चाची ने पढ़ाया मुझे प्रेम का पाठ- 3
(Xxx Chachi Free Fuck Kahani)
Xxx चाची फ्री फक कहानी में मैं पड़ोसन चाची के बेडरूम में था. दोनों पूरे नंगे थे. मैं चाची के नंगे बदन से खेल रहा था और वो सिसकारियां भरती लेटी हुई मजा ले रही थी.
कहानी के दूसरे भाग
पड़ोसन चाची के साथ प्रथम सहवास की ओर
में आपने पढ़ा कि मैं बीच रात में पड़ोस की चाची के आमंत्रण पर उनके बेडरूम में उनके जिस्म के साथ खेलना शुरू कर चुका था. पर चाची या तो सोने का नाटक कर रही थी या फिर वे नींद में इसे स्वप्न मान कर मेरी हरकतों का आनन्द ले रही थी.
अब आगे Xxx चाची फ्री फक कहानी:
मैंने अपना मुंह उसकी जांघों के बीच से निकाला उसकी आंखों में देखता हुआ अपना लंड उसकी योनि द्वार पर रख कर घिसने लगा.
अर्शिका के होंठ एकदम एक दूसरे पर कसे हुए थे.
नींद में ही उसने अपनी टांगें और फैला दी और अपनी दोनों बांहें मेरे गले में डालती हुई अपनी टांगों को मेरी पीठ पर लपेट लिया था.
मैंने अर्शिका की योनि पर अपने कामरस से सराबोर लंड को हल्का सा धकेल दिया.
अर्शिका की गर्दन अत्यंत आनंद से उलट गई.
मेरा लंड जाकर उसकी योनि के छल्ले में फंस गया था.
अब अगले धक्के से अगले ही पल में हम दोनों एक हो जाने वाले थे.
अर्शिका की योनि के छल्ले के किनारे से हम दोनों का सफेद कामरस गाढ़ा होकर चादर पर बहने लगा था.
अभी मैं अपना लंड उसकी योनि के ऊपर ऊपर ही घिस रहा था.
अर्शिका बेचैन हो चली थी.
उसकी बाँहें मेरी गर्दन से लिपट कर मुझे जकड़ने लगी थी.
मैं फिर भी लंड भीतर नहीं घुसा रहा था.
वह नीचे से अपनी कमर उछालने लगी.
एक धक्का उसने नीचे से इतना तेज मारा कि मेरा लंड उसकी चूत के भीतर सरसरता सा उतर गया था.
मेरा लंड उसकी योनि की आधी गहराई तक उतर चुका था.
उसके चेहरे पर एक हल्की दर्द की लकीर मुझे दिखी क्योंकि लंड बहुत कठोर हो चुका था और उसकी योनि थोड़ी संकुचित थी.
लेकिन कामरस की प्रवाह के चलते उसे ज्यादा दर्द नहीं हुआ था.
उसके दर्द देखकर मैंने खुद को रोक लिया था और उसकी योनि के भीतर की दीवारों पर लंड को रगड़ने लगा था.
इससे अर्शिका का दर्द कम हुआ और चेहरे पर आनंद की लकीर दिखाई देने लगी थी.
पर कुछ ही पलों में अर्शिका स्थिर हो चुकी थी.
अब मैं उसके स्तन पर झुका और दोनों स्तनों को जीभर कर चूमता मसलता हुआ अपने आखिरी धक्के के लिए उसे तैयार करने लगा.
उसके होंठों से मेरे इस कदम से आनंद भरी आह फूट पड़ी थी, वह नींद में ही मुस्कुराने लगी थी.
और फिर उसकी मुस्कुराहट देखकर मुझसे नहीं रहा गया और उसके दोनों स्तन थामकर मसलते हुए मैंने अपने घोड़े को एक आखिरी ऐड़ लगा दी.
और इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत की गहराई तक उतर चुका था.
जैसे मक्खन के भीतर छुरा समाता चला जाता है, ठीक इसी तरह अर्शिका की योनि की गर्म और संकुचित दीवारों को फैलाता हुआ मेरा लंड सरसराता हुआ अर्शिका की योनि की गहराई में समा चुका था.
मारे आनंद की अधिकता के अर्शिका के होंठों से एक बहुत तेज मदभारी सिसकारी फूट पड़ी, उसकी जांघें मेरी कमर पर और भी ज्यादा कस गई.
और उसने बाहों में भरकर सिसकारी भरते हुए मेरे चेहरे के अनगिनत चुम्बन ले डाले.
चाची मेरे होंठों को अपने होंठों में भरकर चूसने लगी थी.
उसकी उत्तेजना लंड के भीतर दाखिल होते ही हजार गुणा बढ़ चुकी थी.
उसकी कमर कमान की तरह तन गई थी.
मेरे लंड ने उसकी बच्चेदानी को छू लिया था. आनंद की अधिकता से उसने मेरे चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी.
और फिर तो खेल चल निकला.
अर्शिका और मैं एकाकार हो गए थे.
उसकी टांगें मेरे पीठ पर एकदम कसी हुई थी और इस मुद्रा में मेरा लंड एकदम अर्शिका की चूत की गहराई तक जा रहा था.
मेरा लंड हर धक्के में उसकी बच्चेदानी को चूमकर आ रहा था
“आआ आआह यूफ फ्फ इस्स सस उह्ह उफ्फ आआ आआअह!” अर्शिका के होंठों से असफुट सी बड़बड़ाहट के साथ मादक सिसकारियां फूटती जा रही थी.
उसके कूल्हे तेजी से एक दूसरे पर गिर रहे थे.
उसकी आँखें बंद थी लेकिन होंठ एकदम गोल होकर सिसकारियां भरते जा रहे थे.
हम दोनों का मिला जुला काम रस, हम दोनों का वीर्य बहता हुआ चादर पर फैलता जा रहा था.
कमरे में एसी की ठंडक के बावजूद में हम दोनों के नंगे बदन पसीने से तरबतर थे.
थाप पर थाप पड़ रही थी.
हम दोनों की पलकें आनंद की अधिकता से बंद हो चली थी.
गोल पर गोल हो रहे थे.
चुदाई का खेल अपने चरम पर था लेकिन हम दोनों में से कोई भी हार मानने को तैयार नहीं था.
आखिर अर्शिका और मैं आज एक हो चुके थे.
अब हम दोनों कभी भी कहीं भी एक दूसरे में समा सकते थे.
और मुझे पता था कि अब हम दोनों न दिन देखने वाले थे न रात!
जब भी, जहाँ भी हमें मौके मिलने वाले थे, हम दोनों को एक दूसरे में एकाकार होने में चंद मिनट ही लगने वाले थे.
खेल हमारा जारी था और अब अंतिम दौर की उठा पटक और तेज हो गई थी.
बिस्तर पर हम दोनों कलाबाजियां खाते एक दूसरे में बूटी तरह फंसे हुए दो नग्न शरीर एक दूसरे में गुत्थम-गुत्था होकर इस किनारे से दूसरे किनारे पर पहुंच गये थे.
पूरी चादर अस्त व्यस्त हो चुकी थी.
इस वक्त बिस्तर की हालत ऎसी थी कि अगर कोई सिर्फ बिस्तर ही देख लेता तो इसे बिस्तर पर हुई हमारी ये पहली धुआंधार चुदाई उसकी आंखों में अपने आप ही तैर जाती और उसका लंड खड़ा हो जाता या चूत पानी छोड़ने लगती.
बुरी तरह आहें भरती अर्शिका की योनि में मेरा लंड पिस्टन की भान्ति भीतर बाहर आ जा रहा था.
उसके दोनों स्तन मेरे हाथों में दबाकर अपना आकार बदल चुके थे. निप्पल कड़क होकर बड़े बड़े सख्त अंगूरों में तबदील हो चुके थे.
अर्शिका की नाखूनों ने चरमसुख की उत्तेजना में मेरी पीठ पर अपने नाखूनों के निशान बना दिए थे.
और अब हम दोनों इस सबसे आनंददायक खेल के चरम में आ पहुंचे थे.
और फिर हम दोनों के होंठों से एक साथ तेज काम सुख भरी ‘आ आ आआ आआह’ निकली.
और अर्शिका के झरने भीतर से फूट पड़े.
उसकी पतली कमर कमान की तरह तन गई, उसकी आँखों की पुतलियां उलट गई.
उसके होंठों से एक बहुत लंबी कामसुख आधिक्य से कराह अनवरत बहने लगी.
अगले ही पल मैंने अर्शिका के दोनों स्तनों को और तेजी से दबा लिया, उसके एक स्तन की निप्पल को अपने होंठों में भरकर तीव्र उत्तेजना में दांतों तले दबा लिया.
नीचे से मेरी रफ्तार अचानक से और तेज हो गई और एक तेज गुर्राहट के साथ मैं भी अर्शिका की योनि के भीतर ही स्खलित होता चला गया.
उसकी पूरी योनि अगले कुछ ही पलों में मेरे वीर्य के लबालब भर गई थी.
मेरे गर्म वीर्य को अपनी कोख में गिरने का अहसास पाकर अर्शिका और भी ज्यादा मतवाली हो चली और मेरे होंठों को दीवानों की तरह चूमते हुए उसने मेरे लंड को अपनी योनि के भीतर कस लिया.
मेटे होंठों से पुनः और तेज आनंद भरी सिसकारी फूट पड़ी.
अर्शिका ने कुछ इस तरह मेरे लंड को अपनी योनि में कस लिया था जैसे गन्ने को रस निकलने वाली मशीन के रोलर कस लेते हैं.
मेरा लंड और भी तेजी से अर्शिका की योनि में कसकर भीतर बाहर होने लगा था.
अर्शिका की योनि के संकुचन के फलस्वरूप उसकी योनि ने मेरे लंड से वीर्य की अंतिम बूंद तक निचोड़ ली थी.
उसकी पिंडलियां काफी देर तक कांपती रही थी.
मेरा लंड अभी भी अर्शिका की योनि में ही फंसा हुआ था.
मैंने उसके होंठों को चूम लिया.
उसकी पलकें अब भी बंद थी लेकिन होंठों पर एक संतुष्टि भरी मुस्कुराहट थी.
अर्शिका की बाहें अब भी मेरी गर्दन में फंसी हुई थी.
अलबत्ता टांगें उसने जरूर सीधी कर ली थी.
लेकिन अब भी उसकी योनि ने मेरे लंड को नहीं छोड़ा था. लंड भी योनि के भीतर ही अपने पूरे आकार प्रकार में फंसा हुआ था.
मैंने उसके होंठों को चूमने के बाद उसके नग्न स्तनों को बारी बारी से चूमा और उसके स्तनों पर ही सिर रखकर लेट गया.
हमारी सांसें स्थिर होने लगी थी.
धीरे धीरे मैं भी अर्शिका की कामुक नग्न देह पर छाया हुआ गहरी नींद के आगोश में चला गया था।
मेरी नींद सुबह करीब 4 बजे खुली.
वैसे तो मुझे सुबह सबके उठने से पहले ही रूम से निकल जाना था लेकिन नींद खुलते ही जैसे ही मैंने अपनी बाहों में एकदम नग्न अर्शिका चाची को देखा तो मेरा लंड पुनः एक राउंड खेलने के लिए तैयार हो गया.
मैंने हम दोनों पर पड़ी चादर हटा दी.
अर्शिका की नग्न देह देखकर मैं पुनः उस पर छाता चला गया.
उसकी पतली चिकनी कमर और पेट नाभि को सहलाते हुए मेरे होंठ उसके दोनों स्तनों को चूमने लगे थे.
अर्शिका नींद में ही कामसुख से आहें भरने लगी थी.
फिर मैंने उसकी जांघें फैला दी और अर्शिका की दोनों उरोजों को मसलता हुआ उसके पेट को चूमते हुए बारी बारी से पतली कमर को चूमते हुए उसकी गोल गहरी कामरस से भरी सुंदर प्यारी नाभि को चूम लिया.
और अगले ही पल मेरे होंठ अर्शिका की नाभि की गहराई में पहुंच चुके थे.
अर्शिका की नींद खुल चुकी थी और वह कामुक अप्सरा मादक आहें भरती हुई बेड की चादर को मसल रही थी.
मेरे हाथ लगातार व्यस्त थे उसके स्तनों पर!
स्तनों को जीभर कर मसलने के बाद उसके पेट को सहलाते हुए मैंने अर्शिका के कूल्हे थाम लिए और मेरे होंठ अगले ही पल अर्शिका के योनिद्वार पर थे.
“आहह भैया!” चूत पर होंठों के लगते ही एक जोर से मादक सिसकारी फूट पड़ी अर्शिका के होंठों से!
फिर तो मैंने उसकी योनि के भीतर जीभ डालकर उसका लगातार बहता कामरस पूरा पी लिया.
“आआ आह्हह उफ्फ भैया जी … क्या ही सुख दे रहे हो आप मुझे! आओ अब चोद दो फिर से आप मुझे!” कहते हुए अर्शिका ने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और टांगें फैला दी.
मेरे होंठ सीधे उसके होंठों से जा लगे और इधर नीचे मेरा लंड सीधा अर्शिका की योनि में समा गया.
हम दोनों के होंठों से मदभरी सिसकारी फूट पड़ी.
सुबह पांच बजे हम दोनों पुनः एकाकार हो गए.
अर्शिका को मैं दूसरी बार चोदने लगा था.
खेल चल निकला, मेरे कूल्हे अर्शिका की योनि पर तेजी से गिरे, उसकी बाहें मेरे गले में कस गई.
ठाप पर ठाप पड़ने लगी, गोल पर गोल होने लगे, कोई हार नहीं मान रहा था.
अर्शिका ने मेरा चेहरा चुम्बनों से भर दिया- आह भैया, आप पहले क्यों नहीं मिले … इतने दिन से मेरी चूत प्यासी थी. आह … आज तो अपने मेरी प्यास और भड़का दी है. अब तो आप मुझे रोज ही चोदेंगे ना? बोलिए?
“हाँ मेरी जान अब रोज ही …”
मेरा लंड अर्शिका की चूत के भीतर पूरी गहराई तक जा रहा था.
“आआ ह्ह भैया … आह और जोर से चुदाई करिए … आआह ह ऑफ फ्फ इस्स्स सीई!”
मेरे हाथ उसके दोनों स्तनों को मसलते जा रहे थे.
कामसुख से उसकी पलकें बंद हो चली थी.
चुदाई अपने चरम पर थी.
लंड और चूत का शानदार मिलन जारी था.
जिस अर्शिका को ख्यालों में लाकर के मैं मुठ मारा करता था, आज उसकी चूत को मैं दूसरी बार चोद रहा था.
हम दोनों का ही सपना पूरा हो रहा था.
अर्शिका भी मुझसे चुदना चाहती थी.
और मैं तो इस कामुक अप्सरा को जिस शानदार तरीके से रगड़ कर चोदना चाहता था, वैसे कल रात और आज सुबह दूसरी बार चोद रहा था.
अब यह शानदार जिस्म मेरी मल्कियत है.
जब चाहे मैं और अर्शिका एक दूसरे में समा सकते हैं.
यह सोचकर मेरा लंड चुदाई करते करते ही और कड़ा और लम्बा हो गया.
अर्शिका के आनंद में दोगुनी वृद्धि हो चली थी.
वह कामुक सिसकारियां भरने वाली मशीन बन चुकी थी.
हमारी धुआंधार चुदाई से पूरा बिस्तर अस्त व्यस्त हो चुका था.
लंड पूरी गति से मेरी जान अर्शिका की चूत के भीतर जा रहा था.
पिछले आधे घंटे से चुदाई चालू थी, लंड और चूत दोनों ही हार मानने वाले नहीं थे.
हम दोनों के बदन पसीने से तरबतर हो चुके थे.
अर्शिका की चूत से निकल कर हम दोनों का मिला जुला कामरस चादर पर फैलने लगा था.
इस कामरस की खुशबू से हमारी चुदाई का आनंद बढ़ता ही जा रहा था.
तभी एक जोर की सिसकारी और मादक आह भरती हुई अर्शिका स्खलित होने लगी.
नीचे से Xxx चाची अर्शिका ने भरपूर कामोत्तेजना में अपने कूल्हे उछलने शुरू कर दिए, उसने मुझे अपनी बाहों में कस लिया.
Xxx चाची फ्री फक में स्खलित होने के आनंद में उसने मेरे चेहरे पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी.
मेरी चुदाई की रफ्तार और बढ़ गई थी, स्तनों को मसलकर मैंने उनका आकार बदल दिया था.
उसकी जांघें आनंद की अधिकता से कांपने लगी थी.
और ठीक इसी वक्त मेरा लावा भी उबलने लगा था, मैं भी स्खलित होने वाला था.
मेरा आनंद परमानंद में बदल गया था.
काम सुंदरी अप्सरा अर्शिका को चोदता हुआ मैं अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया.
और फिर मेरा भी बांध बह चला.
पसीने में तरबतर हम दोनों के बुरी तरह गुत्थम-गुत्था शरीर पूरी तरह एक दूसरे से चिपक हुए थे.
लंड और चूत के समागम की रफ्तार में एकाएक गुणात्मक वृद्धि हो गई थी.
हम दोनों एक दूसरे को जी जान से प्यार करने में लगे हुए थे.
आखिर इस प्यार की अंजाम इतना आनंददायक जो होता है, मैं पूरी तरह अर्शिका के भीतर ही स्खलित हो चुका था.
तूफान बड़ी तेजी से आ कर हम दोनों को थका कर गुजरने वाला था.
धीरे धीरे लंड और चूत के मिलन की रफ्तार में कमी आई.
अर्शिका और मेरे होंठ पुनः मिल चुके थे.
नीचे लंड और चूत का मिलन पूरा हो चुका था फिर भी दोनों एक दूसरे में समाए हुए थे.
और अंततः इस आनंद भरे खेल का पुनः समापन हुआ.
हम दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा.
अर्शिका की आंखों में तृप्ति के भाव थे.
उसने प्यार भरी नजरों से मुझे देखते हुए शरमा कर अपनी नजरें नीची कर ली और अपनी बाहों का हार मुझ पर कसते हुए मुझे अपने सीने से पूरी तरह कस लिया।
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