छोटी चाची के साथ सेक्स का मजा- 2
(Garam Chachi Ki Chut Me Lund)
गरम चाची की चूत में लंड डालने का मजा मुझे मिला. मैं बड़ी चाची को चोद चुका था पर एक रात मैंने छोटी चाची को पकड़ लिया था बड़ी चाची समझ कर.
दोस्तो, मैं अमन वर्मा एक बार पुनः अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग के साथ हाजिर हूँ.
कहानी के पिछले भाग
छोटी चाची के साथ सेक्स की शुरुआत
में अब तक आपको पढ़ने मिला था कि मैं चाची को चुदाई के लिए गर्म करने लगा था.
अब आगे गरम चाची की चूत में लंड डालने का मजा:
चाची ने मेरे पैंट को नीचे सरका दिया और मेरे लंड को घूरने लगीं.
‘ये क्या है … इतना बड़ा!’
‘अच्छा है ना?’
‘शानदार … इतना बड़ा और मोटा लंड तो मेरी जान ले लेगा!’
‘जान नहीं लेनी है चाची, बस प्यार करना है. लेनी तो आपकी मुनिया की है!’
चाची शर्मा गईं.
मैंने चाची का हाथ उठा कर अपने लंड पर रख दिया.
चाची धीरे धीरे मेरे लंड को सहलाने लगीं और प्यार से आगे पीछे करने लगीं.
मेरी उत्तेजना बढ़ने लगी.
मैंने चाची की तरफ प्यार से रिक्वेस्ट वाली नजर से देखा.
चाची समझ गईं कि मैं क्या चाहता हूं.
चाची ने मुझे लिटा दिया और खुद मेरी दोनों टांगों को फैला कर बीच में बैठ गईं.
मेरा लंड सीधा मीनार की तरह खड़ा था.
चाची ने मेरे लंड को प्यार से चूमा और फिर धीरे से अपने मुँह में भर लिया.
उसके बाद चाची ने लंड की चुसाई शुरू कर दी.
मैं आनन्द की सीमा पार कर चुका था.
उनके गुलाबी होंठों का घर्षण अपने लंड पर पाकर मैं आनन्द में झूम रहा था.
चाची भी पूरे लंड को अपने गले तक उतार ले रही थीं.
मेरे लंड में तेज सनसनाहट होने लगी थी और मुझे लगा कि मैं शायद झड़ जाऊंगा.
मैंने चाची के मुँह से लंड को निकालने की सोची.
मगर चाची की मेरी जांघों पर पकड़ मजबूत थी, तो मैं ऐसा कर नहीं पाया.
अगले कुछ ही पलों में मेरे लंड ने अपना लावा उगल दिया और वह पूरा चाची के मुँह में समा गया.
चाची ने भी लंड को मुँह में भर कर रखा था और वीर्य की एक एक बूंद चूस कर निचोड़ लिया.
मेरी उखड़ती सांसें को मैं धीरे धीरे संभाल रहा था.
तभी चाची मुझसे अलग हुईं और उन्होंने मेरे पैंट से मेरे लंड के आस-पास बहते वीर्य को पौंछ दिया.
उसके बाद वे बाथरूम चली गईं.
वापस आकर मेरे बगल में लेट गईं.
चाची मेरे बगल में लेट कर मेरे बालों में हाथ फेरने लगीं.
हम दोनों बिल्कुल निर्वस्त्र थे, बस चाची ने अपनी पैंटी पहन रखी थी.
मैंने चाची को थैंक्यू बोला.
अब उन्हें मजा देने की बारी मेरी थी तो मैंने धीरे धीरे चाची के स्तनों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया.
चाची के स्तन वाकयी एक अधपके फल की तरह थे … सुडौल, स्वादिष्ट, तने हुए, कसे हुए और थोड़े नर्म.
उनका अग्र भाग सुर्ख भूरे और गुलाबी रंग की मिश्रित आभा लिए नुकीले अंदाज में अपने यौवन का परचम लहरा रहा था.
मैंने उन यौवन कलशों को बारी बारी से चूमना, चूसना और प्यार से काटना शुरू कर दिया था.
अभी तक मैंने चाची के स्वर्ग द्वार के दर्शन नहीं किए थे.
चाची मस्ती में चूर हो रही थीं.
मैंने चाची की पैंटी की डोर खोल दी.
चाची ने मॉडर्न बिकनी टाइप पैंटी पहन रखी थी.
कुछ ही सेकेंड में पैंटी जिस्म से अलग हो गई.
चाची थोड़ा मुस्कुराईं.
मेरी नजर जैसे ही उनकी चूत पर पड़ी, मेरा लंड सलामी देने लगा.
छोटी से गोरी चूत, बिना बालों वाली, एक छोटा सा चीरा लगा हुआ था.
बहुत छोटा सा … मैंने अपने हाथ से सहलाया तो उनके बदन में सिहरन फैल गई.
फिर चूत की दोनों फांकों को अलग किया तो अन्दर गुलाबी रंग की आभा लिए चूत की दीवारें दिखने लगीं.
चूत बिल्कुल कमसिन लड़की की तरह लग रही थी, जो चुदी ही नहीं हो.
मैंने अपनी एक उंगली चूत के अन्दर डाली और अन्दर का मुयायना करने लगा.
चाची अपनी मुट्ठी भींच कर आंखें बंद करने लगी थीं.
तभी मैंने दूसरी उंगली भी अन्दर डाल दी.
चाची ने अपनी कमर को ऊपर की ओर उठा दिया.
मैंने धीरे धीरे उंगली अन्दर फिरानी शुरू कर दी.
अब तक तो मेरा मन चूत को देख कर दीवाना हो गया था.
मैंने आगे बढ़ कर चूत को चूम लिया, फिर उस पर मुँह टिका दिया.
अपनी जीभ के अग्र नुकीले हिस्से से चूत में अन्दर जाने का रास्ता बना लिया.
मेरी जीभ चूत की अन्दर की दीवारों को महसूस करने लगी.
अब मैंने जीभ को अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
धीरे धीरे चूत पनियाने लगी.
मैं अपनी जीभ से अन्दर के पानी को चाटने लगा.
धीरे धीरे चूत पानी छोड़ती जाती थी और मैं जीभ से चाटता रहा था.
अब मैंने जीभ को तेजी से अन्दर बाहर करने लगा और थोड़ी देर में चाची ने झटका खाया और झड़ गईं.
मैंने चूत को चाटना जारी रखा था.
झड़ने के बाद चाची शांत हो गई थीं.
मैं चूत के रस की एक एक बूंद चूस कर पी गया.
चाची की चूत का नमकीन पानी बेहद नशीला था.
मैं धीरे धीरे उनके केले के तने जैसी चिकनी जांघों को सहलाने लगा.
थोड़ी देर में चाची फिर से गर्म होने लगीं.
उनके चूचे फिर से तन गए और मुझे निमंत्रण देने लगे थे.
मैंने अपने दोनों हाथ उनके स्तनों पर टिका दिए और धीरे धीरे मसलने लगा.
थोड़ी देर के बाद चाची मुझे ऊपर की ओर खींचने लगीं.
अब तक मेरा लंड भी पूरा तैयार था.
मैं ऊपर आया और चाची के होंठों पर अपने होंठ टिका दिए.
चाची ने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया.
फिर उन्होंने अपने एक हाथ से मेरे लंड को सहलाते हुए अपनी चूत पर टिका दिया.
‘थोड़ा आराम से करना, प्लीज!’
मैंने अपने लंड पर धीरे से दवाब बनाया ताकि वो अन्दर जाए मगर इस कसी हुई चूत में लंड अन्दर जाने को तैयार नहीं हुआ.
मैं थोड़ा उठा, गीली चूत की फांकों को थोड़ा फैलाया और उसके बीच लंड फंसाया.
मैंने थोड़े जोर से धक्का लगाया, लंड थोड़ा अन्दर गया.
मैंने फिर से जोर लगाया लंड थोड़ा और अन्दर गया.
चाची चिहुंक पड़ीं.
मैंने फौरन एक जोर का धक्का लगाया और रुक गया.
चाची दर्द से चीख पड़ीं- बस … अब और अन्दर मत डालना … तुम्हारा इससे आगे नहीं जाएगा!
‘क्या? अभी तो आधा भी नहीं गया है!’
‘बहुत दर्द हो रहा है, अब अन्दर मत पेलना!’
‘अभी आपका दर्द भगा देते हैं!’
मैंने चाची के स्तनों को चूमना और चूसना शुरू कर दिया, उनकी गर्दन, कान की लौ को प्यार से चूमा.
मैंने चाची को गर्म कर दिया था.
वे शांत हो गई तो मैंने फिर से एक और जोर का झटका लगा दिया.
चाची दर्द से चीखने लगीं.
इस बार मैं नहीं रुका और दूसरे झटके के लिए तैयार हुआ.
चाची पूरी ताकत से मुझे धकेल रही थीं और खुद को अलग करने की कोशिश कर रही थीं.
मगर मैंने चाची के दोनों हाथों को पकड़ा और पूरी ताकत से लंड अन्दर पेल दिया.
‘आह, मर गई …’ चाची बहुत तेज चीखने लगीं.
घर में कोई नहीं था इसलिए मैं बच गया.
‘कितने बेदर्द हो तुम, मेरे साथ जबरदस्ती कर रहे हो!’
‘सॉरी चाची!’
‘क्या सॉरी … इतना दर्द हो रहा है. जल्दी बाहर निकालो इसे! ऐसा लग रहा है कि कोई गर्म लोहा मेरे अन्दर डाल दिया है तुमने!’
चाची रुआंसी हो गई थीं. उनके आंसू निकल ही गए.
‘सॉरी चाची … मैं थोड़ा ज्यादा जोश में आ गया था. आप इतनी खूबसूरत हो कि मैं सुध-बुध खो बैठा हूं!’
मैं चाची को धीरे धीरे नॉर्मल करने की कोशिश कर रहा था.
अगर मैं लंड बाहर निकाल देता तो चाची फिर मेरे हाथ नहीं लगतीं इसलिए मैं लंड बाहर निकाले बिना ही उनको धीरे धीरे प्यार से सहलाता रहा.
चाची भी अच्छे से जानती थीं कि इस सिचुएशन में चुदाई तो तय है.
थोड़ी देर में चाची नॉर्मल हो गईं.
मैं उनके स्तनों को सहलाता हुआ धीरे धीरे काटने लगा.
वे पुनः उत्तेजित हो गईं और उन्होंने अपनी कमर को ऊपर की ओर थोड़ा सा झटका दे दिया.
मैं समझ गया कि वे अब चुदाई चाहती हैं.
मैंने अपना लंड धीरे से बाहर की ओर खींचा मगर चूत से पूरा बाहर नहीं निकाला.
मेरा सुपारा अभी चूत में ही था.
मैंने धीरे से लंड अन्दर पेला.
चाची फिर चीखीं, मगर मैंने धीरे धीरे अपनी जगह बना ली.
अब मेरे धक्कों की रफ्तार बढ़ने लगी और चाची भी धक्कों पर झूमने लगीं.
थोड़ी देर में मुझे लगा कि शायद अब मैं झड़ जाऊंगा तो मैंने धक्के रोक दिए.
मैं तो इस खेल का खिलाड़ी बन चुका था.
चाची को मेरे रुकना भाया नहीं क्योंकि वे आनन्द चाहती थीं.
मुझे चाची के जिस्म को भोगना था.
पता नहीं दुबारा मिले ना मिले.
अब मैंने चाची को उठाया और खुद लेट गया.
फिर चाची को अपने लंड की सवारी करने का इशारा किया.
चाची थोड़ी झिझक रही थीं मगर मैंने उनको अपने लंड पर चूत सैट करके बैठने को कहा.
फिर धीरे धीरे वे लौड़े पर ऊपर नीचे होने लगीं.
मैं आनन्द में डूब गया था.
चाची की नजरों से नजरें मिला कर चोदने का मजा अलग ही था.
उनकी पतली कमर को मैंने दोनों हाथों से थाम लिया था और चाची की लय से लय मिलाकर चुदाई कर रहा था.
थोड़ी देर में चाची थक गईं और उन्होंने मुझसे पोज चेंज करने को कहा.
मैंने इस बार चाची को घोड़ी बना दिया और पीछे से लंड उनकी चूत में उतार दिया.
चाची के दूधिया गोरे नितंब बेहद शानदार लग रहे थे.
मेरा लंड उनकी चूत में पूरी तरह से उतर गया था और चुदाई चल रही थी.
चाची हर धक्के पर सिसक रही थीं और मुझे उनका यह सिसकना उत्तेजित कर रहा था.
मेरे धक्के बीच बीच में जोर के होने लगते थे, वैसे भी इस पोज में लंड सबसे अन्दर तक पहुंच पाता है.
मेरे जोर के धक्के से चाची अपने कंधे को ऊपर की ओर उठाने लगती थीं.
कुछ देर में फिर से पोज चेंज करने का वक्त आ गया था.
अब हम सीधा मिशनरी पोज में आ गए.
चाची सीधी होकर बेड पर लेट गईं और उन्होंने अपनी दोनों टांगों को फैला दिया ताकि मैं बीच में आ सकूं.
मैंने भी एक तकिया उनकी कमर के नीचे लगाया ताकि उनकी चूत मेरे और करीब आ जाए.
दूसरा तकिया उनके सर के नीचे और एक तकिया उनके सर के पीछे और बेड के कॉर्नर के बीच में लगाया.
अब पूरा कयामत से भरा हुआ उनका जिस्म मेरी पहुंच में था.
मैंने लंड को चूत में पेला और उनकी दोनों जांघों को अपनी जांघों पर रखा.
गरम चाची की चूत में लंड डाल कर मैंने पूरी ताकत से धक्का लगाया.
चाची ने मुँह से अभी भी जोर की आह निकली.
उनकी गीली चूत में फिसलता हुआ लंड बच्चेदानी से जा टकराया था.
मैंने चाची की चीख की परवाह किए बिना फिर से लंड को बाहर निकाला और फिर से जोर का धक्का लगा दिया.
चाची फिर से चीख पड़ीं … मगर मैं रुकने के मूड में नहीं था.
चाची ने मुझसे धीरे से बोला- बेटा थोड़ा धीरे से करो ना!
फिर मैंने धक्के की ताकत को कम किया और चुदाई की स्पीड को बढ़ा दिया.
चाची अब ताल से ताल मिलाने लगीं.
मेरे धक्कों के साथ साथ उनकी कमर का मूवमेंट मस्त हो गया था तो अब फिर से लंड बच्चेदानी तक पहुंचने लगा था.
‘चाची, आई लव यू!’
‘आई लव यू टू, अमन बेटा!
‘आप बहुत प्यारी हो!’
‘तुम भी बहुत अच्छे हो!’
धक्के की स्पीड वैसे ही जारी थी.
मैं चाची को स्मूच करने लगा था तो कभी उनके स्तन को चूसने लगा था.
थोड़ी देर में चाची ने मुझे कस कर पकड़ लिया.
मैं समझ गया कि वो अब झड़ने वाली हैं. मैंने अपने धक्के बढ़ा दिए.
‘आह जल्दी जल्दी करो … मेरा हो गया!’ चाची बोल पड़ीं.
मैंने धक्के तेज कर दिए थे.
तभी चाची ने अपने बदन को एक झटका दिया और झड़ने लगीं.
उनकी चूत से निकला गर्म गर्म पानी मेरे लंड को पूरा स्नान करा गया.
मैं थोड़ा रुका और उनको पूरा झड़ने दिया.
एक मिनट में वे झड़ कर शांत हो गईं.
उनकी चूत ने इतना पानी छोड़ा कि वह चूत से बाहर निकल कर उनकी जांघों पर बहने लगा था.
चाची ने मस्ती में अपनी आंखें बंद कर लीं.
अब मेरी बारी थी.
मैंने फिर से अपने धक्के शुरू कर दिए थे.
चाची अब निढाल पड़ी थीं और कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दे रही थीं.
मेरा लंड उनकी चूत में गोते लगा रहा था और उनकी चूत से रस बाहर निकल रहा था.
मैंने भी 20-25 धक्के लगाए और मेरा लंड भी खुद को रोक न पाया.
लंड ने गर्म लावा उगल दिया था … मैं भी लंड को चूत की जड़ में गाड़ कर उनके ऊपर निढाल सा पड़ कर स्खलन का मजा लेने लगा.
चूत का रस और मेरे लंड का लावा दोनों के मिश्रण ने लंड को चूत को जवानी का स्वाद चखाया.
थोड़ी देर तक यूं ही पड़े रहने के बाद मैंने लंड को बाहर निकाला और बगल में पड़ गया.
थोड़ी देर में चाची उठीं और बाथरूम से खुद को क्लीन करके आ गईं.
उसके बाद मैं भी बाथरूम गया.
जब मैं वापस आया तो चाची कमरे में नहीं थीं और बेडरूम पूरा क्लीन था.
बेडशीट भी बदल दी गई थी.
इस रूम को देख कर लग नहीं रहा था कि यहां तूफान आया होगा.
मैं बेड पर लेटे हुए आज की कहानी सोचने लगा.
ये सब अचानक से हो गया और चाची ने पूरा साथ दिया.
मैंने अपनी दोनों आंटियों को चोद दिया था.
हालांकि दोनों ही जवानी के इस कदम पर थी कि उन्हें लंड की जरूरत थी.
बड़ी चाची के पास तो मेरे सिवा कोई ऑप्शन ही नहीं था और वे तो मेरे बच्चे की मां भी बन चुकी थीं.
छोटी चाची के पास ऑप्शन तो था मगर मुझे आज की चुदाई से लगा नहीं कि अंकल उनको अच्छे से संतुष्ट कर पाते होंगे.
छोटी चाची बिल्कुल प्यासी थीं.
मैं चाची से बात करना चाहता था मगर इस मुद्दे पर कैसे बात करूं, ये सोच रहा था!
आगे की सेक्स कहानी फिर से भेजूंगा.
मेरी यह गरम चाची की चूत में लंड की कहानी कैसी लगी?
मुझे मेल जरूर कीजियेगा.
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