पड़ोसन दीदी को चोदकर संतान सुख दिया
(Married Girl Chudai Kahani)
मैरिड गर्ल चुदाई कहानी में मेरे पड़ोस की लड़की मस्त माल थी पर शादी के 2 साल बाद भी उसे औलाद नहीं हुई. एक दिन वो अपनी छत पर रो रही थी. मैंने उससे कारण पूछा.
दोस्तो, मेरा नाम अमित है.
मैं छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर में रहता हूँ.
मेरी उम्र 25 साल की है, लम्बाई 5 फुट 11 इंच है.
मेरे लंड का साइज सात इंच का है और यह ऐसा मोटा है कि यह किसी भी चूत को चोदकर पूरी तरह से फाड़ कर ठंडी कर दे.
मैं अन्तर्वासना की सेक्स कहानियां पिछले तीन साल से पढ़ता आ रहा हूँ.
मैंने सोचा कि क्यों न आज मैं भी अपनी सच्ची मैरिड गर्ल चुदाई कहानी आप सब लोगों से साझा करूँ.
यह मेरी पहली चुदाई की कहानी है.
यह घटना आज से 6 महीने पहले की है.
मेरे पड़ोस ने एक परिवार रहता था.
उनका और हमारा घर लगा हुआ था.
उस घर में आंटी और अंकल के अलावा उसकी दो बेटियां और एक बेटा रहता था.
आंटी का बेटा मेरी उम्र का ही था.
हम सभी एक दूसरे को बचपन से जानते थे.
उसकी बड़ी बहन संगीता का दो साल पहले शादी हुई थी.
दीदी की उम्र 27 साल की थी.
वे दिखने में एकदम कड़क माल थीं. उन्हें देख कर किसी लौंडे का तो क्या, बूढ़े का लंड भी पानी छोड़ दे.
दीदी का रंग एकदम दूध सा गोरा था, उनका भरा पूरा शरीर और 36-32-38 का कांटा फिगर कभी कभी मुझे बेहद उत्तेजित कर देता था.
उनके फिगर से आप भी अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कैसी दिखती होंगी.
दीदी की गांड भी कुछ ज्यादा ही निकली हुई थी.
उनसे मेरी कभी कभी व्हाट्सएप पर साधारण बात होती रहती थी.
लेकिन मैंने अब तक उनके बारे में कभी ऐसा वैसा नहीं सोचा था.
बस कभी कभी जब मूड हॉर्नी होता और उसी वक्त वे दिख जातीं तो उनकी गांड या चूचे देख कर मैं खुद को शांत कर लेता था.
हुआ यूं कि शादी के दो साल बाद भी दीदी को बच्चा नहीं हो रहा था, इस कारण से उन्हें ससुराल में बहुत ताने सुनने पड़ते थे.
इलाज करवाने के लिए भी दीदी ने बहुत सारे हॉस्पिटल में दिखाया था.
जांच आदि में उनके अन्दर सब नॉर्मल आता था.
उनकी ससुराल नजदीक में ही थी तो वे अब ज्यादा समय मायके में ही रहने लगी थीं.
जीजा जी भी दीदी से मायके में रहने पर कुछ नहीं कहते थे.
वे गर्मियों के दिन थे, शाम को मैं छत पर टहलने जाता था.
एक शाम को मैं छत पर गया तो दीदी अपनी छत पर एक कोने में बैठ कर रो रही थीं.
उन्होंने मुझे आया देखा तो वे चुप हो गईं और आंसू पौंछने लगी थीं.
मैं उनसे कुछ बात करने की अभी सोच ही रहा था कि तभी दीदी के मोबाइल पर किसी का कॉल आया, तो वे नीचे चली गईं.
मेरी दीदी से बात ही नहीं हो पाई.
लेकिन मेरे मन में एक ही बात चल रही थी कि वे क्यों रो रही थीं.
ये पूछने के लिए मैंने रात में उन्हें मैसेज किया- क्या हुआ था दीदी आप क्यों रो रही थीं?
उन्होंने ‘कुछ नहीं, ऐसे ही’ बोल कर बात को टाल दिया.
मेरे बार बार पूछने पर दीदी बोलीं- बच्चा नहीं हो रहा है यार, इसलिए सुनना पड़ता है ससुराल में!
उनके मुँह से यार शब्द सुनकर मैं जरा चौंका.
फिर भी मैंने सोचा कि किसी वजह से मुँह से निकल गया होगा.
कुछ देर यही सब बात करने के बाद चैट बंद हो गई.
अब बीच बीच में हमारी बातें इसी मुद्दे को लेकर होने लगी थीं.
एक दिन दीदी का मैसेज आया.
वे बोलीं- मुझको तुमसे एक काम है.
मैं बोला- हां बताओ क्या काम है दीदी?
वे बोलीं- तुम कल घर आ जाना दोपहर में, फिर बताऊंगी.
मुझे मालूम था कि उनके घर में सबको किसी शादी में बाहर जाना है, इससे मैं समझ तो गया था कि उन्हें मुझसे क्या काम हो सकता है.
फिर भी ओके कह कर मैंने चैट बंद कर दी.
मैं अगले दिन की दोपहर का इंतजार करने लगा.
मैं एक बजे उनके घर गया, तो दीदी से पूछा कि घर में कोई नहीं दिख रहा है?
दीदी ने कहा कि मुझे छोड़ कर बाकी के लोग दो दिन के लिए शादी में बाहर गए हैं.
मैं बोला- हां दीदी बताओ, क्या काम है?
दीदी बोलीं- तुझसे एक मदद चाहिए थी.
मैं बोला- कैसी मदद?
वे बोलीं- पहले तू प्रॉमिस कर कि ये बात किसी से नहीं कहेगा!
मैं- हां ठीक है न दीदी … आप बेहिचक बताइए. मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगा.
तभी दीदी फिर से रोने लगीं.
मैं उनके पास जाकर उन्हें चुप करवाने लगा.
मैं उनकी पीठ पर हाथ फेरता हुआ बोला- अरे दीदी आप रोओ नहीं, प्लीज चुप हो जाओ और बताओ कि आपको मुझसे क्या मदद बताइए. मैं आपका हर काम करूंगा … बस आप रोना बंद करो.
वे बोलने लगीं- देख ना, तेरे जीजा जी से कुछ होता ही नहीं है!
मैं समझ गया कि जीजा जी से क्या नहीं होता है.
मेरा शक सही साबित हुआ था कि दीदी मेरे साथ कुछ करना चाहती थीं.
तब भी अभी इतनी जल्दी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता था तो मैंने जानबूझ कर अनजान बनने का ड्रामा करने लगा.
मैंने कहा- क्या मतलब?
वे बोलीं- तेरे जीजा जी, मेरे साथ बिस्तर में मुश्किल से दो मिनट भी नहीं टिक पाते हैं और उनका लंड भी बहुत छोटा सा है. मुझे अन्दर कुछ अहसास ही नहीं होता है!
यह कह कर दीदी और जोर से रोने लगीं.
उनके मुँह से पहली बार लंड सुन कर मैं भी चौंक गया था.
इससे पहले मैं उनसे कुछ कहता, वे मुझसे लिपट कर रोने लगीं.
मेरे सीने से लिपटते ही दीदी के बड़े बड़े चूचों का जो अहसास मुझे मेरे कलेजे में हुआ, उसका आनन्द ही अलग था.
आज से पहले मैंने संगीता दीदी के बारे में ऐसा कभी नहीं सोचा था.
पर छोड़ो … आज जब ऐसा मौका बिना मांगे ही मिल रहा है तो कौन छोड़े!
दीदी के बदन में अलग ही गर्मी थी.
उनके मम्मों के स्पर्श से ही मेरा 7 इंच का लंबा लंड फुंफकार मारने लगा.
मेरे लंड की सख्ती का अहसास दीदी को भी हो गया था.
मैंने भी देर ना करते हुए उन्हें कस कर पकड़ लिया और अपने होंठ उनके होंठों पर रख कर जोर जोर से किस करने लगा.
दीदी भी मेरा साथ दे रही थीं.
मैं धीरे से अपना हाथ उनके चूतड़ों पर ले गया और उनके दोनों चूतड़ों को बारी बारी से दबाने लगा.
अब उन्हें भी मजा आने लगा था.
उन्होंने भी अपना हाथ मेरे लोवर के ऊपर से ही मेरे लंड पर रख दिया और मेरे लोवर को नीचे कर दिया.
मैं भी उनके चूचों पर टूट पड़ा.
दीदी के रसभरे चूचों को दबाने लगा.
मुझे लग ही नहीं रहा था कि उनकी शादी को दो साल हो गए हैं. उनके चूचे आज भी अनछुए लग रहे थे.
मैंने एक हाथ दीदी की सलवार के अन्दर डाल दिया और उनकी पैंटी के ऊपर से चूत को रगड़ने लगा.
उनकी चूत पहले ही गीली हो चुकी थी.
मैंने अपनी एक उंगली को संगीता दीदी की चूत में डाला तो उनकी आह निकल पड़ी.
सच में बहुत टाईट चूत थी.
मैं जबरन उंगली से चुत को चोदने लगा और दाने को मसलने लगा.
कुछ ही देर में दीदी कराहती हुई बोलीं- अब और मत तड़पा, तेरे उस मादरचोद जीजा ने चुदाई के नाम पर हमेशा मुझे गर्म करके छोड़ दिया है.
मैंने उनके दूध चूसते हुए कहा- तसल्ली रखो दीदी, आज आपको मुझसे निराशा नहीं होगी.
दीदी बोलीं- अबे भोसड़ी के अब दीदी नहीं, संगो रानी बोल मेरे राजा.
मैंने संगीता दीदी का प्यार का नाम संगो कह कर उनके निप्पल मींजते हुए कहा- आज मेरा सात इंच का लवड़ा तुम्हारी चुत को वीर्य से भर देगा संगो रानी!
दीदी भी खुश होकर मेरे लौड़े को सहलाने लगीं.
मैंने अब उनके सारे कपड़े उतार दिए.
दीदी सिर्फ पैंटी में रह गई थीं.
मैंने इससे पहले भी बहुत सी लड़कियों से सेक्स किया है, पर ऐसी दूध जैसी गोरी और बदन में चुदाई के लिए इतनी गर्मी कभी नहीं देखी थी.
दीदी की पैंटी को उतारा, तो क्या कचौड़ी सी फूली हुई गोरी चूत मेरे सामने फड़फड़ा रही थी.
उनकी चुत पर एक भी बाल नहीं था.
मेरे लौड़े से चुदने के ख्याल से दीदी ने चुत को चिकनी चमेली बना कर रखा हुआ था.
चुत से बढ़िया महक भी आ रही थी.
मैंने दीदी को लिटाया और उनके पैर फैला कर दोनों पैरों के बीच बैठ कर चूत का रसपान करने लगा.
क्या नमकीन स्वाद था चूत का … सच में अलग ही आनन्द आ रहा था.
अपनी चूत के छेद में जीभ चलने से दीदी गाली देने लगी थीं- आह आह ओह मादरचोद … और जोर से चूस बहनचोद आह आह!
उनकी बहुत ही मादक सिसकारियां निकल रही थीं.
पूरा घर उनकी मदभरी आवाजों से भर गया था.
इसी बीच दीदी झड़ गईं तो मैं उनका पूरा पानी गटक गया.
दीदी बोलीं- अबे भोसड़ी के, ज्यादा खेल न दिखा, पहले मेरी चुत को एक बार चोद कर मुझे ठंडी कर दे … ज्यादा मत तड़पा साले … जल्दी से अपना लौड़ा मेरी चूत में डाल दे और फ़ाड़ दे मेरी चूत को आज!
मैं उठा और अपना लंड उनके मुँह के पास ले गया- लो चूसो, संगो रानी!
वे बोलीं- यार आज नहीं, मैं फिर कभी चूस दूंगी. अभी मुझे रहा नहीं जाता, प्लीज मुझे और मत तड़पा … जल्दी से मेरी चूत को अपने बड़े लंड से फाड़ दे पहले!
मैंने उन्हें सोफे से उठाया और अन्दर बेड पर लेटा दिया.
फिर मैंने अपनी पड़ोसन बहन की टांगों को अपने कंधों पर रखा और अपने लंड को बहन की चूत पर धीरे-धीरे रगड़ने लगा.
बहन की चूत सच में बहुत टाईट थी, मेरा मोटा लौड़ा उसमें घुस ही नहीं रहा था.
शायद दीदी से इससे पहले मेरे जितना मोटा लौड़ा कभी नहीं लिया था.
दीदी ने दोनों हाथ से अपने चूत की फाँकों को फैलाया और लौड़े के लिए जगह बनाने लगीं.
मैंने भी अपने लंड के सुपारे पर थूक लगा कर छेद पर रख कर दबा दिया.
मैंने अभी लंड का टोपा ही अन्दर डाला था कि दीदी की चीख निकल गई.
‘आह … बाहर निकाल मादरचोद … बाहर निकाल कुत्ते … मेरी जान निकल जाएगी!’
मैं वैसे ही थोड़ी देर रुका रहा.
जब दीदी शांत हुईं तो मैंने पुनः एक जोरदार धक्का लगा कर पूरा लंड उनकी चूत में पेल दिया.
दीदी की आंखों से आंसू निकलने लगे और वे दर्द से कराहने लगीं.
मैंने तुरंत दीदी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा.
कुछ देर यही मैरिड गर्ल चुदाई का सिलसिला चलता रहा.
जब वे कुछ नॉर्मल होने लगीं तो मेरा साथ देने लगीं.
मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए.
अब उन्हें भी मजा आने लगा था.
दीदी भी गांड उठा-उठा कर जोर लगा रही थी- आह आह ओह माई गॉड … फाड़ दे आज मेरी चूत … आह भोसड़ा बना दे मेरी चूत का … साले मादरचोद अमित मुझे मां बना दे … तेरी मां की चूत साले चोदू आह!
वे गाली और अंट शंट बकने लगी थीं.
इससे मेरा जोश और भी बढ़ गया.
अब मैं भी दीदी की चुत को जोर जोर से चोदने लगा.
लगभग 20 मिनट की चुदाई के बाद दोनों एक साथ स्खलित हो गए.
मैंने अपना माल अन्दर ही छोड़ दिया.
मैं बोला- अब ब/च्चा मुझे क्या बोलेगा?
दीदी बोलीं- तूने अपनी बहन को चोद कर बीज बो ही दिया है, तो मामा बने या पापा क्या फर्क पड़ता है!
मैंने कहा- तो इसी खुशी में पार्टी हो जाए.
वे समझ गईं और बोलीं- आज की रात मेरे साथ सोने आ जाना … मैं पार्टी भी दूँगी और तेरी अधूरी तमन्ना भी पूरी कर दूँगी.
मैंने समझ लिया कि संगीता दीदी आज की रात पूरी रंडी बनने के लिए रेडी हैं. वे दारू भी पियेंगीं और लौड़ा भी चूसेंगी.
कुछ देर बाद मैं बाजार गया और उधर से सेक्स की गोलियां, व्हिस्की का हाफ और सिगरेट की डिब्बी ले आया.
मैंने दीदी को सारा सामान पकड़ाते हुए कहा- मैं नौ बजे आता हूँ.
उस रात मैं मैंने दीदी के साथ वह सब किया, जो मेरी फैन्टेसी थी.
दो दिनों में हम लोगो ने जम कर चुदाई की. उसके बाद दीदी प्रेगनेंट भी ही गईं.
वे मुझसे चुदवा कर बहुत खुश थीं.
दोस्तो, यह मेरी पहली सेक्स कहानी थी. कहीं कोई गलती दिखी हो तो प्लीज माफ कर दीजिएगा.
मेरी इस कामरस से भरपूर मैरिड गर्ल चुदाई कहानी को लेकर आपके मन में जो भी विचार आ रहे हों … प्लीज़ ईमेल करके जरूर बताइएगा.
मेरी मेल आईडी है
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