सगी चाची की चुदाई करके प्यास बुझाई

(Hindi Xxx Desi Kahani)

हिंदी Xxx देसी कहानी में मैं चाची के पास रह कर पढ़ाई कर रहा था. चाचा फ़ौज में थे, कभी कभी आते थे. चाची ने कैसे मुझे पटाकर अपनी चूत में मेरा लंड लेकर अपनी वासना शांत की.

फ्रेंड्स, मेरा नाम दीपक है. मेरी उम्र 27 साल है.
मेरी हाइट 6 फीट है और मैं बहुत गोरा हूँ.

ये हिंदी Xxx देसी कहानी पूरी तरह सच्ची है और लगभग 5 साल पुरानी है.

उस वक्त मैं कॉम्पिटिशन की तैयारी के लिए अपनी चाची के घर रहता था.
चाची की उम्र तब करीब 28 साल थी और मैं 21 पार कर चुका था.

चाची के बूब्स ज्यादा बड़े नहीं थे, पर एकदम गोरे और मक्खन जैसे सॉफ्ट थे – बिल्कुल कैटरीना कैफ जैसे.
चाचा फोर्स में थे, इसलिए घर पर सिर्फ चाची और उनका एक छोटा बच्चा रहता था.

जब से चाची शादी के बाद घर आई हैं, वे मुझे तभी से बहुत पसंद थीं.
चाचा-चाची की उम्र में लगभग 8 साल का फर्क था, इसलिए विचारों में भी काफी अंतर था.

हालांकि चाचा फौजी थे तो मुझे हमेशा यही लगता था कि वे चाची को सही से रगड़ते होंगे.

लेकिन जब जब मैं चाची के दूध देखता था तो मुझे हल्की सी निराशा सी होती थी कि चाचा ने चाची के दूध क्यों बड़े नहीं कर पाए.
कई लोगों में शायद आदत होती है कि वे संभोग के दौरान स्त्री के चूचों से नहीं खेलते हैं. ऐसा मैंने सेक्स कहानियों में पढ़ा है.

जबकि मुझे लगता है कि स्त्री के दूध और उभरे हुए चूतड़ ही उसकी जवानी को सही से परिलक्षित करते हैं.

आजकल फैशनेबल कपड़ों में भी आप देखेंगे कि लड़कियां अपनी गांड और मम्मों को उभरा हुआ दिखाने के लिए पैड लगाती हैं ताकि उनकी जवानी और ज्यादा उभर कर दिखाई दे.

खैर … चाचा ने चाची के साथ सेक्स में क्या किया और क्या नहीं किया, इसका खुलासा तो मुझे उस वक्त चाची के मुँह से ही हुआ था जब मैं उनकी जवानी का भोग कर रहा था.

चूंकि चाचा बाहर रहते थे और मैं चाचा के घर पर रह कर पढ़ाई कर रहा था तो मेरा उनके साथ ज्यादा उठना बैठना होता था.

चाची को जब कभी भी सिर में दर्द होता था, तो वे दर्द की शिकायत मुझसे ही करती थीं और मैं उनके सर की मालिश कर देता था.

वे मुझे बहुत केयरिंग समझती थीं और मुझे तो चाची पसंद थी हीं.
मैं अक्सर जब भी उनके सर की मालिश करता था तो मुझे उनके गहरे गले वाले कुर्ते या टॉप में से उनके दूधिया मम्मों की घाटी देखने को जो मिल जाती थी.

वे भी शायद मेरी वासना भरी नजरों को समझती थीं लेकिन शायद वे यह सोच कर नजरअंदाज कर देती होंगी कि मैं अब जवान हो गया हूँ.

मालिश करने के बाद मुझे अक्सर मुठ मारने जाना पड़ता था.

यह देख कर चाची के होंठों पर एक गहरी छिपी हुई मुस्कान आ जाती थी जो मैं कभी देख ही न पाया.

वह तो उन्होंने मुझसे जिस्मानी संबंध बनाने के दौरान कहा था, तब मुझे मालूम हुआ था कि वे खुद ही मुझे सेड्यूस करती थीं.

एक दोपहर हम दोनों खाना आदि खा कर बेड पर लेटे थे और टीवी देख रहे थे.
कमरे में धीरे-धीरे आलस्य का प्रादुर्भाव होता जा रहा था. हम दोनों की आंखें मुंदने सी लगी थीं.

टीवी देखते-देखते नींद आने लगी, तो चाची ने कहा- टीवी बंद कर दो, अब सो जाते हैं.
मैंने टीवी बंद कर दिया और हम दोनों सो गए.

अचानक जब मेरी आंख खुली तो मैंने पाया कि मैंने चाची को कसकर हग कर रखा है; उनकी गर्म-गर्म सांसें मेरे गले पर लग रही थीं.

पहली बार किसी लड़की को इतने करीब से हग किया था तो दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था.
मुझे मज़ा इतना ज्यादा आ रहा था कि बयां नहीं कर सकता.

मुझे लगा कि चाची भी इस हग का पूरा मज़ा ले रही हैं क्योंकि उन्होंने कोई प्रतिरोध ही नहीं किया था.
हम दोनों ऐसे ही चुपचाप सोते रहे.

उसी रात हम दोनों फिर से एक साथ में बेड पर लेटे हुए थे.
चाची बहुत सारी बातें करने लगीं.

फिर अचानक मुझ पर पूरा भरोसा करती हुई बोलीं- दीपक … तुम्हारे चाचा जबरदस्ती सेक्स करते हैं … मना करो तो वे मेरे साथ जबरदस्ती भी करते हैं. मुझे रोमांस पसंद है, प्यार की बातें पसंद हैं … पर वे तो बस सीधे घुसेड़ देते हैं … न बात करते हैं, न पास बैठते हैं!

इतना कहते-कहते वे रोने लगीं.
उनका सिर मेरे कंधे पर था.

मैंने उन्हें चुप कराया.
वे फूट-फूट कर रोती हुई बोलीं- मुझे बस प्यार की ज़रूरत है दीपक!
मैं चुप रहा.

वे फिर से बोलीं- मुझे तुम्हारे गले लगकर रोना है!
मैंने कहा- ठीक है चाची!

वे मुझे ज़ोर से हग करके रोने लगीं.
उन्होंने मुझे इतना जोर से पकड़ा हुआ था कि लगा मानो आज सालों की प्यास बुझ रही हो.

उनके चूचों की गर्मी से मुझे भी उत्तेजना होने लगी थी और मेरा लंड फनफनाने लगा था.

दस मिनट बाद चाची रोते-रोते ही बोलीं- मुझे किस करना है!
मैंने हिचकते हुए कहा- लेकिन चाची … ये गलत है!

चाची- कुछ गलत नहीं है दीपक … प्लीज़!
मैंने कहा- ठीक है!

जैसे ही चाची ने अपने पतले-पतले गुलाबी होंठ मेरे होंठों पर रखे, मेरे पूरे बदन में बिजली-सी दौड़ गई.
मैंने भी उन्हें कसकर जकड़ लिया और उनके रसीले होंठ चूसने लगा.

इतना मज़ा आ रहा था कि मैंने दस मिनट तक उन्हें छोड़ा ही नहीं.
आखिरकार चाची ने जबरदस्ती मुझे अलग किया.

फिर मैंने चाची के बूब्स दबाना शुरू कर दिया.
वे बुरी तरह वासना की आग में जल रही थीं.

मैंने उनके लोअर में हाथ डाला, फिर धीरे-धीरे पैंटी के अन्दर … ओह्ह गॉड कितना मज़ा आया, बता ही नहीं सकता.

उनकी पूरी पैंटी भीगी हुई थी, चूत रस से लबालब … मलाई जैसी कोमल चुत महसूस हो रही थी.

मैंने धीरे-धीरे उंगली चूत के अन्दर डालनी शुरू की.
हम दोनों को जो आनन्द प्राप्त हो रहा था, उसे लिखने के लिए मेरे पास शब्द ही नहीं हैं.

बहुत देर तक चुत में फिंगरिंग करने के बाद चाची ने अपना लोअर-पैंटी उतार दी और बोलीं- अब और खुल कर करो!
वे पागल हो रही थीं.

मैं उनके ऊपर लेट गया था.
तभी मैंने अपना 6 इंच का मोटा लंड निकाला और जैसे ही चूत पर रखा, एक अलग ही स्वर्गिक अहसास हुआ.
चिकना-चिकना, गर्म-गर्म!

मुझे लगा कि सपना सच हो गया.

बस मैंने एक झटके में सारा माल उनकी चूत पर निकाल दिया और उनसे अलग होकर चुपचाप लेट गया.

चाची को गुस्सा आ गया.
वे मुझे मारने लगीं.

उन पर वासना का भूत पूरी तरह सवार था
वे अपनी चुत चुदवाने के लिए तड़प रही थीं और बेकरार थीं.
इधर मैं झड़ गया था.

मैंने कहा- चाची, ये गलत है.
वे गाली देने लगीं- मादरचोद चुत में उंगली करना गलत नहीं था! यदि सही से नहीं किया तो मैं किसी बाहर वाले से चुद जाऊंगी!

मैं कुछ नहीं बोला और उनके बाजू से उठ कर दूसरे बिस्तर पर जाकर सो गया.

अगले दिन फिर से हम दोनों बेड पर आ गए और प्यार करने लगे.
चुम्मा-चाटी शुरू हुई.

मैंने सोचा कि अगर आज मैं इन्हें नहीं चोदूँगा तो कोई और चोद लेगा.
बस मैंने मन बना लिया.
मैं उठ गया और कमरा बंद करके वापस अपनी रसीली चाची पर टूट पड़ा.

पांच मिनट ज़ोरदार किस करने के बाद मैंने उनके बूब्स चूसने शुरू किए.
चाची आज मस्ती से अपने दूध खुद अपने हाथ से पकड़ पकड़ कर मुझसे चुसवा रही थीं.

दूध चूसने के बाद मैं धीरे-धीरे नीचे को सरकने लगा.
जैसे ही मैंने उनकी रसीली चूत पर होंठ रखे, चाची बिन पानी मछली की तरह तड़पने लगीं और झड़ गईं.

मैंने उनकी चुत से निकला सारा रस चाट लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूत चाटने लगा.
वे मेरा सिर अपनी छोटी-सी टाइट चूत पर दबाने लगीं.

ज़िंदगी में पहली बार ऐसा मज़ा मिल रहा था.

तब मैंने अपना लंड निकाला और धीरे-से उनकी भीगी चूत की फाँकों में रगड़ना शुरू कर दिया.
चाची ने टांगें पूरी तरह से खोल दीं और बोलीं- पेल दो!

मैंने डालना शुरू कर दिया, पर मोटा लवड़ा संकरी चुत में नहीं घुस पा रहा था.

चाची बोलीं- यह ऐसे नहीं जाएगा दीपक … तुम्हारा लंड तुम्हारे चाचा के लंड से बहुत बड़ा है!

मैंने उनकी एक न सुनी और धीरे-धीरे अन्दर डालता गया.
वह अनुभूति आज भी याद है … कितनी टाइट चूत थी उनकी. उनका ब/च्चा भी ऑपरेशन से हुआ था, तो चुत ढीली ही नहीं हो पाई थी.

चाचा का लंड छोटा था और 3 महीने से चुदाई नहीं हुई थी.
कुछ देर के दर्द के बाद उनको अच्छा लगने लगा.

फिर जैसे ही मैंने चुदाई शुरू की, चाची मेरे लौड़े से चुदाई के मज़े लेने लगीं.
वे धीरे-धीरे मस्ती से अपनी गांड उठाने लगीं.

कुछ देर बाद उन्होंने मुझे कसकर जकड़ लिया और आह आह करती हुई झड़ गईं.

थोड़ी देर बाद मैं भी झड़ गया.
मैंने लंड चुत से खींच कर सारा माल हाथ में निकाल लिया था.

झड़ने के बाद मैं उनके ऊपर ही लेटा रहा.

उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता, दिन हो या रात, हम दोनों लगभग रोज़ चुदाई कर लेते थे.

अब तो मेरी जॉब लग गई है तो मैं बाहर चला गया हूँ.
लेकिन आज भी जब मैं उनके घर जाता हूँ, तो उन्हें 3-4 बार तो ज़रूर ही चोद देता हूँ.

दोस्तो, ये सेक्स कहानी पूरी तरह सच्ची है. अब तक मैं 4 लड़कियों को चोद चुका हूँ.

आपको मेरी हिंदी Xxx देसी कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
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