सगी बहन की चुदास और मेरा कुंवारा लंड- 1

(Meri Sex Life Story)

पवन मातरो 2026-01-08 Comments

मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी मेरे बहनचोद बनने की सच्ची सेक्स कहानी है. मेरी बड़ी बहन रात को सोते हुए मेरा हाथ अपने बदन पर फिरवाती थी. मुझे भी मजा आने लगा था.

हाय दोस्तो, मेरा नाम राकेश है.
मैं बिहार का रहने वाला हूँ.
मैं 30 साल का हूँ.

ये मेरी पहली सेक्स कहानी है.
उम्मीद करता हूँ कि आप लोगों को मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी पसंद आएगी.

ये कोई काल्पनिक कहानी नहीं है, आप इसे पढ़ने के बाद खुद ही समझ जाएंगे.

मुझे सेक्स स्टोरी पढ़ने में बहुत मज़ा आता है, खासकर अगर वह मां-बहन की चुदाई की कहानी हो.
ये आदत मुझे तब लगी थी, जब मैं जवान हुआ था और मेरा अपनी सगी बहन के साथ सेक्स संबंध हुआ था.

एक बार सेक्स कहानी पढ़ी तो ऐसी लत लगी कि मुझे जब भी मौका मिलता, मैं कहानी पढ़ने लगता.
कामोत्तेजक सेक्स कहानी पढ़ने से लंड खड़ा हो जाता और मैं मुठ मार लेता.

इस तरह से मैं मजा लेते लेते भाई बहन और मॉम सन सेक्स कहानी को कुछ ज्यादा ही रुचि लेकर पढ़ने लगा था.

दोस्तो, मैं इस सब तरह का सेक्स साहित्य पढ़ कर कुछ कर बैठा था और वह सब मैं काफी समय से अपनी सेक्स कहानी के रूप में लिखने के बारे में सोच रहा था.
पर मुझे पता नहीं था कि इसे कैसे भेजा जाता है.

अब जब मैं 30 साल का हो गया, तब मुझे पता चला कि सेक्स कहानी कैसे भेजी जाती है.

मेरी इस सेक्स कहानी में बहुत सारे पात्र हैं क्योंकि ये रियल स्टोरी है, इसलिए लंबी भी है और ये किसी और की नहीं, बल्कि मेरी ज़िंदगी की ही सेक्स स्टोरी है.

ये बात तब की है जब मैं जवानी की दहलीज पर आया ही था.

चूंकि बिहार के गांव का रहन सहन कुछ इस तरह का था कि जवानी का क्या मतलब होता है, यह समझ ही न सका.

मेरे घर में मेरे मां-बाप, दादा-दादी और तीन बहनें हैं. मैं अकेला भाई हूँ.

ये कहानी मेरी एक बहन के साथ मेरी चुदाई की है.
जैसा कि मैंने बताया कि मेरी तीन बहनें हैं. दो मुझसे बड़ी हैं और एक छोटी है.

मेरी सबसे बड़ी बहन का नाम सोनम है, उससे छोटी का नाम रानी है और सबसे छोटी का नाम पायल है.

मेरा घर ज्यादा बड़ा नहीं है.
उसमें तीन कमरे, एक किचन और एक टॉयलेट है.
किचन और रूम के बीच में आंगन है जिसमें हैंडपंप है.

क्योंकि बाथरूम नहीं है तो सब कोई वहीं आंगन में हैंडपंप के पास नहाते हैं.

ये बहुत साल पहले की बात है, उस टाइम हमारे घर में पानी की टंकी या मोटर आदि कुछ नहीं था.

घर में एक बेडरूम में मेरे मम्मी-पापा सोते हैं, दूसरे में हम सब भाई-बहन सोते हैं और बरामदे में दादाजी सोते हैं.
तीसरे रूम में दादी सोती हैं.

हम सब बहन-भाई एक साथ सोते थे.
मैं दोनों बड़ी बहनों के बीच में सोता था.

एक बहन जो मुझसे एक साल बड़ी थी, वह एक तरफ और दूसरी जो मुझसे तीन साल बड़ी थी, वह दूसरी तरफ.

जो बहन मुझसे एक साल बड़ी थी, उसका नाम रानी था.
वह ब.चपन से ही बहुत कामुक थी.
पता नहीं उसे ये सब कैसे पता चल गया था कि सेक्स क्या होता है.
मुझे तो उस टाइम कुछ भी मालूम नहीं था.

उस वक्त सर्दी का मौसम था.
सब लोग खा-पीकर रजाई में सोते थे.

मुझे ये तो याद नहीं कि ये सब शुरू कैसे हुआ, पर जब से मुझे इस सबका अहसास हुआ … वही बता रहा हूँ.

मेरी बहन रानी जब रात में सोती थी तो वह मेरा हाथ पकड़ कर अपने पेट पर सहलाती थी.
तब मैं नींद में होता था, मुझे कुछ मालूम नहीं चलता था.

मुझे शुरू शुरू में तो कुछ मालूम नहीं था पर कुछ टाइम बाद मुझे कुछ कुछ अहसास होने लगा.

हालांकि सुबह जब हम सब उठते थे तो सब कुछ नॉर्मल होता था, हम इस बारे में एक-दूसरे से कोई बात नहीं करते थे.

ये सब काम सिर्फ रात में ही होता था.
शायद मेरी बहन समझती थी कि मैं सो रहा हूँ … जबकि मैं जागा हुआ होता था और उसके बदन को सहलाने का मजा लेता रहता था.

मैं इस बात का बड़ा ख्याल रखता था कि मेरा हाथ खुद ब खुद न चले, बल्कि बहन के हाथ के चलाए अनुसार ही उसके पेट को सहलाए.

धीरे-धीरे दिन बीतते गए, अब बात आगे बढ़ने लगी.

वह मेरे हाथ को अपने चूचों पर भी फिरवाने लगी.
मुझे और ज्यादा मजा भी आने लगा और मेरी कसक भी बढ़ने लगी क्योंकि मुझे उसके दूध मसलने का बड़ा मन करता था.

लेकिन अपने मन से उसके दूध मसलने लगता तो मेरा भेद खुल सकता था, इसलिए बस उसी की चाहत के अनुसार हाथ को चलाता या हाथ से उसके दूध को दबाता रहता था.

चूंकि हाथ से दबाना तो जब होता, जब मैं उसके दूध को खुद से दबाने लगता.
एक तरह से यह दूध दबाना तो नहीं कहा जा सकता है, बस वह मेरा हाथ पकड़ कर अपने चूचों पर सहलाती रहती और दबाने जैसा करती रहती थी.

मैं चुपचाप सोया रहता और वह जैसे जैसे करवाती, मैं करता रहता.

कुछ दिन बाद उसे शायद पता चल गया कि मैं भी जाग रहा होता हूँ, पर ना उसने कभी कुछ बोला, ना मैंने.

हम दोनों चुपचाप सब काम करते थे … वह भी रजाई के अन्दर.
कमरे में अंधेरा होने के कारण कुछ नहीं दिखता था.

उस टाइम लाइट ज्यादातर कटी ही रहती थी, फिर भी रात में तो रूम की लाइट सब ऑफ करके ही सोते थे.

हम दोनों बहन भाई रजाई के अन्दर ही सब किया करते थे.

कुछ रातों के बाद मेरी बहन मेरा हाथ पकड़ कर अपनी पैंटी के अन्दर डालने लगी थी और पैंटी के ऊपर से मेरे हाथ को दबा कर अपनी चूत पर रगड़वाती रहती थी.

मुझे कुछ गीला-गीला महसूस होता था.
मैंने अभी तक किसी की चूत नहीं देखी थी इसलिए मुझे पता ही नहीं था कि ये क्या होती है.

उसी चक्कर में मैंने एक दो बार बहन की चुत के अन्दर उंगली घुसेड़ दी तो मुझे एकदम आग जैसी तपिश महसूस हुई और उसी वक्त मेरी बहन ने भी उंगली की सख्ती को महसूस करते हुए अपने आप को पीछे को किया.

उसके हिलने से मैं डर गया और मैंने अपने हाथ को स्थिर कर लिया.

उस घटना से मेरी बहन को सब कुछ पता चल गया कि मैं जाग रहा हूँ.

वह अब पूरी तरह खुलकर मेरे साथ सब करवाने लगी.
अब मैं भी रोज़ रात होने का इंतज़ार करने लगा था क्योंकि मुझे भी इस सब कामों में मज़ा आने लगा था.

अब रोज़ रात को हम दोनों जल्दी खा-पीकर सोने चले जाते थे.
मुझे तो नींद आ जाती थी, पर पता नहीं मेरी बहन जागती रहती थी या सोकर फिर उठ जाती थी … ये मुझे सही से मालूम नहीं है.

वह अंधेरी रात में जब मेरा हाथ पकड़ कर ये सब करती तो मेरी नींद खुल जाती थी.

अब उसकी हिम्मत कहें, सेक्स की भूख कहें या जिस्म की आग कहें … वह बढ़ती ही जा रही थी.

उसकी गर्मी अब हाथ के छूने से शांत नहीं हो रही थी.
शायद इसलिए एक रात जब फिर वही सब कर रही थी, तो उस वक्त उससे बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने आगे बढ़ने का सोच लिया.

मैं जागा हुआ था और उसकी हरकत को देख रहा था.

उसने एक बार पहले रजाई से अपना मुँह निकाल कर बाहर देखा कि सब सो गए हैं या जाग रहे हैं.
हम दोनों रजाई में मुँह ढककर सोते थे.

मैं ज्यादातर अन्दर ही मुँह किये रहता था.
बहन कभी कभी आस पास का जायजा लेने के लिए मुँह बाहर निकालती थी.

एक रात जब बहन ने ये देख लिया कि सब लोग सो गए हैं, तब उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने पेट पर फेरना शुरू किया.

अब चूंकि सब कुछ ओपन हो गया था तो मैं भी बिंदास हाथ फेर रहा था.

मैं उसके दूध दबा देता तो कभी उसके निप्पल पकड़ कर मींज देता.

कुछ देर बाद उसने मेरे हाथ को पकड़ कर नीचे ले जाकर अपनी चूत पर फिरवाया.
उसके बाद जब उसे समझ में आ गया कि मैं भी मस्ती के मूड में हूँ, तो उसने अपने हाथ से मेरा सिर पकड़ा और अपने पेट की तरफ दबाया.

मुझे तुरंत समझ आ गया कि वह क्या करवाना चाह रही है.
मैं भी अपना सिर उसके पेट की तरफ ले गया.

फिर उसने इशारे से मेरा सिर उसके पेट पर घुमाया और अपनी फ्रॉक को ऊपर उठा लिया. नीचे से वह नंगी थी.

मैं अपने मुँह और होंठ उसके पेट पर घुमाने लगा.
मुझे उसकी चुत से सुसू की मस्त गंध आ रही थी और झांटों के रोंएं मेरे मुँह को चुभ कर मस्ती का अहसास दिला रहे थे.

उसकी चुत के बालों में अपने मुँह को फेरते हुए मैं झड़ गया और शायद वह भी स्खलित हो गई थी तो हम दोनों कुछ देर के बाद सो गए.

ये अब रोज़ की कहानी हो गई थी.
मैं भी अब खुलने लगा था, अब इशारों में ही सब समझ जाता था कि क्या करना है.

धीरे-धीरे हम दोनों को सेक्स का ज्ञान हो गया कि कैसे क्या करना है.
मैं भी सेक्स कहानी पढ़ कर सीखने लगा था.

फिर वह समय भी आया जब मैंने पहली बार अपनी बहन की कुंवारी बुर को जीभ से चखा था.

गर्मी में ये सब करना शायद ठीक नहीं हो सकता था इसलिए सर्दी में ही मैं रजाई के अन्दर उसकी चुत का सुख ले लेना चाहता था.

एक खास बात यह भी थी कि यह सब रात को ही होता था.
दिन में इसके बारे में हम दोनों आपस में कोई भी बात नहीं करते थे.
सब कुछ ऐसे नॉर्मल ही रहता था जैसे कुछ हुआ ही न हो.

अगले दिन की बात है, जब सब खाकर रात को सो गए तो आधी रात को बहन ने अपना काम शुरू किया.
इस बार वह मेरा सिर अपनी चूचियों की तरफ ले गई और अपना निप्पल मेरे होंठ पर रख दिया.

मैं जैसे पेट पर होंठ घुमाता था, वैसे ही निप्पल पर भी घुमाने लगा.
इससे मेरी बहन समझ गई कि मुझे आगे नहीं पता.

तो उसने अपना हाथ मेरे होंठ पर लाया और मेरे मुँह के अन्दर उंगली डाल दी. मुझे तुरंत समझ आ गया कि मुँह खोलना है.
जैसे ही मैंने मुँह खोला, उसने मेरा सिर पकड़ कर निप्पल पर दबा दिया और सिर को हिलाने लगी.

अब मुझे भी समझ में आ गया कि क्या करना है. ब.चपन में जैसे मां का दूध पीता था, वैसे ही करना है.
मैंने भी अपनी बहन के दूध को चूसना शुरू कर दिया.

अब मैं भी उत्तेजित होने लगा था, तो इन सब कामों में मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था.

हालांकि उस टाइम लंड छोटा था, पर खड़ा होने लगा था. उस समय यही कोई 4 इंच का रहा होगा.

धीरे-धीरे मेरी बहन ने अपनी पैंटी को नीचे कर दिया और मेरे हाथ से अपनी चूत सहलवाने लगी.
मैंने निप्पल से मुँह हटाया और चुत पर जीभ लगा दी.

मैं बहन की चुत को चूसने लगा और वह मेरा सर अपनी चुत पर दबाती हुई हल्की सिसकारियां लेने लगी.
कुछ देर बाद वह झड़ गई और सो गई.

मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी में अगली रात को ऐसा हुआ जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था.

मेरी बहन उस दिन शायद कुछ ज़्यादा ही गर्म हो गई थी.
उसने उस रात कुछ ऐसा कर दिया, जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था.

दोस्तो, मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी में आपको कितना मजा आ रहा है, प्लीज कमेंट्स करके जरूर बताएं.
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मेरी सेक्स लाइफ स्टोरी का अगला भाग: सगी बहन की चुदास और मेरा कुंवारा लंड- 2

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