विधवा चाची की वासना भरी चुदाई- 1
(Chachi NonVeg Story)
चाची नॉन वेज़ स्टोरी में मैं हॉस्टल में रह कर बिगड़ चुका था, कई लड़कियां चोद चुका था. घर आया तो विधवा चाची का कमरा मेरे कमरे के सामने था. चाची ने मेरे साथ क्या किया?
मेरा नाम धीरज है. मैं नागपुर से हूँ. मेरी उम्र 22 साल है.
मैंने पहली बार सेक्स 20 साल की उम्र में किया था, वह भी अपनी विधवा चाची रंजीता के साथ.
यह चाची नॉन वेज़ स्टोरी लॉकडाउन के ठीक बाद की है.
बचपन से मैं हॉस्टल में रहा था.
हॉस्टल में फिजिकल ट्रेनिंग की वजह से मेरी बॉडी एकदम फिट और मसल वाली बन गई थी.
हॉस्टल में रह-रहकर मैं काफी बिगड़ भी चुका था.
उस समय तक मैं चार लड़कियों को चोद चुका था.
मेरे घर पर सिर्फ पापा, चाची और उनकी बेटी दीक्षा थे.
मम्मी की कोरोना में डेथ हो गई थी और चाचा आर्मी में थे तो वे पांच साल पहले शहीद हो गए थे.
हमारा घर आर्मी कॉलोनी में था, जहां सिर्फ 25-30 घर थे और ज्यादातर औरतें ही घर पर रहती थीं क्योंकि उनके पति आर्मी में तैनात थे.
पापा और चाचा ने मिलकर एक बड़ा-सा डुप्लेक्स घर बनवाया था.
पापा की नाइलॉन फैक्ट्री है इसलिए वह ज्यादातर घर पर नहीं रहते हैं.
जब मैं पढ़ाई पूरी करके लौटा तो पापा के साथ फैक्ट्री संभालने की बात की.
इस पर पापा ने कहा- अभी दो साल मस्ती कर ले … लाइफ एंजॉय कर बेटा!
चाची से मैं पहले ज्यादा क्लोज नहीं था क्योंकि बचपन उनके साथ ज्यादा रहा ही नहीं.
उनकी बेटी दीक्षा उस वक्त जवान हो गई थी.
शाम को मैं दीक्षा के साथ पार्क घूमने जाता था.
एक दिन रात को पापा कहीं जा रहे थे.
मेरे पूछने पर वे बोले कि दोस्त के साथ 10 दिन की ट्रिप पर जा रहा हूँ.
वे चले गए और घर पर सिर्फ मैं, चाची और दीक्षा रह गए.
मेरा कमरा ऊपरी मंजिल पर था, दीक्षा के कमरे से सटा हुआ.
सामने चाची का कमरा था.
उस रात मैं और दीक्षा बालकनी में बैठे थे, दोनों की बालकनी एक ही थी.
चाची दूध लेकर आईं और हम दोनों को पिलाया.
दूध पीकर दीक्षा होमवर्क करने चली गई और मैं मोबाइल चलाने लगा.
तभी बगल वाले घर की पार्किंग में एक आंटी नजर आईं.
साला क्या माल थीं एकदम टकाटक …
फिर सब सोने चले गए.
रात में पता नहीं क्या हुआ, मुझे लगा जैसे मैंने स्पर्म डिस्चार्ज कर दिया.
यह सब उसी आंटी को याद करके हुआ था. यह सब लिखने का आशय सिर्फ मेरी कामोत्तेजना को बताना था कि मैं चुत चुदाई का कितना बड़ा शैदाई हूँ.
सुबह उठकर मैंने पैंट चेक की, अन्दर तो सब कुछ सूखा था, लेकिन बाहर दाग गवाही दे रहे थे कि लंड ने रात को उलटी की थी.
दोपहर में मैं अकेला था, दीक्षा स्कूल गई थी.
मैं अपने कमरे में मोबाइल चला रहा था.
तभी नजर चाची के कमरे पर पड़ी.
वे बाथरूम से नहाकर निकली थीं, सिर्फ ब्रा-पैंटी में … फिर उन्होंने साड़ी पहनी.
मुझे यह सब देखना कुछ गलत सा लगा इसलिए मैं आंख बंद करके लेट गया और सोने की कोशिश करने लगा.
शाम को उठा, नीचे हॉल में आया और चाय पीकर टीवी देखने लगा.
तभी दीक्षा बोली- चलो भैया, गार्डन में घूमकर आते हैं!
मैं उसके साथ चला गया.
वहां वह अपनी सहेलियों से बातें करने लगी.
तभी एक बहुत सुंदर लड़की आई.
वह दीक्षा की सहेली की बड़ी बहन थी.
मुझे देखकर उसने दीक्षा से पूछा- ये कौन है?
दीक्षा ने मुस्कुराते हुए कहा- ये मेरे भैया हैं!
फिर वह मुझसे बातें करने लगी.
साला क्या माल थी यार …
चूंकि मेरी कम्युनिकेशन स्किल्स भी अच्छी थी इसलिए मिनटों में ही हमारी दोस्ती हो गई.
उसका नाम प्रियांशी था.
घर लौटते वक्त मैंने दीक्षा से पूछा- वह तेरी क्लास में है क्या?
दीक्षा बोली- नहीं भैया, वह मुझसे दो साल आगे की क्लास है. हम दोनों अच्छे दोस्त हैं.
मैं चुप रहा तो वह फिर से बोली.
लेकिन इस बार उसका अंदाज शरारत भरा था.
वह इठला कर बोली- वैसे आप क्यों पूछ रहे हो?
मैं हड़बड़ा गया और उसी हड़बड़ाहट में मैंने प्रियांशी की फ़ेसबुक की आईडी को लेकर कह दिया कि ये तेरे साथ फ़ेसबुक में एड है क्या?
तभी दीक्षा हंसकर बोली- अरे हां, प्रियांशी दीदी की आईडी भी मेरे साथ एड है … और उनकी छोटी बहन आराध्या की आईडी भी एड है.
मैंने बनते हुए कहा- मुझे क्यों बता रही है?
दीक्षा ने आंख मारते हुए कहा- क्योंकि आप तो वही पूछने वाले थे ना और हां … उनका कोई बीएफ नहीं है, वह गर्ल्स कॉलेज में पढ़ती हैं.
मैंने फिर से मासूम बनते हुए कहा- हां तो मुझे क्यों बता रही है?
दीक्षा जोर से हंसी- क्योंकि आपको वह पसंद आ गई ना … हां या ना?
मैंने कहा- अच्छा, तुझे अच्छी लगती है वह?
वह बोली- हां और अब आपको मुझे थैंक्यू बोलना चाहिए!
मैंने हंसकर थैंक्स बोला और घर आ गए.
रात को दूध पीकर सो गया.
उस रात जो हुआ, उसके बारे में मैंने पहले कभी सोचा भी नहीं था.
आधी रात में फिर वही फीलिंग आई मानो कोई मेरे लंड को हिला रहा हो.
पहले लगा कि यह सपना है, फिर शक हुआ कि कहीं दीक्षा तो नहीं?
वह तो बहुत तेज है.
जबकि मैं बिल्कुल नहीं चाहता था कि दीक्षा के साथ कुछ हो.
फिर मैंने हल्की सी आंखें खोलीं … मेरे बगल में रंजीता चाची बैठी थीं.
वे मेरे लोअर में हाथ डालकर मेरा 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लंड सहला रही थीं.
मैं उनके लिए कभी गलत नहीं सोचता था, इसलिए मैंने कोई हलचल नहीं की.
जबकि लौड़े में तनाव आने लगा था जिससे चाची को समझ में आने लगा होगा कि मैं जाग रहा हूँ.
थोड़ी देर लंड सहलवाने के बाद मैं हल्का सा हिला, तो वे तुरंत उठीं और लाइट बंद करके और बालकनी से दीक्षा के रूम की तरफ चली गईं.
मुझे समझ आ गया कि वह दीक्षा के रूम से मेरे रूम में आई थीं.
मैंने अपना लंड शांत किया और सो गया.
अगली सुबह उठकर हॉल में गया.
उस वक्त दीक्षा ट्यूशन जा रही थी.
मैंने सोफे पर बैठकर मोबाइल खोला और इंस्टाग्राम पर प्रियांशी को फॉलो करके फॉलोबैक की रिक्वेस्ट भेज दी.
तभी चाची आ गईं तो उनको देखकर मन में अपराध भाव आ गया.
लेकिन फिर मैंने सोचा कि जब वे करने में नहीं शर्माईं, तो मैं क्यों शर्माऊं?
उनका भी सेक्स करने का मन होता होगा.
यदि वे मेरे साथ सेक्स नहीं करेंगी तो किसी बाहर वाले के साथ कर सकती हैं.
यह तो फैमिली के लिए और भी गलत होगा. पता नहीं कौन उन्हें पेल दे और परेशान करने लगे.
मैं चाची को लेकर यही सब सोचता रहा.
फिर मैंने यह भी सोचा कि चाची हैं भी तो एकदम परफेक्ट … दिखने में बड़ी खूबसूरत हैं, गोरी हैं … गोल-मटोल बूब्स और कसी हुई गांड है … उफ्फ …
इतना सब सोचते ही मेरा लंड तन गया.
अब तक दीक्षा स्कूल चली गई थी.
कुछ देर तक मैं सोफ़े पर बैठा रहा फिर मन में न जाने क्या आया कि मैं उन्हें देखने किचन में चला गया.
चाची एक कसे हुए गाउन में थीं और काम कर रही थीं.
मैंने पीछे से उनकी गांड देखकर सोचा कि यार इस मखमली गांड को दबाने में कितना मजा आएगा.
तभी वे पलट कर मुझसे बातें करने लगीं.
उनके बूब्स एकदम गोल-मटोल थे.
मैंने सोचा कि बस यहीं पटक कर चोद दूँ … लेकिन मन को काबू किया और नहाने चला गया.
नहाकर तैयार होकर मैं टीवी देखने लगा.
कुछ देर बाद चाची भी किचन के काम से फारिग होकर नहाने चली गईं और वे भी तैयार हो गईं.
चाची ने शिफॉन की पिंक साड़ी और टू बाय टू रुबिया वाला काला झीना सा ब्लाउज पहना हुआ था, उसमें से उनकी कसी हुई चूचियां छोटी सी ब्रा में कैद साफ साफ दिख रही थीं.
चाची ने खाना खाने के लिए मुझे बुलाया तो हम दोनों ने खाना खाया.
उसके बाद चाची बर्तन धोने किचन में चली गईं और धोने लगीं.
मैंने हॉल में बैठकर मोबाइल खोला, तो प्रियांशी ने मुझे फॉलो बैक कर लिया था और मैं उससे चैट करने लगा था.
थोड़ी देर बाद चाची आईं और बोलीं- मैं अपने रूम में जा रही हूँ … कुछ चाहिए हो तो रूम में आ जाना!
वे रूम में चली गईं.
मैंने हॉल का दरवाजा बंद किया और सीधा उनके रूम में घुस गया.
मुझे देखते ही चाची बोलीं- क्या हुआ धीरज … तुमको मुझसे कुछ चाहिए है क्या?
मैंने बेडरूम का दरवाजा लॉक किया और मुस्कुराते हुए कहा- क्या आप वह सब दोगी जो मुझे चाहिए?
चाची शरारती आवाज में बोलीं- हां दूँगी … मांग कर तो देखो.
मैं उनके पास को चला गया.
वे थोड़ी शर्मा कर पीछे हटीं, लेकिन मैंने उन्हें बांहों में खींचकर बेड पर बिठा लिया.
चाची सब समझ गई थीं कि मुझे रात वाली हरकत का पता चल गया है.
अचानक वे फुसफुसाईं- आई वांट यू हनी!
वे इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थीं कि मेरे सीने से लग गईं.
मैंने तुरंत उनके होंठ अपने होंठों में ले लिए.
वे सिसकारियां लेती हुई बोलीं- चार दिन से तेरे लिए तड़प रही हूँ धीरज … मेरी प्यास बुझा दे!
मैंने पूछा- कब से?
वह बोलीं- चार दिन से … उस दिन जब तू नहाकर कपड़े पहनने आया था, तब मैंने दीक्षा की बालकनी से तुझे नंगा देख लिया था. उसी वक्त मैंने मन बना लिया कि मैं तुझसे ही चुदवाऊंगी!
मैंने उनकी जांघों पर हाथ फेरते हुए कहा- मुझे भी आपको चोदना है रंजीता चाची … बहुत चोदना है!
मेरा 7 इंच का लंड पूरी सलामी दे रहा था.
मैंने चाची को बेड पर लिटाया और उनके ऊपर चढ़कर पागलों की तरह किस करने लगा.
वे भी जैसे मेरे लिए तरस रही थीं, पूरा साथ दे रही थीं.
मैंने उनकी साड़ी खोलनी शुरू की.
वे अपनी चुत की चुदाई के लिए इतनी ज्यादा बेकरार थीं कि खुद अपने हाथों से अपने बूब्स दबाने लगीं.
मैंने झट से उनका ब्लाउज उतारा और ब्रा में कैद उन गोल-मटोल बूब्स पर मुँह रखकर चूसने लगा.
निप्पलों की खुशबू मुझे पागल कर रही थी.
मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि हॉस्टल से लौटते ही अपनी चाची को चोदने वाला हूँ.
फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और चाची का पेटीकोट, ब्रा, पैंटी भी फटाफट निकाल दी.
अब हम दोनों बेड पर पूरी तरह नंगे थे.
मैंने पूछा- चाची, चाचा के बाद किस-किस से चुदवाया है?
वे शर्माती हुई बोलीं- चाचा के जाने के बाद किसी से नहीं … सिर्फ तुझसे चुदवाऊंगी!
मैंने हंसकर कहा- तो 5 साल से टाइट पड़ी है ना चाची? आज आपकी चुत का भोसड़ा बना दूँगा!
जब मैंने लंड मुँह में लेने को कहा तो वे मना करने लगीं.
मैंने उनकी चूत देखी तो एकदम गोरी, बिना बालों वाली गुलाबी चूत.
तभी मैंने उसे मसला तो थोड़ी देर में ही वह लाल हो गई.
मैंने ड्रेसिंग टेबल से वैसलीन की डिब्बी को उठा लिया और चाची की चूत पर अच्छे से लगाकर उसे चिकनी कर दिया.
फिर अपने लंड पर भी मल कर उसे चाची को दिखलाते हुए मुठियाने लगा कि चाची चूसने के लिए मान जाएं.
जब उन्होंने स्माइल करके ना में सर हिलाया तो मैं समझ गया कि ये अभी नहीं चूसने वाली हैं.
मैं उनकी बुर में उंगली डालकर उसको खोलने लगा.
बस कुछ ही सेकंड में चाची चरम पर पहुंच गईं और चिल्ला दीं- अब घुसा ना पागल … जल्दी!
मैंने अपना मोटा लंड सैट किया और धीरे-धीरे अन्दर धकेलने लगा.
थोड़ी मशक्कत के बाद टोपा अन्दर गया तो चाची मुझे खींचकर जोर से दबाने लगीं.
पूरा का पूरा लंड एकदम उनकी चूत में समा गया.
मैं भी पूरा लवड़ा अन्दर घुसेड़ कर उनके ऊपर लेट गया.
फिर मैं उन्हें चूमते हुए धीरे-धीरे चोदने लगा.
हम दोनों मिशनरी पोजीशन में थे.
इसमें सबसे ज्यादा मजा आता है.
मैं जितनी जोर से धक्का मारता, चाची उतना ही अकड़ जातीं.
वे मदभरी सिसकारियां लेती हुई बोलीं- धीरे … धीरे करो ना … धीरज आह.
पहले तो वह ‘आह … आह … ऊह्ह … आह्ह … धीरे करो आह’ जोर-जोर से चिल्ला रही थीं पर थोड़ी देर में उनका दर्द मजे में बदल गया.
अब वे खुद कमर उठा-उठाकर चुदवा रही थीं और चिल्ला रही थीं- धीरज … उह्ह्ह … अम्म्म … आह्ह्ह … इह्ह्ह … और जोर से!
लगभग 5 मिनट लगातार मिशनरी में पेलने के बाद चाची ने खुद पोजीशन चेंज करने की कही.
मैंने उन्हें फिर से किस किया और उठ कर सोफे पर आ गया.
मैं सोफे पर बैठ गया, चाची मेरे सामने नंगी खड़ी थीं.
मैं उनके दोनों निप्पलों को बारी बारी से दांतों से काट-काटकर चूसने लगा … तो वे फिर से तड़प उठीं.
दोस्तो, आप सभी को मेरी चाची की चुदाई की सेक्स कहानी में कितना मजा आ रहा है, प्लीज मुझे जरूर बताएं.
मैं वादा करता हूँ कि इस चाची नॉन वेज़ स्टोरी के अगले भाग में आपको इस सेक्स कहानी का भरपूर मजा आएगा.
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चाची नॉन वेज़ स्टोरी का अगला भाग:
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