चुदाई का फैशन- 1

(Xxx Style Sex Kahani)

सनी वर्मा 2026-01-18 Comments

Xxx स्टाइल सेक्स कहानी में स्वयम् को आधुनिक मानने वाले 2 परिवारों की 2 पीढ़ियों की है. अपने को अन्य लोगों से बेहतर और मॉडर्न दिखाने में चक्कर में चरित्रपतन कर लेते हैं.

दोस्तो, आज की कहानी आधुनिकता के पीछे अंधाधुंध भागने वाले उन परिवारों की कहानी है जिन्होंने आधुनिकता के नाम पर पाश्चात्य संस्कृति के पीछे भागते-भागते पारिवारिक मूल्यों को बिलकुल समाप्त कर लिया है.
एक अंधे कुंएं में गिर कर जो हो रहा है उसे वे स्वीकार करते जाते हैं और अंत में हाथ आता है एक टूटा और बिखरा हुआ परिवार जहां आपसी सामंजस्य और विश्वास तो कहीं है ही नहीं.

Xxx स्टाइल सेक्स कहानी है शालीमार बाग़ में रहने वाले ब्रिगेडियर सतीश कपूर के परिवार की.

ब्रिगेडियर साहब के बड़े भाई जमाने पहले इंग्लॅण्ड पढने गए तो वहीं बस गए.
एक गोरी से शादी कर ली और पूरे विदेशी हो गये.

उनकी एक लड़की थी जो 18 साल की उम्र से पहले ही किसी गोरे के साथ रहने लगी और आज तक बिना शादी किये रहती है.
उन्हें घूमने का बहुत शौक है.

ऐसा सुनते हैं कि वो न्यूडिस्ट हैं. यानी घर पर या बाहर बीच वगेरा पर बिना कपड़ों के रहना पसंद करते हैं.
और मजे की बात यह है कि कपूर साहब की गोरी घरवाली उन्हें बहुत पसंद करती है और कई बार उनके साथ बाहर भी घूम आई है.
अब ये तो पता नहीं कि उनके साथ बाहर घूमने पर उसने कपड़े पहने या नहीं.

पर हाँ सतीश कपूर और उनकी पत्नी कामिनी कपूर उसकी गोरी चमड़ी और खुलेपन से बहुत प्रभावित रहते हैं.

ब्रिगेडियर साहब ने नौकरी से जल्दी ही वीआरऐस ले लिया था और वो साल में 15 दिन के लिए इंग्लॅण्ड जरूर जाते थे.
वहां वो बिलकुल वहीं के होकर रहते.

कपूर ब्रो और देवरानी जेठानी उन 15 दिनों में आपसी रिश्ते भूल जाते और जम कर शराब और शवाब का मजा लूटते.

कामिनी जो शालीमार बाग में सलवार सूट या ज्यादा से ज्यादा जींस टॉप में दिखतीं, इंग्लॅण्ड में तो शॉर्ट्स और फ्रॉक से ज्यादा कुछ पहनती ही नहीं थी.
स्विमिंग पूल या बीच पर बड़ी बेशर्मी से टू पीस बिकनी पहनतीं.

हाँ, कामिनी ने सिगरेट और व्हिस्की पीनी अपनी गोरी जेठानी से सीखी.
अब कामिनी भी दिल्ली में अकेले होने पर बिना कपड़ों के रहने की कोशिश करतीं पर हमारे हिन्दुस्तान में तो कभी बाई, कभी कपड़े प्रेस वाला, कभी सब्जी वाला आता ही रहता है तो कामिनी कपूर को बार बार कपड़े पहनने पड़ते.

सतीश और कामिनी को सेक्स का बेहद शौक था.
एक तो फौज की जिन्दादिली, फिर इंग्लॅण्ड की यादें, उन्हें हर रात जवान रखतीं.

उनके एक ही बेटी थी शालिनी.
जब तक वो नासमझ थी, तब तक कपूर साहब और कामिनी उसके सामने ही सब कुछ कर लिया करते, साथ ही नहाते.

पर जब से शालिनी ने अपनी मॅाम से पूछना शुरू कर दिया कि पापा के ये जो सूसू वाला है वो आपके और मेरे क्यों नहीं है, तब से कामिनी ने उसे साथ नहलाना बंद कर दिया.
पर खुद वो हमेश कपूर साहब से लिपटकर ही नहाती.

शालिनी के लिए एक फुल टाइम आया रज्जो रखी हुई थी, जिसे कोठी के बाहर की हिस्से में एक कमरा दिया हुआ था, जिसमें वो और उसका पति रहते थे.
पति दिन में बाहर काम करता और रात को आकर सोता था.

जब कपूर साहब और कामिनी एक दूजे में लगे होते तो उस समय आया शालिनी बेबी को संभालती.

कामिनी के बेडरूम का डोर बंद होने की स्थिति में रज्जो को सख्त आदेश था कि वो उन्हें डिस्टर्ब न करे.
अब तो रज्जो को भी आदत पड़ गयी थी कामिनी को बहुत कम कपड़ों में देखने की.
कितनी बार तो कामिनी के बेडरूम से उसकी आहें और सीत्कारें बाहर तक आतीं.
पर इन सबके एवज में रज्जो को अच्छी नौकरी और कपड़े, साथ में खाना पीना मिलता था.

और एक चीज़ जो बोनस में मिलती थी, वो थी कपूर साहब द्वारा उसकी चुदाई.

हाँ, रात को अपने क्वार्टर में जब रज्जो अपने पति के ऊपर चढ़ कर उसकी चुदाई करने की कोशिश करती तो उसके पति का तो ढंग से खड़ा भी नहीं हो पाता था.
वो कमजोर और नपुंसक था.
उसके बस का नहीं था बच्चे पैदा करना.
इसलिए रज्जो उससे नाराज रहती.

कामिनी के किटी या बाज़ार जाने पर जब भी मौक़ा मिलता कपूर साहब रज्जो को चोदते.
अक्सर कामिनी तो उससे अपनी तेल मालिश करवाती ही थी.

कामिनी तेल मालिश करते समय बीच पर मसाज के वो ख्वाब देखती जो उनकी गोरी जिठानी ने उन्हें दिखाए होते.
कहना न होगा कि वो आया से अपने हर अंग की मसाज कराती होंगी.
वरना कौन मेम अपनी आया को हर महीने नया कपड़ा और मेकअप का सामान देगी.

कामिनी की देखा देखी रज्जो भी अपनी चूत और जिस्म चिकना रखती.

शालिनी अब बड़ी हो गयी थी.
उसकी गिनती कॉलोनी की सबसे ज्यादा बिगड़ी लड़कियों में होती.
अब बिगड़ती भी भला क्यों नहीं. शराब पीना उसे कपूर साहब ने ही सिखाया और जिस्म की नुमाइश कामिनी ने.

शालिनी कभी कपड़े पहन कर नहीं सोयी.
ब.चपन से ही उसने ये देखा कि कपूर साहब और कामिनी हमेशा नंगे ही सोये, वो ही उसकी बालक बुद्धि पर बस गया.

इसलिए सुबह कामिनी ही सबसे पहले शालिनी के रूम में जातीं और पंजाबी इंग्लिश की मिलीजुली गालियों में उसे चादर उढ़ाती.

शालिनी डेली शाम को क्लब जाती.
उसे रात को छोड़ने हर रात नयी गाड़ी आती.
गाड़ी जब गेट पर रूकती तो शालिनी उसमें से दो मिनट बाद ही उतरती, टिश्यू से अपने बिखरी हुई लिपस्टिक को संभालते, डगमगाते क़दमों से.

कामिनी या सतीश कपूर ने उससे कभी नहीं पूछा कि रोज वो कहाँ जाती है और क्या करती है.
सतीश कपूर कुछ कहते भी तो कामिनी उन्हें रोक देतीं की बच्चे हैं, मजे तो करेंगे ही. फिर शादी के बाद थोड़े ही न मौक़ा मिलेगा.

एक रात शालिनी घर नहीं आई.
मोबाइल उसका बंद था.

कामिनी तो अपनी चुदाई के बाद एक पेग लगा कर सो गयी.
पर कपूर साहब रात भर चहलकदमी करते रहे.
वे बार बार गेट पर हो आते.

सुबह चार बजे एक गाड़ी रुकी.
उसमें से शालिनी उतरी, नशे में धुत्त, कपड़े अधखुले.

वो जब तक बाहर आते, गाड़ी जा चुकी थी.
गेट खोल कर कपूर साहब शालिनी को अंदर लाये.

सिगरेट और शराब की बदबू भरी हुई थी उसके जिस्म में.
सुबह कपूर साहब ने कामिनी से बात की कि अब इसकी शादी करनी है.
कामिनी ने शालिनी से पूछा तो वो हंस कर बोली कि उसने तो शादी कर भी ली. एक पंजाबी बिज्नेसमैन है विवेक धींगरा. वो दोनों पिछले दो महीने से सेक्सुअल रिलेशनशिप में हैं.

अब सतीश कपूर और कामिनी को तो मानो सांप सूंघ गया.
शालिनी पर तो मानो कोई फर्क ही नहीं था.

अगला धक्का उन्हें तब लगा जब कामिनी ने उन्हें बताया कि कल रात वो विवेक और उसके दोस्त के साथ थी. विवेक को ज्यादा चढ़ गई थी. विवेक के दोस्त और उसने रात को सेक्स किया वो भी अनप्रोटेक्टेड.
कामिनी ने एक झन्नाटेदार चांटा मारा शालिनी के.

शालिनी चुप थी.

कामिनी ने शालिनी से कहा कि उन्हें विवेक के घर वालों से मिलना है.
वो तो किस्मत अच्छी थी कि विवेक के मां बाप बहुत सुलझे हुए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए वो शादी को तैयार हो गये और फटाफट शादी की तारीख भी तय कर दी गयी.
शादी से पहले कामिनी ने शालिनी की सफाई करवाई ताकि गर्भ वाला कोई झगड़ा न हो.

विवेक दबंग था और मजबूत कद काठी का था.
उसने शालिनी को स्पष्ट बोल दिया कि अब वो किसी और लड़के से मतलब न रखे. आगे ऐसा हुआ तो वो उसे गोली मार देगा.
शालिनी जानती थी कि विवेक जो कह रहा है, ऐसा वो कर भी सकता है.

विवेक ने उससे कह दिया कि जिन्दगी जैसे पहले जीते थे, वैसे ही अब भी जियेंगे. मस्ती में कोई कमी नहीं. पब पार्टी डिस्को डांस में कोई कमी नहीं.
पर विवेक को ये बर्दाश्त नहीं की शालिनी किसी और के साथ सेक्स करे.
बाकी किसी चीज़ में उसे कोई आपत्ति नहीं थी.
हाँ, वो दोनों जब साथ हों तो आपसी सहमति से कुछ भी कर सकते हैं.

शादी ठेठ पंजाबी तरीके से खूब मस्ती के साथ हुई.
रोज रात को शराब का दौर, जिसे आधुनिक शादियों में कॉकटेल पार्टी कहते हैं, फिर उन्मुक्त नाच गाने.
सब कुछ गोवा में था.
मौक़ा भी था और माहौल भी.

शादी के अगले दिन सुबह सारे घर वाले और रिश्तेदार वापिस चले गये.
रिसोर्ट में रह गये विवेक और शालिनी अपनी सुहागरात मनाने के लिए.

सुहागरात पर कुछ नया तो नहीं होना था.
शालिनी और विवेक दोनों ही कितनी ही बार सेक्स कर चुके थे.
पर सुहाग सेज की बात कुछ और होती है.

आज शालिनी के पूरे जिस्म पर मेहँदी लगी हुई थी.
ये विवेक की डिमांड थी कि जिस्म का कोई भी कौना मेहंदी से अछूता न रहे.

इसके लिए स्पेशल ग्रुप हायर किया गया था.
हाथ-पैर-पीठ-पेट की मेहंदी तो बॉयज आर्टिस्ट ने लगाई दो दिन पहले और एक दिन पहले शालिनी के मांसल मम्मों और चूत और पिछवाड़े को मेहंदी से रचा गर्ल्स आर्टिस्ट ने.

शीशे में देखने पर चेहरे के अलावा खुद शालिनी को कहीं भी अपनी गोरी चमड़ी नजर नहीं आई.
मम्मों पर एक पर s और एक पर v बना था डिजाईन में.

उस रात शालिनी को बिना कपड़ों के ही सोना पड़ा. हालांकि रात 2 बजे तक मेहँदी सूख गयी थी तो शालिनी ने पिछवाड़ा तो रगड़ लिया.

तो आते हैं उनकी सुहागसेज पर.

बेड पर शालिनी पंजाबी सलवार सूट में गहनों से लड़ी बैठी थी.
विवेक शेम्पेन लिए अंदर आया.

उसने शालिनी को नेग दिया और गोदी में उठा लिया.
दोनों के होठ मिल गये.

आज के चुम्बन में आग थी.
दो दहकते जिस्म एक दूसरे में समाने को बेताब थे.

शालिनी के जिस्म से आती मेहंदी की खुशबू ने पूरा रूम महका रखा था.
विवेक के हाथों में भी गहरी मेहंदी रची थी.
बीच में दिल की डिजाईन में शालिनी का नाम लिखा था.

विवेक ने शालिनी को नीचे खड़ा किया और कहा- ड्रेस चेंज कर लो, फिर शेम्पेन खोलेंगे.
शालिनी बोली- अभी खोलते हैं.

विवेक मुस्कुराया- अभी नहीं. इस शेम्पेन में तुम्हें नहलाना है. अब बताओ अभी करें या कपड़े …
शालिनी हंसती हुई अपनी झीनी सी नाईटी लेकर वाशरूम में चाली गयी.

पीछे पीछे विवेक भी आया तो शालिनी ने डोर लॉक कर लिया.
थोड़ी देर में पुराना मेकअप उतार कर और नया भारी मेकअप करके शालिनी बाहर आई.

झिलमिल रोशनी में वो बिल्कुल परी लग रही थी. नाईटी से उसका एक एक अंग झलक रहा था पर मेहंदी ने उसके जिस्म पर एक चादर सी डाल दी थी.
खनकती पाजेब और कलाइ भरी चूड़ीयाँ खनकाती शालिनी बेड के पास आई.

अब तक विवेक ने भी चेज कर लिया था.
वो एक लुंगी और स्लीवलेस कुरते में था.

विवेक ने शालिनी को जकड़ लिया.
उसके ख्वाबों की रानी उसकी ख्वाबो में देखी ड्रेस में उसकी बाहों में थी.

दोनों ने शेम्पेन को हिलाया और खोल दिया.
दोनों ने एक दूसरे को शेंपेन से नहला दिया और दोनों ने खूब घूँट भरे.

अब दोबारा वाशरूम जाना पड़ा.
दो बेकरार जिस्म एक दूसरे से लिपटे शावर के नीचे खड़े थे.

विवेक का लंड बेचैन था शालिनी की चूत में घुसने के लिए.
शालिनी तो बेसुध थी विवेक की बाहों में.

दोनों फटाफट टॉवेल लपेट कर बेड पर आ गये.

शालिनी हाथ पैर फैला कर आँखें बंद कर के लेट गयी.
उसके पैर के अंगूठे से उसके जिस्म के हर कोने को चूमता हुआ ऊपर आया.
आज उसकी एक हसरत पूरी हुई थी कि उसकी बीवी का हर अंग मेहंदी से सजा हो.

शालिनी की चूत और मम्मों पर जो चित्रकारी हुई थी, विवेक तो झूम उठा.

विवेक शालिनी के मम्मों को चूसकर आगे बढ़ ही नहीं पाया.
शालिनी के मम्मों ने उसे आगे बढ़ने ही नहीं दिया.
वो तो शालिनी ने उसके बाल पकड़कर उसे ऊपर खींचा और होंठ से होंठ मिलाये.

अब शालिनी ने हाथ नीचे किया तो उसके हाथ में विवेक का लंड आ गया.
शालिनी ने आँखें मूंदे मूंदे उसे मसलना शुरू किया.

विवेक उसके कान में फुसफुसाया- क्या तुम नहीं चूसोगी इसे?
शालिनी बैठी और उसने विवेक को लिटाकर जैसे ही उसका लंड अपने मुह में लेने को किया, वो चौंक गयी.

विवेक के लंड, गोटियों पर मेहंदी से चित्रकारी हुई हुई थी.

शालिनी ने उसे चूमते हुए मुख में ले लिया.
विवेक ने उसे 69 कर दिया.

अब दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे.
दोनों के नथुनों में मेहंदी की खुशबू थी.

विवेक चोदने को बेताब था.
उसने शालिनी को नीचे किया और उसकी टांगों को ऊपर करके फैलाते हुए अपना लंड पेल दिया.

शालिनी कितनी ही बार उसका लंड ले चुकी थी.
पर आज के लंड की बात कुछ और थी.
शालिनी की चीख निकली.

विवेक ने धकापेल एकदम से शुरू कर दी.
शालिनी भी उसका साथ दे रही थी और चुदाई की संगत कर रही थीं शालिनी की चूड़ियां और पाजेब.

थोड़ी देर की धमाचौकड़ी के बाद हमेशा की तरह शालिनी ऊपर आ गयी.
उसने अपनी चूत को लंड के ऊपर सेट किया और लगी उछलने.
उसके मम्मे और बाल हवा में लहरा रहे थे.

शालिनी के मम्मों को दबोचने की विवेक की कोशिश लगातार नाकाम हो रही थी.
शालिनी ने भरपूर चुदाई की विवेक की और दोनों का स्खलन लगभग एक साथ ही हुआ.

तब शालिनी विवेक की बगल में लुढ़क गयी.

दोनों ने बेड सुबह 10 बजे छोड़ा.
इस बीच उनकी चुदाई के तीन सेशन हुए.
सुबह उठने पर भी बदन टूटा हुआ था.

उन दोनों की शाम की फ्लाइट थी दिल्ली की.

प्रिय पाठको, अब तक की Xxx स्टाइल सेक्स कहानी कैसी लगी आपको?
[email protected]

Xxx स्टाइल सेक्स कहानी का अगला भाग:

What did you think of this story

Comments

Scroll To Top