स्कूल टीचर के साथ प्यार और वासना का खेल

(Sexy Madam Ki Kahani)

लखनऊ वासी 2026-01-15 Comments

सेक्सी मैडम की कहानी में मैं शिक्षा विभाग में टीचर्ज़ को रिफ्रेशर कोर्स करवाता हूँ. ऐसे ही एक कैंप में एक टीचर ने मेरा नम्बर ले लिया और मुझसे दोस्ती कर ली.

विगत लगभग एक दशक से मैं अन्तर्वासना पर सेक्स कहानियां पढ़ता रहा हूँ। कुछ सच्ची, कुछ झूठी, कुछ कल्पना आधारित कहानियों को पढ़कर ना जाने कितनी बार मैंने मुट्ठ मारकर अपने लिंग को शांत किया है।
आज हिम्मत करके पहली बार मैं एक ऐसी घटना के बारे में लिखने जा रहा हूँ जो आज से करीबन 3 साल पहले घटित हुई थी।

इसके पहले कि कहानी आगे बढ़े, मैं अपना परिचय दे देता हूँ।
मैं अभी उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहता हूँ। शिक्षा के क्षेत्र में नौकरी करता हूँ। मेरा काम मुख्य रूप से शिक्षकों को ट्रेनिंग देना और अलग-अलग तरह के कंटेंट बनाना है।

कद-काठी सामान्य है। हाइट लगभग 5 फीट 7 इंच है। शरीर भरा हुआ है। दिखने में गोरा-चिट्टा हूँ और स्वभाव बहिर्मुखी है।
किताबें पढ़ना, घूमना, लोगों से बातें करना मेरे स्वभाव में है।

अब आइए चलते हैं सेक्सी मैडम की कहानी पर!

यह जुलाई महीने के बरसात के समय की बात है।
एक प्रशिक्षण के सिलसिले में मैं बनारस गया हुआ था।

प्रशिक्षण कुल 5 दिनों का था।
जिस समूह को मैं प्रशिक्षण दे रहा था, उसमें कुल 50 शिक्षक और शिक्षिकाएँ थीं।

पहले दिन मैंने प्रशिक्षण में जो बातचीत की, उससे लोग काफी प्रभावित हुए।
मेरा यह मानना है कि बातों से, ज्ञान से लड़कियाँ ज्यादा प्रभावित होती हैं।

तो जनाब, एक मैडम का दिल मेरे पर आ गया।
मैडम मेरे ही बैच में प्रशिक्षण ले रही थीं।

शाम को उन्होंने मुझसे मेरा नंबर यह कहते हुए लिया- सर! जब किसी मदद की जरूरत होगी तो आपको परेशान करूँगी!

चूँकि इस तरह के प्रशिक्षणों में लोग नंबर वगैरह माँग लेते हैं तो मैंने भी कुछ खास गौर नहीं किया।

शाम में मैडम का मैसेज आया- सर! चाय पीने चलें?
मैं भी दिन भर की बकचोदी से परेशान था तो तुरंत तैयार हो गया।

चाय पीते-पीते मैडम का पूरा परिचय मिला।
मैडम का नाम वसुंधरा था और वे आगरा की रहने वाली थीं।

मैडम के पति दिल्ली के एक कॉलेज में पढ़ाते थे।

चाय पीते हुए मैंने मैडम को ध्यान से देखा।
अच्छी लगीं पास से देखने में।

बढ़िया साड़ी में गोरे बदन में मैडम गजब की माल लग रही थीं।
उनके शरीर में सब कुछ परफेक्ट लग रहा था।
बाहर से देखने में स्लिम-फिट लग रही थीं।

बाद में सेक्स के दौरान जब मैंने उन्हें पूरी नंगी करके उनके बदन का मुआयना किया था तो पता चला कि ईश्वर ने उन्हें उन्हीं जगहों पर भरपूर चर्बी दी है जहाँ चर्बी की जरूरत होती है।

चाय पीते-पीते ही मैंने भी अपने बारे में उन्हें बताया।
जैसे ही उन्होंने सुना कि मैं सुबह टहलने जाता हूँ, तो वे बड़ी खुश हुईं।

बोलीं- मैं भी टहलने जाती हूँ!”

फिर क्या? अगली सुबह हम दोनों टहलने निकले।

अब आप लोग सोच रहे होंगे कि अब तक सेक्स क्यों नहीं शुरू हुआ?
तो दोस्तो, कोई लड़की ऐसे मिलते ही किसी आदमी को अपनी चूत रूपी कंदरा में उसका मोटा चूहा दौड़ाने का अवसर नहीं देती है.
पहले वह जाँचती और परखती है, उसके बाद ही वह अपना सबकुछ किसी गैर को सौंपती है।

और अगर बात किसी शादीशुदा औरत की हो तो वह और भी ज्यादा सावधानी रखती है।

तो जनाब! अगर आप किसी औरत की चूत की थाह लेनी है तो सबसे पहले उसे अपनी मन की थाह लेने दीजिए।

अगले चार दिनों तक प्रशिक्षण के बाद से लगभग 12 बजे रात तक का समय हम दोनों ने हर रोज़ एक साथ बिताया।
बनारस की गलियों में लौंग-लता और पान खाते हुए घूमते रहे।

मैडम की बेबाक बातें, बिंदास अंदाज़ मुझे भी अच्छा लगने लगा।

घूमकर वापस आने के बाद ही हम मैसेज से बातें करने लगे।
रोमांटिक शेरो-शायरी का आदान-प्रदान होने लगा।

प्रशिक्षण के अंतिम दिन मैडम की आगरा जाने की बस थी।
बस रात में 11 बजे जाने वाली थी।

प्रशिक्षण शाम में करीबन साढ़े तीन बजे ही खत्म हो गया था।

मैडम ने प्रशिक्षण कक्ष से बाहर आते ही मुझसे कहा- चलिए, आज आपके साथ ज्यादा समय बिताने को मिलेगा, रात में तो चले ही जाना है!”

प्लान बना कि आज बोटिंग की जाएगी।

शाम में करीबन पौने पाँच बजे फ्रेश होने के बाद मैंने मैडम को कॉल करके होटल के कमरे से बाहर आने को कहा।
मैडम ने बोला- आइए पहले एक गर्म कॉफी पीते हैं, फिर घूमने चलेंगे!”

मैडम ने अपना रूम नंबर बताया और बोला- जल्दी आ जाइएगा!”

मैं भी अपने रूम से निकलकर उनके कमरे में पहुँच गया।
आज मैडम ने जींस और टी-शर्ट पहनी हुई थी।
उनके बदन का उभार देखकर मेरा लंड उफान मारने लगा।

मेरे कमरे में पहुँचने के थोड़ी देर बाद ही बैरा कॉफी देकर चला गया।
कॉफी पीते-पीते मैं बेड पर बैठ गया।
मैडम मेरे काफी पास बैठी थीं।

उनके बदन की मादक खुशबू मुझे उनकी ओर आकर्षित कर रही थी।
कॉफी पीते-पीते उन्होंने मेरे हाथ में अपना हाथ रख दिया।

उत्तेजना के मारे मेरे कान गर्म होने लगे।
लंड पैंट में सलामी देने लगा और गला सूखने लगा।

दोस्तो, हर बार जब कोई नई औरत ऐसे पहल करती है तो आप लोगों में से कईयों को भी ऐसा ही महसूस होता होगा।

मैंने भी उनका हाथ थामे रखा।
मन में उम्मीद जगने लगी कि आज एक नई चूत का दीदार होने ही वाला है।

फिर मैडम ने मेरे कंधे पर अपना सर रख दिया।
उनकी गर्म साँसें मेरे चेहरे से टकरा रही थीं।
उनकी मखमली चूंचियाँ मेरे शरीर में वासना का उफान उठा रही थीं।

अब मुझे लगने लगा कि अब मुझे भी अपनी तरफ से पहल करनी चाहिए।
जब मैडम खुद कामातुर हैं तो चूत पर चर्चा शुरू कर ही देनी चाहिए।

मैंने मैडम को अपनी तरफ खींचा और उनके माथे पर एक किस किया।
जो बेहतर किस करना जानते हैं उन्हें पता होगा कि माथे पर किस करना सम्मान और भरोसे का प्रतीक होता है।

मैंने पहली ही किस से यह जता दिया कि मैडम मुझ पर भरोसा कर सकती हैं।

मैडम ने मुझे कसके गले लगा लिया।
मैंने अब एक पल की भी देरी करना ठीक नहीं समझा।

भरोसा जीतने के बाद अब चूत की कंदरा में प्रवेश का रास्ता साफ हो चला था।

मैंने मैडम का चेहरा अपनी तरफ किया और सीधे लिप-किस करना शुरू किया।

करीबन 5 मिनट की लंबी किस के बाद हमने एक-दूसरे के कपड़े उतारने शुरू किए।
मैंने अपना शर्ट उतार दिया।
मैडम ने हाथ ऊपर करके उनकी टी-शर्ट उतारने में मदद की।

सेक्स को संभोग इसीलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें दो लोग बराबरी से एक-दूसरे का भोग लगाते हैं।
अगर किसी एक को ही ज्यादा एफर्ट करना पड़े तो सेक्स अर्थात संभोग का मजा आधा रह जाता है।

अगले कुछ ही पलों में हम केवल अपने-अपने अधोवस्त्रों में ही रह गए।

अब मैंने मैडम की मांसल चूचियों को निशाना बनाया; दोनों चूचियों को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया।
जब एक चूची मुँह में होती तो दूसरी का हाथों से मसाज करता और जब दूसरी को मुँह में लेता तो पहली चूची की मसाज करता।

मैडम अब काफी गर्म हो चुकी थीं।
कामुक आवाज़ें होटल के साउंडप्रूफ कमरे को भेद कर बाहर जाना चाहती थीं।

अब मैडम ने मेरे लंड को अपने हाथों की सेवा देनी शुरू की, मुझे धक्का देकर बेड पर गिराया और मेरे अधोवस्त्र को निकाल दिया।

मैडम बिना कुछ कहे मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चुभलाने लगी।
यकीन मानिए दोस्तो, अगर औरत ओरल सेक्स करने में माहिर है तो उसकी मुँह में भी उसकी चूत जितना ही मज़ा आता है।

मैडम गपागप लंड चूसती रही और मैं आनंद के सागर में गोते लगाता रहा।

करीब 10 मिनट की घनघोर कामुक चुसाई के बाद मैंने उनके मुँह में ही अपना वीर्य गिरा दिया।
मैडम ने थोड़ा सा वीर्य पिया और बाकी वाशरूम के सिंक के हवाले कर दिया।

एक बार झड़ जाने के बाद मैं भी थोड़ा शांत हो चला था।
लेकिन अब यह स्पष्ट था कि अब बनारस की तंग गलियों और चौड़ी गंगा नदी में मस्ती करने की जगह उनकी चूत की तंग गलियों और चौड़ी छाती पर मस्ती करने का समय है।

कामदेव जब एक बार मन में कब्ज़ा करते हैं तो तब तक कब्ज़ा नहीं हटाते जब तक लंड और चूत का मिलन ना हो जाए।
हम दोनों ने उस शाम रात के साढ़े दस बजे तक 3 राउंड सेक्स किया।

मैडम की चूत हर बार मेरे वीर्य से भर जाती जिसे वाइप पेपर से साफ करके अगले राउंड की तरफ हम आगे बढ़ जाते।

हर राउंड में मैडम एक नए शऊर में आ जाती थीं।
पहले राउंड में उन्होंने मुझे एक शानदार ओरल सेक्स का मज़ा दिया था।

वीर्यपात के बाद मेरा लंड मुरझा चुका था।
हम दोनों की साँसें तेज़-तेज़ चल रही थीं।

जैसे ही मैडम वाशरूम से वापस आईं, मेरे सीने पर अपना सर रखकर आराम करने लगीं।
मेरे सीने पर सर रखे-रखे ही वे मेरे बालों से खेलने लगीं।

थोड़ी देर के बाद मुझे भी फिर से जोश आने लगा।
मैडम ने अपने मुँह से स्वर्गिक सुख मुझे दिया था, अब उसे सूद समेत लौटाने का समय आ रहा था।
सेक्स में लेन-देन जितना बराबर होगा उतना ही मज़ा आएगा।

मैंने धीरे से मैडम का सर अपने सीने से हटाया और उन्हें स्पंजी बेड के बीच में लिटा दिया।
अब मैंने अपने चुम्बन कला का कौशल मैडम को दिखाना शुरू किया।

सबसे पहले मैंने होंठों से शुरुआत की, जमकर होंठों से मैडम की जवानी का अमृतपान किया।
उसके बाद उनके दोनों अमृत कलशों की तरफ बढ़ चला।

साथियो! ऊपर वाले ने भी औरत के शरीर के ऊपरी हिस्से में जो अमृत कलश बनाए हैं, दरअसल स्वर्ग की अनुभूति को धरती पर लाने के लिए ही बनाए गए हैं।
जी भरकर मैंने मैडम के अमृत कलशों से मधुपान किया।

फिर उनके सपाट पेट और जाँघों पर जीभ से कलाबाजियाँ दिखाने लगा।
मेरी एक-एक कलाबाज़ी पर मैडम चूतड़ उठा-उठाकर सलामी दे रही थीं।

अब उनकी चूत से चूत-रस पीने का टाइम आ चुका था।
मैंने उनके अधोवस्त्र उतार दिए।

धीरे-धीरे मैं उनकी जाँघों के बीच अपनी ज़ुबान फिराने लगा।

मैडम अब पूरे जोश में आ गई थीं।
चूत पर जैसे ही मैंने उंगली फिराई तो पता लगा कि उनकी चूत से पानी ऐसे बह रहा है जैसे हिमखंडों के पिघलने से पानी बहता है।
अंतर बस यह था कि हिमखंड का पानी ठंडा होता है और मैडम की चूत का पानी गरम और नमकीन था, उनकी तासीर की तरह।

अगर आपने अलग-अलग पानी छोड़ती चूतें देखी हैं तो पता होगा कि पानी छोड़ती चूत से प्यारी चीज़ इस धरती पर बनी ही नहीं है।

पनियाई चूत में मैंने झट से अपनी जीभ घुसा दी और हाथों से मैडम के अमृत कलशों का मर्दन करने लगा।
मैंने उनकी पूरी चूत ही मुँह में लेकर गपागप खानी शुरू कर दी।

क्या गजब का स्वाद था।
मैडम के गालों की तरह ही मैडम की चूत भी एकदम रोम-रहित थी।

चिकनी चमेली जैसी पानीदार चूत मैं गपागप खाता रहा।

करीबन 20 मिनट की मेहनत के बाद आखिरकार मैडम को चरम सुख मिला और वे ठंडी होकर मुझसे लिपट गईं।

एक-एक राउंड के ओरल सेक्स के बाद हम दोनों ने थोड़ा आराम करना मुनासिब समझा ताकि जब इस वासना की कथा का मुख्य अध्याय शुरू हो तो हम दोनों पूरी तन्मयता के साथ उसमें भाग ले सकें।

अब थोड़ी थकावट थी और मेहनत के बाद भूख लगी थी तो सबसे पहले खाना मंगवाया और एक ही थाली में खाना खाया।

ये प्यार, ये मोहब्बत या फिर वासना भी क्या गजब की चीज़ है ना?
अभी चार दिन पहले जिसको जानता भी नहीं था, उसके साथ एक थाली में खाना खा रहा था।

खाने के बाद हम दोनों को ही पता था कि अब इस शाम की वासना के उफान का अंतिम दौर आने वाला है।
अब लंड में चूत जाने वाला है।
खाने के बाद मैंने वनीला आइसक्रीम और गुलाब जामुन डेजर्ट में मंगवाया था।

मैंने मन ही मन सोच लिया था कि आज तो आइसक्रीम मैडम की चूत की तश्तरी में रखकर जीभ रूपी फोर्क से खाऊँगा और मैडम को कोन वाली आइसक्रीम खिलाऊँगा।

मैंने मैडम को योजना बताई।
वो झट से मान गईं।

पहले हमने एक-दूसरे के मुँह से गुलाब जामुन खाया।
अब आइसक्रीम की बारी थी।

लेडीज़ फर्स्ट की तर्ज पर मैडम ने पहले कोन से आइसक्रीम खाने की इजाज़त माँगी।
अंधे को क्या चाहिए? दो आँखें!

मैं बेड से उतरकर नीचे खड़ा हुआ।
मैडम नीचे बैठकर आइसक्रीम को मेरे लंड पर पोतने लगीं।

अंदर नसों में गर्म खून और बाहर की चमड़ी पर ठंडा आइसक्रीम, क्या गजब का कॉम्बिनेशन बन गया था।

मैडम मेरे लंड से आइसक्रीम खाने लगीं।
मैंने जोश में उनका सर पकड़कर पूरा लंड उनकी मुँह में गले तक ले जाकर लैंड कर दिया।

जैसे ही लंड पर लगा आइसक्रीम खत्म हुआ, मैडम ने इशारे से लंड बाहर निकालने को कहा।

अब आइसक्रीम खाने की बारी मेरी थी।
मैंने उनकी चूत की तंग गलियों में चारों तरफ आइसक्रीम बिछा दी।

अब मैंने सप-सप चूत की तश्तरी से आइसक्रीम खानी शुरू कर दी।

करीब 15 मिनट में आइसक्रीम की ठंडक और जीभ की गर्मी के चलते मैडम एक बार फिर से झड़ गईं।

अब मैडम ने इंग्लिश में “Fuck! Fuck!” कहना शुरू कर दिया।

मैंने भी बिना देर किए उन्हें चोदने का प्लान बना लिया।
मैंने मिशनरी पोज़ में चुदाई के मिशन की शुरुआत की।

धीरे-धीरे चुदाई परवान चढ़ने लगी।
फिर मैडम कब घोड़ी बनीं, कब लंड पर बैठकर जंप करने लगीं और कब गोद में बैठे-बैठे लंड पर जंप करने लगीं, पता ही नहीं चला।

चूत और लंड की इस जंग में मेरा लंड दो बार पानी छोड़कर निढाल हुआ और चूत ने भी इतनी ही बार पानी छोड़ा।

एक अच्छी और कामुक शाम अब अपने ढलान पर थी।
हमने घड़ी देखी, साढ़े दस बज रहे थे।

मैंने मैडम को तैयार होने को बोला।
मैंने उनके लिए ओला बुक करके उन्हें बस स्टैंड तक ड्रॉप किया।

जाने के पहले मैडम ने इतने प्यार से गले लगाया कि आज तक उसकी याद ताज़ा है।

आज भी मेरी शादी के बाद भी मैडम से साल में कम से कम दो बार घमासान चुदाई हो ही जाती है।
हम दोनों का ही टेस्ट बदल जाता है।

अगली कहानी में बताऊँगा कि कैसे मैंने प्रयागराज में जनवरी महीने में मैडम की गांड मारी।

सेक्सी मैडम की कहानी अच्छी लगी होगी.
मेल और कमेंट्स में पर अपने विचार ज़रूर साझा करिएगा!
[email protected]

What did you think of this story

Comments

Scroll To Top