मेले के बहाने चुदाई की मस्ती- 3

(New Hindi Xxx Kahani)

न्यू हिंदी Xxx कहानी में पढ़ें कि मुझे चोदने में मेरा यार इतना निढाल हो गया कि उसमें अब मेरी सहेली की चूत मारने की हिम्मत नहीं रही, उसका लंड खड़ा नहीं हो रहा था.

मैं सारिका कंवल आपको अपनी चुदाई की कहानी सुना रही थी.
पिछले भाग
सहेली के सामने जोरदार चूत चुदाई
में अब तक आपने पढ़ा था कि सुरेश ने मेरे साथ सम्भोग करके मुझे बेहद थका दिया था.

अब आगे न्यू हिंदी Xxx कहानी:

सुषमा बोली- सारिका, ये क्या था?
मैं- क्या?

सुषमा- ये यही, कैसी चुदाई थी ये, गजब तुम लोग तो शायद भूल ही गए थे मैं भी हूँ इस कमरे में!
सुरेश- अब ऐसा मजा आएगा तो किसको क्या याद रहेगा? वो मजा लेगा या इधर उधर देखेगा?

सुषमा- मगर ऐसा कोई करता है क्या?
सुरेश- कैसा क्या?

सुषमा- वही जो सारिका ने किया तुम्हारे साथ … एक एक अंग चाट गयी.
मैं- हां कसम से, मैंने तो कभी सोचा नहीं था कि कोई औरत किसी मर्द को ऐसे भी मजा दे सकती है. मेरे जीवन की ये सबसे मजेदार चुदाई थी.

सुषमा- तुम भी तो उसकी चूत कैसे चाट रहे थे और गांड की छेद भी … छी: गंदा नहीं लगा?
सुरेश- सारिका ने मुझे इतना जोश दिला दिया था कि मैं सब भूल गया था. बस ये लग रहा था कि सारिका को खा जाऊं … और जोश में होश कहां रहता है कि क्या गंदा और क्या अच्छा … हा हा हा हा हा.

सुषमा- ये सब कहां से सीखा सारिका?

मैं- ब्लू फिल्मों में सब दिखाते हैं, वैसे पता नहीं मुझे आज क्या हुआ था, कुछ ज्यादा ही गर्म हो गयी थी.
सुषमा- चूत गांड लंड चाटना कैसा लगता है?

सुरेश- अरे खुद चाट कर देख लो न, लंड भी चूत भी है और हम दोनों की गांड भी है … हा हा हा हा.
सुषमा- हरामी कहीं का … कैसे चोद रहे थे हमको लगा आज सारिका की चूत फाड़ ही दोगे. सारिका भी जबरदस्त ऊपर चढ़ कर चुद रही थी.

मैं- सच में बहुत मजा आया, तुझे कुछ नहीं हुआ हमको देख कर?
सुषमा- हुआ कैसे नहीं रे, तभी से चूत में उंगली कर रही थी.

मैं- तो बोलना था न मैं तो 3 बार झड़ गयी, मुझे छोड़ कर तुझे चोद देता सुरेश!
सुषमा- नहीं, मैं तुम लोगों को डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी.

सुरेश- अभी क्या हुआ, मैं नहीं कर रहा क्या?
सुषमा- कर तो रहा पर तुम्हारा खूंटा तो गिर गया, एक घंटे के आस पास चुदाई की तुम दोनों ने … अब तुम्हारे शरीर में ताकत कहां बची होगी.

सुरेश- तेरी मुनिया अगर तैयार है, तो अपने मुन्ना को जबरदस्ती भी खड़ा कर दूँ. बस थोड़ी देर आराम कर लेने दो.
सुषमा- अब तू भाग यहां से, एक बजने को है … कल आना.

मैं- क्या हुआ सुषमा तेरा करने का मन नहीं है क्या?
सुषमा- मन तो है मगर इसका इतनी जल्दी खड़ा नहीं होगा और रात बहुत हो गयी है.

मैं- चाहेगी तो सब हो जाएगा, बस थोड़ा समय लगेगा, पर जितना तू सोच रही उससे कम लगेगा.
सुषमा- कैसे?

मैं- मेहनत करनी पड़ेगी तुझे!
सुषमा- अरे इतनी जल्दी इसका लौड़ा नहीं खड़ा होगा, अभी अभी झड़ा है. इसको तैयार करते करते मेरा मन बदल नायेगा.
सुरेश- तुझे कुछ नहीं आता. एक ही रात में सारिका को मैंने दो दो बार चोदा है, अगर मन होगा तो सब हो जाएगा.

मैं- क्या रे सुषमा, सिर्फ बच्चा पैदा करना जानती है, किसी मर्द को तैयार करना नहीं सीखा कभी. एक मर्द के शरीर को न जाना तो क्या जाना तूने?
सुषमा- ठीक है तू ही सिखा दे मुझे!

मैं- ठीक है, पर तुझे साथ देना होगा और जो कहूँ करना होगा.
सुषमा- ठीक है मगर गांड इसकी मत चाटने को बोलना.

मैं- ठीक, ये तेरी गांड चाटेगा तो चलेगा!
सुषमा- ठीक है.

मैं- थोड़ी देर मुझसे सुस्ता लेने दे, तब तक तू इसका लंड धीरे धीरे सहला.

सुषमा सुरेश का लिंग हाथ में पकड़ कर हिलाती हुई बोली- ये देख, कैसा मरा हुआ सांप जैसा हो गया है. नहीं खड़ा होगा इतनी जल्दी. मगर पहले से थोड़ा मोटा लग रहा.
मैं- अभी अभी चोद कर झड़ा है, इसलिए फूला फूला लग रहा. खड़ा होगा तो भी इतना ही मोटा लगेगा.

सुषमा- तेरी चूत की कैसी हालत है अभी … ही ही ही ही.
मैं अपनी टांगें फैला सुषमा को दिखाती हुई बोली- देख ले खुद!

सुषमा मजाक उड़ाती हुई बोली- हाय रे, मुनिया की कैसी हालत कर दी कमीने ने, देखो तो चूत का मुँह खुला का खुला है और गूदा भी बाहर निकल आया … ही ही ही.
मैं- कमीनी, अभी तेरी चूत का भी यही हाल होगा. सुरेश, रगड़ कर चोदना कमीनी को … साली की सब ही ही ही ही निकल जाएगी.

सुरेश- हां आज फाड़ ही दूंगा चूत इसकी सही से चोदने नहीं दिया दिन में साली ने … हा हा हा हा हा. पहले पेशाब करके आता हूं तभी से लग रही थी.
सुषमा- मैं भी चलती हूँ.

मैं- मैं भी कर ही लेती हूं.
मैंने मैक्सी डाली सुरेश ने तौलिया लपेटा और सुषमा तो पहले से मैक्सी में थी.

हम तीनों कमरे से बाहर निकले और वहीं नाली के ऊपर मैं और सुषमा मैक्सी उठा कर बैठ गईं और सुरेश खड़े खड़े धार मारने लगा.

तभी मैंने सुषमा को बताया- जानती हो सुषमा, सुरेश तो मेरा मूत भी चख चुका है … ही ही ही ही.
सुषमा- ही ही ही ही मुँह में मूत दिया था क्या इसके!

सुरेश- साली दोनों मेरा मजाक बना रही हो!
मैं- तुम खुद ही तो कह रहे थे कि मूत चख लिया मेरा.
सुरेश- वो तो चूत चाटते हुए तुम्हारी झांटों में जरा सा लगा था, वो मुँह में चला गया था.

मैं- अच्छा ठीक है पर तुम तो बोल रहे थे कि अच्छा लगेगा तो मूत भी पी लोगे.
सुरेश- चुदाई के मूड में मुँह से क्या निकल रहा … किसको इतना ध्यान रहता है?

सुषमा- पीना है तो बोलो, बचा कर रख लेती हूं वरना धार मार रही हूँ … ही ही ही ही.
सुरेश- साली मूत चुपचाप … वरना अभी मूत से नहला दूंगा.
वह अपने पेशाब की दिशा हमारी और करता हुआ बोला.

हम झट से उठ गई और उसे गालियां देने लगीं.
वो हंसता हुआ फिर सीधा हो गया, हम फिर बैठ गई और पूरी तरह पेशाब कर इसी तरह छेड़खानी करते हुए वापस कमरे में चले गए.

कमरे में जाकर सुरेश ने सुषमा से कहा- मैं तो तुम्हारी चूत चाट कर ही तुम्हें झाड़ सकता हूँ.
सुषमा- हां ठीक है.

मैं- जब चुद कर झड़ने का जुगाड़ है तो आधा अधूरा क्यों करना … बाकी तुम दोनों की मर्ज़ी, मैं तो संतुष्ट हूं.
सुषमा- कमीनी जब सब जानती है, तो इसका लुल्ली खड़ा कर दे ना!
सुरेश- ये लुल्ली लग रहा है तुझे … अभी चूस इसको लुल्ला बन कर तेरी चूत फाड़ देगा. हा हा हा …

मैं- तूने बच्चे पैदा करने के अलावा और कुछ नहीं किया क्या. कभी अपने मर्द को खुश करने की बात दिमाग में नहीं आई?
सुषमा- सब तो करती हूं. कभी अपने पति को मना नहीं किया, पति क्या सुरेश को भी मना नहीं किया. देख कल भी नदी किनारे चोदने दिया, आज दिन में भी दिया और उससे पहले भी कितना जोखिम उठा कर दिया … इसी से पूछ ना!

मैं- मर्द की हर बात मान लेना ही उसे खुश नहीं करता. बहुत सी बातें हैं जो मर्द एक औरत से चाहता है.
सुरेश- सही कहा, सारिका तुम्हारी यही खूबी बहुत पसंद आई, तुम मजा देना और लेना बहुत अच्छे से जानती हो.

मैं- देख एक बार तू खुल कर मर्द को देकर देख, मर्द तुझे दोगुना मजा देगा. अभी थोड़ी देर पहले देखा न मैंने और सुरेश ने कितने मजे से चुदाई की?

सुरेश- एकदम सही, मेरा तो ऐसा मन हो रहा था कि झड़ू ही नहीं, जब तक सारिका को 8-10 बार न झाड़ दूँ. पर ऐसा मुमकिन नहीं. फिर भी मैंने खुद झड़ने से पहले उसे 3 बार झाड़ दिया.
मैं- हां, चोदने का असली मजा तभी आता है, जब दोनों के बदन में आग जैसी गर्मी हो. दोनों एक दूसरे को मजा देना चाहते हों. जैसे कि मैं सुरेश को भरपूर मजा देना चाहती थी और वो मुझे. इसके लिए पहले एक दूसरे के बीच अहसास जगाना पड़ता.

सुरेश- सीधी सी बात है लेने और देने की कि जब कोई तुम्हारे लिए कुछ करता है, तो तुम भी उसके लिए कुछ करती हो.
मैं- हां एकदम ऐसा ही है, मजा सिर्फ लंड को चूत में डाल के रगड़ना नहीं होता. अपना पूरा शरीर लगा दो … शरीर से पूरे शरीर को रगड़ो, मन को मन से देखो कितना मजा आएगा. चुदाई को काम मत समझो, उसको अपने शरीर की जरूरत समझो. ये जरूरत तब पूरी होगी, जब तू किसी को इसी तरह मन से देगी.

सुषमा- अरे बाल बच्चों और घर गृहस्थी के आगे ये सब कभी दिमाग में आया ही नहीं. अभी बोल … क्या करना है?
मैं- ये कोई सिखाने की चीज़ नहीं, इंसान खुद सीख जाता है. बस मन में चाहत होनी चाहिए. सबसे पहले तो तू ये मन को मना कि तुझे चुदाई का मजा चाहिए और सुरेश को तुझे अभी पूरा खुल कर मजा देना है … और वो तुझे देगा.

सुषमा- ठीक है.
मैं- यहां से जब जीजाजी (सुषमा के पति को) के पास जाएगी, तो उनको भी ऐसा ही मजा देगी तू … बोल!

सुषमा- ठीक है कोशिश करूँगी, अगर वो चाहेंगे तो!
सुरेश- वैसे जीजाजी कितनी देर तक चोदते है तुम्हें?

सुषमा- कल से दो बार चोद चुका है मुझे … अब मेरे पति तेरे जीजाजी कब से बन गए?
मैं- ही ही ही ही.
सुरेश- मेरे नहीं सारिका के जीजाजी … हा हा हा हा हा.
सुषमा- ज्यादतर तो 10-15 मिनट … कभी कभी तो वो मुझे 25-30 मिनट तक चोदते रहते हैं.

मैं- ये तो अच्छा है. बहुत से मर्द 5-7 मिनट ही चोद पाते हैं. जीजाजी का तो अच्छा है, ये सोच मेरे और सुरेश की तरह करोगी तो मजा दोगुना बढ़ जाएगा. और फिर क्या पता वो एक घंटा तक भी तुझे चोद सकते हैं.
सुषमा- बाप रे एक घंटा तक चोदेगा … तो सुबह चल फिर भी नहीं पाऊंगी? जब नई नई शादी हुई थी तो कोई कोई दिन 3-4 बार चोदते थे और सुबह मैं लंगड़ा कर चलती.

मैं- ऐसा कुछ नहीं है, एक ही आसन में चुदने से तो ऐसा होगा ही. कभी तू नीचे रह और वो ऊपर से मारंगे, फिर तू ऊपर हो जाना … या पीछे से लेना. ऐसा करने से ज्यादा देर तक मजा ले सकती हो.

सुरेश- आज तो तुम इसे पूरा ज्ञान ही पेल दो … हा हा हा!
मैं- बस आज भर … बाद में तो खुद मास्टरनी बन जाएगी.

सुषमा- अब बता क्या करना है, इसका तो अभी भी मरा हुआ सांप के जैसे झूल रहा. खड़ा भी हो गया तो बहुत देर तक झड़ेगा नहीं. मेरी तो हालत खराब कर देगा ये!
मैं- ऐसा कुछ नहीं होगा, प्यार से चोदेगा तुझे … और अगर तेरा मन भर जाएगा तो मैं हूँ न … मुझे चोद लेगा.

सुरेश- इससे अच्छा दिन मेरे लिए और कोई नहीं हो सकता कि दो मस्त औरतों को एक साथ चोदने का मौका मिल रहा.
इतना कह कर उसने अपना तौलिया निकाल फेंका.

मैंने सुरेश से पूछा- लग रहा है तुम्हें कि ये अभी खड़ा हो सकता है?
सुरेश- नहीं, लंड में तो ऐसा कुछ महसूस नहीं हो रहा … पर करने का मन तो है.

मैं अपनी मैक्सी उतार कर बोली- सुषमा चल तू भी नंगी होकर आ जा!
सुषमा अपनी मैक्सी उतार नंगी होकर हमारे पास आ गयी.

मैंने उससे कहा- अभी इसको थोड़ा समय लगेगा गर्म होने में और इसको हमें अन्दर से जगाना पड़ेगा. इसलिए मैं जैसा करूं, तुझे करना पड़ेगा.
सुषमा- ठीक है.

मैं- मैं अभी सुरेश को चूमती हूँ तू इसका लंड हिला. फिर जैसे हम चूम रहे, वैसा तुम चूमना.
सुषमा सुरेश का लिंग पकड़ हिलाती हुई बोली- ठीक है.

मैं सुरेश के एक तरफ बैठी थी, सुषमा दूसरी तरफ और बीच में सुरेश बैठा था.

मैंने उसके दोनों हाथों को अपने स्तनों पर रख दबाने का इशारा किया और हम होंठों को होंठ मिला चूमने लगे.

मैं और सुरेश चूमना जानते थे तो सुषमा को दिखा दिया कि कैसे चूमते हैं. हालाकि उसने फिल्मों में और मुझे तो पहले भी देखा था, पर ऐसा कभी किया नहीं था.

थोड़ी देर के बाद मैं अलग हुई और सुषमा से बोली- देखा? अब तू चूम. पहले मुँह खोल … फिर जीभ बाहर निकाल कर सुरेश की जीभ से मिला. उसके बाद जब वो तेरा ऊपर का होंठ चूसेगा, तू नीचे का होंठ चूसना. फिर जब वो तेरा नीचे का होंठ चूसेगा, तू ऊपर का चूसना. बीच बीच में जुबान को लड़ाना और सुरेश को जीभ चूसने देना या वो तुझे अपनी जुबान देगा तो चूसना. थूक अच्छा लगे तो एक दूसरे को दे सकती हो, जैसे शुरू में मैं और सुरेश एक दूसरे का पी रहे थे.

सुरेश ने सुषमा के दोनों स्तनों को पकड़ कर दबाना शुरू किया और आगे को बढ़ा.
सुषमा भी आगे आयी.

एक पल थोड़ा सा दोनों में ताल मेल नहीं बैठा, पर जैसा कि सुरेश पहले से अनुभवी था … उसने सब सम्भाल लिया और चुम्बन की प्रक्रिया शुरू हुई.

थोड़ी सी कोशिश में ही सुषमा सीख गयी और दोनों बराबर चुम्बन में भाग लेने लगे.
जैसा कि मैंने कहा कि ये सिखाने की चीज़ नहीं, बस अपने अन्दर इच्छा जगाओ … सब खुद ब खुद सीख जाते हैं.

मैंने देखा कि सुषमा चुम्बन को अब मजे के साथ कर रही थी.
वहीं सुरेश के हाथों को पकड़ अपने स्तनों को सहलाने और दबाने में सुरेश की सहायता भी कर रही थी.

जिस प्रकार सुषमा सुरेश की जीभ चूसते हुए चुम्बन कर रही थी और स्तनों को दबवा रही थी, उससे तो साफ था कि वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी.
इधर मैं सुरेश के लिंग को सहलाती हुई हिला रही थी मगर अभी तक उसमें कोई हलचल नहीं दिख रही थी.

मैं समझ गयी कि सुरेश को तैयार करने में काफी मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि एक तो वो दो बार संभोग कर चुका था. दूसरा अभी झड़े हुए 15 मिनट से ज्यादा ही समय हुआ होगा.

वो दोनों चुम्बन में लीन हो चुके थे.
मैंने झुक कर सुरेश के लिंग की चमड़ी खींच सुपारे को बाहर निकाला और उसके ऊपर थोड़ी देर जीभ फिराई.
मगर जरा सा भी कोई हलचल नहीं दिखी.

मैंने उसके अंडों को एक हाथ से हल्के हल्के दबाना शुरू किया और दूसरे हाथ से लिंग को आगे पीछे हिलाते हुए सुपारे पर थूक कर जुबान से फैलाते हुए सुपाड़े को चाटने लगी.
अभी भी वही हाल था.
वो मेरे हुए सांप की तरह बिल्कुल ढीला था.

काफी देर के बाद उसके लिंग में थोड़ी सी हलचल दिखी.
मैं सुरेश का लिंग हिलाती हुई बोली- सुषमा, अपना चूची भी चुसा उसको!

मेरी बात सुन सुषमा ने बारी बारी से अपने स्तनों को पकड़ कर सुरेश के मुँह में देना शुरू कर दिया और सुरेश उन्हें दबाते हुए चूसने लगा.

सुषमा सिसकारियां भरने लगी और मैं अब सुरेश का लिंग मुँह में भर कर हिलाते हुए और अंडों को दबाते हुए चूसने लगी.
धीरे धीरे सुरेश का लिंग कड़क होने लगा और उसका आकार बढ़ने लगा.

मैं मौका देख उसे तेज़ी से हिलाती हुई चूसने लगी और बस थोड़ी ही देर में लिंग पूरी तरह खड़ा हो गया.
मगर अभी भी संभोग करने लायक नहीं हुआ था.

मैं जानती थी कि जैसे ही इसे हिलाना चूसना बन्द करूँगी, ये वापस ढीला पड़ जाएगा इसलिए मैं उसे लगातार चूस और हिला रही थी.

अब तो मेरे मुँह ओर हाथ में भी दर्द होने लगा था.
मैं करीब 10 मिनट से जो उसे तैयार करने में लगी थी.

आखिर कर मैंने चूसना छोड़ सुषमा से कहा- सुषमा अब तू कर … मेरे मुँह में दर्द हो रहा.

सुषमा- मुझे नहीं आता.
मैं- इतनी बार देख चुकी है, अब इसमें क्या नहीं आता तुझे, बस समझ कि लॉलीपॉप चूसने जैसा है.

सुषमा- कभी किया नहीं रे … लंड मुँह में नहीं लिया, एक बार तू दिखा दे.
मैं लिंग को हिलाती और चूस कर दिखाती हुई बोली- देख एक हाथ से लंड पकड़, दूसरे से इसके आंड को हल्के हल्के दबा या सहला … और लंड को लॉलीपॉप की तरह ऐसे चूस. ध्यान ये रखना है कि मुँह से ज्यादा से ज्यादा थूक निकाल लंड पर डाल कर चूसना है.

जब तक मैं उसे ज्ञान दे रही थी, इतने सुरेश का लिंग फिर से ढीला पड़ गया.
पर अब उम्मीद थी कि जल्द खड़ा भी हो जाएगा.

पाठको, सुरेश का लंड खड़ा होने में अभी समय लग रहा है.
उसके बाद किस तरह से सुषमा ने सेक्स किया वो सब आपको अगले भाग में लिखूंगी.

आपको न्यू हिंदी Xxx कहानी कैसी लग रही है, प्लीज़ मुझे मेल करके जरूर बताएं.
[email protected]

न्यू हिंदी Xxx कहानी का अगला भाग: मेले के बहाने चुदाई की मस्ती- 4

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