दूधवाली आंटी मुझे घर के अंदर ले गयी
(Big Boobs Aunty Sex Kahani)
बिग बूब्ज़ आंटी सेक्स कहानी में मैं एक आंटी से दूध लेने जता था. उनके बड़े बड़े स्तन देख मेरा मन उनको चोदने का करता था. वे भी मेरी नजर अपनी बड़ी चूचियों पर महसूस करती थी.
दोस्तो, मैं आप सबका दोस्त नव हूँ. आज मैं आपको मेरी और नीलम आंटी की धाँसू बिग बूब्ज़ आंटी सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूँ.
हर रोज शाम को मैं नीलम आंटी के घर दूध लेने जाता था.
उन्होंने गाय-भैंसें पाली हुई थीं, इसलिए हम वहीं से दूध लेते थे.
आंटी का गदराया हुआ बदन देखकर मैं मन ही मन में ऊपर वाले से दुआ मांगता था कि बस एक बार आंटी मेरे बिस्तर में आ जाएं तो मज़ा आ जाए.
आंटी से दूध लेते वक्त मैं बस उन्हें घूरता रहता.
वे मुड़तीं तो उनकी मोटी-मोटी गांड देखने लगता, झुकतीं तो उनके 42 साइज के भारी बूब्स का क्लीवेज देखने लगता.
वे भी मुझे ऐसा करते देखती थीं और जानबूझ कर पल्लू आगे को करके गिरा देती थीं.
जब उन्होंने दो तीन बार ऐसा किया तो मैंने समझ लिया कि शायद मेरी दुआ कुबूल हो गई है.
उनका ऐसे करने का मतलब साफ था कि उन्हें भी मेरी नीयत का पूरा पता चल गया था और वे भी अपनी तरफ से हरी झंडी देने की कोशिश कर रही हैं.
अब मैं आपको आंटी का फिगर बता देता हूँ.
आंटी की हाइट 5 फीट 3 इंच की थी … लेकिन उनकी चूचियां 42 इंच के करीब होंगी.
उनकी कमर आनुपातिक थी और गांड तो मम्मों से बड़ी रहती ही है, तो आंटी की गांड 46 इंच की थी और बस उसे ठुमकती देख कर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था.
आंटी भी मेरी पैंट में बनता उभार देखकर समझ जाती थीं कि अन्दर कुछ बहुत बड़ा हथियार छुपा है.
मैं रोज रात को नीलम आंटी को सोचकर मुठ मारता था, जिससे मैं काफी दुबला हो गया था.
फिर एक दिन दूध लेने गया तो आंटी ने पूछा- बेटा क्या हो गया? तू इतना दुबला-पतला क्यों होता जा रहा है?
मैं चुप रहा.
आंटी ने समझ लिया कि मैं अपने शरीर को हाथ से कमजोर कर रहा हूँ.
वे अधिकार पूर्ण लहजे में बोलीं- चल अन्दर आ, मेरे रूम में आ … मैं तुझे सही से दूध पिलाती हूँ!
मैंने कहा- सही से ही तो पीता हूँ आंटी … लेकिन लगता ही नहीं है!
वे मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर लिवा ले गईं.
मुझे अन्दर ले जाकर आंटी बोलीं- बता, गाय का दूध पिएगा या भैंस का?
मेरे मुँह से निकल गया- आंटी मेरे लिए तो आप ही गाय है और आप ही … मैं तो आपका ही दूध पी लूँगा!
यह सुनकर आंटी एकदम से चौंक गईं.
मैंने फटाफट सॉरी बोला और भागने लगा.
उस दिन उन्हें पूरा यकीन हो गया कि मैं उनके बारे में क्या-क्या सोचता हूँ.
अगले दिन जब मैं फिर से उसी समय दूध लेने गया तो वे घर पर अकेली थीं.
उस दिन वे मुस्कुरा कर मुझे देखने लगीं.
मैंने बर्तन आगे बढ़ा दिया.
आंटी ने बर्तन में दूध डालते वक्त जानबूझ कर अपना पल्लू गिरा दिया और पूरा क्लीवेज दिखा दिया.
मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया.
जब मैं वापस जाने लगा तो आंटी बोलीं- अन्दर नहीं आएगा … आ जा ना!
मैं डर गया कि कहीं कल की बात पर नाराज न हो जाएं.
मैंने उन्हें फिर से सॉरी बोला.
तो वे कड़क स्वर में बोलीं- मादरचोद, चल न अन्दर!
उनके मुँह से कड़क आवाज में गाली सुनकर मेरी तो सिट्टी-पिट्टी ही गुम हो गई.
मैं चुपचाप उनके साथ अन्दर चल दिया.
रूम में जाते ही आंटी ने पलट कर मेरी पैंट के ऊपर से ही लौड़े पर हाथ रख दिया.
मेरा खड़ा लंड उनके स्पर्श से और भनभनाने लगा.
मैंने कहा- आंटी आप ये क्या कर रही हो? यह गलत है!
वे मेरे गाल पर एक जोर का थप्पड़ मारती हुई बोलीं- भोसड़ी वाले, जो तू मेरे साथ करना चाहता है, मैं भी वही करना चाहती हूँ. जब से तू आ रहा है न … तेरी नजरों को समझ रही हूँ मैं!
मैं चुप रहा क्योंकि आंटी की हरकतों से मुझे मजा आने लगा था और मेरा डर खत्म हो गया था.
फिर आंटी ने अपने हाथ से मेरी पैंट की ज़िप खोली और मेरा 7 इंच लंबा और खूब मोटा सा लंड बाहर निकाल लिया.
लौड़े को निकाल कर आंटी खुश हो गईं और लंड को तारीफ की नजरों से देखने लगीं.
वे लौड़े को हाथ से सहलाती हुई अपने घुटनों पर बैठ गईं और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं.
जैसे ही उनके गर्म होंठ लंड पर लगे, मैं पागल हो गया और उत्तेजना में मैंने उनका ब्लाउज पकड़ कर जोर से खींच दिया.
उनका ब्लाउज चिर्र की आवाज करता हुआ फट गया.
मैंने अगले ही पल उनके एक दूध को अपने हाथ से पकड़ कर जोर से मसल दिया.
बिग बूब्ज़ मसलने से आंटी को दर्द हुआ और वे चीख पड़ीं- आह्ह … धीरे करो मेरे राजा … मैं कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ!
मैंने कहा- नीलम आंटी, आज धीरे कुछ नहीं होगा … आज तो जोर-जोर से बजेगा तुम्हारा बाजा!
वे हंस पड़ीं और बोलीं- साले तेरी तो नजर शुरू से ही मेरे बाजे पर टिकी थी … चल आज मस्ती से बाजा बजा ले तू भी क्या याद करेगा कि किसी आंटी से पाला पड़ा था.
मैंने कुछ देर लंड चुसवाने के बाद आंटी को पकड़ कर उठाया और उनके रसीले होंठों पर अपने होंठ जमा दिए.
वे भी मेरे साथ चुंबन का मजा लेने लगीं और हम दोनों ने 5 मिनट तक एक दूसरे के होंठों का रस चूसा.
उसी दरमियान मैंने आंटी की साड़ी के ऊपर से ही उनकी चूत पर हाथ लगाया और चुत को रगड़ने लगा.
वे और गर्म हो गईं.
फिर मैंने उनकी साड़ी-पेटीकोट सब उतार दिया और आंटी को पूरी नंगी कर दिया.
वे नंगी होती ही अपनी चुत को टांगों से दबा कर छिपाने लगीं.
मैंने कहा- अब छिपाने से क्या फायदा आंटी … आज तो इसका भोसड़ा बनना तय है.
यह कहते हुए मैंने उन्हें बेड पर लिटाया और उनकी टांगों को फैला कर चूत चाटने लगा.
आंटी मादक सिसकारियां भरने लगीं ‘आह और जोर से … चूसो मेरे राजा …!’
मैंने आंटी की चुत को और जोर से चूसना चालू कर दिया.
आंटी की टांगें हवा में उठ गईं और मैं उनकी चुत में जीभ को अन्दर तक पेल कर चुत चूसता ही चला गया.
कुछ मिनट बाद आंटी बोलीं- अब चूसता ही रहेगा क्या?
मैंने कहा- मस्त चुत है आंटी आपकी … पर भोसड़ा बनाने के लिए चोदना तो पड़ेगा ही!
यह कह कर मैंने अपना 7 इंच का मोटा लंड उनकी चूत में एकदम से ठूँस दिया.
वे अचानक से लौड़े के हमले से तड़फ उठीं और चीख पड़ीं- अरे मर गई मम्मी रे … साले तूने अपना इतना बड़ा लंड एकदम से अन्दर पेल दिया … आह मर गई कमीने … तेरे अंकल का तो इससे आधा भी नहीं था!
मैंने कहा- अब अंकल को भूल जाओ … अपने इस नए राजा पर ध्यान दो!
आंटी मस्त होकर सिसकारियां लेती रहीं.
मैंने कुछ देर तक तो धीमे धीमे चोदा फिर अचानक जोर-जोर से धक्के देने शुरू कर दिए.
आंटी चीखने लगीं- आह धीरे कर न आह अब बस कर … बस कर …!
पर मैं कहां रुकने वाला था … मैं उनके मुँह पर थप्पड़ मारते हुए जोर-जोर से पेलता रहा.
थोड़ी देर बाद रुका तो वे हांफती हुई बोलीं- नव … दर्द तो बहुत हुआ, पर अब मजा आ रहा है!
कुछ देर और चोदने के बाद मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया और गांड के छेद में लंड दे मारा.
गांड चुदाई का प्रोग्राम पहले से तय नहीं था और अचानक से गांड फाड़ देने से वे रोने-चीखने लगीं- आह छोड़ दे … मर जाऊंगी!
मैं आंटी की गांड चोदते हुए बोला- अगर तू रोज दूध के साथ चूत फ्री देगी तो गांड नहीं मारूँगा!
उनके हां कहते ही मैंने लंड गांड से निकाल लिया और चुत चोदने लगा.
वे मस्ती से चुत चुदवाने लगीं.
आखिर में जब मैं झड़ने को हुआ तो मैंने चुत से लंड खींच कर उनके मुँह में अपना लंड पेल दिया और सारा का सारा गाढ़ा माल उड़ेल कर उन्हें पिला दिया.
आंटी लस्त हो गई थीं.
कुछ देर बाद वे उठीं और उन्होंने लोटे में दूध लिया और मेरे लौड़े को दूध से धोकर दूध पी लिया.
मैंने कहा- यह क्या किया?
वे बोलीं- तेरे माल में प्रोटीन है, इसे मैं वेस्ट नहीं कर सकती थी.
मैं उनकी चुम्मियां लेने लगा और अपने कपड़े पहन कर घर आ गया.
नीलम आंटी मीठे दर्द और सैटिस्फैक्शन के मिश्रण में लेटी रह गईं … और मैं आंटी की जवानी को याद करते हुए मुस्कुराता हुआ सो गया.
अब आंटी रोजाना मुझे चुत देती हैं.
आपको मेरी बिग बूब्ज़ आंटी सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज कमेंट्स जरूर करें.
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