दोस्त के पापा ने मेरी बहन चोद दी- 1

(Desi Girl Hot Sex Kahani)

देसी गर्ल हॉट सेक्स कहानी मेरी बुआ की लड़की की है जिसे मेरे घर के पास रहने वाले अंकल पटाने की कोशिश कर रहे थे. एक बारिश वाले दिन अंकल को मौक़ा मिल गया.

दोस्तो,
मेरी पिछली कहानी
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अपने पढ़ी और पसंद की.
धन्यवाद.

आज मैं आपको एक मजेदार पर सच्ची सेक्स कहानी सुनाने जा रहा हूं.

इस देसी गर्ल हॉट सेक्स कहानी में नाम तो सही ही हैं, पर जगह के नाम बदल दिए हैं.

मेरा नाम निशांत है. मैं 25 साल का हूँ और गुजरात के राजकोट शहर में रहता हूं.

यह कहानी कुछ साल पहले की है.
तब हम लोग शहर के पास बनी एक नयी सोसायटी में रहने आये थे.

मेरे डैड की शहर में एक इलेक्ट्रॉनिक की दुकान थी.
मैं तब स्कूल में पढ़ता था.

हमारे पास में एक परिवार रहने आया. उस परिवार में एक अंकल थे, जिनका नाम जयसुख था.
उनकी पत्नी निमिषा और दो बेटे विमल और नीतेश थे.

विमल मुझसे चार साल बड़ा था और वह दूसरे शहर में किसी हॉस्टल में रह कर पढ़ा कर रहा था.
जबकि नीतेश मेरे स्कूल में ही मेरी क्लास में पढ़ता था तो मेरी थोड़े ही समय में उससे अच्छी दोस्ती हो गई थी.

मैं और नीतेश साथ में ही स्कूल और ट्यूशन जाते थे और पढ़ाई के बाद भी साथ ही खेलते थे.

हमारी सोसायटी में अभी थोड़े ही परिवार रहते थे. ज्यादातर मकान बन रहे थे या खाली पड़े थे.
सड़क से आते समय पहले नीतेश का घर आता था, उसके घर से थोड़ी दूर, दूसरी गली में मेरा घर आता था.

मार्केट तक जाने के जाने के लिए मुझे नीतेश के घर पास से ही निकलना होता था.
नीतेश के पापा जयसुख अंकल पर्यटन विभाग में कर्मचारी थे और पास के किसी गांव में पोस्टेड थे.
उनके ऑफिस में ज्यादा काम नहीं होता था तो ज्यादातर वह घर में टीवी देखते ही मिलते थे.

अंकल चवालीस साल के सांवले से और थोड़े से मोटे थे, उनके आधे बाल झड़ चुके थे और बाकी बचे बाल, आधे काले और आधे सफेद थे.
वे ज्यादातर कम ही बोलते थे और जब भी बोलते, तब बेतुकी बात ही करते थे.

मैं उनको पसंद नहीं करता था और उनसे बात करने से बचता था.
वह घर में केवल लुंगी ही पहनते थे, ऊपर नंगा बदन ही रहते थे.
उनके पास से गुजरने से पसीने की बदबू आती थी. उनके घर पर मेरे सिवा कोई आता जाता भी नहीं था.

नीतेश की मम्मी निमिषा आंटी धार्मिक प्रवृत्ति की थीं.
वे सुबह पूरे दिन का खाना बनाकर और घर के कामकाज निपटा कर दस बजे मंदिर या सत्संग के लिए निकल जाती थीं, तो रात को आठ नौ बजे ही लौटती थीं.

उनकी उस समय की हालत को मैंने जो समझा था, वह बयां कर रहा हूं.
जयसुख अंकल अपनी पत्नी से खुश नहीं थे. उनकी शादीसुदा लाइफ लगभग खत्म ही हो चुकी थी.
वैसे भी निमिषा आंटी ने छोटे बेटे नीतेश के पैदा होने के बाद अंकल के साथ सोना लगभग बंद कर दिया था.

पिछले चार साल में तो आंटी एक भी बार अंकल के साथ सोई नहीं थीं और घर में भी उनसे बेरुखी से बात करती थीं.
अंकल सेक्स के भूखे शेर हो गए थे. उन्होंने काफी बार आंटी को सोने के लिए बहुत प्यार से मनाया, पर आंटी ने उनको हर बार गुस्से से झाड़ दिया था.

अब अंकल ने आंटी से अपनी शारीरिक जरूरत पूरी होने का ख्याल भी दिल से निकाल दिया.
पर अंकल की इच्छाएं अभी भी खत्म नहीं हो रही थीं, तो अंकल मजबूरन बाहर डोरे डालने लगे थे.
पर बाहर भी क्या कर लेते.

वैसे अंकल डरपोक थे और समाज में नाम खराब होने से काफी डरते थे. तो धंधे वाली के पास जा नहीं सकते थे और उनके ऑफिस या आस पड़ोस में कोई औरत या लड़की भी तो नहीं थी.

इसलिए वह बाजार में जाकर औरतों को ताड़ते रहते थे और घर आकर हाथ से लंड हिला कर गर्मी निकाल लेते थे.
वे कोई हैंडसम या मालदार आदमी तो थे नहीं कि कोई लड़की या औरत उनको भाव दे.
वैसे भी उनके घर मेरे अलावा कोई मेहमान या पड़ोसी भी आता जाता नहीं था.

छह सात महीने के बाद समय ने करवट बदली और एक बार मेरी मम्मी को बाजार से कुछ सामान की जरूरत पड़ी.
उन्होंने मेरी बुआ की बेटी, जो मेरे घर पर आयी हुई थी, उसे मुझे बुलाने के लिए भेजा.
उसका नाम जयश्री दीदी था.

दीदी ने मेरे घर मेरी मम्मी से सिलाई मशीन सीखना हाल ही में शुरू किया था.
मेरी बुआजी मेरे शहर में ही छह किलोमीटर दूर रहती थीं. दीदी रोज मेरे घर सिलाई सीखने आया करती थी.

दीदी ने मुझे बुलाने के लिए नीतेश के घर के दरवाजे के बाहर से आवाज दी.
पर मैं और नीतेश छत पर खेल रहे थे तो हमने उसकी आवाज नहीं सुनी.

दीदी घर में आ गयी, जहां जयसुख अंकल टीवी देख रहे थे.

उन्होंने भी टीवी की आवाज ज्यादा होने के कारण आवाज नहीं सुनी थी.
दीदी ने अंकल से मेरे बारे में पूछा, तो अंकल ने हमें नीचे बुलाया.

मैं दीदी के साथ जा रहा था, तो मैंने देखा कि अंकल दीदी को ताड़ रहे थे.
ऐसे दो तीन बार हुआ कि दीदी मुझे बुलाने नीतेश के घर आयी और हर बार अंकल घर पर मिले.
जब भी मैं नीतेश के घर खेलने जाता, अंकल मुझसे दीदी के बारे में सीधे या घुमा-फिरा कर पूछते रहते थे.

मैं समझ सकता था कि अंकल दीदी पर चांस मार रहे थे पर मैं कुछ बोलता नहीं था.
दीदी ही उनके संपर्क में आने वाली एकमात्र लड़की थी.

अब मैं आपको मेरी दीदी के बारे में बताता हूं. मेरी दीदी 24 साल की कुंवारी लड़की थी.
वह पोस्ट ग्रेजुएट तक पढ़ी थी. उसकी शादी की बात एक साल से चल रही थी.

मेरे फूफाजी एक बड़े सरकारी अधिकारी थे तो वे दीदी के लिए बड़े ऊंचे और पैसे वाले घर का लड़का ढूँढ रहे थे, पर दीदी की एक ही कमी थी कि दीदी गोरी नहीं थी.
हालांकि वो ज्यादा सांवली तो नहीं थी, पर गोरी भी नहीं थी.

बाकी दीदी के नाक नक्श एकदम मस्त थे और कामुक फिगर थी. उसकी फिगर का साइज़ 34-30-36 का था.

उसे देखने आने वाले अमीरजादों को तो गोरी लड़की ही चाहिए थी तो वह दीदी को पसंद नहीं करते थे.
भले वह खुद काले भैंसे जैसे हों.

यह बात दीदी को काफी बुरी लगती थी कि वह गोरी नहीं थी.

दीदी रोज दोपहर को मेरे घर आती थी और शाम को जाती थी.
अंकल उसके आने और जाने के समय उसे ताड़ने के लिए अपने दरवाजे पर खड़े रहते थे.

अंकल ने मुझसे दीदी का पता जान लिया था तो वह दीदी के घर के पास भी चक्कर लगाने लगे थे.
वहां उनका दीदी से दो तीन बार आमना-सामना भी हो गया था.

एक दिन दीदी हमारे घर आ रही थी तो रास्ते में ही भारी बारिश शुरू हो गई थी.
दीदी छाता लगाए हुई मेरे घर आ रही थी. बारिश काफी तेज थी.

हमारी सोसायटी निचले इलाके में होने के कारण घुटने तक पानी भर गया था.
दीदी जैसे ही नीतेश के घर से थोड़ा आगे गयी, वहां एक बड़ा पत्थर था, जो पानी के नीचे होने से दीदी ने देखा नहीं और वह धड़ाम से गिर पड़ी.
वो एकदम से चिल्लाई.

जयसुख अंकल ने दीदी की आवाज सुनी, तो उन्होंने खिड़की से बाहर देखा.
उन्होंने दीदी को देखा.

वैसे वे रोज मेरी दीदी को ताड़ने दरवाजे पर खड़े होते थे, पर आज उनको लगा कि भारी बारिश में दीदी नहीं आएगी.

दीदी पूरी तरह से भीग चुकी थी और उसके कपड़ों पर कीचड़ भी लग चुका था.
अंकल झट से घर से निकले और दीदी के पास पहुंचे.
दीदी के घुटने में चोट लगी थी खून भी निकल रहा था तो दीदी डर से सहम गयी थी.

दीदी जैसे ही थोड़ा आगे कदम उठाया तो फिर से गिर पड़ी.
अंकल ने दीदी से कहा कि ऐसी हालत में तुम अपने मामा के घर तक नहीं पहुंच पाओगी. बारिश रूकने तक मेरे घर में चलो.

दीदी के पैर में दर्द काफी हो रहा था तो दीदी को अंकल की बात सही लगी और वह अंकल के साथ उनके घर में आ गयी.

वह पूरी तरह भीगी और कीचड़ से सनी थी तो अंकल ने उससे कहा- तुम बाथरूम में जाकर कपड़े बदल लो. मैं तुम्हें अपनी पत्नी के कपड़े और तौलिया दे देता हूं. तुम्हारे कपड़े में मशीन में धोकर सुखा दूँगा.

अंकल ने दीदी को निमिषा आंटी की साड़ी, ब्लाउज, पेटीकोट तथा तौलिया दे दिया.
फिर दीदी बाथरूम में गयी और कपड़े बदल कर बाहर आयी.

अंकल एकटक दीदी को देखे जा रहे थे.
उन्होंने अपनी पत्नी के कपड़ों में दीदी को देखा तो अंकल दीवाने से हो गए. उन्होंने दीदी से उसके कपड़े लिए और मशीन में डाल दिए.

मशीन चालू करके वह दीदी के पास आए और उससे तौलिया ले ली.
अब वो खुद उसी तौलिये खुद को पौंछने लगे.
दीदी ने यह देख लिया.

अंकल दीदी के पास आकर सौफे पर बैठ गए और दीदी को उनकी घुटने की चोट दिखाने को बोला.
दीदी ने शर्माते हुए कहा कि ज्यादा नहीं लगी है, रहने दीजिए.

पर अंकल ने जोर देते हुए दीदी की साड़ी और पेटीकोट ऊपर करके देखा.
वैसे दीदी को दर्द तो हो रहा था, तो दीदी भी ना नहीं बोल पायी.

उसके घुटने के ऊपर छिल गया था. अंकल ने वहां पट्टी लगा दी और सूजन भी आयी थी तो आसपास मूव लगा कर मालिश करने लगे.

दीदी ने देखा कि अंकल की लुंगी में तंबू बन गया था, जिसे छुपाने की वह नाकाम कोशिश कर रहे थे.
अब दीदी भी काफी शर्मा रही थी.
बाहर बारिश रूकने का नाम नहीं ले रही थी, तो वह भी मजबूर थी.

फिर अंकल ने दो कप चाय बनायी और थोड़ा नाश्ता लेकर आए.
उधर मशीन में से कपड़े भी निकाल कर पंखे के नीचे सुखाने रख दिए.
फिर चाय पीते पीते अंकल दीदी से बात करने लगे.

दीदी को शर्म काफी आ रही थी क्योंकि वह किसी गैर मर्द के साथ अकेले में पहली बार बैठी थी.
अंकल नंगे बदन केवल लुंगी में तंबू बनाये उसके सामने बैठे थे.
वैसे मेरी दीदी बातूनी और मिलनसार स्वभाव की थी.

अंकल उससे उसके बारे में पूछ रहे थे कि कहां तक पढ़ी हो, क्या कर रही हो.
वह देसी गर्ल सर झुका कर जवाब दे रही थी.

थोड़ी देर में वह अंकल से खुल गई और दोनों बातें करने लगे.
अंकल को ना जाने कहां से दीदी से बात करने की अक्ल आ गई थी. बाकी वह हमेशा मेरे सामने बगैर सिर पैर की ही बात करते थे. पर आज तो बड़ी अच्छी तरह से बात कर रहे थे.

शायद उन्होंने रोमांटिक फ़िल्में ज्यादा देखी थीं, ये उसका असर था.
अंकल मेरी दीदी को बात बात में मक्खन मलाई लगा रहे थे.

उन्होंने दीदी से कहा- तुम्हारी शादी की बातें चल रही होंगी ना … लड़के वाले तुम्हें देखने भी आते होंगे. फिर भी अभी तक तुम्हारी सगाई क्यों नहीं हुई?
अंकल ने दीदी की दुखती रग पर हाथ रख दिया था.

दोस्तो, जब अंकल ने मेरी दीदी की दुःखती रग पर हाथ रखा तो दीदी के चेहरे पर मायूसी छा गई.
उसके बाद अंकल ने मेरी बहन को किस तरह से अपने जाल में फंसा कर चोदा, वो मैं आपको सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूंगा.

आपको मेरी देसी गर्ल हॉट सेक्स कहानी कैसी लग रही है, प्लीज़ कमेंट्स करें.
लेखक के आग्रह पर इमेल आईडी नहीं दिया जा रहा है.

देसी गर्ल हॉट सेक्स कहानी का अगला भाग: दोस्त के पापा ने मेरी बहन चोद दी- 2

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