चाची को अपनी पर्सनल रखैल बनाया
(Desi Chachi Ki Chut Mari)
देसी चाची की चूत मारी मैंने. हम एक ही घर में रहते हैं. चाची का कमरा मेरे कमरे के सामने है. वे अपने कमरे में कपड़े बदलती थी तो उका दरवाजा थोड़ा खुला रहता था.
स्वागत है आप सभी का मेरी नई कहानी में।
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है और मैं कानपुर का रहने वाला हूँ।
ये कहानी मेरी और मेरी चाची के बीच हुई सेक्स की है।
मैं कानपुर से बिलॉन्ग करता हूँ और मेरी चाची का नाम श्रद्धा है।
दोस्तों, उनकी उम्र 38 साल है और उनका फिगर बिल्कुल काजोल की तरह है।
उनका फिगर मस्त है।
मेरी चाची की एक बेटी भी है जिसकी उम्र कम है।
मेरी चाची बिल्कुल पटाखा माल है।
उसे देखकर सबका लंड खड़ा हो जाएगा।
जो भी देखता है, उसे उसे चोदने का मन जरूर करता है।
ये देसी चाची की चूत मारी कहानी आज से 2 महीने पहले की है।
उस वक्त मेरे घर में मैं और मेरी चाची बिल्कुल अकेले थे।
मेरे घर में कुल सात लोग रहते हैं – मैं, मेरी माँ, पापा, दादी, चाचा, चाची और उनकी एक बेटी।
मेरी चाची जब भी मेरे कमरे में आतीं, मेरी नजर हमेशा उनके बूब्स पर रहती थी।
मैं हमेशा सोचता था कि मौका मिल जाए तो उन्हें जी भर के चोदूँ।
चाची भी कई बार नोटिस कर चुकी थीं कि मैं हमेशा उनकी बूब्स को ताड़ता रहता हूँ।
मैं हमेशा उनके बड़े-बड़े मम्मों को बड़े गौर से देखता था।
क्योंकि उनका कमरा मेरे कमरे के ठीक सामने था, जब भी वो सुबह नहा कर आतीं तो मैं अपने कमरे का दरवाजा हल्का खुला रखता।
इससे मुझे उनके कमरे का सब कुछ साफ-साफ दिखाई देता।
जब भी वो कपड़े बदलतीं, मैं उन्हें कपड़े बदलते हुए देखता।
उनके मस्त-मस्त बूब्स को ताड़ता।
कई बार मैंने उनके नाम की मुठ भी मारी थी।
क्योंकि मैं जॉइंट फैमिली में रहता था इसलिए मुझे उन्हें चोदने का मौक़ा नहीं मिल रहा था।
मैं हमेशा इसी मौके की तलाश में रहता था कि कब मेरा घर खाली हो और मैं मौके का फायदा उठा सकूँ।
जल्दी ही मुझे वो मौका मिल गया।
हमारे एक रिश्तेदार के यहाँ शादी थी, जिस पर पूरी फैमिली को जाना था।
घर में सिर्फ मैं और मेरी चाची ही रुकने वाले थे।
मैं मन ही मन बहुत खुश था।
मुझे मौका मिलने वाला था।
फिर वो रात आ गई जब मेरे घर में सभी लोग शादी में चले गए।
उस दिन बिल्कुल नॉर्मल दिन की तरह ही चल रहा था।
पूरा दिन मैं इंतजार करता रहा कि कब रात हो और कब मैं अपनी चाची का रस भोग सकूँ।
शाम होते ही मैं हल्का सा टहलने निकल गया और पास के मेडिकल स्टोर से तीन सेक्स की गोली ले आया।
शाम होते ही चाची ने कहा- आओ राहुल, खाना खा लेते हैं!”
मैंने कहा, “ठीक है!”
उन्होंने बताया कि सबको आने में सुबह हो जाएगी।
मैंने कहा, “ठीक है!”
और मन ही मन लड्डू फूटने लगे।
रात के 8:00 बज गए।
चाची ने खाना लगाया और हम दोनों साथ खाने बैठ गए।
मैंने बहाने से कहा, “अरे, मैं पानी लाना तो भूल ही गया!”
पानी लेने जैसे ही गया, मैंने सेक्स की टैबलेट उनकी सब्जी में मिला दी।
फिर हम दोनों ने साथ में खाना खाया।
मैंने कहा, “चाची, मैं थोड़ी देर यहीं बैठ जाता हूँ, फिर सोने चला जाऊँगा!”
उन्होंने कहा, “कोई नहीं, बैठे रहो, आराम से!”
हम बैठे-बैठे पिक्चर देखते रहे।
मैंने नोटिस किया कि चाची की आँखें धीरे-धीरे बंद हो रही हैं।
मैंने उन्हें हल्का-हल्का बुलाना शुरू किया लेकिन कोई जवाब नहीं।
फिर हल्के से हिलाकर देखा।
जब कन्फर्म हो गया कि वो पूरी तरह नींद में हैं, मैंने धीरे-धीरे उनका कमीज ऊपर करना शुरू किया।
फिर पेट को टच करना शुरू किया।
उनकी तरफ से कोई रिएक्शन न देखकर सूट उतार दिया।
अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा में थीं।
अगर वो उठ गईं तो दिक्कत हो जाएगी, इसलिए मैंने अपना मोबाइल सामने फिट कर दिया और रिकॉर्डिंग ऑन कर दी।
फिर उनके बूब्स को ब्रा से आजाद कर दिया।
उनके बड़े-बड़े बूब्स को धीरे-धीरे चूसने लगा, निप्पल्स को जीभ से चाटने लगा।
फिर धीरे-धीरे निप्पल्स चूसने लगा।
ये सब मैं मोबाइल में रिकॉर्ड कर रहा था।
फिर सलवार भी रिमूव कर दी।
अब वो सिर्फ पैंटी में थीं।
मैंने पैंटी के ऊपर से ही उनकी चूत को किस करना शुरू कर दिया।
साइड से पैंटी हटाकर चूत पर किस करने लगा।
धीरे-धीरे जीभ से चाटने लगा।
उनकी जाँघों को चाटने लगा।
फिर पैंटी हटाई और बिना देर किए अपना लंड उनकी चूत पर रखा, धीरे-धीरे अंदर डालने लगा।
धीरे-धीरे उनकी बॉडी में मूवमेंट होने लगा।
वो आँखें बंद ही रखे मुझे चाचा समझकर मेरी पीठ पर हाथ फेरने लगीं।
मैंने धीरे-धीरे लंड अंदर डालना शुरू किया और चोदने लगा।
उनके बूब्स दबाने लगा।
उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
मैंने स्पीड बढ़ा दी।
वो भी धीरे-धीरे पूरा मजा लेने लगीं।
फिर उनके मुँह से निकला- और चोदो… और चोदो!”
मैंने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी।
करीब 15 मिनट बाद मेरा होने वाला था।
मैंने उनकी चूत में ही सारा माल निकाल दिया।
उठकर मोबाइल में रिकॉर्डिंग सेव की और अपने कमरे में आकर सो गया।
अगली सुबह करीब 7:00 बजे चाची मेरे कमरे में आईं और बोलीं- राहुल, उठो! मुझे तुमसे कुछ बात करनी है!”
मैं बिल्कुल अनजान बनते हुए बोला, “हाँ बताओ, क्या बात करनी है?”
वो बोलीं, “कल तुम मेरे कमरे में क्या करके आए हो?”
मैंने कहा, “कुछ तो नहीं!”
वो हल्की मुस्कान के साथ बोलीं, “अभी मैं तुम्हारी मम्मी को बोलती हूँ, सबको बोलती हूँ कि तुमने कल मेरे साथ क्या किया!”
ये सुनते ही मेरे चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आ गई।
मैंने कहा, “आपको मजा नहीं आया क्या!”
इस पर उन्होंने मुझे गाल पर हल्का सा थप्पड़ मार दिया और वो मुस्कुराती हुई कमरे से बाहर चली गईं।
थोड़ी देर बाद वापस आईं और बोलीं- तुम मुझे यह मजा रोज दोगे. बदले में मुझसे तुम्हें क्या चाहिए?
मैंने कहा, “जैसा मैं कहूँ वैसा करो!”
वो बोलीं, “ठीक है!”
फिर मैंने कहा, “आज से जब भी मेरे कमरे में झाड़ू-पोछा लगाने या कोई भी काम करने आओगी, अपने बूब्स खोलकर आओगी। मुझे तुम्हारे बूब्स हमेशा देखने हैं!”
वो बोलीं, “ठीक है…”
मैंने कहा, “अभी अपने कपड़े उतारो!”
वो कपड़े उतारने लगीं।
मैंने कहा, “बैठो!”
वो बैठ गईं।
मैंने धीरे-धीरे उनके बूब्स दबाने शुरू किए।
निप्पल्स को मसलने लगा।
फिर उनकी पैंटी हटा दी और टाँगें फैलाईं और उनकी चूत पर मुँह रख दिया।
उनकी चूत को चाटने लगा।
धीरे-धीरे वो भी साथ देने लगीं और अपना हाथ मेरे सिर पर रखकर दबाने लगीं।
मैं समझ गया कि वो गरम हो चुकी हैं।
मैंने अपना लंड निकाला।
उन्होंने देखकर कहा- ये तो बहुत बड़ा है!”
मैंने कहा, “चूसो इसे!”
वो धीरे-धीरे मेरा लंड चूसने लगीं।
मेरा लंड और सख्त हो गया।
मैं उनकी चूत को उंगलियों से सहला रहा था, फिर उंगलियों से चोदने लगा।
वो बोलीं- राहुल… अब रहा नहीं जा रहा… अपनी लंड मेरी चूत में डालो!”
मैंने उन्हें और तड़पाया, फिर उनकी टाँगें कंधे पर रखीं।
लंड चूत पर सेट किया और एक जोरदार झटके में पूरा अंदर पेल दिया।
उनकी चीख निकल गई- मर गई रे! मर गई माँ! छोड़ दो मुझे… मुझे नहीं करना!”
मैंने एक न सुनी और जोर-जोर से धक्के देने लगा।
हर झटके के साथ वो चिल्लातीं- प्लीज राहुल!”
मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और चूतड़ पकड़कर ऊपर-नीचे करने लगा।
धीरे-धीरे उन्हें मजा आने लगा।
वो भी कमर हिलाने लगीं और मेरा पूरा लंड अंदर लेने लगीं।
फिर वो चिल्लाने लगीं- आ गया… आह आह आह… मज़ा आ गया राहुल! क्या मस्त चोदते हो! ऐसे ही चोदते रहो! फाड़ दो मेरी चूत को! बहुत दिनों से प्यासी है ये चूत… इतना बड़ा लंड आज तक नहीं लिया! ऐसे ही करते रहो… फाड़ दो… फाड़ दो! प्लीज ऐसे ही रोज चोदो! मुझे अपनी रखैल बना लो राहुल!”
मैं उनकी चूचियाँ काटने लगा।
पूरा कमरा पच-पच-पच की आवाज से गूँजने लगा।
धीरे-धीरे उनका दो बार पानी छूट गया।
मैंने कहा, “मेरा भी आने वाला है!”
वो बोलीं- मेरी चूत में ही डाल दो… बुझा दो मेरी प्यास!”
मैंने उन्हें 15 मिनट और चोदा और सारा माल उनकी चूत में छोड़ दिया।
फिर एक राउंड और देसी चाची की चूत मारी।
उन्हें दीवार से सटा कर खड़ा किया, एक टाँग उठाई और लंड चूत में सेट करके ताबड़तोड़ झटके देने शुरू कर दिए।
उनकी चूत से पानी जाँघों से होता हुआ पैरों तक बहने लगा।
वो चिल्लाती रहीं, मैं चोदता रहा और फिर सारा माल उनकी चूत में डाल दिया।
इतने में घर में चाचा का फोन आ गया कि वो लोग आधे घंटे में पहुँच रहे हैं।
हम दोनों जल्दी से अलग हुए और रेडी हो गए।
मैं और चाची साथ में नहाये।
उन्होंने मुझे प्रॉमिस लिया- जब भी मेरा मन होगा, तुम मुझे जरूर चोदोगे।
मैंने कहा- नेकी और पूछ पूछ!
अब भी जब-जब मौका मिलता है, मैं उन्हें जी भर के चोदता हूँ।
दोस्तो, कैसी लगी मेरी देसी चाची की चूत मारी कहानी?
आप लोग कमेंट करके जरूर बताइएगा।
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