बुआ की चूत की प्यास बुझाई उनके घर में- 2

(Foreplay Sex With Aunty)

फोरप्ले सेक्स विथ आंटी का मजा मैंने अपनी बुआ के घर में उसकी रसोई में बुआ की चूत चाट कर, उसकी गांड में उंगली करके उसको चुदाई के लिए तैयार करके लिया.

कहानी के पहले भाग
बुआ को दोबारा चोदने की चाहत
में आपने पढ़ा कि मैं और बुआ अपने पिछले किये सेक्स को याद करके वीडियो काल पर मुठ मार के और चूत में उंगली करके अपनी प्यास बुझाते थे.

अब आगे फोरप्ले सेक्स विथ आंटी:

सीधे मुख्य बात पर आते हैं।

1-1.5 महीने बाद आखिर एग्जाम डेट आई।
इस डेढ़ महीने के टाइम में मैं रेगुलर बुआ के साथ सेक्स चैट, गर्म बातें करके बुआ को उत्तेजित रखे हुए था।

मैंने बुआ से पहले ही बता दिया था कि जब एग्जाम होगा तो मेरे घर वाले आपसे मेरी आपके घर रूकने की बात करेंगे, तो आप संभाल लेना।

जब मैंने अपने घर में एग्जाम के बारे में बताया तो जब इतने दूर जाने और वहाँ रूकने की बात आई तो मेरे घरवालों ने खुद ही कहा, “चित्रा बुआ के यहाँ रूक जाना!”

यह सुनकर मैंने बिल्कुल नॉर्मल व्यवहार किया जैसे मुझे बुआ के घर जाने में कोई इंटरेस्ट नहीं है लेकिन एग्जाम की वजह से रूक जाऊँगा।

ठीक वैसा ही हुआ, घरवालों ने चित्रा बुआ से बात की और बुआ ने सब संभाल लिया।

मेरे यहाँ से निकलने से पहले बुआ फिर से मुझसे बोलीं, “अभिराज, मुझे डर लग रहा है! कुछ गड़बड़ी ना हो जाए! मेरे पति को पता नहीं चलना चाहिए!”
मैंने फिर समझाया, “बुआ, आप परेशान मत हो! मैं आता हूँ, अगर कुछ भी गड़बड़ी हुई या कुछ भी रिस्क हुआ तो हम कुछ नहीं करेंगे! वैसे भी मेरा एग्जाम है, मैं एग्जाम देकर वापस चला जाऊँगा!”

मेरे समझाने पर बुआ थोड़ा नॉर्मल होती हैं, लेकिन महिलाओं में सिक्योरिटी की चिंता ज्यादा होती है।
महिला पाठक मेरी इस बात से सहमत होंगी।

मैंने जब यह प्लान सोचा था, तब ही यह सोच लिया था कि अपनी ज्यादा से ज्यादा फैंटेसी पूरी करूँगा।
मैंने कम से कम 3 दिन का प्लान बनाया।

ऐसी ट्रेन का टिकट किया जो एग्जाम से एक दिन पहले सुबह पहुँचाए।
तो 1 दिन यह, फिर मेरा एग्जाम दोपहर 3 से 4 था, तो बच्चों या उनके पति के आने से पहले 1 बजे तक का समय और एग्जाम के बाद अगले दिन के लिए यह सोचा था कि अगर बुआ और मेरा मन भर जाएगा तो एग्जाम के अगले दिन की टिकट कर लूँगा, नहीं तो एक दिन और रूक जाऊँगा, टिकट न मिलने का बहाना करके।

बुआ ने अपने घर में बता ही दिया था कि मैं आ रहा हूँ।
मैं तय समय पर यहाँ से निकला।

चूँकि मैंने सबसे पहले तो शावर सेक्स फैंटेसी सोची थी.
लेकिन मेरी ट्रेन थोड़ी लेट हो गई और 9:30 बजे बुआ के शहर पहुँची और स्टेशन से घर तक पहुँचने में 10 से ज्यादा समय हो जाएगा इसलिए शावर सेक्स फैंटेसी को अगले दिन के लिए स्थगित किया।

क्योंकि बुआ को नाश्ता और खाना बनाने के लिए सुबह नहाना होता था इसलिए मैंने किचन सेक्स करने का निर्णय लिया, क्योंकि बेडरूम सेक्स तो मैं कर ही चुका था।

हाँलांकि मैंने बुआ से अपनी फैंटेसी के बारे में नहीं बताया, बस सुबह-सुबह ही कॉल करके बताया कि मैं 10:30 तक आ जाऊँगा और बुआ से अपनी फेवरेट लाल साड़ी और लाल ब्रा-पैंटी पहनने को बोला।

ट्रेन से उतर कर मैंने ऑटो लिया और बुआ के घर पहुँचा।
मेरा मन रोमांच, उत्साह और थोड़ी घबराहट से भरा हुआ था क्योंकि मैं पहली बार किसी के घर इस तरह से सेक्स के लिए जा रहा था।

बुआ मेरा इंतजार ही कर रही थीं और शायद बुआ भी मेरी तरह ही भावनाओं से घिरी थीं, बस बुआ में मुझसे अलग एक अनचाहा डर था।

खैर, जैसे ही मैंने दरवाजे पर बुआ को देखा, मेरी सारी सफर की थकान, सारी घबराहट हवा हो गई।

बुआ की काली बड़ी आँखों में मेरा इंतजार, पहली बार किसी को अपने घर बुलाने का डर, वासना का मिश्रण था।
उनके गोरे गाल गुलाबी हो चुके थे।
उनके गुलाबी, रसीले लाल लिपस्टिक से भरे होंठ कसकर चूमे जाने के लिए बेताब थे।

उनके माथे पर पसीने की कुछ बूँदें भी थीं, जो उनकी घबराहट को बयाँ कर रही थीं।
लाल साड़ी में लिपटी, सेक्स से भरी हुई बुआ मेरे नियंत्रण को चुनौती दे रही थीं।

शायद उनकी धड़कन तेज हो गई थी, जिससे उनकी साँसें भी सामान्य से थोड़ी तेज थीं, जिससे उनका सीना लयबद्ध तरीके से ऊपर-नीचे हो रहा था.
और मेरे लण्ड को पैंट फाड़कर बाहर आने के लिए बेताब करने के लिए काफी था।

मेरी तो नजर ही नहीं हट रही थी।
बुआ ने ही मुझे तुरंत अंदर बुलाया और फुर्ती से दरवाजा बंद किया।

चूँकि मैंने बुआ से पहले ही कन्फर्म कर लिया था कि घर में उनके अलावा कोई नहीं है इसलिए दरवाजा बंद होते ही मैंने न आव देखा न ताव, न बात की न हालचाल पूछा, सबसे पहले बुआ को पकड़कर दरवाजे से लगाया और उनके गुलाबी, रसीले होंठों को होंठों में दबा लिया और ऐसे चूसा जैसे उनसे रस निकालकर ही छोड़ूँगा।

वो कुछ समझ पातीं, इससे पहले ही मैंने उनको अपनी पकड़ में किया और बारी-बारी से दोनों होंठों को कसकर चूसा, बारी-बारी से एक-एक होंठ को अपने होंठों से दबाकर खींच लेता था।
वो अचानक हुए इस हमले से शॉक्ड हो गईं और मुझे दूर धकेलने लगीं.

लेकिन मैंने लगभग 10 मिनट तक बुआ को छोड़ा ही नहीं।
10 मिनट के इस वेलकम किस के बाद मैंने उन्हें छोड़ा।

उनकी लाल लिपस्टिक होंठों के अगल-बगल फैल गई।
उनके होंठ कसकर चूसे जाने से इस कदर लाल हो गए जैसे उनसे खून निकल आया हो।

जैसे ही मैंने उनको छोड़ा, अचानक हुए इस वाकये से और इस लंबे चुम्बन से उनकी साँसें तेज हो गईं और उन्होंने कुछ सेकंड अपने आप को संभाला।
फिर मेरी तरफ देखकर थोड़े गुस्से से बोलीं, “ऐसे कोई करता है क्या! न हाय न हैलो, न कुछ बात-चीत! बस आते ही शुरू हो गए! बस यही करने के लिए आए हो ना!”

क्या बताऊँ दोस्तो, वह इतनी सुंदर, कामुक स्त्री हैं, ऊपर से उनके चेहरे पर गुस्सा उनकी सुंदरता, कामुकता पर चार चाँद लगा रहा था।
मैंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “अरे मेरी जान तो नाराज़ हो गई! यह तो मेरी जान के लिए वेलकम गिफ्ट था! इतने दिन आपसे दूर रहा, क्या करूँ, इतनी खूबसूरत, सेक्सी गर्लफ्रेंड हो तो कोई कैसे कंट्रोल कर सकता है!”

फिर उनके पास जाकर उन्हें बाँहों में भर लिया।
वो अभी भी थोड़ी नाराज़ थीं या ड्रामा कर रही थीं।

उन्हें बाँहों में भरकर मैंने कहा, “मेरी जान तो अभी भी नाराज़ है! चलो, ये नाराजगी दूर कर देते हैं!”
और फिर एक बार उनके सुर्ख गुलाबी होंठों को मुँह में भर लिया.
लेकिन इस बार प्यार से और उत्तेजक तरीके से धीरे-धीरे मैं उनके होंठों को चूमता और चूसता रहा।
फिर मैं बुआ की जीभ को अपने होंठों में दबाकर चूसने लगा और कुछ देर बाद अपनी जीभ को उनके होंठों में फंसा दिया।

इस तरह कभी मैं उनके होंठों को और जीभ को चूसता रहा, कभी वो मेरे होंठों को चूसती रहीं।

फिर उन्होंने अपने आप को अलग किया और बोलीं, “ये सब बाद में! पहले चलो, हाथ-मुँह धो लो, चाय बनाती हूँ, चाय पी लो!”

लंबे सफर से मैं थक भी गया था और नहाना भी चाहता था.
इसलिए मैंने पहले नहाना ठीक समझा जिससे फ्रेश हो जाऊँ, तब सेक्स का मजा आए।

मैं नहाने चला गया और बुआ से बोला- जब मेरा नहाना लगभग खत्म हो जाए, तब चाय बनाना। ऐसा मैंने इसलिए कहा कि मेरे नहाने के बाद बुआ किचन में ही रहें।

इसके बाद मैं अच्छे से नहाया, लण्ड को भी अच्छे से साफ किया।
अच्छे से नहाकर फ्रेश होकर जब मैं बाहर आया, तो जैसा मैंने सोचा था, बुआ किचन में चाय बना रही थीं।

मैं टॉवेल लपेट कर बाहर आया था लेकिन किचन में जाते समय मैंने टॉवेल निकाल दिया।

बुआ को देखकर, इतने मस्त, सेक्सी किस के बाद लण्ड खड़ा हो ही गया था.
तो वैसे ही खड़े लण्ड के साथ चुपचाप किचन में गया और बुआ को पीछे से पकड़ लिया और गालों पर किस करने लगा, जीभ से लिक करने लगा।

गालों पर किस करने के साथ ही, बुआ के होंठों पर भी किस करने लगा और अपने खड़े लण्ड को साड़ी के ऊपर से ही चित्रा बुआ की गांड में रगड़ने लगा।
बुआ कहने लगीं, “आ आहह, रूक तो जा! उममम, रूम में तो चलने दे, यहीं शुरू हो गया तू! आआह हह!”

लेकिन मैंने अनसुना कर दिया और किस के साथ गर्दन पर भी अपने होंठों को रगड़ने लगा और लण्ड को गांड पर और जोर से रगड़ने लगा।
बुआ भी गर्म होने लगी थीं।

अचानक बुआ ने अपना हाथ संभलने के लिए पीछे किया और उनका हाथ मेरे खड़े लण्ड से टकराया।
बुआ चौंक कर घूमीं और जैसे ही चित्रा बुआ की नजर मेरे खड़े लौड़े पर पड़ी, बुआ बोलीं, “बहुत बेशर्म है तू! घर में, किचन में ऐसे ही नंगा घूम रहा है!”

मैंने उन्हें पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और कसकर खुद से सटा लिया।
मेरा लण्ड उनके पेट को टच कर रहा था क्योंकि मेरी हाइट ज्यादा है।

मैं बोला, “आज आपको भी बेशर्म बनना है! आपको भी घर में हर जगह बिना कपड़ों के रहना है!”
और उनकी गर्दन को जोर से किस करने लगा, जीभ से पूरी गर्दन को चाटने लगा।

बुआ को मजा आने लगा और वह आहें भरने लगीं, “आआहहह, उफफफ, अभिराज, रूम में तो चल, मान जा, वहाँ कर लेना जो करना है! आआहहह, इसस्स्स!”

मैंने अनसुना कर दिया और गर्दन के साथ-साथ क्लीवेज वाले एरिया की भी जीभ से चाटने लगा, किस करने लगा।
वह खड़े-खड़े मदहोश होने लगीं और उन्होंने किचन स्लैब को हाथों से थाम लिया और मजा लेने लगीं।

मैंने गर्दन, क्लीवेज को किस, लिक करने के साथ-साथ उनके बड़े, टाइट, सेक्सी बूब्स को हाथों में भर लिया और धीरे-धीरे दबाने लगा, मसलने लगा।
बुआ की साँसें, धड़कन तेज होने लगी थीं।
मजे से उनका सीना मेरी क्रियाओं के अनुसार ऊपर-नीचे होने लगा था।

कुछ देर बूब्स दबाने के बाद मैंने एक चूचे को ब्लाउज के ऊपर से ही मुँह में भर लिया और दूसरे को हाथ से ही दबाता रहा।
फिर कुछ देर दूसरे को मुँह में भर कर चूसता रहा और पहले को हाथ से दबाता रहा।
बुआ की बस आहें, जोर-जोर से साँसें, लंबी-लंबी सिसकारियाँ ही सुनाई दे रही थीं।

फिर मैंने उनके ब्लाउज के बटन खोलने शुरू किए।
जैसे ही मैंने बुआ का ब्लाउज उतारा, उनके गोरे, बड़े स्तन लाल ब्रा में उछलकर बाहर आ गए।

बुआ को ब्रा में देखकर मैं तुरंत ही जोश में आ गया और ब्रा के ऊपर से ही चूचों पर टूट पड़ा।
दोनों बूब्स को हाथों से दबाने, मसलने के साथ ही मुँह में भर कर चूसने लगा।

जैसे ही मैंने निप्पल के ऊपर अपनी जीभ घुमाई, वैसे ही बुआ की लंबी आह निकल गई।
मैं बारी-बारी से दोनों निप्पलों पर कभी जीभ घुमाता, कभी निप्पल्स को उंगलियों में फंसा कर छेड़ता।
फोरप्ले सेक्स विथ आंटी से वो तो बस मजे में पागल हुई जा रही थीं।

मैं, “अकेले-अकेले ही मजा लोगे क्या बुआ! मेरा लण्ड इतनी देर से खड़ा है, कुछ करो इसका!”
इतना सुनते ही बुआ ने खड़े, उनके पेट को चुभते लण्ड को हाथ में लिया और बोलीं, “आआह हह, बड़ा मस्त है तेरा हथियार! ईईस्स्स, बड़ा गर्म हो गया है! उम्म!”

और अपने नाजुक हाथों से लौड़े को सहलाने लगीं।
इधर मैंने कुछ देर बाद खींच कर ब्रा भी निकाल दी और उनके बड़े, गोरे, चिकने बूब्स, जो इतनी देर से दबाए जाने से लाल हो गए थे, को सीधे मुँह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, हाथों से मसलने लगा।

चित्रा बुआ अब मेरे सिर पर हाथ फिराते हुए मजे ले रही थीं।
जैसे ही मैंने जीभ नुकीली करके निप्पल को छेड़ा, बुआ खड़े-खड़े मचलने लगीं और लंबी-लंबी सिसकारियाँ भरने लगीं, “आआहहह, उममम… ओह!”

कुछ देर तक मैं दोनों बूब्स को होंठों और जीभ से छेड़ता रहा, फिर उंगलियों में फंसाकर हल्के से खींच लिया।

बुआ, “आउच, क्क्क्या कर रहा है! इसस्स्स!”
मैं, “क्या करूँ, आपके बूब्स हैं ही इतने सेक्सी कि कंट्रोल नहीं होता!”

बुआ, “तो आराम से कर ना! आआहहह, जो करना है! यसस्स्स!”
मैं, “ऐसे!”

और इतना कहते ही दोनों निप्पलों को उंगलियों में फंसाकर खींच कर छोड़ दिया!
बुआ, “आआहहह, धीरे से रे!”

फिर कुछ देर बाद बूब्स को हाथों से दबाता रहा और होंठों से किस करता हुआ धीरे-धीरे पेट पर आया, बुआ के वासना और मजे से लहराते हुए पेट पर अपने होंठ फिराए।

मैं लगातार बूब्स दबाता रहा और चिकने पेट पर होंठ के साथ-साथ जीभ भी फिराने लगा।

बुआ मजे से इतनी बेचैन हो गईं कि अगर उन्होंने किचन स्लैब को हाथों से पकड़ा न होता तो शायद खड़ी न रह पातीं।

मैं बुआ की सेक्सी नाभि को छोड़कर बाकी पेट पर जीभ घुमाता रहा और हाथों से बूब्स दबाते हुए, जीभ घुमाते-घुमाते ही जीभ को नुकीला करके बुआ की सेक्सी, गहरी नाभि में तेजी से जितना अंदर जीभ जा सके, उतना अंदर तक डाल दिया और जोर से जीभ नाभि में घुमाने लगा।

बुआ ने अचानक ही उत्तेजनावश अपने पेट को काफी ऊपर तक उठा लिया और उनके मुँह से एक लंबी आह निकली, “आआ आआआह हह हहह, ईईईसस ससस!”

मैं पक्के तौर पर कह सकता हूँ कि इस तरह बूब्स दबाने, निप्पलों को छेड़ने और पेट एवं नाभि में मेरी जीभ की करामात ने अब तक बुआ की चूत गीली कर दी थी।

कुछ देर तक मैं बुआ की नाभि को ही जीभ से कुरेदता रहा।
फिर मैं खड़ा हुआ और बुआ को किस करने लगा।

इस बार बुआ भी बहुत उत्तेजित हो गई थीं इसलिए वो मुझसे ज्यादा जोश में किस करने लगीं।
कुछ देर बाद मैंने बुआ को पलट दिया और उन्हें पीठ तरफ से खुद से चिपकाकर गर्दन चाटने लगा और बूब्स दबाता रहा।
वो अपनी गांड को खुद ही मेरे लण्ड पर रगड़ने लगीं।

फिर मैंने बुआ की गोरी, चिकनी पीठ पर ऊपर गर्दन से लेकर नीचे चूतड़ों के ऊपर तक उंगलियाँ फिराईं और जीभ से पूरी पीठ को तल्लीनता से चाटा और पीठ चाटने के दौरान हाथ आगे करके बूब्स दबाता रहा।
बुआ की आहें, सिसकारियाँ, लंबी-लंबी साँसें मेरे लिए फ्यूल का काम करती रहीं।

बीच-बीच में मैं पूछता रहा, “कैसा लग रहा है मेरी जान!”
वो कहतीं, “बहुत मजा आ रहा है! और जल्दी करो, मुझसे रहा नहीं जा रहा है!”

दरअसल रहा तो मुझसे भी नहीं जा रहा था।
मैं खुद बुआ की चिकनी, रसभरी चूत चाटने को बेताब था, लेकिन पिछली बार थोड़ी जल्दबाजी के बाद मैंने सोच लिया था कि बड़े आराम से, तल्लीनता से बुआ के हर अंग का मजा लूँगा, इसलिए मैंने अपने आप पर नियंत्रण रखा।

पीठ को किस और लिक कर लेने के बाद मैंने बुआ को किचन स्लैब में आराम से झुका दिया, जिससे उनकी गांड थोड़ा पीछे की ओर निकल आए और खुद नीचे जमीन पर बैठ कर बुआ की मखमली टाँगों, गोरी, चिकनी, मुलायम जाँघों को पेटीकोट के ऊपर से हाथों से प्यार से सहलाता रहा।
फिर बुआ का गुलाबी पेटीकोट खींच कर उतार दिया।

जैसे ही चित्रा बुआ का पेटीकोट उतरा, बुआ की एकदम गोरी, चिकनी टाँगें, मखमली, मुलायम, गद्देदार जाँघें देखकर मेरे लण्ड ने एक झटका मारा।

मैंने मन में कहा कि थोड़ा सब्र कर, कुछ ही देर में बुआ की चिकनी, गर्म, रसीली चूत में जाने का मौका मिलेगा।

जैसे ही मेरी नजर बुआ की सेक्सी, बड़ी, गोल, मांसल गांड पर पड़ी, जो जालीदार लाल पैंटी में लिपटी हुई थी और आधे से ज्यादा पैंटी बुआ के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच में फंसी थी और पैंटी पर चूत रस का धब्बा उभर आया था, क्योंकि इतनी देर से मैं बुआ के हर अंग का तसल्ली से मजा ले रहा था और बुआ भी अपने हर अंग को चूसे, चाटे जाने का आनंद ले रही थीं, इसलिए बुआ की गीली चूत ने झरना बहाना शुरू कर दिया था।

यह कामुक नजारा देखकर मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपने दोनों हाथों से बुआ के दोनों चूतड़ों पर अचानक एक-एक थप्पड़ मारा।
‘चटाक’ थप्पड़ की आवाज किचन भर में गूंज गई।

थप्पड़ पड़ते ही बुआ कसमसाईं और जोर की आह भरी, “आ आआ आह हह!”

मैंने फिर से दोनों चूतड़ों को थप्पड़ मारा और चूतड़ों को अपने हाथों से थाम लिया।
इस बार भी बुआ कसमसाईं और चीखीं।
मैंने दोनों चूतड़ों को अपने हाथों से पकड़कर इस कदर फैलाया कि पैंटी के साइड से बुआ की गांड के भूरे छेद की थोड़ी झलक दिखाई दी।

मैं जोश में आ गया और गांड को हाथों से आटा गूँथने की स्टाइल से मसलने लगा और बुआ की मांसल जाँघों को चूमने लगा।
फिर गांड को मसलते-मसलते ही जाँघों पर जीभ फिराने लगा।

फिर बिना पैंटी उतारे अपने हाथ के अँगूठे को थूक लगाकर गांड के सुराख पर फिराने लगा और काफी देर तक दोनों जाँघों को चूमता और चाटता रहा।

गांड के छेद को जैसे-जैसे मैं अँगूठे से कुरेदता रहा, वैसे-वैसे ही बुआ की आहें, सिसकारियाँ निकलती रहीं।

बुआ, “अभिराज, आआ हहह, बस कर! डाल दे ना अपना लण्ड मेरी चूत में! उउ उफ, कितना तड़पाएगा! आआह!”
मैं, “अभी मुझे आपके बदन के हर अंग का मजा लेने दो! बहुत दिनों बाद तो मौका मिला है!”

बुआ, “ईईस्स्स, जल्दी कर जो करना है! मेरी चूत में आग लगी है, पता नहीं कितनी गीली हो रखी है! उउफफ!”
मैं, “अच्छा, ये बात है! ठीक है, अभी आग ठंडी कर देता हूँ!”

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