चलती बस में चुदाई गर्म आंटी की

(Chudai Bus Travel Sex Kahani)

चुदाई बस ट्रेवल सेक्स कहानी में मैं स्लीपर बस से पूरी रात की यात्रा कर रहा था. तभी मेरे केबिन में मेरे पड़ोस में रहने वाली आंटी आई. मैं हैरान रह गया. वे मेरे साथ लेट गयी.

दोस्तो, कैसे हो आप सब?
मैं विशाल, मैं गुजरात के छोटे से शहर जामनगर का रहने वाला हूँ.
मेरा लौड़ा ज्यादा बड़ा तो नहीं, पर 6 इंच लंबा और 2.5 इंच मोटा है.

अपने जीवन की एक बिल्कुल सच्ची घटना आपसे शेयर करना चाहता हूँ.
लिखने में अगर कोई गलती हो जाए तो माफ कर देना.

ये चुदाई बस ट्रेवल सेक्स कहानी उस समय की है, जब मैं सूरत में जॉब कर रहा था.
तब मेरी उम्र 31 साल थी.

मेरी जॉब सूरत में थी और घर जामनगर, इसलिए अक्सर आना-जाना लगा रहता था.
मुझे ट्रेन से ज्यादा बस का शौक है और सफर लंबा होने की वजह से ज्यादातर स्लीपर कोच में ही ट्रैवल करता था ताकि थकान कम लगे.

जामनगर में मेरे घर के ठीक सामने एक फैमिली रहती थी.
उसमें पति, पत्नी, एक लड़का और उनकी शादीशुदा बेटी.

उस औरत (आंटी) की उम्र उस वक्त करीब 50 साल रही होगी.

आंटी का नाम अस्मिता था.

आंटी बहुत ज्यादा हॉट तो नहीं थीं पर खूबसूरत जरूर थीं.
उनका फिगर लगभग 32-28-36 का था.

कुछ समय बाद वे तीनों (पति-पत्नी और लड़का) सूरत शिफ्ट हो गए थे और लड़की अपनी ससुराल चली गई थी.

उसके बाद मैं अक्सर उनके सूरत वाले घर में आने जाने लगा था.
मैं नाइट शिफ्ट में होता था, इसलिए जब जाता तो आंटी अकेली ही घर पर मिलती थीं.

उनसे बातचीत होती रहती थी.
कई बार मुझे लगा कि आंटी कुछ उदास-उदास रहती हैं.

एक बार मैंने उनसे उनकी उदासी का कारण पूछा तो उन्होंने टाल दिया.
फिर मैंने कभी नहीं पूछा.

एक दिन मुझे सूरत से जामनगर आना था.
मैंने हमेशा की तरह डबल वाला सोफा (स्लीपिंग बर्थ) को बुक किया था.

मुझे किसी अनजान के साथ शेयर करके ट्रैवल करना बिल्कुल पसंद नहीं था.

बस अभी चली ही थी कि सूरत में ही एक स्टॉप पर रुकी.
कंडक्टर मेरे पास आया और बोला- साहब, अगर दिक्कत न हो तो एक पैसेंजर को यहीं बिठा दूँ?

मैंने पहले मना किया.
पर उसने मिन्नत की- सर, वे भी जामनगर ही जा रही हैं, प्लीज मान जाइए!
मैंने ‘जा रही हैं.’ सुना तो हां कह दिया.

जैसे ही पैसेंजर अन्दर आई, मैं चौंक गया.
वे मेरी पड़ोस वाली आंटी ही थीं.

मैंने झट से उनका सामान ऊपर रखा और उन्हें सोफे पर बिठा दिया.

हम दोनों में बातें शुरू हो गईं.
रास्ते में मैंने फिर से उनकी उदासी की वजह पूछी तो आंटी और ज्यादा उदास हो गईं.

अब बस चल पड़ी थी.

मैंने पूछा- आंटी, मेरे साथ डबल वाली इस बर्थ में सोने में आपको कोई दिक्कत तो नहीं ना?
उन्होंने मुस्कुराकर कहा- नहीं बेटा, कोई दिक्कत नहीं है.

फिर मैंने फिर पूछा- बताइए न आंटी कि आप इतनी उदास क्यों रहती हैं?
इस बार वे रोने लगीं और बोलीं- तुम्हारे अंकल मुझे बहुत मारते-पीटते हैं.

मैंने उन्हें चुप कराया- आंटी आप प्लीज रोइए मत …प्लीज.
मैंने उन्हें पानी पिलाया, कंधे पर हाथ रखकर ढाँढस बँधाया.

उस वक्त मेरे दिल में उनके लिए कोई गलत ख्याल नहीं था.

बस थोड़ी आगे बढ़ी और लाइट्स बंद हो गईं. हम दोनों लेट गए.
आंटी जल्दी सो गईं, मुझे नींद नहीं आ रही थी.

मैंने मोबाइल निकाला और मूवी देखने लगा.
मूवी में हॉट सीन आए तो मेरा लौड़ा एकदम टाइट खड़ा हो गया.

मूवी बंद की और सोने की कोशिश की पर खड़ा लौड़ा लेकर कौन सो पाता है भला!

मैं करवट बदलकर आंटी की तरफ मुँह करके लेट गया.
आंटी दूसरी तरफ मुँह करके गहरी नींद में थीं.

मैंने आंटी को ऊपर से नीचे तक देखा.
नज़र जैसे ही उनकी गांड पर पड़ी, मेरे सारे ख्याल बदल गए.

मन में बस एक ही बात आई कि काश इनको चोद पाता!

मेरा लौड़ा इतना टाइट हो गया कि लग रहा था कि अभी फट जाएगा या पानी निकल पड़ेगा.

मैंने सोचा, चलो ट्राई करते हैं.
अगर काम बन गया तो ये सफर ज़िंदगी भर याद रहेगा.

ऐसा सोचकर मैं आंटी से बिल्कुल सटकर लेट गया.

मेरा खड़ा लौड़ा उनकी गांड से टकरा रहा था.
थोड़ी देर बाद मैंने जान-बूझकर दबाव बढ़ाया और फिर … महसूस हुआ कि आंटी खुद अपनी गांड मेरे लौड़े पर दबा रही हैं. उनकी सांसें तेज़ हो गई थीं.

मैं फिर भी चुपचाप पड़ा रहा.
थोड़ी देर बाद मैंने अपना हाथ उनके बूब्स पर रख दिया और धीरे-धीरे दबाने लगा.

आज 50 साल की उम्र में भी उनके बोबे इतने सॉफ्ट थे मानो मक्खन जैसे हों और देखने में एकदम सधे हुए दिखते थे.
मैं अपने हाथ से आंटी के बोबे दबा रहा था और लौड़ा उनकी गांड पर रगड़ रहा था.

सच में मज़ा आ गया.

फिर मैंने हाथ उनके पजामे के ऊपर से चूत पर फेरना शुरू किया.
आंटी की सांसें और तेज़ हो गईं.

मैंने धीरे से नाड़ा खोला और हाथ पजामे के अन्दर डाल दिया.
आंटी की चूत पूरी गीली थी, बालों वाली मगर रस से लबालब.

मैंने उनके कान में फुसफुसाया- आंटी, अब घूम भी जाओ ना यार … क्यों तड़प रही हो … और मुझे भी तड़पा रही हो!

आंटी तुरंत मेरी तरफ़ मुड़ गईं.
जैसे ही घूमीं, मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और चूसने लगा.

मैं एक हाथ से बोबे मसल रहा था, दूसरे से चूत सहला रहा था.
धीरे-धीरे हम दोनों पूरी तरह नंगे हो गए.

अंधेरे में भी उनका बदन चमक रहा था.
मैंने झट से उनकी चूत पर मुँह रखा और चाटने लगा.

हम दोनों को लगा जैसे सातवें आसमान पर पहुंच गए हों.

थोड़ी देर बाद मैंने कहा- आंटी 69 में आ जाओ!
वे फुर्ती से आ गईं और मेरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगीं.

आह्ह्ह … क्या लौड़ा चूस रही थीं … मैं खुद को जन्नत में महसूस कर रहा था.
बस अहमदाबाद पार कर चुकी थी और हम भी अपनी वासना की हद को पार कर चुके थे.

मैंने कहा- अस्मिता आंटी … अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है.
वे हंसती हुई बोलीं- इतना कुछ करने के बाद भी आंटी?

थोड़ी और चूमाचाटी के बाद मैं उनके पैरों के बीच आ गया, लौड़ा पकड़कर उनकी चिकनी, गीली चूत पर घिसने लगा.

अस्मिता आंटी तड़प कर बोलीं- विशाल … अब मत तड़पाओ … लौड़ा अन्दर डाल दो! तेरे अंकल ने मुझे पिछले कई साल से नहीं चोदा है.
मैंने पूछा- क्यों?

वे अंकल को गाली देती हुई बोलीं- मां के लौड़े के लंड ने खड़ा होना ही बंद कर दिया है. इसी लिए तो चिढ़ता है भोसड़ी का … तभी तो हाथ उठाने लगा है … कुत्ता साला!

आंटी के मुँह से इतना सुनते ही मैं समझ गया कि आंटी जबरदस्त चुदासी हैं और इन्हें लौड़े का सुख नहीं मिलता है.

बस फिर क्या था मैंने अपना 6 इंच का मोटा लौड़ा एक झटके में अस्मिता आंटी की चूत में पेल दिया.

आंटी सालों से नहीं चुदी थीं तो आह करके सिसिया उठीं.
वह तो मैंने तुरंत उनके होंठों को अपने होंठों से दबा दिया नहीं तो चलती बस में लाइव ब्लू फिल्म देखने वाले आ जाते.

कुछ देर बाद आंटी की चुत ने लौड़े को गपागप लेना शुरू कर दिया था तो चुदाई का मजा आने लगा.

हम दोनों ताबड़तोड़ बस चुदाई में लग गए.
बस की रफ्तार और हिचकोलों के साथ-साथ हमने अपनी लय सैट कर ली थी.

थोड़ी देर बाद मेरा माल निकलने वाला था.
अस्मिता आंटी बोलीं- अन्दर ही निकाल दो … मेरी चूत बहुत प्यासी है!

मैंने सारा गर्म माल उनकी चूत में उड़ेल दिया और उनके ऊपर ही निढाल होकर गिर पड़ा.
आंटी तो पहले ही झड़ चुकी थीं.

मुझे बताना था कि मेरा फेवरेट पोजीशन डॉगी स्टाइल है पर बस में अस्मिता आंटी को डॉगी में चोदना मुश्किल था.

फिर भी वह रात का सफर हमारी ज़िंदगी का सबसे हॉट सफर बन गया था.

सूरत से जामनगर तक उस बस के एक सफर में हम दोनों ने तीन बार चुदाई बस में की.
आंटी की टांगें उठा उठा कर उन्हें इतना चोदा कि उनकी सारी उदासी दूर कर दी.
मैं तो उनकी गांड भी मारना चाहता था, पर आंटी की गांड सीलपैक थी तो वे राजी ही नहीं हुईं.

गांड चुदाई भी इतना आसान नहीं होता है, इसके लिए काफी तैयारी करनी पड़ती है.
गांड में ढीलापन होना जरूरी होता है.
वह सब मैं आंटी के साथ अभी चलती बस में नहीं कर सकता था इसलिए मैं मान गया.

उस दिन के ट्रेवल सेक्स के बाद मुझे बाद में मालूम हुआ था और आप भी सुनकर यकीन नहीं करेंगे कि उस उम्र में भी अस्मिता आंटी मुझसे प्रेगनेंट हो गई थीं.

हालांकि उन्होंने तुरंत गोली ले ली थी और सब ठीक हो गया.

आज भी हमारी चुदाई का सिलसिला चलता ही रहता है. बस अब पहले जैसा जोश नहीं रहा … क्योंकि अब अस्मिता आंटी की माहवारी खत्म होने की स्थिति आ गई है.

आज भी जब हम दोनों को मौका मिलता है, तो आंटी मुझे ‘विशाल … आ जा न मेरे जानू …’ कहकर बुला ही लेती हैं.

चुदाई बस ट्रेवल सेक्स कहानी लिखने में कोई भूल हो गई हो तो माफ कर देना.
आपको मेरी कहानी कैसी लगी मुझे मेल अवश्य करें.
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