जवान विधवा की जिस्मानी प्यास- 2

(Office Xxx Chudai Kahani)

ऑफिस Xxx चुदाई कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने अपने ऑफिस के एक सजीले मर्द से दोस्ती की. मैंने उसके साथ सेक्स का मजा लेना चाहती थी क्योंकि मैं 7 साल पहले विधवा हो गयी थी.

यह कहानी सुनें.

नमस्कार दोस्तो,
मैं समीहा, आप सभी पाठकों का कहानी के दूसरे भाग में स्वागत करती हूं।

कहानी के पहले भाग
सहकर्मी से दोस्ती और वासना भरा प्यार
में अभी तक आपने मेरे बारे में जाना और किस प्रकार से मेरी दोस्ती अनिल से हुई थी।
अब आप इस भाग में पढ़ेंगे कि किस तरह से हम लोग मिले और हम दोनों के बीच क्या क्या हुआ।

इससे पहले मैं आप लोगों को बता दूँ कि यह कहानी लिखने में मुझे काफी समय लग रहा है क्योंकि मेरे पास समय की बेहद कमी रहती है और जब कभी भी समय मिल रहा है तो मैं थोड़ा बहुत लिख रही हूं।

मेरे और अनिल के बीच जो कुछ भी हुआ है, वो सब छोटी से छोटी बात मैं आप लोगों को बताने का प्रयास कर रही हूं।
मेरे साथ उस दौरान जो कुछ भी हुआ था बिल्कुल सही सही लिख रही हूं।

वैसे मैं बहुत दिन से कहानी को अन्तर्वासना पर भेजने की सोच रही थी लेकिन सही मार्गदर्शन नहीं मिला और जब मेरी बात कोमल जी से हुई तो उन्होंने कहानी लिखने में मेरी बहुत मदद की।
कोमल जी वास्तव में एक बिंदास महिला होने के साथ साथ अच्छी दोस्त भी हैं।
उन्होंने मेरी मदद की उसके लिए उनका दिल से धन्यवाद।

तो दोस्तो, चलते हैं ऑफिस Xxx चुदाई कहानी में आगे क्या क्या हुआ … जानते हैं।

जैसा कि आपने कहानी के पहले भाग में पढ़ा था कि मेरी और अनिल की दोस्ती कैसे हुई और किस तरह से हम दोनों अपनी दोस्ती को बिल्कुल गुप्त रख रहे थे।
हम दोनों रोज रात में बात तो करते थे लेकिन कभी मिलना हो रहा था क्योंकि हम लोग किसी होटल में नहीं मिल सकते थे क्योंकि वहाँ पर काफी रिस्क रहता है।

ऐसे ही करते हुए हम लोगों को करीब पांच महीने हो गए लेकिन हमारा मिलन नहीं हुआ।
मेरे बदन में तो जैसे आग लगी हुई थी और मैं निश्चित रूप से कह सकती हूं कि अनिल का भी यही हाल रहा होगा।

मैंने पिछले 7 साल से चुदाई नहीं की थी और अनिल करीब दस साल से चुदाई से वंचित था।
आग तो उसके अंदर भी लगी होगी और जिस दिन भी हम दोनों मिले उस दिन दोनों का ज्वालामुखी फूट जाएगा।

फिर दोस्तो, 2021 का साल शुरू हुआ।

फरवरी का महीना चल रहा था और मेरे सास ससुर और मेरा बेटा तीनों गांव गए हुए थे जो कि यहाँ से 150 किलोमीटर दूर है।
मैं अकेली ही घर पर थी।

उसी समय कोरोना महामारी काफी तेजी से फैल रहा था और भारत सरकार ने सभी जगह पर लॉक डाउन लगा दिया था।
मेरे ऑफिस में भी सभी को कह दिया गया था कि आप लोग घर से ही ऑनलाइन काम करिए।

हालात ये हो गए थे कि न मैं कहीं जा सकती थी और न कोई मेरे घर आ सकता था।
तीन दिन तक मैं घर में अकेली रही।

फिर मैंने अनिल को कहा- क्या तुम मेरे साथ कुछ दिन बिता सकते हो?
उसने तुरंत ही इसके लिए हां कह दिया।

मेरे घर पर कोई भी नहीं आ सकता था क्योंकि उस समय कोई किसी के घर नहीं जा रहा था।
यह मौका हमारे लिए बेहद ही फायदे का था।

अगले दिन अनिल मेरे घर पर आने वाला था और उससे पहले ही मैं अपने जिस्म को तैयार कर रही थी।

मैंने अपने जिस्म से सभी अनचाहे बालों की सफाई की जिससे मेरा गोरा जिस्म बिल्कुल ही दमक उठा था।
उस दिन नई ब्रा पेंटी निकालकर पहनी और नया गाउन पहना।

शाम होते ही अनिल मेरे घर आने वाले थे और उससे पहले मैंने खाने की पूरी तैयारी कर ली थी।
इसके साथ ही मैंने अपने बेडरूम की अच्छे से साफ सफाई की और बिस्तर पर नई चादर बिछाई।

चादर बिछाते हुए मेरे मन में यही ख्याल आया कि आज इस बिस्तर पर इतने सालों बाद मैं किसी के साथ नंगी सोऊंगी।

अनिल आठ बजे मेरे घर पहुँच गए।

उस दिन काफी गर्मी लग रही थी इसलिए अनिल ने नहाने के लिए बोला.
मैंने उन्हें बाथरूम दिखाया और वे नहाने के लिए चले गए।

नहाने के बाद वे बाहर आये तो उन्होंने एक हाफ पैंट और बनियान पहनी हुई थी।
बनियान में उनका चौड़ा मर्दाना सीना मुझे काफी अच्छा लगा।

गर्मी को देखते हुए मैंने बेडरूम का एयरकंडीशन चालू कर दिया ताकि बेडरूम अच्छे से ठंडा हो जाये।

इसके बाद कुछ समय में ही मैंने खाना निकाला और हम दोनों बात करते हुए खाना खा रहे थे।

उस वक्त मैं गाउन पहने हुई थी और उस गाउन में मेरे बड़े बड़े चूचे बिल्कुल तने हुए थे।
अनिल की नजर खाना खाते हुए मेरे सीने पर ही जा रही थी.
और ऐसा हो भी क्यों न … क्योंकि मेरे दूध हैं ही इतने कड़क और तने हुए कि किसी की भी नजर उन पर जाएगी ही!

कुछ देर में ही हमने खाना खत्म कर लिया और दोनों जाकर सामने कमरे में बैठ गए।
काफी देर हम दोनों एक दूसरे से बात करते रहे।

दोस्तो, आग दोनों तरफ लगी हुई थी लेकिन पहल कोई नहीं कर रहा था।
बस एक दूसरे को देखते हुए बस बात किये जा रहे थे।

मैं एक औरत हूँ और आगे बढ़कर अपने से तो उसके गले नहीं लग सकती थी, शुरुआत उसे ही करनी होगी।

उसने ऐसा किया भी और सबसे पहले मेरे हाथों को अपने हाथ में लिया।
यह उसका पहला स्पर्श था और इससे मेरे बदन में आग सी लग गई।
मुझे ऐसा लगा कि मेरे रोम रोम खड़े हो गए हैं।

उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से सहलाते हुए चूम लिया और मैंने अपनी आँखें बंद कर ली।

अनिल अब रुकने वाला नहीं था और वह मेरे बगल में आकर बैठ गया।

अब उसने मेरे चेहरे को अपने हाथों से थाम लिया और हम दोनों एक दूसरे की आखों में खो गये।

धीरे धीरे अनिल मेरे करीब आता गया और मेरी दिल की धड़कन तेजी से चलने लगी.

जल्द ही उसने मेरे होठों पर अपने होठ रख दिये।
इतने सालों के बाद किसी ने मेरे होठों को चूमा था।

मैं बराबर अनिल का साथ देने लगी और अपनी जीभ निकालते हुए उसके मुँह में डालने लगी।

मैंने अपने हाथों से उसके बालों को सहलाना शुरू कर दिया और अनिल कभी मेरे नीचे के होठ तो कभी ऊपर के होठ को चूमने के साथ साथ मेरी जीभ को भी चूसता जा रहा था।

काफी देर तक हम दोनों ने एक दूसरे के होठों को चूमा और फिर मुझे अहसास हुआ कि अनिल का हाथ मेरे गाउन के नीचे से होता हुआ अंदर मेरी जांघों तक चला गया है।

मैं तुरंत ही उसे रोक कर हाँफते हुए बोली- नहीं नहीं … यहाँ नहीं!

उसने मेरे इशारे को समझ लिया और एक झटके में मुझे अपनी गोद में उठा लिया और बेडरूम की तरफ चल पड़ा।

जब हम बेडरूम में दाखिल हुए तो वहाँ का माहौल बिल्कुल अलग था।
कमरा बिल्कुल ठंडा हो गया था और रूम में हल्की दूधिया लाइट जल रही थी।
बिस्तर पर लाल रंग की चादर थी जिससे बेडरूम का माहौल काफी सेक्सी लग रहा था।

अनिल ने मुझे बिस्तर के पास खड़ी कर दिया और मुझे अपनी बाहों में भर लिया।
मैं भी उससे लिपट गई और हम दोनों एक दूसरे को जोश के साथ चूमने लगे।

वह मेरे चेहरे को बुरी तरह से चूम रहा था और मैं अपने दोनों हाथों से उनकी पीठ सहला रही थी।
जल्द ही उसने अपना एक हाथ मेरी कमर में रखा और मुझे अपनी तरफ चिपका लिया।

जैसे ही मैं उससे चिपकी तो मेरा पेट उसके लंड से जा टकराया जो कि पूरी तरह से खड़ा हो गया था।
लंड के पहले स्पर्श से ही मुझे पता चल गया था कि उसका लंड कोई साधारण लंड नहीं है क्योंकि वह काफी बड़ा और मोटा लग रहा था।

हम दोनों ही एक दूसरे को चूमते हुए काफी गर्म हो गये थे.

अब अनिल ने मेरे गाउन को ऊपर करना शुरू किया।
धीरे धीरे करते हुए उसने मेरे गाउन को निकाल दिया और मैं ब्रा पेंटी में उसके सामने थी।

उस वक्त मेरे तने हुए दूध ऐसे लग रहे थे जैसे कि ब्रा को फाड़कर बाहर निकल आएंगे।
अनिल मुझे ऊपर से नीचे की तरफ देखने लगा और मैं शर्माती हुई अपने दोनों हाथों से अपने गुप्तांगों को ढकने लगी।

अनिल झुका और मेरे सीने पर अपना मुँह लगा दिया और मेरे सीने को चूमने लगा।
मैं अपने सीने को उसके चेहरे पर दबाने लगी और अनिल भी मेरी पीठ को दबाते हुए मुझे अपने से चिपकाने लगा।

जल्द ही अनिल ने मेरे ब्रा के हुक खोल दिए और मेरे ब्रा को निकाल दिया।
अब मेरे दोनों दूध उछलकर उसके सामने आ गए.

मेरे वक्ष देखने के बाद उससे रहा नहीं गया और वह मेरे दूध पर टूट पड़ा।
उसने मेरे एक निप्पल को अपने मुंह में भर लिया और बड़ी बेदर्दी से चूसने लगा।

उसके इस प्रकार से चूसने से मुझे काफी दिक्कत हो रही थी लेकिन उस वक्त मुझे उससे भी ज्यादा मजा आ रहा था।

अनिल ने मेरे दूसरे दूध को अपनी मुट्ठी में भर लिया और जोर जोर से मसलने लगा।
मेरा दूध इतना बड़ा है कि उसकी मुट्ठी में आधा भी नहीं समा रहा था।

वह बारी बारी से मेरे दोनों निप्पलों को चूस रहा था और दोनों दूध को बुरी तरह से मसल रहा था।
पहले कुछ देर तो उसके मसलने से मुझे तकलीफ हुई लेकिन फिर मजा आने लगा।

मुझे भी लग रहा था कि अनिल ऐसे ही मुझे मसलता रहे.
क्योंकि मैं खुद चाह रही थी कि वह मुझे बुरी तरह से मसल डाले और मेरी इतने सालों की प्यास बुझा दे।
अनिल ठीक वैसा ही कर रहा था जैसा मैं चाह रही थी।

वह भी 10 सालों से प्यासा था और वह भी आज अपनी प्यास बुझाने के लिए उतावला था।
काफी देर तक वह मुझे वहीं पर खड़ी करके मेरे दूध को निचोड़ डाला।

उसके बाद उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और पहले अपनी बनियान और फिर अपनी हाफ पैंट निकाल दी।

अब वह भी बिस्तर पर आ गया और मेरे ऊपर हो गया।
उस वक्त हम दोनों ही केवल चड्डी में थे।

जैसे ही वह मेरे ऊपर आया और उसका नंगा बदन मेरे नंगे बदन से टकराया मेरे मुँह से आआह निकल गई।
उस ठंडे कमरे में दोनों के गर्म गर्म बदन का मजा ही अलग था।

इतने सालों बाद मुझे किसी मर्द के नंगे बदन का स्पर्श मिला था।

मैंने अपने दोनों हाथों से उसे जकड़ लिया और उसकी पीठ पर अपने नाखून गड़ाने लगी।

अनिल ने अपने दोनों हाथों में मेरे दूध को भर लिया और मेरे होठों को चूमते हुए दूध को जोर जोर से मसलने लगा।

मैं भी उसका पूरा साथ दे रही थी और हम दोनों बारी बारी से एक दूसरे के होंठ चूस रहे थे।

कुछ देर बाद अनिल मेरे बदन को चूमता हुआ नीचे की तरफ जाने लगा और जल्द ही वह मेरी चूत के पास पहुंच गया।

पहले तो उसने मेरी एक टांग को उठाकर अपने कंधों पर रख लिया और मेरी गदराई हुई जांघ को चूमते हुए अपने दांतों से काटने लगा।

मैं उसके इस काम से तड़प उठी और बिस्तर पर इधर उधर मचलने लगी- आह आह आहह ऊऊह ऊऊऊ ओऊऊ ऊफ़्फ़ ऊह ऊह।

उसने मेरीदोनों जांघो को बुरी तरह से काटा और चूमा।
उसका इस तरह से काटना मेरे जोश को दुगना कर रहा था।

जल्द ही उसने मेरी पेंटी को पकड़ा और नीचे करते हुए निकाल दिया।
अब मैं पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी और अपनी चूत को अपने हाथ से ढक रही थी।

अनिल ने मेरे हाथों को अलग किया और मेरी चूत के पहले दर्शन किये।

जिस तरह से मैं गोरी हूँ उस तरह ही मेरी चूत गुलाबी रंग की है और इतने सालों से अनछुई होने के कारण किसी कुँवारी लड़की से कम नहीं थी।

कुछ देर तक मेरी चूत को देखने के बाद अनिल ने अपना हाथ मेरी चूत पर रखा.
और उस वक्त मेरा पूरा बदन कांप उठा।

अनिल ने अपनी उंगली से चूत को फैलाया और कुछ देर उंगली से चूत को सहलाने के बाद अपना मुँह मेरी चूत में लगा दिया।
वह अपनी जीभ चूत में चलाने लगे और मैं बिस्तर पर मचल उठी- सीईई ईईई ईईई सीईई ईईई ऊऊ ऊफ़्फ़ उफ़।

मेरी चूत पानी से लबालब भर गई थी और अनिल चाट चाट के पूरी चूत को साफ करते जा रहा था।
जिस प्रकार अनिल मेरी चूत में जीभ चलाता जा रहा था, वैसे ही मेरी चूतड़ अपने आप ऊपर नीचे मचल रही थी।

एक बार तो ऐसा हुआ कि अनिल ने मेरी पूरी चूत को ही अपने मुँह के अंदर भर लिया और जोर से चूसने लगा।
उस वक्त मैं इतनी ज्यादा मचल उठी थी कि अपनी गांड को पूरी तरह से हवा में उठा दी और जोर से चिल्लाई- ऊऊई ईईई मम्मीई ईई आआहह हह!

उसके बाद अनिल ने चूत के दाने को अपने दाँत से कुरेदना शुरू कर दिया।
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे वह मेरे जिस्म की गर्मी को जांच रहा था।

मैं बिल्कुल व्याकुल हो गई और मुझे ऐसा लगने लगा कि बस अब अनिल मुझे चोद डाले।

जैसे जैसे अनिल चूत के दाने को कुरेद रहा था, मेरी सहन शक्ति जवाब देती जा रही थी और मैं उस आंनद को ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसके मुख में ही झड़ गई।

जैसे जैसे मैं झड़ रही थी वैसे वैसे चूत से पानी की पिचकारी अनिल के मुँह में पड़ रही थी।

अनिल भी उस वक्त इतना जोश में आ गया था कि उसे बिल्कुल भी गंदा नहीं लग रहा था और वह चूत चाटता जा रहा था।

मैं झड़ गई थी, अनिल इसको समझ रहा था इसलिए वह मुझे दुबारा गर्म करके की कोशिश करने लगा।

कुछ देर और चूत चाटने के बाद वह मेरे ऊपर लेट गया और मुझे पलटते हुए मुझे अपने ऊपर ले लिया।

अब उसने मुझे और ऊपर किया और मेरे दूध को अपने मुँह में रख लिया।
अब उसने बारी बारी से दोनों निप्पलों को बुरी तरह से चूसना शुरू कर दिया और अपने हाथों से मेरी बड़ी बड़ी चूतड़ को मसलने लगा।

इधर वह मेरे निप्पलों को चूस रहा था, उधर अपनी उंगलियां गांड की दरार में डालकर गांड के छेद को रगड़ रहा था।
मुझे गंदा तो लग रहा था कि वह मेरी गांड के छेद को रगड़ रहा है लेकिन मुझे उसमें उतना ही मजा आ रहा था।

उन्होंने जल्द ही मुझे एक बार फिर से गर्म कर दिया था और अब मुझे लग रहा था कि जल्द ही लंड मेरी चूत में उतर जाए।

अनिल भी इस मामले में काफी अनुभवी ठा और वह समझ गया कि अब देर करना सही नहीं है।
उसने मुझे अपने ऊपर से हटाकर बिस्तर पर लिटा दिया और अपनी चड्डी निकाल दी।
पहली बार मैंने उसके लंड को देखा।

जैसा कि मैंने अनुभव किया था बिल्कुल वैसा ही उनका लंड कोई आम लंड नहीं था।
जिस प्रकार अनिल 6 फ़ीट लम्बा औऱ हट्टा कट्टा ठा, बिल्कुल वैसा ही उनका लंड था जो कि लगभग 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था।
लंड का सुपारा ही देखने से पता चल रहा था कि ये लंड आज मेरी हालत खराब कर देगा।

मैंने तो अपने हसबैंड के अलावा कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया ठा और मेरे हसबैंड का लंड मात्र साढ़े पांच इंच का था।
उस हिसाब से अनिल का 7 इंच लंबा लंड मेरे लिए तो कुछ ज्यादा ही था।

7 सालों से मैं चुदाई नहीं की थी और मेरी चूत इतने सालों में किसी कुँवारी लड़की की तरह ही थी।

अब अनिल नंगा होकर मेरे ऊपर आ गया।

मेरा बदन चुदाई के लिए इतना तड़प रहा था कि मेरे दोनों पैर अपने आप ही फैल गए और अनिल को अपनी चूत के आगोश में भर लिया।

अनिल अपने हाथों से लंड पकड़ कर मेरी चूत में ऊपर नीचे करते हुए सहलाने लगा.
फिर सुपारे को चूत के छेद में लगाकर मेरी एक जांघ को ऊपर उठा लिया जिससे मेरी चूत फैल गई।

अब अनिल ने जोर देना शुरू किया और लंड अंदर जाने लगा।
जैसे जैसे लंड अंदर जा रहा था मुझे चूत के फैलने का साफ साफ पता चल रहा था।

सुपारा मेरी चूत में जैसे ही गया मेरे मुंह से आआह निकल गई।

जैसे तैसे करते हुए अनिल ने आधा लंड अंदर कर दिया और फिर उसने मेरी दोनों जांघो को अपने हाथ में फसाकर मेरे पैरों को ऊपर उठा लिया।

अब उसने एक बार में ही अपना पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया।
इतने सालों से सूखी पड़ी मेरी चूत में उसका मोटा लंबा लंड गया तो मेरी चीख निकल गई और मैं चिल्लाई- आआई ईईई मम्मीईईई ऊऊऊऊ आआ आआह ऊऊ उफ़।

अनिल ने मुझे कसकर पकड़ लिया और आधा लंड बाहर निकाल कर दुबारा से अंदर डाल दिया।
मैं पसीने से बिल्कुल तरबतर हो गई लेकिन मैं उसका साथ देती रही।

अनिल ने तीन चार बार ऐसे ही लंड को आधा निकालते हुए अंदर डालता रहा और जल्द ही मेरी चूत उस लंड को आराम से अपने अंदर लेने लगी मतलब चूत उस लंड के हिसाब से फैल गई थी।

कुछ देर अनिल ने आराम से लंड अंदर बाहर करते हुए मुझे चोदा और जल्द ही उसकी रफ्तार तेज होने लगी।

मुझे भी अब मजा आने लगा था और मैं अपनी आँखें बंद करके चुदाई का मजा लेने लगी।
मेरे मुँह से बड़ी ही अश्लील आवाजें निकल रही थी- ऊफ़्फ़ ऊ ऊऊआ आह आआह ऊऊऊ आआ हहह ऊउफ़्फ़ ऊ!

जल्द ही अनिल की रफ्तार इतनी तेज हो गई कि पूरा पलंग बुरी तरह से हिलने लगा।
उसके तेज तेज धक्के मेरी चूत पर चट चट करते हुए पड़ रहे थे।

उसका लंड जब चूत के आखिरी छोर पर पहुँचता तो ऐसा लगता कि वह मेरे बच्चेदानी से टकरा रहा था।

करीब पांच मिनट तक अनिल मुझे तेजी से चोदता रहा जिससे मैं जल्द ही झड़ गई और मेरे झड़ने के तुरंत बाद ही अनिल भी झड़ गया।

हमारी पहली चुदाई मात्र पांच मिनट ही चली.
लेकिन मैं समझ रही थी कि इतने सालों बाद अनिल ने चुदाई की है तो जल्दी झड़ना ही है।

कुछ देर अनिल मेरे ऊपर ही लेटे रहे फिर लंड निकालकर मेरे बगल में लेट गया।
मैं शर्म के कारण चादर खींच कर ओढ़ ली और आराम से लेट गई।

अनिल मेरे बगल में बिल्कुल नंगा लेटा हुआ था, उसका लंड खड़ा हुआ था.
वह आँखें बंद किये हुए लेटा हुआ था और उसका बदन पसीने से भीगा हुआ था।

मेरी नजर बार बार अनिल के लंड कि तरफ जा रही थी जिसे देखने में मेरे अंदर अलग ही जोश आ रहा था।

धीरे धीरे उसका लंड ढीला होते हुए उसके पेट के ऊपर आ गया लेकिन उसका सुपारा अभी भी बाहर निकला हुआ था।

कुछ ही देर में हम दोनों की साँसें बिल्कुल नार्मल हो गई और बदन का पसीना भी सूख गया।

दोस्तो, यह तो थी हम दोनों की पहली चुदाई!
लेकिन इसके आगे की चुदाई में क्या क्या हुआ और अनिल मेरे घर पर जितने दिन रहे और उन्होंने किस तरह से मुझे चोद चोद के बेहाल कर दिया।
ये सब जानने के लिए आप ऑफिस Xxx चुदाई कहानी का अगला भाग जरूर पढ़ें।
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ऑफिस Xxx चुदाई कहानी का अगला भाग: जवान विधवा की जिस्मानी प्यास- 3

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