बस में अजनबी लड़की और उसकी मामी- 2

हर्षद मोटे 2023-05-24 Comments

Xxx लेडी सेक्स इन बस का मजा खचाखच भरी हुई बस में मिला. रात हो चुकी थी, पूरा अन्धेरा था. मैंने उसी बस में एक शादीशुदा महिला को चोदा. यह खेल कैसे हुआ?

दोस्तो, मैं आपका साथ हर्षद एक बार फिर से आपको अपनी सेक्स कहानी में डुबोने हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
बस में मिली अजनबी लड़की संग मस्ती
में अब तक आपने पढ़ा था कि बस के सफर में रवीना के साथ ऊपर ऊपर से मजे लेने के बाद उसकी मामी उसकी जगह खड़ी हो गई थी.
वह मेरी तरफ अपनी गांड करके खड़ी हुई थी तो उसकी गांड की दरार में मेरा लंड रगड़ देने लगा था.

अब आगे Xxx लेडी सेक्स इन बस:

मैं मामी से पीछे हटने की कोशिश कर रहा था लेकिन पीछे भी जगह नहीं थी.

मुझे ये सब अच्छा नहीं लग रहा था.
मैं सोच रहा था कि रवीना ने मुझे मामी के साथ ऐसे करते हुए देखा तो वह क्या सोचेगी?

इसी सोच से मैं परेशान था.
कुछ मिनट ऐसे ही निकल गए.

मेरा लंड मामी के नितंबों के स्पर्श से ही पैंट के अन्दर ही फड़फड़ा रहा था.

मामी भी शायद पूरी तरह से गर्म हो गयी थी. इसलिए वह भीड़ और अंधेरे का फायदा लेकर अपने नितंब मेरे लंड पर रगड़ रही थी.

इतने में रवीना ने सीट पर रखा हुआ मेरा हाथ उठाकर मामी के नितंबों पर रखते हुए मेरा हाथ उस पर फिराने लगी.

मुझे तो ये सब अजीब लग रहा था, शायद रवीना भी चाहती थी.
मैं भी अपने दोनों हाथों से मामी के गदराए नितंब सहलाने लगा.
मामी भी अपने नितंब हिलाकर मुझे साथ देने लगी थी.

रवीना ने मेरे पैंट के अन्दर से मेरा लंड बाहर निकाल दिया.
मैं उस गड़बड़ी में पैंट की चेन लगाना और अंडरपैंट ऊपर लेना भूल गया था.

अब रवीना ने खड़े रहकर झट से अपने हाथों से मामी का कुर्ता ऊपर करके उसकी सलवार और पैंटी को एक ही साथ जांघों से नीचे खींच दिया.

वह अपनी सीट पर बैठ कर आगे का खेल देखने लगी थी.
अब मेरा लंड और लोहे जैसा कड़क होकर मामी के नितंबों की दरार में जाकर गीली हुई चूत को ठोकर मारने लगा था.

मामी ये सब सहन नहीं कर सकी, शायद उसे भी इसी पल का इंतजार था.

मामी और नीचे को झुक गयी और अपनी चूत मेरे लंड के सुपारे पर रगड़ने लगी.
मैं भी अब उसकी कमर को पकड़ कर धक्के देने लगा.

मामी ने अपने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ कर सुपारे को अपनी गीली हुई चूत के मुख पर रखकर रगड़ने लगी.

मैंने इसी मौके का फायदा उठाकर जोर से एक धक्का मार दिया.
आधा लंड मामी की चूत की दीवारों को चीरकर अन्दर घुस गया था.

मेरा धक्का मामी सह नहीं पायी तो उसने मेरी कमर पर हाथ रखकर मुझे रोक लिया.

मैं रुक गया और उसके ऊपर झुककर उसके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथ कुर्ते के अन्दर डालकर उसकी ब्रा के ऊपर से मसलने लगा.

अपने दोनों हाथ मामी कुर्ते के ऊपर से ही मेरे हाथों पर रखकर दबाने लगी थी.
मामी की चूत अन्दर से बहुत ही गर्म थी.

अब मामी अपनी कमर आगे पीछे करने लगी थी … अब वह मेरा पूरा लंड अपनी चूत में लेना चाहती थी.
शायद वह बहुत दिनों की भूखी थी.

मैं भी अब और इंतजार नहीं कर सकता था तो मैंने मामी के स्तन जोर से रगड़ कर अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर रखे और उन्हें सहलाकर जोर से पकड़ लिया.
अब मेरी पकड़ बन गई थी तो मैंने एक जोर का धक्का मारकर पूरा लंड मामी की चूत में जड़ तक उतार दिया.

मामी कसमसाकर अपने मुँह से मादक सिसकारियां लेने लगी थीं.
भीड़ की वजह से वह चिल्ला भी नहीं सकती थीं.

जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में पूरा जड़ तक गया तो उसने गर्म चूत रस मेरे लंड पर छोड़ना शुरू कर दिया.
शायद मेरे मोटे लंड का अपनी चूत में अहसास होते ही वह झड़ गयी थी.

इधर रवीना सब कुछ देखकर गर्म हो गयी थी तो वह एक हाथ से मेरी जांघों को सहलाती हुई मेरी अंडगोटियों को सहलाने लगी.

इससे मैं और जोश में आ गया और मामी के नितंबों को कसके पकड़ कर धक्के देने लगा.
अब मामी भी मेरा साथ देने लगी थी.

मेरा लंड पूरी तरह से गीला होकर आराम से मामी की कसी चूत में अन्दर बाहर हो रहा था.

मामी अब पूरी तरह से कामुक होकर मेरे लंड पर धक्के मारकर मेरा पूरा लंड अपनी प्यासी चूत में ले रही थी.

रवीना ये नजारा नजदीक से देखकर मजे लेती हुई गर्म हो गयी थी.
उसने मेरा एक हाथ पकड़कर अपनी टी-शर्ट में डाल दिया.

मैं समझ गया कि यह लड़की पूरी तरह से कामुक हो गयी है.
तो मैं एक हाथ से उसके दोनों स्तनों को बारी बारी से मसलने लगा और साथ में मामी को भी धक्के मारकर चोद रहा था.

बीस मिनट की चुदाई के बाद मामी एकाएक जोर से धक्के मारकर कराहने लगी.
तो मैं समझ गया कि ये दुबारा झड़ने वाली है.

अब मैं भी ज्यादा देर इंतजार नहीं कर सकता था, मेरा भी निकलने वाला था.

मैं मदहोश होकर जोर जोर से धक्के मार कर मामी की चूत में लंड ठूंसने लगा था. साथ में रवीना के स्तन जोर से रगड़ रहा था.
रवीना कसमसाने लगी थी.

इतने में मामी अपना गर्म कामरस मेरे लंड पर छोड़ती हुई झड़ने लगी.

उसके गर्म कामरस में डूबते ही मैंने आखिरी धक्का मार दिया और मेरे लंड ने अपनी गर्म वीर्य की पिचकारियां मारते हुए मामी की प्यासी चूत वीर्य से भर दी.

मामी अपना पूरा दबाव मेरे लंड पर डालते हुए पूरा लंड चूत में लेकर स्वर्ग के सुख का अनुभव ले रही थी.

पाँच मिनट मैं ऐसे ही मामी की चूत में लंड दबाकर खड़ा रहा और मामी की चूत मेरे लंड के वीर्य का एक एक बूंद निगल रही थी.
अब हम दोनों शांत हो गए थे.

मैंने रवीना की टी-शर्ट से अपना हाथ निकाल दिया था.
मैं मामी के नितंब सहलाते हुए अपना लंड आहिस्ता आहिस्ता उसकी चूत से बाहर निकालने लगा.

जैसे ही आधा लंड बाहर आया तो रवीना ने उसे अपने एक हाथ से पकड़ लिया.
मेरा लंड पूरी तरह से गीला था.

जैसे ही मेरा पूरा लंड बाहर निकला, रवीना ने अपना मुँह आगे कर दिया और आधा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.

मेरे बदन में तो बिजली सी दौड़ने लगी थी; मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था.
मैंने एक हाथ से मामी की सलवार को ऊपर किया और कुर्ते को नीचे कर दिया.

दूसरे हाथ से रवीना के सर पकड़ कर उसके मुँह में लंड आगे पीछे करने लगा.

रवीना ने अच्छी तरह से चूसकर मेरा लंड साफ कर दिया था.
अब वह मेरा लंड पैंट में डालने लगी, तो मैंने अपना हाथ उसके हाथ पर रख दिया.

उसके कोमल हाथ का स्पर्श मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था.
उसने मेरे हाथ से अपना हाथ छुड़ा लिया और अपनी सीट पर सोने का नाटक करके अधलेटी सी हो गयी.

इधर मामी भी अपने कपड़े ठीक-ठाक करके फिर से मुझे गांड सटाकर खड़ी हो गयी.

थोड़ी ही देर बाद बस में लाईट जल गयी तो मामी ने पीछे मुड़कर कहा- हर्षद, अब हमारा स्टाप आ गया है.
फिर उसने रवीना को आवाज दी- उठो रवीना … अपना सामान ले लो.

रवीना भी उठकर खड़ी हो गयी.
उनके पास तीन बैग थे और मेरी छोटी सी अटैची थी, तो मैंने रवीना के हाथ से एक बैग ले लिया.
मामी ने भी एक बैग ले लिया था.

ऐसे ही सामान लेकर हम बस में जगह बनाते हुए आगे आ गए थे.
तभी बस रुक गयी और हम नीचे उतर गए.

हम एक छोटे से रास्ते से अन्दर गांव की तरफ जाने लगे.

मैंने मामी से पूछा- इधर से गांव कितना दूर है?
मामी बोली- यहाँ से करीब आठ किलोमीटर दूर है. हमारा घर तो यहां नजदीक ही है. तुम आज रात यहीं सो जाना … और सुबह गांव चले जाना.

मैंने कहा- अब तो मेरे पास और कोई रास्ता ही नहीं है मामी … लेकिन मेरी वजह से आप लोगों को कितनी तकलीफ होगी. फिर मैं एक अनजान आदमी हूँ, तो घर के बाकी लोग क्या सोचेंगे?

मामी बोली- उसकी चिंता तुम मत करो. मैं लोगों को पहचानती हूँ. अच्छे बुरे की समझ है हमें हर्षद!

इसी बात पर रवीना ने अंधेरे में मेरा हाथ दबाकर कहा- मान भी जाओ हर्षद, इतनी रात को हम तुम्हें ऐसे अनजान इलाके में अकेला कैसे छोड़ सकते हैं.

इस तरह हम तीनों बातें करते करते उनके घर में पहुँच गए.

दो मंजिल का बड़ा घर था. आजू बाजू सब खेती थी. चारों ओर हरा-भरा सा लग रहा था.
मामी की सास ने हमारा स्वागत किया और बोलीं- तुम सब फ्रेश होकर खाना खा लेना अनीता.

हम अन्दर गए, सब सामान रवीना लेकर एक रूम में चली गयी.

मैं अनीता मामी की ओर देख कर बोला- मामी आपकी सलवार देखो, नीचे से पूरी गीली हो गयी है. जल्दी से चेंज कर लो. अगर किसी ने देख लिया तो!
उसने नीचे देखा और शर्मा गयी.

फिर वह मेरी तरफ देखकर बोली- थैंक्स हर्षद … मेरा तो ध्यान ही नहीं गया.
यह बात बोलकर वह बाथरूम की ओर भाग गयी और थोड़ी देर में फ्रेश होकर गाउन पहनकर बाहर आयी.

अब मैं फ्रेश होने चला गया.

बाद में हम तीनों ने मिलकर खाना खा लिया.
रवीना और मामी ने बर्तन साफ कर दिए.

फिर अनीता मामी रवीना से बोली- रवीना, ऊपर तुम्हारे बेडरूम के बाजू के बेडरूम में हर्षद के लिए बिस्तर लगा देना और वहाँ पानी या और कुछ चीज चाहिए तो रख देना.
रवीना ‘ठीक है मामी …’ कहकर ऊपर चली गयी.

मामी मुझे अपने बेडरूम में लेकर चली गयी और मुझे अपनी बांहों में कसकर चूमकर बोली- हर्षद, आज तुमने मेरी बरसों की प्यासी चूत की आग बुझा दी. मैं वह पल कभी नहीं भूलूँगी.
मैंने हंस कर उसकी चुम्मी ले ली.

मामी- लेकिन उस हालत में मेरी प्यास बुझाने वाला तुम्हारा लंबा-मोटा लंड मैंने अभी तक नहीं देखा है. प्लीज मुझे दिखा दो ना अपना लंड.

इतना बोलकर उसने मेरी पैंट की चेन खोल कर मेरा मुरझाया लंड बाहर निकाला और अपने दोनों हाथों में लेकर सहलाने लगी.

उसका कोमल हाथ पहली बार लगते ही मेरा लंड झट से खड़ा हो गया. फिर जैसे ही बड़ा हो गया, मामी दोनों हाथों से सहलाते हुए उसे अपने गुलाबी होंठों से चूमने लगी.
मेरा लंड और भी बड़ा और लोहे जैसा कड़क हो गया.

मामी लौड़े को सहलाती हुई बोली- बाप रे इतना गोरा, लंबा और मोटा लंड पहली बार देख रही हूँ हर्षद! मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है कि इतना बड़ा मेरी चूत में कैसे चला गया. इसीलिए अभी तक मेरी चूत में दर्द हो रहा है.
मैंने मामी से कहा- मामी अब बस करो, नहीं तो रवीना आ जाएगी.

तभी उसने मेरे लंड पर होंठों से चूम लिया और लंड को प्यार से मेरी पैंट में डालकर मेरे होंठों पर किस कर दिया.

मैंने भी उसे जोर से बांहों में कसकर चूम लिया और अलग हो गया.

फिर वह बोली- हर्षद, अब जाओ और आराम से सो जाओ. कल तुम्हें शादी में जाना है.

मैंने जाते हुए गुडनाईट बोला और मैं ऊपर सोने चला गया.

तो दोस्तों यह Xxx लेडी सेक्स इन बस आपको कैसा लगा? जरूर बताना. कमेंट्स करना मत भूलना.

इससे जुड़ी आगे की सेक्स कहानी समय मिलते ही आपके मनोरंजन के लिए लेकर आऊँगा.
तब तक के लिए आपको मेरा प्यार भरा नमस्कार.

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