क्या माल है यार

आशु राज 2013-10-21 Comments

लेखक : आशु

हाय फ्रेंड्स, यह मेरा पहली बार का सेक्स अनुभव था। मैं हॉस्टल में पढ़ता था। हॉस्टल में अपने ग्रुप में हम सेक्स से सम्बन्धित बहुत सी बातें एक दूसरे से शेयर करते रहते थे, काफ़ी अच्छा लगता था, मेरा मतलब अब भी लगता है।

एक बार गर्मी की छुट्टियों में मैं अपने घर आया था, काफ़ी खुश था, घर आकर जैसा सभी हॉस्टलर होते हैं।

तभी मुझे पता चला कि मेरी माँ ने एक नये शादीशुदा जोड़े को घर किराये पर दिया है।

मैं अपनी छुट्टियाँ अपने फ़्रेन्ड्स वगैरह के साथ मजे करने लगा। तो जब मेरे कुछ फ़्रेन्ड्स को पता चला कि मेरे घर पर एक कपल रेन्ट पर रह रहे हैं। तो

फ़्रेन्ड्स- ओये आशु सुना है तेरे यहाँ एक माल रहने आया है…!?!

मैं- हाँ यार… आया है, पर शादीशुदा है…!!

फ़्रेन्ड्स- तो क्या हुआ पटा साली को और मजे कर..!

मैं- पर यार, कुछ खास नहीं है..!

फ़्रेन्ड्स- अबे तुझे कौन सा गर्लफ़्रेन्ड बनानी है… काम चला… और छुट्टियों के मजे ले..!

मैं- यार फिर भी उसमें वो बात नहीं है…! वो स्पार्क नहीं है जो मुझे चाहिए…

फ़्रेन्ड्स- जो चाहिए वो तो है ना बस.. और तुझे कौन सा सिगरेट जलानी है… और सुन जब अपने दिल में कामदेव हो तो साली हर औरत माल लगती है।

मैं- सोचता हूँ।

फ़्रेन्ड्स- सोचता नहीं चोदता हूँ बोल… और हो सके तो हमें भी टेस्ट करा…!

मैं- सालों, अब समझा क्यों इतना मच-मच कर रहे हो…!!

सभी हँसने लगे..

फ़्रेन्ड्स से मिलने के बाद मैं अपने घर आया, घर पर कोई नहीं था, सभी नौकरी पर गए थे, मैं अपने रूम में आकर वही बातें सोचने लगा।

फिर अचानक मैं ऊपर वाली मंजिल पर गया जहाँ भाभी अकेली कुछ काम कर रही थी, उनके पति भी काम पर गए थे, पूरे घर में सिर्फ़ हम दो लोग थे, मैं उनके पास बैठ कर बातें करने लगा।

तभी मेरी नज़र उनके ऊपर गई, मैं उन्हें सेक्सी नज़रों से देख रहा था, वो मुझे आज सेक्सी लग रही थी मेरा मतलब स्पार्की लग रही थीं, थी तो वो पहले भी पर शायद मैंने उन्हें कभी उन नज़रों से देखा नहीं था। क्या फ़िगर था यार… !!

तभी ‘क्या माल है यार’ मैंने कहा।

भाभी- तुमने कुछ कहा?

मैं- न.नई… नहीं कुछ नहीं भाभी !

भाभी- क्या हुआ?

मैं- कुछ नहीं, भाभी बस ऐसे ही।

मैं वहाँ से तुरन्त निकल आया… हम दोनों के बीच ऐसे ही बातें काफ़ी दिनों तक चलती रहीं। मेरे फ़्रेन्ड्स भी इस बारे में डेली अपडेट लेते रहते थे।

मेरी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए? कहाँ से शुरुआत की जाए? तभी एक दिन मेरा एक दोस्त ने मुझसे बात की-

वंश- ओये आशु, और क्या चल रहा है आजकल?

मैं- यार कुछ नहीं बस ऐसे ही टाईम पास हो रहा है।

वंश- अच्छा तो यह बता उसके और उसके पति के बीच पटती कैसी है?

मैं- कुछ नहीं यार लड़ते बहुत हैं, थोड़ा कम पटती है।

वंश- तो तू इन्तजार किस का कर रहा है मैदान बिल्कुल साफ़ है, मौके पे चौका मार, वो 100% तेरे से सेट हो जाएगी।

मैं- मगर यार फ़टती बहुत है मेरी।

वंश- यार किस की नहीं फ़टती ऐसे टाईम, अच्छों-अच्छों की फ़टती है। तू बस अपना काम कर।

फ़्रेन्ड्स से मिलने के बाद, मैं सोचता हूँ अब चाहे जो हो जाए साली को पटा के ही रहूँगा। आखिर दूसरे दिन सब लोगों के जाने के बाद मैं भाभी के रूम में ऊपर जाता हूँ। वो टी.वी. देख रहीं थी।

मैं- मैं अन्दर आ सकता हूँ?

भाभी (हँसकर)- अरे आओ ना ! क्यों मजाक करते हो !

मैं- और भाभी क्या हो रहा है?

भाभी- कुछ नहीं टी.वी. देख रही हूँ।

मैं- क्या देख रही हो?

भाभी- होलीवुड मूवी… वो भी म्यूट करके।

मैं- रियली !! कौन सी?

भाभी- अरे मैं मजाक कर रही हूँ… न्यूज़ देख रही हूँ।

मैं- भाभी दोगी…!

भाभी- क्या?

मैं- रिमोट !

पर माँगना तो कुछ और चाह रहा था।

इन सबके बीच मेरे दिमाग में बस एक ही बात चल रही थी कि भाभी को कैसे पटाया जाए, पर कुछ समझ नहीं आ रहा था और फ़ट के हाथ में आ रही थी, वो अलग।

तभी मैंने देखा उनका हाथ कुछ जल सा गया था। मैंने उनका हाथ अपने हाथ में लिया और पूछा- यह कैसे हुआ भाभी?

भाभी- कुछ नहीं खाना बनाते वक्त जल गया।

मैं- आप अपना ख्याल रखा करो।

मैंने देखा उनके हाथ कितने खूबसूरत हैं… तभी मेरे दिमाग में एक विचार आया, मैं बोला- भाभी, आपके हाथों की रेखा तो कमाल की हैं।

भाभी- क्यों क्या हुआ?

मैं- हुआ तो कुछ नहीं पर शायद कुछ होने वाला हैं।

भाभी- क्या मजाक कर रहे हो… और वैसे भी तुम्हें आता है ये सब देखना?

मैं- हाँ पर ज्यादा नहीं। वो एक बुक पढ़ी थी, बहुत पहले।

भाभी- अच्छा तो बताओ और क्या-क्या लिखा है?

मैं- आपकी जिंदगी में बहुत जल्द कुछ अच्छा होने वाला है।

भाभी हंसकर- क्यों? मेरे पति क्या मुझे तलाक देने वाले हैं?

भाभी और उनके पति के बीच अक्सर लड़ाई-झगड़े होते थे।

मैं- क्या भाभी आप भी..!

फिर हम लोग आपस में ऐसे ही बातें करने लगे। इस दौरान हम लोगों में काफ़ी मजाक हुआ और एक दूसरे को छुआ भी। ऐसा हम दोनों में काफ़ी दिनों तक चलता रहा, पर वो नहीं हो पा रहा था जिसका मुझे इन्तजार था।

फ़िर एक दिन मैं अपनी माँ से किसी बात को लेकर थोड़ा नाराज हो गया तो उस दिन मै अपने ही रूम में बैठा लैपटॉप चला रहा था। आज मैं भाभी के पास भी नहीं गया, तभी एक आवाज आई।

भाभी- क्या मैं अन्दर आ सकती हूँ?

मैं (मुस्कुराकर)- भाभी आप? आओ…न !

वो मेरे पास आकर बैठ गई।

भाभी- क्यों आ नहीं सकती?

मैं- क्यों नहीं !

भाभी- अब तुम नहीं आए, तो मैंने सोचा कि मैं ही चली जाऊँ। वैसे क्या कर रहे हो?

मैं- कुछ नहीं नेट चला रहा हूँ।

थोड़े टाईम बाद मेरा रूम बिल्कुल शांत… कोई आवाज नहीं तभी…

मैं- भाभी मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूँ।

भाभी- हाँ कहो।

मैंने भाभी के दोनों गालों पर हाथ रखा और कहा- भाभी… मैं आपको पसंद करता हूँ।

मेरी साँसें और धड़कन दोनों बहुत तेज चलने लगी।

भाभी- …अम्म्म… मम… मैं भी..

मैंने बिना टाईम बर्बाद किए उन्हें किस करने लगा… अब मेरे दोनों हाथ उनके कबूतरों पर थे। मैं उन्हें दबाने लगा, वो भी मुझे किस करने लगी।

इस बीच हम दोनों एक-दूसरे के कपड़े उतारने लगते हैं। अब वो मेरे सामने सिर्फ़ ब्रा-पैंटी में थीं।

कसम से माल लग रही था… क्रेकर जो मुझे चाहिए थी। फिर मैने वो भी उतार दिए अब वो नंगी थीं मेरे सामने। मैं बस उन्हें और उनके फ़िगर को देखे जा रहा था।

मैं- क्या माल है यार !

भाभी(मुस्कुराकर)- यह तुम पहले भी कह चुके हो।

मैं- आपको कैसे पता?

भाभी- मैंने सुन लिया था..

मैं मुस्कुराया और उन्हें किस करने लगा। मेरे हाथ उनके शरीर पर घूम रहे थे, जिस से उनके सारे रोंगटे खड़े हो गए। बिल्कुल ऐसा लग रहा था, जैसे उनके शरीर में करंट दौड़ गया हो।

वो चीज मैं खुद महसूस कर रहा था, वो शादीशुदा थीं, तो जाहिर सी बात है कि मुझ से दो कदम आगे होगीं।

वो मेरे नीचे आकर मेरा लन्ड मुँह में लेकर चूसने लगीं। मेरा पहली बार था, तो सब कुछ मुझे बड़ा अजीब लग रहा था।

पर मैंने सब कुछ अपने दोस्तों से सुन रखा था। खैर थोड़ी देर बाद मुझे मजे आने लगा, तो मैंने अपने दोनों हाथों से उनका सिर पकड़ कर उनका साथ देने लगा।

फिर कुछ देर बाद मैंने नीचे आकर भाभी की टाँगों को फ़ैलाया। अब मुझे उनकी चूत साफ़ दिख रही थी। बिल्कुल गुलाब की पंखुडी की तरह एकदम गुलाबी लग रही थी। जैसे कि वो अब तक कुंआरी हो।

मैंने आव देखा न ताव, उनकी चूत पर एक किस किया और उनकी चूत के मजे लेने लगा। कभी-कभी बीच में दाँतों से काट भी लेता तो भाभी चीख उठतीं।

कुछ देर में भाभी आवाजें निकालने लगी, भाभी बोली- आशु अब तुम जल्दी करो।

मुझे लगने लगा कि अब बिल्कुल सही टाईम है तो मैं उठा और अपना लन्ड उनकी चूत पर रगड़ने लगा, पर मैं डाल नहीं रहा था, बस उन्हें तड़पा रहा था।

भाभी- अब जल्दी करो, क्यों तड़पा रहे हो?

मुझे लगा अब भाभी बिल्कुल लास्ट स्टेज पर हैं, तो मैंने बिना टाईम बेस्ट किए अपना लन्ड उनकी चूत में पेल दिया। जिस से भाभी के मुँह से आवाज निकल गई।

मैं- क्या हुआ भाभी?

भाभी- कुछ नहीं, तुम बस मजे दो और लो।

और मैं उन्हें चोदने लगा।

भाभी- आशु और तेज चलाओ और तेज।

मुझे लगने लगा कि अब भाभी का बस होने वाला है, मैं उन्हें और तेज़ चोदने लगा, फिर भाभी ने मुझे कस के पकड़ लिया, यानि भाभी झड़ चुकी !

…फिर कुछ देर बाद मुझे लगा कि मैं भी झड़ने वाला हूँ, मैं और तेज चोदने लगा।

…थोड़े समय के बाद हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर बिस्तर पर गिर गये और मुस्कुराकर एक दूसरे को चूमने लगे।

फिर हम दोनों बाथरुम में गये, वहाँ हम दोनों नहाते हुए काफ़ी मजे करते रहे। फिर आकर कपड़े पहन कर एक-दूसरे को गले लगा कर, काफ़ी टाईम तक एक-दूसरे के साथ लेटे रहे।

फिर जब घर वालों का घर आने का समय हुआ तो भाभी मुस्कुराकर एक चुम्बन देकर अपने कमरे में चली गई।

हम दोनों ने बाद में भी कई बार सेक्स किया और भी मजेदार तरीके के साथ…

आप को मेरी आप-बीती कैसी लगी। मुझे मेल करें।

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