ही तरह अब बेला भी उत्तेजना के कारण अं … ह … ह … ऊ… हूँ … हूँ … जैसी आवाज मुँह से निकालने लगी, लेकिन बहुत धीमी आवाज में.

हालांकि हमारी आवाज को कोई सुनने वाला नहीं था फिर भी गांड फट रही थी तो आवाज अपने आप धीमी निकल रही थी.

फिर मैंने उसकी सलवार की डोरी भी सरका कर खोल दी.
सलवार नीचे गिर गई तो उसने दोनों पैरों को निकाल कर अपने को अलग कर लिया.

मुझे हल्की-हल्की एक सुगंध जैसी महसूस हुई.
मैंने उसकी चुत में उंगली डाली तो वह चुदासी चुत के गर्म-गर्म रस से भीग गई.

मैंने उंगली को सूँघा तो पता चला कि वह सुगंध बेला बहिन की चुदासी चुत से ही आ रही थी.

मैंने उंगलियों को चाट लिया … और फिर नीचे बैठकर छेद की फांकों को मुँह में लेकर चूसने लगा.
बीच-बीच में चाचा की तरह मैं अपनी नाक या कभी-कभी अपनी जीभ उसके छेद के भीतर घुसाकर चलाने लगता.

बेला बहिन मेरे सिर के बालों को पकड़ कर मेरे सिर को अपनी चुत पर जोर-जोर से दबा रही थी, मानो वह मेरा पूरा सिर ही अपनी चुत में घुसा लेना चाहती हो.

लेकिन मेरी सांस घुटने लगती तो मैं बलपूर्वक अपना सिर अलग कर लेता था.

अब मेरे बाल पकड़ कर बेला ऊपर खींचने लगी.
वह मुझे खड़ा होने का संकेत दे रही थी.
मैं चुत को चाटना चूसना छोड़ कर खड़ा हो गया.

उसने मुझको अपनी लुंगी खोलने का इशारा किया.
मैंने लुंगी खोलकर अलग कर दी.

वह मेरा पूरी तरह टनटनाया हुआ लंड को एक हाथ में पकड़ कर हल्के-हल्के दबाने लगी और दूसरे हाथ से मुझे पीछे की ओर धक्का देने लगी.
मैंने इशारा समझा और पीछे हटकर चौकी पर चित होकर लेट गया.

वह मेरे पैरों की तरफ चेहरा करके बैठ गई और अपनी चुत मेरे मुँह पर जोर-जोर से रगड़ने लगी.
अपनी चुत मेरे चेहरे पर रखती हुई वह आगे की ओर झुकी और मेरे लंड को हाथों में लेकर चूमने-चाटने लगी.

मैं उसकी चुत को चूम-चाट रहा था और वह मेरे लंड को.

फिर उसने मेरा सुपाड़ा अपने मुँह में भर लिया और उस पर अपनी जीभ फेरने लगी.
मेरे लिए यह अत्यंत ही सुखद अनुभव था.
उसके मुँह की गर्मी में लौड़ा और तन गया.

ताव में आकर मैंने अपना लंड उसके मुँह में थोड़ा और भीतर धकेला और फिर मैं अपनी कमर चलाकर लंड को आगे-पीछे करने लगा और इस तरह उसके मुँह की चुदाई करने लगा.

पूरी ताकत से अपनी चुत मेरे चेहरे पर रगड़ती हुई वह भी अपना मुँह आगे-पीछे कर मुँह की चुदाई का मजा लेने लगी.
मैं उसका मुँह चोद रहा था और वह मेरा मुँह चोद रही थी

मेरा ताव बढ़ता जा रहा था.
मैं मुँह में लौड़े को तेजी से अन्दर-बाहर करने लगा और जल्दी ही झड़ने लगा.

मेरा गर्म-गर्म माल जब उसके मुँह में जाने लगा तो उसने अपना मुँह अलग कर लिया और सारा माल बाहर गिरने दिया … मुँह में गया हुआ माल भी मेरे लौड़े के ऊपर उगल दिया.

मैं हांफने लगा.
वह अलग हट गई और मेरे कान के पास मुँह लाकर फुसफुसाई- तुम्हारी पहली चुदाई है, तो मैं जानती थी कि तुम तुरंत ही झड़ जाओगे … यदि तुम मेरी चुत में इतनी जल्दी झड़ जाते, तब तो मेरा सारा मजा ही किरकिरा हो जाता. यही सोचकर एक-दूसरे के मुँह की चोदा-चोदी करने लगी. इसमें भी बड़ा मजा आया … तुमको मजा आया न?

मैंने कहा- हूँ … मुझे तो बहुत ही मजा आया!

मेरे मुँह से अपना मुँह भिड़ाती हुई वह हंसने लगी और बोली- लेकिन मैं अभी खलास नहीं हुई हूँ, जब दुबारा तुम्हारा लंड तन जाएगा तब बुर चुदवाऊंगी और बिना खलास हुए तुमको छोड़ूँगी नहीं!
ऐसा कहकर वह मुझे चूमने-चाटने लगी.

उसकी गर्म-गर्म सांस मेरे चेहरे पर पड़ रही थी जो मुझे बहुत ही आनन्द दे रही थी.

फिर वह उठी, नीचे से मेरी लुंगी उठाई और उसी से मेरे लंड और जांघों पर बिखरे हुए मेरे सारे माल को पौंछकर साफ कर दिया.
फिर मेरे ऊपर चढ़कर मेरा मुँह चूमने लगी.

थोड़ी देर में वह फिर उल्टा घूम गई और अपनी चुत मेरे मुँह पर रखते हुए उसने अपने मुँह को मेरे ठंडे पड़े लौड़े पर रख दिया.
जिस तरह बछड़ा गाय को पेन्हाने के लिए उसकी चूचियों को थूथुन से मारता रहता है और अपने मुँह में लेकर चूचियों को चुभलाता रहता है, उसी तरह बेला मेरे लौड़े को चूम-चूमकर मुँह में ले रही थी और चुभला रही थी.

गर्म-गर्म चुदासी चुत की सुगंध मेरी नाक में घुस रही थी और जीभ से मैं चुत के गर्म रस को चाट रहा था.
जब उसके टीट के गोल दाने को मैं जीभ से टटोलने लगा तो वह चिहुंक कर पूरी ताकत लगाकर दोनों जांघों से मेरे सिर को दबोच लेती थी.

नीचे मेरे लौड़े को मुँह में लेकर मेरी इंडियन सिस्टर अपना मुँह आगे-पीछे करते हुए लगातार मेरा मुखचोदन कर रही थी.

धीरे-धीरे मेरा लौड़ा खड़ा होने लगा.
वह सीधी होकर फिर से मेरी जीभ को मुँह में लेकर चुभलाने लगी और मैं उसकी चूचियों से खेलने लगा.
जल्द ही मेरा लंड फिर से इंडियन सिस्टर चुदाई के लिए तैयार हो गया.

बेला उठकर बैठ गई.
उसने मेरे लौड़े को मुट्ठी में पकड़ा और ढेर सारा थूक डालकर लौड़े को गीला कर दिया.

तब मेरी कमर के दोनों ओर उसने अपने दोनों पैर रखे और लौड़े पर बैठ गई.
पूरी तरह तना हुआ मेरा लंड उसकी रस से भरी हुई चुत में घुसता चला गया.

चुत में लौड़ा घुसने का यह मेरा पहला अनुभव था, मैं तो सुख के सातवें आसमान पर पहुंच गया.
मेरी आंखें बंद हो गईं और मैं बड़बड़ाने लगा- आह … आह … क्या मजा है चुत में लंड घुसाने का … मेरी प्यारी बुरचोदी बहना, तुम मुझको ऐसा सुख दे रही हो जैसा मैंने कभी सोचा ही नहीं था!

वह कुछ नहीं बोली बस लौड़े को अन्दर लेती रही.
‘मैं तो तुम्हारी चुत का गुलाम हो गया… गर्मागर्म सुगंधित चुत वाली मेरी बहना रानी … मैं तो तेरा दीवाना हो गया!’
वह हंस दी.

फिर मैंने कहा- चाची को चुदाई का सबसे ज्यादा सुख चुत में लौड़ा घुसवाते समय मिल रहा था. मुझे भी चुत में घुसेड़ते हुए ही सबसे ज्यादा सुख मिल रहा है. तुमको चुदाई का सुख सबसे अधिक कब मिलता है मेरी भाईचोदी बहना?

‘मुझे सबसे अधिक मजा तब मिलता है मेरे बहनचोद भाई, जब लौड़ा चुत के अन्दर-बाहर होता रहता है. इसी लिए मुझे चुदाई की गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठना पसंद है जैसे अभी मैं बैठी हूँ. ऐसे में लंड को छेद के भीतर-बाहर करना मेरे कंट्रोल में रहता है. मैं जिससे भी चुदवाती हूँ, उसको अपने ऊपर चढ़ने नहीं देती हूँ जैसा कि पिताजी मेरी मां पर चढ़े हुए थे. मैं तो मर्द के लौड़े पर ही चढ़ बैठती हूँ. इसमें मुझे सबसे अधिक मजा आता है!

मतलब ये कि बेला को अपनी मां की तरह मर्द से चुदवाना पसंद नहीं था.
वह मर्द को चोदना पसंद करती थी.
मुझे ये बातें बहुत मजेदार लगीं.

मेरे लंड पर बैठी हुई वह अपने चूतड़ों को उछाल-उछाल कर मुझे चोदे जा रही थी और मुँह से आह … उह … की आवाजें निकाली जा रही थी.
साफ था कि उसको मुझे चोदने में बहुत ही मजा आ रहा था.
मुझे तो उसकी चुदाई से ज्यादा उसको चुदाई करते हुए देखने में मजा आ रहा था.

उसकी चूचियां गेंद की तरह इधर-उधर उछल रही थीं.
फिर धीरे-धीरे वह झुकी और लंड पर बैठे-बैठे आगे-पीछे पींगें मारती हुई वह अपनी चूचियों को मेरे सीने पर रगड़ने लगी, मसलने लगी.
जब भी वह अपने धक्के से आगे आती, तो मेरे होंठों को चूम लेती थी.

मैंने उसके पीछे हाथ ले जाकर उसके बड़े बड़े गुदाज चूतड़ों को मसल रहा था और चूतड़ों पर जोर लगाकर आगे-पीछे धक्का मारने में उसकी मदद कर रहा था.
मैं खुद भी अपने चूतड़ों को ऊपर उछाल-उछाल कर अपने लंड से धक्का देते हुए उसकी चुत के हर धक्के का जवाब भी देता जा रहा था.

वह आंखें बंद करके पूरी ताकत से मुझे चोदे जा रही थी और मैं आंखें खोलकर उसकी चुदाई का मजा ले रहा था.

कभी-कभी मैं भी बोलने लगता- चोदो रानी, चोदो मारो छेद का धक्का मेरे लंड को खूब चोदो … और चोदो … और चोदो … मारो चुत से धक्का … आह … ओह!

वह भी बोलने लगती- आह ले भाई … मेरी चुत को अपने लंड से छेद दो … लो धक्का … तुम्हारे मोटे लंड को चोदने में बड़ा मजा आ रहा है भाई … तुम भी अपने लंड से धक्का दो … लो चुत का धक्का … आह कैसा सटासट मेरी चुत तुम्हारे लंड को बाहर-भीतर कर रही है … आह लो सटासट … चोदो सटासट … और चोदो … और मारो लंड का धक्का … मारो आह … ऊंहू ले बहनचोद … बहन की चुत का मजा लो … आह चोदो … चोदो!

धीरे-धीरे उसकी स्पीड बढ़ने लगी थी.
वह हाँफती हुई बोली- तैयार हो जा बहनचोद … आह तेरी बुरचोदी बहना तेरे लंड पर झड़ने वाली है … आह … आह … आ रही हूँ बहनचोद … आ रही हूँ … तुम भी आ जाओ … भाई-बहन साथ झड़ेंगे … आं … भाई रे आह … बहुत मजा आया भाई!

बेला का शरीर कड़ा होने लगा … शायद उसने झड़ना शुरू कर दिया था, मैं पिछड़ रहा था.

मैंने घूमकर बलपूर्वक उसे नीचे पटका और उसके ऊपर चढ़कर दोनों घुटनों को चौकी पर जमाते हुए उसकी चुत में जोर-जोर से लौड़े का धक्का देने लगा.

वह चिल्लाने लगी- अब नहीं चाहिए रे बहनचोद … अब बंद कर पेलाई, मेरा हो गया … आह मैं खलास हो गई … अब तुम्हारे लौड़े का धक्का नहीं चाहिए, अब हट जाओ … फिर बाद में चोद लेना … आह … रे बहनचोद, तुम चुत फाड़ ही डालोगे क्या!

वह बड़बड़ाती हुई शिथिल पड़ती जा रही थी और मैं अपनी पेलाई तेज करता जा रहा था.

तभी लगा कि मैं भी झड़ने वाला हूँ.
मैंने खूब जोर से बेला को दबोच लिया, उसके होंठों को मुँह में जोर से दबा लिया और इधर उसकी चुत के अन्दर मेरे लंड से रस की पिचकारी निकल पड़ी.

मेरा लंड बार-बार फड़क रहा था और चुत के भीतर पिचकारी मारे जा रहा था.

मैं भी निढाल होकर उसके मुँह के ऊपर अपना मुँह रखकर गिर पड़ा.
हम दोनों हांफ रहे थे.
नीचे उसकी चुत के भीतर मेरा लंड पिघल कर हलवा बन रहा था और यहां ऊपर दोनों की गर्म सांसें एक-दूसरे में घुल रही थीं.

हम दोनों इसी तरह कुछ देर सुस्त पड़े रहे.

थोड़ी देर बाद होश दुरुस्त हुआ तो मैंने इतना ही कहा- बड़ा मजा आया मेरी बेला रानी!
वह शरारत करती हुई फिर से मेरे ऊपर आ गई और बोली- मुझे भी मेरे बहनचोद भाई, तुमको चोदने में बहुत ही मजा आया … चोदने लायक क्या मस्त लौड़ा है तेरा!
यह कहकर उसने मुझको खूब चूमा.

फिर मेरे शरीर से अलग हो गई.
मेरी लुंगी लेकर अपनी चुत से टपकते हुए मेरे माल को उसने पौंछकर साफ किया.

फिर कपड़े पहनने लगी.
कपड़े पहनती हुई बेला बहन बोली- तू भी लुंगी-गंजी पहन ले … मन तो एक बार और चोदने का कर रहा है लेकिन बहुत देर हो गई है. अब चलना होगा. चलो, अब कल चुदाई करेंगे!

मेरी लुंगी दो-दो बार झड़े हुए लंड के रस से भीग गई थी. फिर भी मैंने पहन ली. कपड़े पहनने के बाद हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे.

मुझसे लिपटते हुए उसे मेरी भीगी हुई लुंगी का ध्यान आया.
वह बोली- जाकर लुंगी बदल लेना, इस लुंगी को तुरंत पानी में बढ़िया से धोकर फैला देना. नहीं तो लंड के रस का पीला-पीला दाग हो जाएगा. लोग पूछेंगे तो कह देना कि बहुत गर्मी लग रही थी तो रात को ही नहा लिया.

मैंने सिर हिलाते हुए कहा- कभी दिन में चुदाई का जुगाड़ लगाओ न बहन … अंधेरे में तुम्हारी चूची, तुम्हारा छेद, कुछ भी ठीक से नहीं देख पाया!

‘ठीक है, देखूँगी.’ कहती हुई वह कोठरी के बाहर निकलने लगी.
मैं भी उसके पीछे-पीछे बाहर निकल गया. उसने सावधानीपूर्वक दरवाजे की सांकल चढ़ा दी और हम दबे पांव चलते-चलते अपने घर में बिछावन पर पहुंच गए.

आपको मेरी इस इंडियन सिस्टर चुदाई कहानी में कितना मजा आया, प्लीज जरूर बताएं.
rukmini.devi01011945@gmail.com

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