लेडी डॉक्टर के घर में बिताये दो दिन- 1

(Sexy Doctor Ki Chudai Kahani)

हर्षद मोटे 2022-09-29 Comments

सेक्सी डॉक्टर की चूत चुदाई का मजा मुझे दिया डॉक्टर ने मुझे अपने घर बुलाकर. मैं डॉक्टर को पहले भी चोद चुका था। कई महीने बाद हमें दोबारा मिलने का मौका मिला।

अन्तर्वासना के सभी दोस्तों को हर्षद का प्यार भरा नमस्कार।
मैं फिर से आप लोगों के लिए एक नयी कहानी लेकर आया हूं; आशा है इससे आपका मनोरंजन खूब होगा।

मैं डॉ. रेखा के साथ अपनी कहानी आपको सुनाने जा रहा हूं।
मेरी मुलाकात सेक्सी डॉक्टर रेखा से तब हुई थी जब मैं अपने बेटे के इलाज के लिए उनके पास गया था।

उनके पति भी एक डॉक्टर हैं और पुणे के एक बड़े हॉस्पिटल के डीन हैं।

उनके पति हॉस्पिटल में ही रहते थे। रेखा के पास वो हफ्ते में एक दिन आते थे और वापस चले जाते थे।
डॉ. रेखा की चुदाई का मजा मैं ले चुका था, जो मैंने आपको अपनी पिछली कहानी में बताया था।

अब हमें मिले हुए 6 महीने के लगभग का समय हो गया था; सिर्फ फोन पर ही बातें हो रही थीं।

एक दिन मैं अपने ऑफिस में था तो डॉ. रेखा का कॉल मेरे पास आया।

मैंने फोन उठाया तो वो बोली- कैसे हो हर्षद? लंच किया?
मैं बोला- ठीक हूं, तुम कैसी हो?
वो बोली- मैं भी ठीक हूं, लेकिन … फोन पर बात करने से मन नहीं भरता, तुमसे बात करती हूं तो आग और सुलग जाती है।

तो मैंने कहा- हां, ये बात तो तुम सही कह रही हो।
वो बोली- एक खुशखबरी है।
मैंने पूछा- क्या?
वो बोली- मेरे पति 3 दिन के लिए मुंबई जा रहे हैं सेमिनार में। तुम चाहो तो 2 दिन मेरे साथ रुक सकते हो।

ये सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे।
मैंने पूछा- कब जा रहे हैं?
रेखा- कल सुबह ही निकल जाएंगे, अपने घरवालों को क्या बोलना है ये तुम देख लेना!

मैं बोला- हां, वो तुम मुझ पर छोड़ दो। मैं कल दोपहर तक तुम्हारे वहां पहुंच जाऊंगा।
फिर मैंने फोन रख दिया और बॉस को 2 दिन की छुट्टी देने के लिए रिक्वेस्ट भेज दी।

किस्मत से मुझे छुट्टी मिल गई और मेरी खुशी का ठिकाना न रहा।

फिर मैं घर पहुंचा और मम्मी पापा के साथ बैठकर चाय पी।
चाय पीते हुए मैंने उनसे भी कह दिया कि मैं 2-3 दिन के लिए मुंबई में एक सेमिनार में जा रहा हूं।
उन्होंने भी जाने के लिए हां कर दी।

अगली सुबह मम्मी ने मुझे 7 बजे उठा दिया।
मैं जल्दी से नहाया और नाश्ता किया।

फिर अपने बैग में रोज की जरूरत का सारा सामान भर लिया और जाने के लिए तैयार हो गया।
मैं बाइक से निकला और 10 बजे डॉक्टर रेखा के घर पहुंच गया।

प्लान के मुताबिक गेट पहले से खुला हुआ था।
मैंने बाइक को अंदर लगा दिया और गेट को अंदर से लॉक कर दिया।

मैं ऊपर गया तो रेखा मेरा इंतजार कर रही थी। मैं उसे देखता रह गया।
उसने ऊपर सफेद ब्लाउज और नीचे सफेद रंग का ही शॉर्ट स्कर्ट डाला हुआ था।

उसके गोरे स्तन बाहर निकले हुए दिख रहे थे।
स्तनों की गहरी दरार बहुत उत्तेजित कर रही थी।
ब्लाउज में उसके भूरे रंग के निप्पल भी अलग से चमक रहे थे।

स्कर्ट में उसकी मांसल जांघें, उठी हुई भारी गांड देखकर मैं तो उसे चोदने के लिए जैसे तड़प सा गया।

कब वो मेरे पास आयी मुझे तो पता ही न चला।
मेरे हाथ से बैग लेते हुए उसने कहा- क्या हुआ, क्या देख रहे हो ऐसे?
मैं बोला- कुछ नहीं, तुम्हें बहुत दिनों के बाद देख रहा हूं, इसलिए नजर नहीं हटी।

वो मुस्कराकर बोली- तुम हाथ-मुंह धो लो, मैं बैग रखकर आती हूं।
रेखा गांड मटकाती हुई चली गई; फिर बैग रखकर लौटी।

आते ही वो सेक्सी डॉक्टर मेरे गले से लग गई और फिर मेरे होंठों और गालों को चूमने लगी।
उसके होंठ मेरी गर्दन पर चूमने लगे तो मैंने भी उसको कस कर अपनी बांहों में भींच लिया।
मैं भी उसे जहां-तहां चूमने लगा।

पांच-सात मिनट तक ये चूमा-चाटी चली; फिर हम अलग हो गए।
उसने पूछा- चाय लोगे या ठंडा?
मैंने कहा- कुछ ठंडा ही लेते हैं लेकिन एक शर्त पर …

वो बोली- कैसी शर्त?
मैंने कहा- हम दोनों दो दिन बिना कपड़ों के ही रहेंगे।
वो मेरी तरफ मुस्कराते हुए बोली- तुमने तो मेरे मुंह की बात छीन ली।

हम जल्दी से नंगे हुए और दोनों एक दूसरे की गांड सहलाते हुए रूम में आ गए।
मैं सोफे पर बैठ गया और रेखा ठंडा लेकर आ गई।

हम दोनों बैठकर ठंडा पीने लगे।

उसने मेरी जांघ पर हाथ रखा और बोली- कितने दिनों के बाद मिले हैं हम दोनों! रात को जब मैं बेड पर अकेली होती थी तो तुम्हारी बहुत याद आती थी। तुम्हें अपने अंदर महसूस करते हुए मेरी चूत हमेशा गीली हो जाती थी।

ये सुनकर मैंने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए उसके चूचों तक ले गया।
इससे उसकी हल्की सिसकारी निकली और बोली- तुम्हारे छूने से पूरे बदन में बिजली सी दौड़ जाती है।
मैं चुपचाप उसके स्तनों को सहलाने लगा।

वो हल्की मदहोशी में जाने लगी।
फिर जल्दी से हमने ठंडा पीकर खत्म किया और वो किचन में गिलास रखकर फिर से मुझसे चिपक कर आ बैठी।

वो बोली- नाश्ता करना है क्या तुम्हें अभी?
मैंने पूछा- तुमने किया है?
वो बोली- हां।

मैंने ना में गर्दन हिला दी तो रेखा ने अपना सिर मेरे कंधे पर रख दिया और एक हाथ मेरी जांघ पर।

वो मेरी जांघ को सहलाते हुए बोली- मैं तुम्हें बहुत चाहती हूं। अभी दो दिन अकेली हूं और तुम्हें बिल्कुल अकेला नहीं छोड़ूंगी। एक पल के लिए भी तुमसे दूर नहीं रहूंगी।
मैं बोला- तुम्हारे बिना मेरा भी यही हाल हो गया था।
कितनी ही बार मेरा लंड तुम्हारी मुलायम चूत के बारे में सोचकर झड़ा है रातों को।

उसने अपना हाथ अब मेरे लंड पर रख दिया और सहलाने लगी, जो पहले से ही तना हुआ था।
मैं बोला- मेरा ये लंड तुम्हारी गुलाबी और उभरी हुई चिकनी चूत का दीवाना हो गया है।

ऐसा कहते हुए मैंने रेखा की चूत पर हाथ रखकर उसे सहलाना शुरू कर दिया।
मेरा हाथ उसकी चूत पर गया तो उसने जांघें फैला दीं।

जैसे-जैसे मेरा हाथ उसकी चूत पर चलने लगा, उसके मुंह से सीत्कार निकलने लगे- आह्ह हर्षद … बहुत दिनों के बाद तुम्हारे हाथ का स्पर्श पाकर मेरी चूत मचलने लगी है … ऐसे ही सहलाते रहो … बहुत मजा आ रहा है।

रेखा ने मेरे लंड पर हाथ को कस दिया और उसको मसलने लगी।
मेरा लंड फड़फड़ाने लगा; वो विकराल रूप में आ चुका था।

अब मैंने अपने हाथ की बीच वाली उंगली उसकी चूत में अंदर सरका दी।
उसकी चूत अंदर से पूरी गीली हो चुकी थी।

उंगली जाते ही रेखा सिहर गई।
वो सिसकारते हुए बोली- आह्ह … हर्षद … तुम मेरी चूत की आग को और ज्यादा भड़का रहे हो।

उसने मेरे हाथ पर अपना हाथ भी रख लिया और चूत पर दबाने लगी।
मैं दूसरे हाथ से उसके चूचों को रगड़ने लगा।

थोड़ा दर्द में सिसकारते हुए वो बोली- आह्ह … आराम से दबाओ हर्षद, इनमें दर्द हो रहा है, लाल हो गए हैं।
मैं बोला- इतने गोरे, गोल-मटोल, सेक्सी चूचे देखकर मैं रुक नहीं पाता हूं रेखा, और वैसे भी … कितने दिनों के बाद मिले हैं … कंट्रोल नहीं हो रहा है।

फिर उसने मेरे लंड को अपने दोनों हाथों में थाम लिया और सहलाते हुए बोली- आह्ह … ये पहले से और मोटा हो गया लगता है। अब ये तुम्हारा मूसल मेरी चूत में गया तो फाड़ कर रख देगा।

मैं सोफे के किनारे आकर पीछे कमर लगाकर बैठ गया ताकि लंड ऊपर आ जाए।
रेखा भी वैसे ही बैठ गई।

मैं तेजी से उसकी चूत में उंगली चलाने लगा।

वो बोली- आराम से करो हर्षद … ऐसे ही मजा आ रहा है।
फिर उसने मेरे लंड की गोटियों को भी सहलाना शुरू कर दिया।
मैं उसकी चूचियों में मुंह लगाकर पीने लगा और बारी-बारी से उसके दोनों मम्मों को चूसने लगा।

चूचियां पीते हुए मैं दो उंगलियां उसकी चूत में चलाने लगा।
इससे वो एकदम से उचकने लगी।

मैं बोला- पहले से टाइट लग रही है चूत, मेरी दो उंगलियां इसमें अब फिट आ रही हैं। आज शायद मेरा लंड तुम्हारी चूत का ऑपरेशन कर ही देगा।
रेखा मेरा लंड जोर से रगड़ते हुए बोली- हां, मुझे भी यही लगता है।

मैं तेजी से उसकी चूत में उंगली करने लगा तो वो मेरा हाथ अपनी चूत पर दबाकर जोर जोर से सिसकारियां लेने लगी- आह्ह … आईई … अम्म … ऊईई … ऊऊऊ … आराम से … आहाह।

जब तक मैं कुछ और करता उसकी चूत से पानी निकलने लगा और मैंने जल्दी से अपने होंठ उसकी चूत पर लगा दिए।
मैं सेक्सी डॉक्टर की चूत का खट्टा-मीठा रस मैं पीने लगा।

रेखा लगातार कसमसा रही थी और उसका बदन हल्का हल्का कांप रहा था।
उसने एक हाथ से मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा रखा था।

मैंने उसकी चूत का सारा रस चाट लिया।
उसकी चूत बहुत गोरी और चिकनी लग रही थी, शायद आज सुबह ही बाल साफ किए थे उसने!

फिर हम दोनों खड़े हो गए।
उसने मुझे एक गोली दी और एक खुद खा ली।
वो बोली- विटामिन की गोली है, इसे चूसते रहना।

फिर वो मेरे गले में बांहें डालकर चूमने लगी और मैं भी उसका साथ देने लगा।

अब हम दोनों की जीभ आपस में लड़ने लगीं।
गोली की वजह से मुंह से बहुत मादक खुशबू आ रही थी।

मेरा लंड रेखा की चूत पर बार-बार ठोकर खा रहा था।
वो भी अपनी दोनों टांगें थोड़ी सी फैलाकर लंड को चूत पर अच्छे से रगड़वाने लगी।

मैंने दोनों हाथों से उसकी गोरी, मांसल और बाहर निकली गांड को भींचना शुरू कर दिया और लंड को उसकी चूत पर जोर से रगड़ने लगा।
बीच-बीच में मैं उसकी गांड के छेद पर उंगली से सहला भी रहा था।

वो बोली- बहुत गुदगुदी हो रही है हर्षद … लेकिन मजा भी आ रहा है।
फिर वो दोनों हाथों को मेरी गांड पर रखकर सहलाने लगी।
वो भी मेरी गांड की दरार में उंगली फिरा रही थी।

हम दोनों मदहोश हो रहे थे।
वो बोली- अब और नहीं रुका जा रहा … चलो बेडरूम में … तुम्हारा ये लंड अब चूत में लेने की इच्छा हो रही है।
मैं- हां, मैं भी तुम्हें चोदने के लिए तड़प गया हूं रेखा!

वो बोली- चलो फिर, इंतजार किस बात का कर रहे हो?
मैंने कहा- इतने दिनों के बाद मिले हैं, थोड़ा चूस दो ना इसे जान … बहुत मन कर रहा है, फिर बेडरूम में जाकर चुदाई का पूरा मजा लेते हैं।

रेखा भी जैसे बस कहने भर का इंतजार कर रही थी।
वो फटाक से अपने घुटनों पर बैठी और मेरे मूसल लंड को अपने मुंह में लेकर जोर जोर से चूसने लगी।

रेखा ऐसे चूस रही थी जैसे ये कोई लॉलीपोप है जिसमें से मीठा पानी निकलता हो।
मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … रेखा … ओह्ह रेखा … आह्स्स … स्स्स … आईई … उफ्फ मेरी जान … चूस चूस कर खा लो इसे … बहुत तड़पा है तुम्हारी चूत की याद में!

मेरे हाथ रेखा के सिर पर चले गए और मैं गांड आगे पीछे चलाते हुए उसके मुंह को चोदने लगा।
वो भी मेरे लंड को गले तक ले जाती थी लेकिन एक पल बाद फिर से निकाल देती थी।

कुछ ही देर में उसका चेहरा लाल होने लगा और उसकी सांस फूलने लगी।

फिर उसने मुंह से लंड को निकाला तो वो पूरा उसकी लार में गीला हो चुका था।
हांफते हुए वो बोली- चलो हर्षद … अब रूम में चलो। वहीं करना जो कुछ करना है।

मैंने उसकी बात मान ली और हम दोनों एक दूसरे की गांड सहलाते हुए बेडरूम में चले गए।

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