टीचर संग ओरल सेक्स का मजा

(Oral Fuck Story)

Antarvasna 2026-03-17 Comments

ओरल फक स्टोरी में मेरी एक टीचर मुझे बहुत पसंद करती थी, मैं भी उसे पसंद करता था. हम दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे. टीचर जॉब छोड़ कर जाने लगी तो आखिरी दिन वे मेरे बाइक पर बैठ गयी.

मेरी टीचर मेरी सामने खड़ी थीं.
उनकी आंखों में कामुकता चमक रही थी.
आखिर ये हमारी आखिरी मुलाकात थी.

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अमित है. मैं नर्सिंग कॉलेज का छात्र हूँ.

यह ओरल फक स्टोरी आज से लगभग दो हफ्ते पहले की है.

मेरी टीचर का असली नाम तो मैं आपको नहीं बता सकता … लेकिन आप उन्हें संजना के नाम से जान कर इस सेक्स कहानी का रस लें.

संजना मेम की फिगर बहुत ही बढ़िया है.
उनके बड़े बड़े कबूतर हैं जिनको हम लड़के आपस में खरबूजों के नाम से जानते थे.

संजना के खरबूजे अंदाजन मिया खलीफा जैसे बड़े बड़े और रसभरे हैं.

मैं अपने गांव से दूर शहर में कॉलेज की पढ़ाई करने के लिए आया था.
जब मैं कॉलेज में फर्स्ट ईयर में था, तभी से मैं पढ़ाई में काफी अच्छा था और इसी वजह से कॉलेज में टीचर्स के बीच में मेरी काफी अच्छी इमेज बन गई थी.

मेरे कॉलेज की संजना टीचर का मुझ पर कुछ विशेष ध्यान था.
मेरी उनके साथ पहली मुलाकात कॉलेज की फ्रेशर्स पार्टी में हुई थी.

जब में फ्रेशर्स पार्टी की रैंप वॉक की तैयारी कर रहा था, उस वक्त संजना मेम हमारी रैंप वॉक की कोच थीं.

उसी वक्त किसी कारण से मुझे मेम के मोबाइल नंबर की जरूरत पड़ी पर मेरे पास मोबाइल नहीं था.

तब संजना मेम ने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और पेन से अपना नंबर मेरी हथेली पर लिख दिया.
मैं उनकी इस हरकत को देख कर समझ गया था कि मेम के दिमाग में मुझे लेकर क्या चल रहा है.

हालांकि यह बहुत जल्दबाजी थी कि मैं उनके बारे में अपने दिमाग में कुछ विचार बना पाता.
खैर … उस दिन मैं वापस आ गया और जल्द ही मैं मेम के साथ फोन से जुड़ गया.

हमारी व्हाट्सएप पर बातें होने लगीं और हम दोनों के बीच के पर्दे खुलने लगे.
जल्द ही हम दोनों दोस्त हो गए.

अब तो ऐसा हो गया था कि कई बार मेरे और उनके बीच में झगड़ा हो जाता और फिर जल्द ही सुलह भी हो जाती.

मेम मुझको बहुत लाइन देती थीं पर मैं उन्हें भाव नहीं देता था.
मेरे पास उसके लिए कई कारण थे, जिसे मैं कहानी के अंत में लिखूँगा.

खैर … कॉलेज और हॉस्टल में मैंने कई बार संजना मेम के कबूतर और गांड को छुआ था.
मेरे ऐसा करने से उन्हें भी कोई दिक्कत नहीं थी.

ऐसे करते करते काफी समय चला गया और हमारी लड़ाई और सुलह का सिलसिला भी चलता रहा.

इतना सब होने के बाद भी अभी तक मैंने पूरी तरह से उनके साथ सेक्स संबंधों को लेकर कुछ खास नहीं किया था.
मन तो उनका भी बहुत था, पर कई बार समय नहीं मिलने के कारण से और कई बार मेरे अपने कारणों के वजह से कुछ नहीं हो सका था.

नतीजतन हम दोनों ही ऐसा नहीं कर पाए.

मैं कई दिनों से संजना मेम से नाराज चल रहा था और उनसे बात नहीं कर रहा था.
मैंने उनका फोन नंबर भी ब्लॉक लिस्ट में डाल रखा था.

उन्हीं दिनों मुझे जानकारी हुई कि अब वे कॉलेज छोड़कर जाने वाली थीं.
वे मेरे अलावा और भी कुछ लड़कों से कॉलेज में हंसी मजाक भरी बात करती थीं पर उनका किसी और लड़के के साथ मेरे जितना करीबी रिश्ता नहीं था.

बात ऐसी हुई कि वे जाने से पहले हम तीन लड़कों को खाना खिलाने होटल ले गईं.

उन्होंने उन दोनों लड़कों से कहा था कि कुछ भी हो जाए, आज तुम दोनों अमित को जरूर बुला लो. आज मैं अपने प्रिय छात्र और अच्छे दोस्तों से आखिरी बार मिलना चाहती हूँ.

मैं मेम के साथ जाने को तैयार नहीं था पर वे दोनों दोस्त मुझे जबरदस्ती ले गए.

हम चारों ने होटल में खाना खाया और खाते खाते बातें करते रहे.
हमारी बातों में कॉलेज के बारे में, भविष्य के बारे में, विदेश के बारे में, मूवीज के बारे में चर्चा चल रही थी.

ये सब बातों को करते करते काफी समय गुजर गया और फिर हम सब खाना खाकर उठ गए.
मैं सोच रहा था कि किसी तरह जल्दी से जल्दी हॉस्टल पहुंच जाऊं.

पर जैसे ही मैं अपनी गाड़ी पर सवार हुआ, संजना मेम जल्दी से मेरे पीछे बैठ गईं और वह भी अपनी दोनों टांगें दोनों बाजू डाल कर लड़कों के जैसे बैठ गईं.
मैं समझ गया कि आज इतनी आसानी से मैं कमरे में नहीं जा सकूंगा.

खैर … मैंने भी अपनी किस्मत को शुक्रिया अदा किया और गाड़ी चलाने लगा.
हम दोनों स्लो चले थे जबकि वे दोनों लड़के कब के आगे निकल गए थे.

मैंने भी गाड़ी को रेस देना शुरू की और चलाने लगा.
संजना मेम से जितना ज्यादा हुआ, वे उतनी ज्यादा मेरी पीठ से चिपक कर बैठ गई थीं.

उनके बड़े बड़े खरबूजे मुझे अपने पीछे गड़ते हुए महसूस हो रहे थे और लौड़े ने तनतनाना शुरू कर दिया था.
मेरे गाल गर्म होने लगे थे क्योंकि आज पहली बार मुझे एक मस्त माल अपने जिस्म से चिपका हुआ हॉर्नी कर रहा था.

जब मेम ने मेरी कमर को अपने हाथों से सख्ती से पकड़ा तो मैंने भी मजे लेने शुरू कर दिए.
मैं भी अब जितना हो सकता था, उतना ही उनके सीने को अपनी पीठ से दबा रहा था.

वे भी मेरे कान में गर्म सांसें छोड़ने लगी थीं.
मैं समझ गया था कि आज मेम मेरे लौड़े का कत्ल करके ही रहेंगी.

फिर मुझसे भी रहा नहीं गया और मैं अपनी बाइक को एक अंधेरे रास्ते पर लेकर चला गया.

यहां पर कभी ट्रैफिक नहीं रहता और कभी कभार ही कोई गाड़ी दिखती है.
मैंने एक कोपचे जैसी जगह देखी और गाड़ी रोक कर पार्क कर दी.

मैंने मेम से उतरने का कहा.
तो वे उतर गईं.
उनके उतरते भी मैं भी उतर गया.
अब वे मेरे सामने खड़ी थीं.

मेरी संजना मेम मादक नजरों से मुझे देख रही थीं और मैं अपने कड़क हो चुके लौड़े को छिपाने की भरसक कोशिश कर रहा था … पर खड़ा लंड बिठा पाना इतना आसान नहीं होता है, यह मुझे उसी दिन अहसास हुआ था.

मैं मेम की आंखों में कामुकता देख सकता था, उनके चेहरे पर छलक आए पसीने के बूंदें उनकी गर्माहट को साफ दिखा रही थीं.

मेम मेरे सामने अपनी कमर पर हाथ टिका कर खड़ी थीं और मैं सोच रहा था कि आज मेम मेरे नीचे आने को तैयार हैं, मैं उनके साथ जो चाहूँ … कर सकता हूँ.
मैं उनको और उनके बड़े बड़े खरबूजों को एकटक देखता रहा.

मैंने अपनी किस्मत को शुक्रिया कहा और उनकी तरफ कदम बढ़ाया.
वे भी मुझे देखती रहीं और मेरे बढ़ते कदमों से किंचित मात्र भी नहीं हिलीं.

मैंने मेम के करीब जाकर अपने हाथ बढ़ाए और सीधे उनके दोनों कबूतरों को पकड़ लिया.

वाह क्या अनुभव था वह … उनके मुलायम मुलायम दूध मुझे रेशम सा अहसास दे रहे थे.
मैंने उनके एक दूध को दबाया तो बड़े ही जोर से मसलता चला गया.

मेरे ऐसा करते ही संजना मेम की कामुक सिसकारियां निकल पड़ीं.
मैंने उनके दोनों कबूतरों को नीचे से हाथ लगाते हुए ऊपर को उठाया, तो महसूस हुआ कि उनके दूध कितने बड़े और भारी थे.

मैं हमेशा से ये करना चाहता था, आज वह तमन्ना भी पूरी हो गई थी.
मैंने मेम को देखा तो वे भी एकदम चुदासी दिखने लगी थीं.

मैंने अपने हाथों को उनके टी-शर्ट के निचले किनारों पर लगाया और उसे ऊपर उठाते हुए सर के रास्ते से बाहर निकाल दिया.

अब मेम मेरे सामने काली ब्रा में थीं.
उनकी काली ब्रा में से उनके बड़े बड़े दूध बाहर निकल भागने के लिए छटपटा रहे थे.

मैं मेम के दाहिने कबूतर के ऊपर बना काला तिल देख सकता था.
मैंने उनको अपनी बांहों में भरा और उनकी ब्रा के हुक को खोल दिया.

ब्रा ढीली हुई तो उनके कबूतरों ने खुली हवा में सांस लेते हुए खुद को आजाद कर लिया.
वाह .. क्या बड़े बड़े सफेद दूधिया कबूतर मेरे सामने एकदम तने हुए खड़े थे.

मैं एकटक उनके मम्मों को देखता रहा. मेम के मम्मों के भूरे भूरे निप्पल एकदम कड़क होकर तन गए थे.

मैंने उसके एक मम्मे को पकड़ा और जोर जोर से दबाने लगा.
वे उह… आह…. करने लगीं.

मैंने मेम के दोनों मम्मों को मसल मसल कर एकदम लाल कर दिए.

फिर कुछ देर के बाद मैंने दाहिने कबूतर को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा.
वाह क्या मस्त अनुभव था वह!

मेम भी जोर जोर से कामुक सिसकारियां लेने लगी थीं.
मैंने एक को चूसा और दूसर को मसला, फिर बाएं वाले कबूतर को पकड़ा और मेम को अपने और पास में खींचकर चूसने लगा.

मेम के मम्मों को चूसते मसलते हुए मैं अपने एक हाथ को धीरे से नीचे ले जाने लगा.
रास्ते में मुझे मेम की नाभि मिली.

मैं अपनी एक उंगली मेम की नाभि में घुसेड़ कर नाभि को कुलबुलाने लगा.
वे सिहरने लगीं और आह आह करने लगीं.

मैंने उनकी नाभि पर अपनी दो उंगलियों की मदद से एक च्यूँटी काटी तो वे चिहुंक उठीं.
मैंने उनकी ऊँह आंह पर ध्यान न देते हुए पेट की चर्बी को अपने हाथ की हथेली में भर कर दबाया.

वे और भी मादक आवाज निकालने लगीं.
उसके बाद मैंने अपना हाथ मेम के पैंट पर पहुंचाया.

वे अपनी कमर को थिरकाने लगीं.
मैंने उनके एक नग्न मम्मे को अपने मुँह से खींचते हुए चूसा और उसे चूसते चूसते हुए ही मेम की पैंट की चेन को खोल दिया.
चेन खुली तो मैंने अपनी एक उंगली अन्दर सरका दी.

उंगली भीग गई तो समझ गया कि मेम की चुत तो एकदम भीगी हुई है.
मेम की पैंटी पूरी गीली हो गई थी.

उतने में मेरे मुँह से मेम की चूची निकल गई थी.
मैंने फिर से अपने होंठों से उसके मम्मे को पकड़ कर वापस चूसना चालू किया और निप्पल को चूसते हुए मैंने उनकी पैंट के हुक को खोल दिया.

मैं मेम की पैंट को नीचे खिसकाते हुए उतारने लगा.

वे मेरे कान की लौ को अपने दांतों से पकड़ कर धीरे धीरे काटने लगीं.
मैंने पैंट को जांघों तक सरका दिया और फिर से पैंटी को छुआ.

मैं धीरे धीरे उनकी चुत के बीच की दरार को पैंटी के ऊपर से ही उंगली से कुरेदने लगा.
आह … सच में मैं मेम की चुत गर्माहट को महसूस करने लगा था.

कुछ देर ऐसा करने के बाद में मैं अपने दोनों हाथ से मेम की गांड को सहलाते हुए दबाने लगा.
उनकी गांड भी बड़ी मस्त थी … एकदम गोल गोल किसी छोटी भगौनिया जैसी.

मेरे मुँह में अभी उनका एक दूध दबा हुआ था.
वे मुझे अपने दूध को हाथ से पकड़ कर चुसवा रही थीं और आह आह करती हुई अपनी कमर चला कर मुझसे गांड मसलवाने का मजा ले रही थीं.

कुछ देर तक ऐसे ही मजा लेने के बाद मैंने मेम के मम्मे को एक बार हल्के से काटा और उनकी मीठी आह निकलते ही मुँह से निकाल दिया.

मेम के दोनों दूध अब पूरे गीले हो गए थे.
मैं उन्हें बिना ब्रा के और सिर्फ पैंटी में देखने के लिए एक बार रुका.

पैंट को बदन से अलग करने के बाद अब मेम सिर्फ पैंटी में मेरे सामने खड़ी थीं.

मैं अब घुटनों पर बैठ कर मेम की चुत की तरफ बढ़ गया.
उनकी पैंटी को धीमे धीमे नीचे सरकाने लगा.

मेम पूरी तरह से गीली चुत में भीगी खड़ी थीं. चड्डी पानी में भीग गई थी.

चड्डी को चुत से हटाया, तो मैंने देखा कि मेम की चुत पर झांट का एक भी बाल नहीं था.
मतलब आज मेम चुदाई के लिए पूरी तैयारी करके आई थीं.

मगर मैं सोच चुका था कि चुदाई के जैसा सुख ही दूंगा … उससे आगे नहीं बढ़ूँगा.

मैंने उनकी चुत के ऊपरी हिस्से को धीमे से अपने होंठों से छुआ.
चुत के ऊपरी हिस्से पर मुझे उनकी झांटों के छोटे छोटे बाल की चुभन महसूस हो रही थी.

मैंने अब चुत को चाटने के लिए उन्हें अपनी बाइक पर पीठ के सहारे टिका दिया और उनके दोनों पैरों को खोल कर अपनी जीभ को काम पर लगा दिया.
मैं मेम की जांघों को जीभ से छूता सहलाता हुआ मजा लेने लगा और उसी पल मैंने उनकी चुत में एक उंगली डाल दी.

वे जोर से चिल्ला दीं ‘आह … उह …’

मैंने अपनी दूसरी उंगली भी उनकी चुत में डाल दी.
अब वे और भी ज्यादा चिल्लाने लगीं.

फिर मैंने हाथ ऊपर करके मेम के एक कबूतर को अपने हाथ में पकड़ लिया और जोर जोर से मसलने लगा.
ऊपर दूध का मजा और नीचे चुत में उंगलियों को अन्दर बाहर करते हुए मजा लेने लगा.

थोड़ी देर तक ये सिलसिला चलता रहा और उसके बाद मैंने मेम की चुत को चाटना चालू किया तो उनकी चुत से पानी छूट गया.
मेम ने पतली धार से पानी छोड़ना शुरू किया तो मैं चाटने लगा.

उसी पल मेम ने तेजी से अपनी कमर को अकड़ाया और आह आह करती हुई झड़ गईं.
अब मैंने खड़े होकर अपना लौड़ा निकाला और उनके ऊपर लगभग चढ़ गया.

वे सीट पर अपनी गांड टिका कर मुझे अपने ऊपर लेकर खड़ी थीं.
मैंने उनको नीचे बैठने का इशारा किया तो वे घुटनों पर बैठ गईं.

तब मैंने मेम के दोनों मम्मों के बीच में अपना लौड़ा फँसाया और मेम ने अपने दोनों मम्मों से मेरे लौड़े को दबा लिया.
मैं बूब फकिंग करते लंड मम्मों की घाटी में घिसने लगा.

आह … क्या मीठा अनुभव था वह … उनके मुलायम कबूतर मेरे लौड़े की मालिश कर रहे थे.

लंड को आगे पीछे करना शुरू किया तो सुपारा मेम के मुँह में टच होने लगा और मेम ने जीभ से लौड़े को चूसना चालू कर दिया.
एक तरह से मेरे लौड़े की चुदाई होने लगी थी.

मैं इस असीम सुख को ज्यादा देर तक झेल ही न सका और मैं भी झड़ गया.
मैंने अपना सारा माल मेम के गले के नीचे और कबूतरों के बीच में छोड़ दिया.

अब मैं शांत हो गया था, तो एक बार पुनः मेरी वही भावना जागृत हो गई जो कि सेक्स करने की नहीं थी.

अब मैंने जल्दी से अपना पैंट पहना और उनकी पैंटी को ऊपर खींच कर उन्हें पहना दी.
वे मुझे हैरान सी देख रही थीं और मैं उनकी मनोदशा को समझ रहा था.

फिर मैंने मेम को उनकी ब्रा भी पहना दी.
अब जब वे पैंट पहन रही थीं तो मैंने उनकी गांड पर जोर से एक हाथ मारा.

वे हंस दीं.
मैं उनके दूध मसलते हुए मस्ती करने लगा.

वे मुझे असमंजस से देख रही थीं और मैं कुछ नहीं कह रहा था.

कुछ देर बाद वे मेरे रूमाल से मेरा लंड साफ करने लगीं और उसके बाद अपनी टी-शर्ट पहनने लगीं.
सब कुछ ठीक होने के बाद मैंने गाड़ी स्टार्ट की और उन्हें पीछे बिठा कर आगे बढ़ गया.
मैं मेम को उनके रूम पर छोड़ने चला गया.

सच में क्या मस्त अनुभव था हमारी आखिरी मुलाकात का.
ओरल फक करके मैंने अपने और उस टीचर की कामुकता को अच्छे से पूरा कर दिया था.

मैंने मेम को चोदने के अलावा उनके साथ सब कुछ किया था.
शायद मैं खुद ही उन्हें चोदना नहीं चाहता था.
मेरी सोच यह थी कि मैं पहली बार में अपनी बीवी को ही चोदना चाहता था.
तो मैंने मेम को नहीं पेला था.

मेम भी शायद यह बात समझ गई थीं तो उन्होंने भी मुझसे कुछ नहीं कहा.
ये हमारी आखिरी मुलाकात मुझे हमेशा याद रहेगी.

धन्यवाद दोस्तो, मेरी सेक्स कहानी को पढ़ने के लिए.
आपको मेरी ये ओरल फक स्टोरी कैसी लगी, प्लीज मुझे ईमेल करके बता सकते हैं.
example1a2b69@gmail.com

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