पड़ोसन आंटी को ट्रेन में चोदकर रखैल बनाया
(Aunty Porn Story)
आंटी पोर्न स्टोरी में मेरे पड़ोस की एक आंटी अपने पति से लड़ कर हमारे घर आ गयी. एक दिन आंटी को लम्बी ट्रेन यात्रा पर जाना था. वे मुझे अपने साथ ले गयी.
मेरा नाम सौरभ है और मैं नागपुर का रहने वाला हूँ.
मैं 25 साल का एक लड़का हूँ.
मेरी काठी कुछ छोटी है, मेरा कद 5 फुट है.
मेरा लंड सामान्य है पर यह किसी भी औरत को पूर्णरूप से संतुष्ट कर सकता है.
आंटी पोर्न स्टोरी में कुछ समय पहले हमारे घर के बगल में एक औरत का अपने पति के साथ बहुत झगड़ा हो रहा था.
झगड़े के बाद उसके पति ने उसे घर से बाहर निकाल दिया.
वह औरत अपना दुखड़ा सुनाने हमारे घर आई.
मेरी दादी उसकी बातें सुन रही थीं.
दो दिनों तक वह औरत हमारे घर पर ही रुकी.
तीसरे दिन उसका पति हमारे घर आया.
दोनों फिर से झगड़े के मूड में आ गए थे, तभी मेरी दादी ने दोनों को समझाया.
इसके बाद कुछ दिनों तक वे दोनों एक साथ रहने लगे.
लेकिन करीब दो महीने बाद उनकी फिर से अनबन शुरू हो गई.
इस बार तो झगड़ा कुछ ज्यादा ही बढ़ गया.
मैंने आपको उस औरत का नाम अभी नहीं बताया था पर अब यह बताना जरूरी है.
उसका नाम टीना था.
उसका कद छोटा था और फिगर भी कोई खास नहीं था लेकिन दिखने में वह सुंदर थी.
मैं उन्हें आंटी कहता था.
टीना आंटी और मेरी दादी की काफी बनती थी.
मेरी दादी को उस बेचारी टीना आंटी पर दया आ गई तो उन्होंने उसे फिर से हमारे घर में रुकने को कहा.
अब टीना आंटी दिन भर घर में रहकर कुछ घरेलू कामों में दादी का हाथ बटाने लगी थीं.
एक दिन उन्हें कुछ काम से शहर से बाहर जाना था लेकिन उनके पास सामान ज्यादा होने की वजह से उन्होंने दादी से मेरी सिफारिश की कि मुझे उसके साथ भेज दें.
दादी ने कहा- ठीक है … वैसे भी सौरभ दिन भर पढ़ाई ही करता है … इसी बहाने वह तेरे साथ थोड़ा घूम फिर आएगा!
अब दादी आईं तो उन्होंने मुझसे टीना आंटी के साथ उनके गांव कुछ सामान छोड़ने जाने को कहा.
मैंने कहा- ठीक है. सुबह चला जाऊंगा.
आंटी का गांव वैसे ज्यादा दूर नहीं था.
सुबह उठकर मैं तैयार हुआ और टीना आंटी के साथ रेलवे स्टेशन के लिए निकल पड़ा.
उन्होंने वाराणसी के लिए दो टिकट लिए और हम दोनों प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आने का इंतज़ार करने लगे.
ट्रेन काफी लेट थी.
सुबह 10 बजे की ट्रेन दोपहर 2 बजे आई.
हमने बिना रिजर्वेशन वाला टिकट लिया था इसलिए हमें कोई सीट नहीं मिली.
फिर किस्मत से एक सीट खाली थी, शायद जिसकी यह सीट थी, वह आया ही नहीं.
ढाई बजे ट्रेन चल पड़ी.
मैं फोन में एक फिल्म देख रहा था.
फिर मैंने देखा कि टीना आंटी भी उसे देख रही थीं.
फिल्म खत्म होने के बाद मैं ट्रेन में इधर-उधर घूमने लगा.
रात हुई तो हमने खाना खाया, थोड़ी इधर-उधर की बातें कीं और फिर सो गए.
एक ही सीट थी तो वे खिड़की की तरफ सिर रखकर सोईं और मैं उनके पैरों की तरफ सिर रखकर सो गया.
रात के करीब एक बजे मुझे पेशाब लगी.
मैं टॉयलेट की ओर निकला ही था कि टीना आंटी भी उठ गईं और बोलीं- मुझे भी आना है!
रात का समय था, डिब्बे की लाइटें भी धीमी थीं और उन्हें डर भी लग रहा था.
उन्होंने बताया- यह पहली बार है जब मैं अकेली जा रही हूँ!
मैंने हंसते हुए कहा- आप अकेली थोड़े ना हैं, मैं भी तो अकेला हूँ.
फिर हम दोनों मुस्कुराते हुए वापस सोने चले गए.
उस दिन कुछ नहीं हुआ और मैं भी उनके बारे में कुछ गलत नहीं सोच रहा था.
लेकिन सोते वक्त कुछ-कुछ हो रहा था.
हम दोनों गांव पहुंचे.
मैं उसी दिन वापस निकलने वाला था लेकिन टीना आंटी ने रोका और बोलीं- इतनी दूर आया है, थोड़ा घूम-फिर जा!
मैंने तपाक से कहा- अकेले क्या घूमना?
फिर उन्होंने कहा- शाम को साथ चलेंगे घूमने!
मैं दो दिन तक उनके गांव में रुका.
अगले दिन मैंने फिर से स्टेशन जाकर दो टिकट लिए.
इस बार मैंने स्लीपर क्लास में रिजर्वेशन न मिलने के कारण सेकंड एसी के टिकट ले लिए थे क्योंकि बिना रिजर्वेशन के जाने में बड़ी दिक्कत होती है.
हालांकि उस वक्त तक मैंने यह बिल्कुल भी नहीं सोचा था कि आज की रात आंटी की चुदाई की रात साबित होगी.
दरअसल हुआ यह कि जिस ट्रेन में मैंने रिजर्वेशन करवाया था, वह कोई वीकली ट्रेन थी और लगभग पैक ही जाती थी.
जब उस दिन चार्ट बना तो मुझे मैसेज आया कि मेरा टिकट ऑटो अपग्रेड होकर फर्स्ट एसी के एक ऐसे कूपे में हो गया जिसमें सिर्फ दो ही बर्थ होती हैं.
मैंने मोबाइल में अपने मैसेज को दो तीन बार सही से जांचा तो तबीयत खुश हो गई.
मुझे खुश होता देख कर आंटी ने पूछा कि किसका मैसेज आया है.
मैंने कहा- अपनी सीटें ऑटो अपग्रेड होकर फर्स्ट एसी में हो गई हैं.
वे चौंक कर बोलीं- फर्स्ट एसी में सीट बुक क्यों करवा लीं. अब हम लोग इतना पैसा किधर से भरेंगे?
मैंने चाची के गाल पर हाथ फेरते हुए कहा- अरे आंटी, यह फ्री में मिल गई हैं. अपने मजे हो गए हैं.
उनकी कुछ समझ में नहीं आया.
अब हम ट्रेन आने का इंतजार करने लगे थे.
ट्रेन आने के बाद हम दोनों फर्स्ट एसी के दो बर्थ वाले कूपे में अपनी-अपनी सीट पर बैठ गए.
टीना आंटी कुछ उदास दिख रही थीं.
मैंने पूछा- क्या हुआ आंटी? आप खुश होने की जगह उदास क्यों हैं?
तब उन्होंने मुझे अपनी आपबीती सुनाई.
वे रोने लगीं.
मैंने उन्हें चुप कराने के लिए उनकी बगल में बैठकर उनकी पीठ सहलाई.
तभी वे मुझसे लिपट गईं और और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगीं.
थोड़ी देर बाद वे सामान्य हुईं.
हमने खाना ऑर्डर किया, खाना खाया और फिर सो गए.
रात में मुझे ठंड लग रही थी और मैं ठंड से कांप रहा था.
ठंड के कारण मैं कुड़कुड़ा रहा था.
शायद उन्होंने मेरी आवाज़ सुन ली थी.
पहले दिन की तरह वे सोने लगीं, लेकिन मेरी ठंड कम होने का नाम ही नहीं ले रही थी.
फिर वे मुझसे लिपट कर सोने लगीं.
मेरा लंड उनकी गांड में चुभ रहा था.
चूंकि मैं ठंड से कांप रहा था, इसलिए उन्होंने कुछ नहीं कहा और सोती रहीं.
लेकिन अब मुझे नींद नहीं आ रही थी.
मेरा लंड उनकी गांड से चिपक गया था और अन्दर जाने के लिए बेताब हो रहा था.
थोड़ी देर बाद मुझे अपने लंड पर कुछ गीलापन महसूस हुआ.
मैं समझ गया कि लोहा गर्म हो गया है.
मैंने और ज्यादा ठंड का नाटक किया और उनसे और टाइट लिपट कर सोने लगा.
मैंने इतना कसकर पकड़ा कि मुझे पता ही नहीं चला कि उनकी चूची मेरे हाथ में दब गई थी.
उनके मुँह से ‘आ …ह …’ की आवाज़ निकली.
अब आंटी की वासना भी जाग चुकी थी.
वे मेरी तरफ मुँह करके लिपट कर सोने लगीं.
मेरे होंठ उनके होंठों से जा भिड़े और हमने एक लंबी, गहरी किस की.
मेरा खड़ा लंड उन्हें अपनी चुत में चुभ रहा था, तो उन्होंने लंड को मेरे लोअर से बाहर निकाला और हाथ में लेकर आगे-पीछे करने लगीं.
मैंने भी देर न करते हुए उनके सारे कपड़े उतारने शुरू कर दिए.
क्या कमाल का फिगर था आंटी का.
बिल्कुल तमन्ना भाटिया जैसा … एकदम स्लिम! चीकू सरीखे बूब्स … पतली कमर और खरबूजे जैसी गोल गांड.
अब तक तो आप अंदाज़ा लगा ही चुके होंगे!
मैंने बारी-बारी से उनके दोनों चूचे चूस-चूस कर लाल कर दिए और उनकी चूत पर एक करारा किस किया, जिससे वे सिहर उठीं.
मेरा खड़ा लंड अब दर्द करने लगा था.
मैंने सीधे उनकी चूत को पोजीशन में लिया और अपना कड़क लंड पेल दिया.
आंटी की चूत थोड़ी छोटी और काफी कसी हुई थी.
शायद टीना आंटी के पति ने उनकी चूत को कई महीनों से नहीं चोदा था.
जैसे ही मैंने लंड डाला, वे छटपटाने लगीं.
मैं कुछ देर शांत रहा और उनके ऊपर लेटा रहा.
जब उनका दर्द कम हुआ तो उन्होंने गांड हिलानी शुरू कर दी.
चुदाई चालू हो गई.
कुछ ही देर में मेरा लंड आंटी की चुत में सरपट दौड़ने लगा.
अब मैंने उनसे कहा- आप ऊपर हो जाओ!
तो वे मेरे ऊपर आकर लंड की सवारी करने लगीं.
उनके हिलते हुए चूचे मुझे बहुत आकर्षित कर रहे थे जिससे मेरा जोश और बढ़ गया.
फिर मैंने चलती ट्रेन में उन्हें गोद में उठाकर चोदना शुरू कर दिया.
आंटी का पानी निकलने वाला था तो मैंने उन्हें सीट पर बिठा दिया और टांगें उठा कर जमकर चोदने लगा.
उनकी चूत इतनी गर्म और कसी हुई थी कि मैं भी ज्यादा देर टिक न सका.
करीब पंद्रह झटकों के बाद मैं उसकी चूत में ही झड़ गया.
चुदाई के बाद वे बहुत शर्मा रही थीं जैसे सुहागरात के दिन दुल्हन शर्माती है … वैसे ही!
उनकी इस अदा ने मुझे फिर से जोश दिला दिया.
इस बार मैंने उन्हें संभलने का मौका भी नहीं दिया.
वे बस मुँह से ‘आ … उई … माँ …’ की आवाज़ें निकाल रही थीं.
अचानक से मैंने आंटी की गांड में लंड डालने की इच्छा ज़ाहिर की तो वे मना करने लगीं और बोलीं- फिर कभी!
मैंने भी कोई विरोध नहीं किया और चुत की चुदाई चालू रखी.
चुदते हुए वे बहुत खुश दिख रही थीं.
मज़ाक में उन्होंने कहा- मेरा पति भी मुझे इस तरह नहीं चोद पाता!
मैंने जवाब दिया- आज से इस चूत पर इस लंड का राज है! अब आपको लंड की कोई परेशानी नहीं होगी!
इस पर वे हंस पड़ीं और ‘साले हरामी’ की गाली देती हुई झड़ गईं.
उनकी चुत का गर्म पानी मेरे लंड में और उत्तेजना भर गया.
मैंने उन्हें खड़ा करके उनकी गांड के पीछे से लंड डालकर चोदना शुरू कर दिया.
ट्रेन की रफ्तार और हिचकोले का भी अपना अलग मज़ा था.
करीब बीस मिनट बाद मैं फिर से अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया और उनकी चूत में सारा माल झाड़ दिया.
जब हम दोनों अलग हुए तो मैंने देखा कि उनकी नंगी चूत से माल अभी भी टपक रहा था.
फिर हम दोनों ने कपड़े पहने और टॉयलेट की तरफ चल पड़े.
टॉयलेट में जाकर मैंने आंटी की चूत साफ की और उन्होंने मेरा लंड साफ किया.
फिर हम दोनों अपनी सीट पर वापस आकर बैठ गए.
जब तक हमारा स्टेशन नहीं आया, हमने दो और बार चुदाई की जिससे आंटी की चूत सूज सी गई थी.
अब वे अकेली ही रूम लेकर रहने लगी हैं.
यह रूम भी मेरे परिचितों का है जो यहां नहीं रहते हैं.
इसी लिए मेरे उनसे मिलने जाने पर किसी को शक भी नहीं होता है.
मैंने उनके लिए काम ढूंढ दिया.
जब वे शाम को काम से घर वापस आती हैं, तो मैं रात में जाकर आंटी को चोद देता हूं.
जब मैं आने का मैसेज देता हूं, तो घर में आंटी नंगी ही होती हैं.
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