दीदी के देवर के साथ यादगार चुदाई
(Teen Girl Bad Story)
टीन गर्ल बैड स्टोरी में मैं अपने बॉयफ्रेंड से चुदती थी. मेरी दीदी की शादी के बाद उनका देवर मेरे ऊपर डोरे डालने लगा. मुझे वह अच्छा लगा तो मैं उससे सेट हो गयी.
यह कहानी सुनें.
दोस्तो, मेरा नाम पारुल है और मैं 23 साल की हूँ. मैं दिल्ली में रहती हूँ.
मेरा फिगर 32-30-34 है.
मेरी दीदी का नाम संजना है और उनकी शादी 2021 में हुई थी.
यह टीन गर्ल बैड स्टोरी 2021 की ही है.
दीदी का एक देवर भी है, जिसका नाम सागर है.
वह मुझे घूरता रहता था और मैं उसकी नजरों को नोटिस भी करती रहती थी.
वैसे मेरा एक बॉयफ्रेंड भी है, जीतू.
हम दो साल से रिलेशनशिप में हैं और कई बार सेक्स भी कर चुके हैं.
लेकिन दीदी के देवर सागर की नज़र भी मुझ पर थी.
फिर एक दिन मैं दीदी के यहां घूमने गई तो सागर मेरे आसपास ही मँडराता रहता था.
एक दिन मैं किचन में थी तो अचानक से वह पीछे से आ गया.
मैं डर गई क्योंकि मुझे पता था उसके दिमाग में क्या चल रहा है.
वह मेरे बिल्कुल पास आया और धीरे से बोला- पारुल, मुझे तुम्हारा नंबर चाहिए.
मैं शॉक्ड हो गई.
मैंने पूछा- क्यों?
वह बोला- ऐसे ही, बात करने के लिए.
मैंने कहा- दीदी के पास है, उनसे ले लो.
वह मुस्कुराया और बोला- ऐसे तो ले ही लूँगा, लेकिन तुमसे चाहिए था.
न जाने क्यों उसका बात करने का तरीका मुझे अच्छा लगा और मैंने हंसते हुए नंबर दे दिया.
फिर हमारी चैटिंग शुरू हो गई. एक हफ्ते बाद उसने मुझसे पूछा- कोई बॉयफ्रेंड है?
मैंने झूठ बोल दिया- नहीं है.
वह तुरंत बोला- मैं तुम्हें बहुत लाइक करता हूँ पारुल, क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनोगी?
मेरा ब्वॉयफ्रेंड तो जीतू था, पर मैंने उसे नहीं बताया.
मैंने कहा- फ्रेंड बनकर रह सकते हैं.
वह बोला- तुम मुझे फ्रेंड बना लो, लेकिन मेरे लिए तुम मेरी जीएफ ही हो.
मैंने हंसकर कहा- जो समझना है, समझो!
कुछ दिन बाद मैं दीदी के घर से अपने घर आ गई.
सागर मुझसे चैट करता रहा.
मैं भी उसके साथ सहज हो गई थी.
वह सच में अच्छी बात करता था.
कुछ ही दिनों में हम दोनों कुछ ज्यादा ही क्लोज हो गए और रात-रात भर बातें करने लगे.
हम दोनों के बीच धीरे-धीरे सेक्स चैट भी शुरू हो गई और एक महीने में हम पूरी तरह ओपन हो गए.
एक दिन उसने मुझे अपने घर बुलाया.
मैंने मना कर दिया तो वह कसमें देने लगा.
आख़िर मैंने दीदी से कहा- दीदी, कुछ दिन तेरे यहां रहने आ जाऊं? तू बहुत याद आ रही है.
दीदी एकदम से बोलीं- हां हां, तू ज़रूर आ जा, मुझे भी तेरे आने से अच्छा लगेगा.
मैं मन ही मन बहुत खुश थी क्योंकि मुझे यही चाहिए था.
फिर मैं तीन दिन के लिए दीदी के यहां आ गई.
उस दिन सागर ने अपनी जॉब से भी छुट्टी ले ली.
उसने पहले फ्लोर पर बने अपने रूम में मुझे बुलाया.
जैसे ही मैं रूम में घुसी, उसने दरवाज़ा बंद किया और मुझे ज़ोर से टाइट हग कर लिया.
वह पागलों की तरह लिप-किस करने लगा.
मैं भी उसका साथ देने लगी.
थोड़ी देर बाद मुझे उसका हाथ अपनी चूत पर महसूस हुआ तो मैंने उसे धक्का देकर दूर किया.
पर सागर हटा नहीं.
वह मेरे ऊपर ही था और परमिशन मांगने लगा- पारुल प्लीज़ … एक बार!
मैंने मुँह से मना कर दिया, पर अन्दर-अन्दर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
उसने मौक़ा देखकर एक हाथ मेरी पैंटी के अन्दर डाल दिया और लिप-किस करते हुए एक उंगली मेरी चूत में घुसा दी.
बस फिर क्या … मैंने खुद उसे अपनी बांहों में कसकर जकड़ लिया और पूरी तरह मज़े लेने लगी.
फिर सागर ने एकदम से उठकर अपना लंड बाहर निकाल लिया.
उसका मोटा 7 इंच का लंड देखते ही मेरी चूत में आग लग गई.
मेरे बॉयफ्रेंड के अलावा मैंने पहली बार किसी दूसरे मर्द का लंड देखा था.
मैंने खुद को कंट्रोल किया और मना कर दिया.
मैं अपने कपड़े ठीक करके जाने लगी तो उसने मुझे जाने नहीं दिया.
वह ज़बरदस्ती चोदने की जिद करने लगा.
मैं डर गई और वहां से भाग आई.
सागर गुस्सा हो गया और उसने मुझसे बात करना बंद कर दी.
मैंने बहुत मनाया तो उसने कहा- आज रात को तुम मेरे रूम में आओगी, मैं इंतज़ार करूँगा.
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि हां करूँ या नहीं, लेकिन उसका लंबा-मोटा लंड मेरी आंखों के सामने घूम रहा था और उसकी उंगली की फीलिंग अभी भी चूत में हो रही थी.
मेरे बॉयफ्रेंड के अलावा किसी दूसरे लंड से चुदने का मौक़ा था.
सागर प्रेशर डाल रहा था, मेरी चूत भी पूरी गीली हो चुकी थी.
आख़िर मैंने हां कर दी.
रात करीब एक बजे उसका मैसेज आया- आ जाओ, सब सो गए हैं.
मैं चुपके से उठी और सागर के रूम में पहुंच गई.
जैसे ही मैंने दरवाज़ा खोला, कमरे में अंधेरा था.
उसने मुझे खींचकर बेड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया.
मुझे तुरंत फील हुआ कि सागर पूरा नंगा है और उसका गर्म-गर्म लंड मेरे पेट पर टकरा रहा है.
उसने फटाफट मेरा लोअर उतारा, फिर पैंटी भी खींचकर फेंक दी और मेरी चूत चाटने लगा.
जैसे ही उसकी जीभ मेरी चूत पर पड़ी, मैं पूरी तरह उसमें खो गई और मज़े लेने लगी.
मैं खुद उसके ऊपर चढ़ गई और 69 पोज़ीशन में आ गई.
पहली बार मैंने उसका लंड हाथ में लिया और मुँह में भर लिया.
बहुत देर तक मैंने उसका लंड चूसा.
फिर जैसे ही उसने कहा- अब डालूँ?
मैं तो उसकी चुदाई में पूरी तरह घुल चुकी थी.
तो मैंने बोला- जो करना है कर लो … आज पारुल सिर्फ़ तुम्हारी है!
जैसे ही उसने मेरी चूत में अपना लंड घुसाया, मेरे मुँह से चीख निकल गई.
उसने तुरंत मेरा मुँह बंद कर दिया और दूसरे ज़ोरदार धक्के में पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया.
मैंने उसे कसकर जकड़ लिया.
मन कर रहा था कि अब ये लंड मेरी चूत से कभी बाहर न निकले.
फिर उसने धीरे-धीरे झटके लगाने शुरू किए.
मैं एक अलग ही नशे में डूब चुकी थी.
पांच मिनट बाद अचानक मेरी चूत में गर्म-गर्म फव्वारा फूटा, तब पता चला कि सागर मेरी चूत में ही झड़ गया है.
मैं एकदम से डर गई, क्योंकि मेरे साथ कभी ऐसा नहीं हुआ था.
उसने सॉरी बोलते हुए कहा कि सुबह पिल ले लेना, कोई रिस्क नहीं होगा.
फिर उसने अपना गीला-गीला लंड मेरे मुँह में ठूँस दिया और मैंने उसका सारा माल चाटकर साफ कर दिया.
अब हम दोनों लेट कर बातें करने लगे थे.
उसने मुझसे पूछा- तुम चली हुई साइकिल हो न!
मैं समझ गई कि यह क्या सवाल कर रहा है!
मैं चुप रही तो वह मेरे एक दूध को चूसता हुआ बोला- अंकी, मुझे मालूम हो गया है और मुझे इससे कोई दिक्कत भी नहीं है. मैं खुद दो साइकिलें चला चुका हूँ.
मैंने उसे गाली देते हुए कहा- तू कमीन है … लड़की को साइकिल क्यों कह रहा है?
वह हंस कर बोला- तो क्या बोलूँ?
मैंने कहा- सीधा सीधा भी तो बोल सकता है कि पहले सेक्स किया है क्या?
वह बोला- हां कह तो सकता हूँ लेकिन उसमें कुछ फर्क होता है.
मैंने पूछा- क्या फर्क होता है?
वह बोला- मेरी बात को सिर्फ मजाक में लेकर सुनेगी तो बताऊं!
मैंने ओके कह दिया.
वह बोला- साइकिल माने नई नई लौंडिया, जिसने एक दो बार ही सेक्स किया हो. मोटर साइकिल वह कहलाती है जो फर्राटेदार चलती हो … और इसके बाद एक किस्म और होती है … तू कहे तो बताऊं!
मुझे उसकी इसी तरह की मजेदार बातें अच्छी लगती थीं तो मैंने उसकी छाती पर मुक्का मारते हुए कहा- अब बता भी दे साले … वैसे भी तू मानने वाला तो है नहीं?
उसने हंस कर कहा- बड़ी इन्नोसेन्ट है तू!
मैंने कहा- वह तो मैं हूँ ही पर तू अपनी बात पूरी कर न!
उसने बताया कि तीसरी किस्म नेशनल हाईवे की होती है, जिस पर से कई ट्रक निकल गए हों!
मैं हंसने लगी और बोली- चल तेरी साइकिल वापस से हीट पर आ गई … एक बार और सवारी कर ले!
वह हंस दिया और उसने कहा- हां इस बार पीछे से चलाऊंगा!
मैंने समझा कि साला गांड मारने की कह रहा है.
मैंने मना कर दिया कि मैं पीछे से नहीं चलती!
वह हंस दिया और बोला- अरे पगली मैं पीछे से तेरे आगे वाले छेद में ही पेलूँगा!
मैं खुश हो गई क्योंकि घोड़ी बन कर चुदवाने में मुझे बड़ा मजा आता है.
जीतू का लंड भी जब मेरी गांड को रगड़ता हुआ चुत में चलता है तो मैं मस्त हो जाती हूँ.
कुछ देर बाद उसने दोबारा लंड चुसवाया और खड़ा करके मुझे घोड़ी बना कर चोदना शुरू कर दिया.
तीसरी बार में उसने मुझे अपने मूसल लौड़े की सवारी कारवाई और मेरे दोनों थन खूब मसल मसल कर चूसे.
उस रात हम दोनों 4 बजे तक चुदाई करते रहे.
उसने मुझे तीन बार हचक कर चोदा था और मेरी सांसें फुला दी थीं.
मुझे अपने ब्वॉयफ्रेंड जीतू से ज्यादा मजा सागर के लौड़े से चुदवाने में आया था.
ऐसे ही मैं तीन दिन रुकी और तीनों रात उसने मुझे रोज़ चोदा.
अब जब भी मैं दीदी के घर घूमने जाती हूँ, सागर के साथ ज़बरदस्त चुदाई करके ही लौटती हूँ.
तो दोस्तो, ये थी मेरी टीन गर्ल बैड स्टोरी आपको कैसी लगी?
कमेंट में ज़रूर बताएं.
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लेखक की पिछली कहानी थी: सहेली के बॉयफ्रेंड के साथ चुदाई का पहला अनुभव
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