सगी बहन की चुदास और मेरा कुंवारा लंड- 2

(Xxxx Sister Fuck Story)

पवन मातरो 2026-01-09 Comments

Xxx सिस्टर फक स्टोरी में मेरी बड़ी बहन ने अपनी चुदास के चलते मेरा लंड अपनी चूत में लेकर चूत फ़ड़वा ली थी. उसके बाद हम दोनों के जीवन में क्या हुआ?

दोस्तो, मैं राकेश आपको अपनी सगी बहन की सेक्स कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
मेरी सगी बहन ने मेरे साथ सेक्स का मजा लिया
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि वह मुझे अपनी टांगों में दबा कर अपनी चुत रगड़वा कर झड़ गई थी.

अब आगे Xxx सिस्टर फक स्टोरी:

दूसरी रात को भी हम खाना खाकर सोने आ गए.
फिर हमेशा की तरह बहन ने अपना काम शुरू किया.

जैसे मेरे हाथ से पहले पेट पर हाथ सहलाना, फिर चूत पर हाथ डालकर सहलवाना, उसके बाद मम्मों को सहलवाना, फिर मुझे चूसने के लिए इशारा करना.

यहां तक तो रोज़ का काम था, जो अब मैं समझ गया था.
वह जैसे जैसे इशारे करती, मैं तुरंत उसके अनुसार कर देता था.

पर आज मामला बिल्कुल अलग था.
शुरुआती इशारे आदि सब करवाने के बाद उसने अपनी पैंटी नीचे की तरफ खिसका दी.

एक बार फिर से उसने रजाई से मुँह निकाल कर देख लिया कि सब सो रहे हैं या नहीं.

जब उसे पूरा यकीन हो गया कि सब सो रहे हैं, तब उसने फिर से रजाई के अन्दर सिर डाल लिया और मेरा सिर पकड़ कर नीचे की तरफ दबाने लगी.

पहले तो मुझे कुछ समझ नहीं आया इसलिए मैं रुक गया.
फिर वह मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत की तरफ दबाने लगी.

मैं कुछ समझ पाता, तब तक मेरा मुँह चूत तक पहुंच चुका था.
फिर भी मैं समझ नहीं पा रहा था कि क्या करना है क्योंकि मुझे तब तक तो यही पता था कि यहां से लोग सुसु करते हैं और ये जगह सिर्फ इसके लिए ही है.

मेरे दिमाग में ये नहीं आ रहा था कि इसमें मुँह कैसे लगाएं, मुझे घिन भी आ रही थी, इसलिए मैं रुका रहा.

फिर पहली बार मेरी बहन ने मेरे कान में आकर फुसफुसाया- इसे चूस!
यह कह कर फिर से पैर फैला कर लेट गई.

मुझे तो घिन आ रही थी … पर बहन ने कहा था इसलिए मैंने ना चाहते हुए भी चूत पर मुँह लगा दिया.

मैंने महसूस किया कि चूत पर बहुत सारे बाल थे.
रजाई के अन्दर और लाइट ऑफ होने के कारण अन्दर कुछ दिख नहीं रहा था, सिर्फ महसूस हो रहा था.

जैसे ही मैंने अपना मुँह चूत के पास रखा, तो अजीब सी गंध आई.

इतने में मेरी बहन ने मेरा सिर चूत पर दबा दिया और मैंने ना चाहते हुए भी चूत पर होंठ रख दिए.

मेरा स्पर्श चुत पर पाते ही मेरी बहन को अचानक करंट की तरह लगा और वह मचल उठी.
कुछ देर तक उसने मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाए रखा.

इतने में मैंने महसूस किया कि उसकी चूत और गीली हो गई है.

शायद उसका पानी निकल गया था इसलिए उसकी बॉडी झटके मार रही थी.
ये सब मुझे बाद में पता चला कि लड़की का भी पानी निकलता है.

उस टाइम तो मैं बस ऐसे ही पड़ा रहा क्योंकि मेरा सिर मेरी बहन ने पकड़ कर रखा था.
कुछ देर बाद वह शांत हुई और मुझे अपने ऊपर से हटाकर कपड़े ठीक करके सो गई.

मैं समझ गया कि अब कुछ नहीं होना है क्योंकि ये रोज़ का इशारा था … काम होते ही वह कपड़े ठीक करके सो जाती थी.

मैं भी नीचे से ऊपर की तरफ खिसक कर सो गया.

अब अगले दिन से तो ऐसा ही होने लगा था.
कल जब से चुत चुसवाई तब से वह चूचों पर ज़्यादा टाइम नहीं देती थी, सीधा मेरा सिर अपनी चूत पर सटा कर रगड़ती थी.

इससे धीरे-धीरे मैं भी चूत चूसना अच्छे से समझ गया था.

पहले मैं मुँह बंद करके ही चूत पर अपने होंठ रगड़ता था क्योंकि एक तो वह मुझे गंदी जगह लगती थी, दूसरा वहां बहुत बाल थे.
इसलिए मैं चूत नहीं चाटता था.

पर समय के साथ सब बदल गया.
धीरे-धीरे मुझे भी उसकी बुर को चाटना अब अच्छा लगने लगा.
मैं रात को उसके एक ही इशारे में चूत की तरफ़ जाकर उसे चाटने लगा.

शुरू शुरू में तो मुझे उसकी बुर का स्वाद कुछ अजीब सा लगता था, पर मैं चाटते चाटते मस्त होने लगा था.

उसकी चुत चाटते समय मैं उसका पानी मुँह के अन्दर नहीं जाने देता था, जीभ पर रस लगता तो मैं उसे अपने हाथ से या कपड़े से पौंछ लेता था.

ऐसे ही कुछ दिन और बीत गए और एक दिन और बड़ा तूफ़ान आया क्योंकि अब मैं भी बड़ा हो गया था, मेरा लंड भी खड़ा हो रहा था.

इसलिए जब कई रातों को चूत चाटने के बाद भी मेरी बहन की आग नहीं बुझी, तो उसने एक कदम और बढ़ाया.

उसने एक रात मेरे लंड पर हाथ रखा तो उसे पता चला कि मेरा लंड तो खड़ा है.
उसने मेरे लौड़े पर अपना हाथ फेरना शुरू किया, जिससे वह और टाइट हो गया.

तभी अचानक उसके दिमाग में क्या आया, उसने मेरा पैंट खोलना शुरू कर दिया.
पैंट खुला तो मेरा लंड पैंट से बाहर आ गया.

मेरी बहन ने मेरे लंड को हाथ से छुआ, उसे शायद बहुत अच्छा लगा.
फिर उसने उसे ऊपर-नीचे करना शुरू कर दिया.

पर उसे शायद पता नहीं था कि लंड का चमड़ा सुपारे तक ही नीचे जाता है, तो उसने उसे पूरा नीचे की तरफ़ खींच दिया.
मुझे दर्द हुआ तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.

फिर उसे समझ में आया कि ये ज़्यादा जोर से नहीं करना है.

मुझे तो जैसे जन्नत महसूस हो रही थी.
मैं शांति से लेटा हुआ उसके हाथ से लंड हिलवाता रहता था.
मुझे इसमें बहुत मज़ा आता था.

ऐसा करके कुछ दिन बीत गए.
फिर एक रात मेरी बहन ने मुझे ऐसा सुख दिया, जिसकी इच्छा हर किसी को होती है.

मेरी बहन ने एक रात मेरा लंड हिलाते-हिलाते कुछ सोचा, फिर उसने अपनी पैंटी भी खोल दी. उसने पैंटी को पूरी तरह से नहीं निकाला, बस घुटनों तक खिसका दिया.
फिर उसने मेरे पैंट को भी घुटनों तक निकाला.

उसके बाद हमेशा की तरह रजाई से बाहर झाँक कर देखा कि सब सो रहे हैं.

फिर उसने वह किया जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था.
वह मेरे ऊपर आ गई.

रजाई के अन्दर ही वह मेरी जांघों पर बैठ गई और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.

दोस्तो, क्या ही बताऊं … मुझे तो लगा जैसे मेरा लंड अब फट जाएगा.

फिर मुझे लंड पर कुछ गीला-गीला सा महसूस हुआ, शायद मेरी बहन की चूत गीली हो गई थी.

उसके बाद उसने मेरे लंड को हाथ से पकड़ कर अपनी चूत में अन्दर डाल लिया क्योंकि मेरा लंड उस वक़्त छोटा था, इसलिए वह ज़्यादा अन्दर नहीं गया.
पर मुझे लगा कि वह कोई गर्म, गुदगुदी जगह के अन्दर घुस रहा है.

उसके बाद मेरी बहन ने उस पर अपनी चूत रगड़ना शुरू कर दिया.

दोस्तो, मैं क्या ही बताऊं … ये सुख जिसके साथ होता है, वही जान सकता है.

मेरा लंड अन्दर की तरफ़ घुस गया तो लंड का चमड़ा पीछे की तरफ़ खिंच गया क्योंकि उसकी चूत थोड़ी टाइट थी.
लंड का चमड़ा पीछे खिंचने से मुझे तेज़ दर्द हुआ.

मैंने उसकी कमर पकड़ कर रोक लिया और अपनी कमर को नीचे की तरफ़ खींचा.
पर मेरी बहन इसे समझ नहीं पाई और थोड़ी देर रुकने के बाद वह फिर से रगड़ने लगी.

मुझे दर्द हो रहा था पर मैं रोक नहीं सकता था क्योंकि मैं अब बहन का गुलाम हो चुका था.
जैसा वह करती थी, मुझे वैसा ही करना पड़ता था.

मैं दर्द को बर्दाश्त करता रहा.
फिर आख़िर में करीब 10 मिनट बाद मेरी बहन झटके मारने लगी और अचानक मेरे ऊपर रुक गई.

थोड़ी देर रुकने के बाद वह मेरे ऊपर से उतर गई.
तब जाकर मेरे लंड को कुछ राहत मिली.

पर मेरा मन अभी संतुष्ट नहीं हुआ था, मुझे और करने का मन कर रहा था.

मैंने अपनी बहन को अपनी तरफ़ खींचा, पर वह नहीं आई और कपड़े ठीक करके सो गई.
मैंने सोचा कि पता नहीं इसे क्या हुआ, इतना अच्छा तो चल रहा था, फिर अचानक उतर कर क्यों भाग गई?

तब तक मुझे ये भी मालूम नहीं था कि लड़की का भी पानी निकलता है इसलिए उसका काम हो जाने के बाद वह लंड से उतर कर सो गई थी.
फिर मैंने अपना लंड छुआ तो पाया कि उस पर कुछ चिपचिपा सा पानी लगा था.

मुझे नहीं पता था कि ये मेरे लंड का प्री-कम था या चूत का पानी.
मेरे लंड से उस टाइम पानी नहीं निकला था.

मैं मुठ मारना आदि सब नहीं जानता था, मैंने कभी मुठ मारी भी नहीं थी.

उसके बाद से Xxx सिस्टर फक रोज़ होने लगा.
वह रोज़ मेरे ऊपर चढ़ जाती और कुछ देर ऊपर-नीचे या रगड़ने के बाद अचानक रुककर उतर जाती.
बाद में मुझे पता लगा था कि शायद उसे डर लगता होगा कि बच्चा न हो जाए, इसलिए रुक जाती और हट जाती थी.

ये तो वही जाने, क्योंकि हम लोग इसके बारे में कभी बात ही नहीं करते थे

उसके बाद उसके चूचे भी बड़े हो गए … ज्यादा बड़े नहीं, पर नॉर्मल साइज़ के.

फिर घर वालों को लगा कि हम बड़े हो गए हैं इसलिए हमें एक साथ नहीं सोना चाहिए.
अब मुझे बाहर वाले बरामदे में, जहां मेरे दादाजी सोते थे, वहीं दूसरे बेड पर सुलाया जाता था.

इसलिए अब चुदाई नहीं होती थी.

शायद अब हम बड़े होने लगे थे, अब हम दोनों दूसरे लोगों की तरफ़ आकर्षित होने लगे थे.
मुझे भी दूसरी लड़कियों को देखना अच्छा लगने लगा था, मेरी बहन भी अब किसी और की तलाश में थी.

मेरा जहां घर था, वहां मेरे पड़ोस में मेरे चाचा रहते थे और एक तरफ़ मेरी बुआ का घर था.

सामने से सड़क थी और ठीक मेरे घर के सामने एक और घर था, जिसमें एक और फैमिली रहती थी.

मेरे चाचा और मेरी बुआ सगे नहीं थे, वे मेरे दादाजी के भाई की बेटी और बेटा थे.
मेरे चाचा के दो लड़के थे.
एक का नाम अमन और दूसरे का नाम सोहन था.

बुआ की भी तीन बेटियां और दो बेटे थे.
बहन-भाई सब हमसे बड़े थे, सिर्फ़ एक बेटा मेरी ही उम्र का था.

ये सब मैं इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि मेरी बहन का चक्कर शायद मेरे चाचा के छोटे लड़के के साथ भी था.

उसने एक बार धोखे से मुझे बता दिया था.
पूरी बात उसने नहीं बोली, पर ऐसा बोला था, जिससे मुझे शक हुआ कि उसका भी मेरी बहन के साथ कुछ हो चुका है.

ये कब हुआ और कैसे हुआ, ये मुझे मालूम नहीं क्योंकि मैं ये पूछ भी नहीं सकता था.

हम सब लगभग एक ही उम्र के थे, इसलिए सब मिलकर साथ खेला करते थे

एक बार क्रिकेट खेलते समय हमारी बॉल मेरे घर की छत चली गई.
मेरे घर की छत पक्की नहीं थी, वह एस्बेस्टस (सीमेंट की चादर) की थी.
इसलिए उस पर जाना कोई नहीं चाहता था क्योंकि वह ज्यादा मज़बूत नहीं होती और ज़्यादा वज़न से टूट भी जाती है.

तो हममें से कोई बॉल लाने नहीं जा रहा था.

इतने में हमें आइडिया आया कि क्यों न अपनी बहन को भेजें … वह दुबली-पतली थी, वज़न कम था, शायद इससे न टूटे.
हमने उससे कहा तो वह बॉल लाने को तैयार हो गई.

किसी तरह हम लोगों ने उसे ऊपर चढ़ा दिया. बॉल लेकर जब वह वापस आ रही थी तो अचानक छप्पर टूट गया और वह उस पर लटक गई.
एक तरफ़ दीवार थी और दूसरी तरफ़ छप्पर पकड़ कर वह लटकी हुई थी.

उस टाइम हमारे घर में कोई बड़ा आदमी नहीं था, जो उसे वहां से निकालता.
तभी सबको हमारे घर के सामने वाले घर में रहने वाले एक लड़के की याद आई, जो हम सबसे उम्र में काफी बड़ा था और थोड़ा लंबा भी था.

वह आया और उसने मेरी बहन को नीचे से पकड़ कर गोद में उतार लिया.

शायद इसी के बाद से मेरी बहन ने उसे अपना दिल दे दिया.
वह उससे प्यार करने लगी.

अब वह हमेशा उसे देखती रहती थी.
घर के सामने होने की वजह से वह दिख ही जाता था.

ये बात अब मेरी बड़ी बहन को भी पता चल गई.
दीदी ने मम्मी को भी बता दिया कि ये उसे देखती रहती है.
मां ने उसे खूब डाँटा.

पर दोस्तो, आप लोग यह बात जानते ही हो कि जिस काम को जितना मना किया जाता है, बचपन में उतना ही ज़्यादा करते हैं.

इस तरह मेरी बहन उसके प्यार में पागल हो गई थी.
वह लड़का भी उसे प्यार करता था या नहीं, ये तो पता नहीं.

वे दोनों कभी मिलते थे या नहीं, ये भी मुझे पता नहीं.
शायद स्कूल जाते समय मिलते भी होंगे क्योंकि मैं और मेरी बहन अलग-अलग स्कूल में जाते थे.

इसलिए मेरी बहन का ध्यान अब उस लड़के पर था, तो मेरे साथ अब चुदाई नहीं होती थी.
एक कारण ये भी था और दूसरा हमें मौक़ा ही नहीं मिलता था. हमने एक-दूसरे से कभी इसके बारे में बात नहीं की थी, इसलिए अब पता नहीं वह करना चाहती थी या नहीं.

पर मेरा मन तो करता था.

धीरे-धीरे समय बीतता गया.
अब मैं हायर स्टडी कर रहा था, वह मुझसे एक साल बड़ी थी.
हम सब पढ़ाई में लग गए.

कुछ समय के बाद मेरी बड़ी बहन की शादी हो गई.
फिर कुछ सालों बाद मैं बाहर चला गया.

उधर मैंने एक लड़की पटाई.
मैं उसे लेटर लिखा करता था क्योंकि उस टाइम मोबाइल बहुत कम लोगों के पास था.

मैं उसके घर भी आता-जाता था क्योंकि मैं उसके छोटे भाई-बहन को पढ़ाता था.

जब उसके घर जाता तो चुपके से लेटर उसे दे देता था.
वह भी लेटर लिखकर मुझे देती थी.

एक बार रात के टाइम हम सब भाई-बहन एक साथ पढ़ते थे.
उसी टाइम मैं अपनी जीएफ को लेटर लिख रहा था.
तभी मेरी बहन ने देख लिया.
मैंने उसे अपनी पॉकेट में रख लिया.

मेरी बहन मेरे पड़ोस वाले लड़के के चक्कर में थी इसलिए मैं भी उस पर गुस्सा रहता था.
मैंने भी एक बार मां को उसके बारे में बताया था तो मां ने मेरी बहन को बहुत डाँटा था.

शायद इसी गुस्से में मेरी बहन थी.

मुझे क्या पता था कि वह इतनी गुस्सा है.
मैंने सोचा अगर वह मुझे लेटर लिखते देख भी ले तो क्या हुआ, ये मां को नहीं बताएगी.
पर ऐसा हुआ नहीं.

जब मैंने अपना पैंट खोलकर दूसरा पैंट पहना तो मेरा लेटर पहले वाले पैंट में ही रह गया, जिसे मेरी बहन ने चुपके से निकाल लिया और मां को दिखा दिया.
उसके बाद मेरी मां ने मुझे भी डाँटा.

इसके बाद से हम दोनों भाई-बहन में प्यार ख़त्म हो गया.
मुझे उस पर जितना विश्वास था, वह टूट गया.
इसलिए मैंने उससे बात करना बंद कर दिया.
वह भी मुझसे नहीं बात करती थी.

ऐसे ही समय बीतता चला गया.

अब मेरी बहन की शादी भी हो गई.
कुछ साल बाद मेरी भी शादी हो गई.

मेरी बीवी भी बहुत सुंदर है.
पर आज भी मेरे मन में रहता है कि काश बहन को चोदने का कभी फिर से मौक़ा मिले, तो मज़ा आ जाए.

उस वक़्त तो मुझे कुछ पता नहीं था, पर अब मैं उसी तरह उसकी चूत चाटना और चोदना चाहता हूँ.

मुझे पता नहीं उसके मन में क्या है पर वह मेरी बीवी से खुलकर सारी बातें करती है.

इससे मुझे शक तो होता है पर हिम्मत नहीं होती और मौक़ा भी नहीं मिलता.

कभी सोचता हूँ उसे मोबाइल पर मैसेज करूँ, पर फिर डर लगता है कि कहीं वह सबको बता न दे.
एक बार धोखा खा चुका हूँ विश्वास करके, इसलिए अब हिम्मत नहीं होती.

दोस्तो, अगर आपके पास कोई आइडिया है तो मुझे बताएं. मैं अपनी बहन को फिर से चोदना चाहता हूँ.

मुझे ये तो पता है कि उसे चूत चटवाने में बहुत मज़ा आता है.
उसके पति चाटते हैं या नहीं, ये मुझे पता नहीं क्योंकि सबको चूत चाटना पसंद नहीं होता.

पर अगर मुझे मौक़ा मिले तो मैं पूरी लगन और मन से चाटूँगा. बस मौक़ा मिलना चाहिए.

दोस्तो, भाई बहन की Xxx सिस्टर फक स्टोरी आपको कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
[email protected]

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