मां की गैरमर्द के बड़े लंड से चुदाई
(Mom Adult Story)
यह मॅाम अडल्ट स्टोरी मेरी अपनी मम्मी की किसी बड़े लंड से चुदाई की मेरी आँखों देखी है. घर के पीछे कच्चे पक्के बाथरूम में मैं अपनी मां को नंगी नहाते हुए देखता था.
दोस्तो, कैसे हो आप सब? मेरा नाम तुषार है और ये मेरी पहली सच्ची सेक्स कहानी है, जो मेरी मां की चुदाई की है.
मेरी मां का नाम कविता है और उनकी उम्र 39 साल है.
मेरे पापा की उम्र 55 साल है.
मेरी मां देखने में बहुत खूबसूरत हैं, उनका 36-32-38 का फिगर तो बहुत ही गजब का है.
ये यह मॅाम अडल्ट स्टोरी पिछले साल की है, जब पापा का प्रमोशन हुआ और वह आउट ऑफ स्टेट रहने लगे थे.
उस वक्त तक मेरी मां बहुत संस्कारी थीं, किसी गैर मर्द को आंख उठाकर भी नहीं देखती थीं.
लेकिन जहां हम रहते थे, वह पूरा विधर्मी इलाका था और हमारे घर के आसपास 200 मीटर तक कोई दूसरा घर नहीं था.
घर के पीछे बाथरूम ऊपर से खुला हुआ था, उसी से मैं अपनी मां को नंगी नहाते हुए देखता था.
घर के पीछे पूरा जंगल था, जहां लोग गाय-भैंस चराने आते थे और वहीं दारू पीते, जुआ खेलते थे.
पापा को गए लगभग दो महीने हो गए थे और मां की चूत में खुजली होने लगी थी.
मैंने देखा था कि वे नहाते समय अपनी चुत को रगड़ती थीं.
एक दिन मां घर के पीछे नल के पास नहा कर सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में कपड़े धो रही थीं.
पेटीकोट उन्होंने कमर में फँसा रखा था, जिससे उनकी नंगी टांगें घुटनों से ऊपर तक पूरी नज़र आ रही थीं.
उसी वक्त एक आदमी वहां मूतने आया.
मूतते वक्त उसकी नज़र मेरी मां पर पड़ गई, जो सिर्फ़ ब्लाउज़-पेटीकोट में आधी नंगी कपड़े धो रही थीं.
उसने मूतते हुए ही जानबूझ कर खाँसने का नाटक किया ताकि मां की नज़र उसके लौड़े पर पड़ जाए.
जैसे ही मां ने उसकी तरफ़ देखा और उसका लौड़ा देखा, तो मां उस 8 इंच का काला, मोटा लंड देखते ही रह गईं.
उसका लंड देखकर मां की चूत पानी छोड़ने लगी थी.
तभी उसने अपना लंड हिलाना शुरू कर दिया और मां को इशारा करने लगा.
मां ने उसे नजरअंदाज करने की कोशिश की, लेकिन कनखियों से उसका लंड देखे जा रही थीं.
मैं छत पर छुपकर सब देख रहा था.
अचानक हवा चली और मां का तौलिया उड़कर उस आदमी के पास वाली झाड़ी में चला गया.
मां तौलिया लेने गईं, तभी उसने पीछे से आकर मां की गांड पर अपना काला लंड पेटीकोट के ऊपर से रगड़ दिया और हंसने लगा.
मां वहां से निकलने लगीं तो उसने मां का हाथ पकड़ लिया और बोला- अरे भाभी, क्यों जा रही हो? थोड़ा रुक जाओ ना … जरा इसे देखो… तुम्हें देखकर कितना फूल गया है. ज़रा इसे शांत करने में मेरी मदद कर दो!
मां ने गुस्से से उसे देखा और बोलीं- छोड़ो मुझे … मैं शादीशुदा हूँ अगर कोई देख लेगा तो बदनामी हो जाएगी, जाने दो!
लेकिन उसने कहा- अरे भाभी कोई नहीं देखेगा. तुम जल्दी से इस लंड को शांत कर दो, फिर चली जाना! मेरा नाम जावेद है, मैं बहुत दिनों से आपकी लेना चाह रहा था.
मां की चूत में भी खुजली हो रही थी, तो उन्होंने ज़्यादा नखरे नहीं किए.
वे इधर-उधर देखकर उसका लंड हिलाने लगीं.
वह आदमी मां की गांड दबाने लगा, फिर उसने मां के मुँह में अपना लंड ठूँस दिया और चुसवाने लगा- आह चूस ले भाभी … आह्ह … कितना मज़ा आ रहा है!
मेरी मां भी उसका लंड पूरा गले तक लेने लगीं और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगीं.
‘आह्ह … भाभी … सच में बड़ा मज़ा आ रहा है!’ वह कामुक सिसकारियां ले रहा था और मेरी मां की चूचियां मसल रहा था.
पांच मिनट लंड चुसवाने के बाद उसने वहीं मेरी मां को घोड़ी बना दिया और पीछे से उनकी चूत चाटने लगा.
उसके बाद उसने अपना काला, मोटा लंड मां की गीली चूत के मुँह पर रखकर इतनी ज़ोर से झटका मारा कि पूरा 5 इंच लंड मां की चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया.
‘आआह्ह्ह … नहींईई!’ मां ज़ोर से चीख पड़ीं, लेकिन जंगल में उनकी चीख सुनने वाला कोई नहीं था.
तब वह आदमी रुक गया, मां के दोनों आम (बूब्स) बेदर्दी से मसलने लगा और कुछ पल बाद उसने अपने लंड को जरा पीछे खींच कर फिर से एक और ज़बरदस्त धक्का दे मारा.
इस बार उसका पूरा लंड मां की चूत में बच्चेदानी तक धँस गया.
‘मांआआ … मार डाला … साले धीरे करो मादरचोद जावेद साले कुत्ते … आह फट गई मेरी!’ मां की आंखों में आंसू आ गए, वे रोती और कराहती हुई बोलीं.
लेकिन जावेद पर कोई असर नहीं हो रहा था.
वह तो जोर-जोर से मां को खुल्लम-खुल्ला गालियां देते हुए झाड़ियों में चोदने लगा था- ले साली … ले रंडी … आज तेरी चूत फाड़ दूँगा!
दस मिनट झुकाकर उसके मजबूत धक्कों से चोदने के कारण मेरी मां के पैर दर्द करने लगे थे.
मां ने कहा- दर्द हो रहा है जावेद … लिटा कर चोद ले!
उसने मां को नीचे लिटाया, दोनों पैर फैलाए और लंड चूत पर रखकर एक ही झटके में पूरा अन्दर पेल दिया.
‘हाय रे … फट गई मेरी चूत!’ मां फिर चिल्लाईं.
जावेद ने तुरंत उनके होंठ अपने मुँह में लेकर जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया.
लंड पूरा बाहर निकाल कर फिर पूरा अन्दर ठोकना शुरू कर दिया.
ऐसे ही पंद्रह मिनट तक चोदते-चोदते वह मां की चूचियों को पीने लगा, कभी काट लेता.
उसके दांतों के निशान मां के गोरे शरीर पर लाल-लाल दिखने लगे.
मां कराहती-सिसकती हुई उसके नीचे अपनी टांगें फैलाए चुदती रहीं.
मां दो बार झड़ चुकी थीं, उनकी चूत से पानी की फुहारें निकल रही थीं.
फिर पांच मिनट बाद जावेद का भी झड़ने वाला था.
उसने मां की चूत में ज़ोरदार-ज़ोरदार धक्के लगाने शुरू किए और पांच-सात धक्कों में अपना पूरा गर्म माल मां की चूत में उड़ेल दिया.
‘ले भाभी … ले मेरा रस … बच्चेदानी में भर दूँगा तेरा!’
मां को अपनी बच्चेदानी में उसका गर्म पानी महसूस हुआ.
‘आह्ह्ह … कितना गर्म रस है तेरा … साले अन्दर क्यों भर दिया तूने!’
वह बोला- अरे एक बार में कुछ नहीं होता भाभी!
जब जावेद पूरी तरह से झड़ गया, तब उसने मां को चूमते हुए लंड बाहर निकाला और कहा- मज़ा आ गया भाभी तेरी चूत मारने में … मैं रोज़ इसी टाइम यहां आता हूँ. कल से इसी टाइम मिलेंगे … समझी?
मां ने हांफते हुए उसके बारे में ज्यादा पूछा.
तो उसने कहा- नाम तो तुझे मालूम ही है … जावेद. बाकी मेरा काम तो तेरी जैसी चुदासी औरतों को चोदने का ही है!
मां ने हंस कर उससे कल मिलने का वादा कर दिया और वह मेरी मां का चुम्मा लेकर चला गया.
मां अभी भी वहां अधनंगी पड़ी थीं, मम्मी की चूत से जावेद के लौड़े का वीर्य टपक रहा था.
कुछ देर बाद मां ने अपने कपड़े उठाए और उसी नंगी हालत में बाथरूम के पास आकर नहाने लगीं.
मैं देख रहा था कि मां के चेहरे पर मुस्कुराहट थी. उन्हें एक लंड जो मिल गया था.
तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी मां की पहली बार गैरमर्द से चुदाई की कहानी?
यह मॅाम अडल्ट स्टोरी पर मुझे ज़रूर मेल करना, ताकि मैं अगले भाग में आपको बता सकूँ कि जावेद ने मेरी मां को अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से कैसे चुदवाया और मां की गांड कैसे फाड़ी.
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