पड़ोसन को गर्लफ्रेंड बना कर चोदा

कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी में पढ़ें कि मेरी पड़ोसन लड़की मेरे घर किताब लेने आई तो गलती से उसमें अश्लील किताब चली गयी. फिर उस किताब के बहाने से मैंने उसको कैसे पटाया?

दोस्तो! मेरा नाम हिमांशु है. मैं कानपुर (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला हूं. मेरी उम्र 40 साल है. मैं देखने में अच्छा दिखता हूं. बॉडी भी अच्छी है और हाइट भी 5 फीट 9 इंच है. मैं कसरत करता हूं और बॉडी को फिट रखता हूं.

यह कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी मेरी रीयल स्टोरी है जो मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में है. मेरी गर्लफ्रेंड का नाम अंजू (बदला हुआ) है. दरअसल वह मेरी पड़ोसन है और हमारे घर के बगल में ही रहती है. हमने कभी आपस में सेक्स के बारे में नहीं सोचा था.

मगर एक दिन एक ऐसी घटना हुई कि हम दोनों की ये दोस्ती सेक्स तक पहुंच गयी.

यह घटना करीब 18 साल पहले की है. उस वक्त मैं कॉलेज में था. वो भी पढ़ाई कर रही थी. अंजू मेरी ही उम्र की थी करीब 20-21 साल की.

हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ा करते थे. कई बार उससे पढ़ाई के बारे में बातें हो जाया करती थी. वो भी ज्यादा बात नहीं करती थी. बस हम काम से काम रखते थे क्योंकि उसके परिवार वाले उसको ज्यादा कहीं पर बाहर नहीं जाने देते थे.

उस समय मैं हस्तमैथुन बहुत किया करता था. देखने में शरीफ लगता हूं लेकिन मुझे सेक्स का चस्का बहुत है. मैं अपनी जवानी में चरम पर था और मेरा लौड़ा मुझे चैन से नहीं बैठने देता था. मैं दिन में तीन बार तो कम से कम मुठ मारा करता था.

मुझे सेक्स कहानियां पढ़ने का बहुत शौक था जो अभी भी वैसा का वैसा बना हुआ है. उस समय मैं नंगी लड़कियों वाली किताबें देखने का बहुत शौकीन था. आजकल तो खैर सब कुछ इंटरनेट और स्मार्टफोन में उपलब्ध है लेकिन उस वक्त अश्लील किताबें छोटे शहरों और कस्बों में काफी चलन में थीं.

मेरे पास एक किताब थी जिसका नाम था- हसीनाओं को छेड़ने के नियम। मैं दरअसल एक लड़की पटाने के चक्कर में था ताकि चूत का जुगाड़ हो सके. मेरे लंड को एक चूत की सख्त जरूरत थी ताकि मैं चुदाई का मजा ले सकूं.

उस किताब पर एक नंगी लड़की की फोटो छपी थी और अंदर भी काफी सारी फोटो थी. फिर मैं मुठ मार कर लेट गया. वो किताब रात को पढ़ कर मैंने अपनी कैमिस्ट्री की किताब में रख दी. अगली सुबह उठा और फिर काम में लग गया. ऐसे ही दोपहर हो गयी और मैं लेट कर टीवी देख रहा था.

तभी अंजू घर आ गयी. वो मम्मी के पास जाकर सीधी मेरे कमरे में आ गयी. मैं लेटा हुआ था.
वो बोली- हिमांशु मुझे तुम्हारी कैमिस्ट्री की बुक चाहिए. मेरी बुक मेरी सहेली के पास रह गयी और वो काफी दूर रहती है. मैं उसके घर नहीं जा सकती हूं.

मैंने कहा- ठीक है, ले जाओ.
मैंने सामने रखी टेबल पर बुक की ओर इशारा कर दिया. मैं ये भूल ही गया कि मैं रात में मैंने उसी बुक में वो अश्लील किताब भी रखी थी.
अंजू ने बुक उठाई और उसे अपनी बांहों में लपेट कर चूचों से दबा लिया और चुपचाप चली गयी.

मुझे अभी भी ध्यान नहीं था कि मैंने क्या बेवकूफी की है. मगर बाद में वो बेवकूफी ही मेरे काम आ गयी.

शाम को जब अंजू किताब को वापस लौटाने आई तो वो मंद मंद मुस्करा रही थी.
मैं भी हैरान था कि ये इतना क्यों मुस्करा रही है. इससे पहले तो इसने कभी ऐसे स्माइल नहीं किया.

किताब लौटाते हुए वो बोली- तुम बहुत ही गंदे हो.
इतना कहकर वो हंसी और भाग गयी.
मैं हैरान कि ये इस लड़की को क्या हो गया है!
फिर मैंने किताब खोल कर देखी तो पता चला उसमें वो अश्लील किताब रखी हुई थी.

एक बार तो मैंने माथा पटका मगर फिर अगले ही पल सोचा कि अगर अंजू को बुरा लगा होता तो वो ऐसे नहीं मुस्कराती. वो तो गुस्सा होने की बजाय शरमा रही थी.
ये सोच कर ही मेरे मन में लड्डू फूटने लगे. लंड तनाव में आने लगा.

उस दिन पहली बार मेरा ध्यान अंजू की जवानी पर गया. वो भी मेरी हमउम्र थी और जवान हो रही थी. उसके मन में भी सेक्स को लेकर कई सारे सवाल होंगे. उसका मन भी किसी लड़के के लिए मचलता होगा.

मैंने सोचा कि क्यों न अंजू को ही पटा लिया जाये. उस दिन के बाद से मैंने अंजू का पीछा करना शुरू कर दिया. मैं गली मौहल्ले और बाजार में उसका पीछा करने लगा. वो भी नोटिस कर रही थी कि मैं उसको फॉलो कर रहा हूं.

कॉलेज में भी जब उससे आमना सामना होता तो वो हंस कर चली जाती थी. उसके सूट में चुन्नी के नीचे उभरे उसके चूचे देख कर मेरा लंड खड़ा हो जाता था. मन करता था उसको पकड़ कर चूस लूं.

एक दिन मैंने उसे साथ में लंच करने के लिए पूछा. वो मान गयी. हम दोनों साथ में खाना खाने लगे.
बातों बातों में मैंने उससे उस दिन वाली बात पूछी और कहा- तुम उस दिन मुझे गंदा क्यों कह रही थी?

वो हंसने लगी और बोली- और क्या कहूं?
पढ़ाई की किताब में कोई ऐसी गंदी किताब रखता है क्या?
मैंने कहा- कैसी किताब?
वो बोली- अच्छा तुम्हें नहीं पता?
मैं- नहीं तो!

फिर वो बोली- नाम बताऊं क्या?
मैंने कहा- हां, बताओ, मुझे भी तो पता चले.
वो बोली- हसीनाओं को … आगे तुम खुद समझ जाओ.
मैंने हंसकर कहा- अरे यार … वो तो बस ऐसे ही एक दोस्त ने मुझे दी थी.
वो बोली- मगर पढ़ी तो तुमने भी होगी!

इस पर मैंने कहा- तो क्या तुमने नहीं पढ़ी?
इस पर उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया और वो उठ कर जाने लगी.
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और कहा- थोड़ी देर और रुक जाओ ना।
वो हाथ छुड़ाने लगी लेकिन मैंने उसे खींच कर नीचे बिठा लिया.

उसकी सांसें तेज तेज चल रही थीं.
मैंने कहा- तुम्हारे माथे पर तो पसीना आ रहा है.
वो बोली- छोड़ो मुझे, जाने दो हिमांशु।
मैंने कहा- अच्छा चली जाना, ये बताओ कि तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है?
उसने ना में गर्दन हिला दी.

वो बोली- तुम्हारी कोई है?
मैंने कहा- नहीं यार … मुझे कौन पसंद करेगी?
वो बोली- क्यों नहीं करेगी?
मैंने कहा- तो तुम कर लो!

इस पर वो हाथ छुड़ा कर हंसती हुई भाग गई और मैं अपना लंड मसल कर रह गया. उसके बदन को छूने से ही मेरे लंड ने कामरस छोड़ना शुरू कर दिया था. बस अब तो मैं किसी भी हाल में उसको पाकर उसकी चूत मारना चाह रहा था.

फिर ऐसे ही उसके साथ हंसी मजाक का सिलसिला शुरू हो गया. हम दोनों साथ में लंच किया करते थे. अब मैं उसका हाथ पकड़ लेता था और उसके कंधे भी सहला दिया करता था और वो कुछ नहीं बोलती थी. मुझे लाइन कुछ क्लीयर नजर आ रही थी लेकिन अभी पूरा आश्वस्त नहीं था.

एक दिन मैंने उसको कॉलेज की बिल्डिंग के पीछे अपनी बांहों में भर लिया. उसकी गांड पर अपना लंड लगा दिया और उसके बालों में चूमने लगा. वो छुड़ाने लगी लेकिन मैंने पकड़ और मजबूत कर दी.

वो बोली- क्या कर रहे हो पागल, कोई देख लेगा.
मैंने हवस भरे लहजे में कहा- देखने दो, मैं किसी से नहीं डरता, तुमसे प्यार करता हूं.
वो बोली- छोड़ो हिमांशु, कोई आ जायेगा.

इतना बोल कर उसने जोर लगाया और फिर मैंने भी उसको छोड़ दिया. वो अपनी चुन्नी अपने बूब्स पर संभालती हुई वहां से भाग गयी. अब मुझे यकीन हो गया था कि वो भी चुदने के लिये तैयार है. बस शुरूआत करने भर की देर है.

अब हम दोनों फोन पर भी बातें करने लगे थे. मैं उससे डबल मीनिंग बातें भी करता था और वो कुछ नहीं बोलती थी. फिर एक दिन दोपहर के वक्त उसका फोन आया और वो कहने लगी कि उसको कैमिस्ट्री के कुछ सवाल हल करने हैं. मैं तुम्हारे घर नहीं आ सकती, क्या तुम मेरे घर आ सकते हो?

मैंने कहा- अभी आता हूं. बस पांच मिनट में।
मैंने जल्दी से एक उत्तेजक खुशबू वाला मर्दों का डिओ लगाया और टीशर्ट व जीन्स पहन कर उसके घर पहुंच गया.
मैं घर में अंदर गया तो पता चला कि उसके घर वाले कहीं बाहर गये हुए थे. वो घर में अकेली थी. ये सोच कर ही मेरा लंड खड़ा होने लगा.

फिर हम दोनों साथ में बैठ कर पढ़ाई करने लगे. मैं उसके बिल्कुल करीब बैठा था ताकि उसको गर्म कर सकूं. मैं बार बार उसके हाथ को छू रहा था और कभी कभी अपनी जांघ पर भी रखवा देता था. वो बार बार हाथ हटा ले रही थी. मेरा लौड़ा भी तन कर कड़क हो चुका था जो मेरी जीन्स में डंडे जैसा दिख रहा था.

उसकी नजर मेरे लंड पर जा रही थी लेकिन वो नीचे ही नीचे नजर फेर लेती थी.
फिर मैंने पूछा- अंजू, बुरा न मानो तो एक बात पूछूं?
वो बोली- हां।
मैंने कहा- तुम्हें कैसे लड़के पसंद हैं?
वो बोली- तुम्हारे जैसे।

मैं उसके इस जवाब पर हक्का बक्का रह गया. उसने इतनी बेबाकी से जवाब दिया. मगर वो नजर उठा कर नहीं देख रही थी. बस नीचे ही नीचे मुस्करा रही थी. मैंने सोचा कि लोहा गर्म है. हथौड़ा चला ही दूं. ऐसा मौका नहीं मिलेगा.

फिर मैं बोला- तो मैं तो तुम्हारे पास ही हूं.
वो धीरे से बोली- और पास आ जाओ फिर!
उसका इतना कहना था कि मैंने उसके चेहरे को हाथ से ऊपर उठाया और उसकी गर्दन को पकड़ कर उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया.

पता नहीं मेरे अंदर क्या जोश आया कि मैं उसको जोर जोर से चूसने लगा. वो भी मेरा साथ देने लगी. दो मिनट बाद ही हम दोनों एक दूसरे की बांहों में लिपटे हुए एक दूसरे को बुरी तरीके से चूस रहे थे. किताबें कहां पड़ी थीं कुछ होश नहीं था.

मैंने जल्दी जल्दी से उसके कपड़े उतारने शुरू कर दिये और उसको एक मिनट के अंदर ब्रा और पैंटी में कर दिया. फिर मैं उसकी ब्रा को ऊपर से ही खाने लगा. उसकी चूचियों को जोर जोर से भींचने लगा. उसके मुंह से कराहटें निकल रही थीं.

फिर मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी. उसकी मीडियम साइज की चूचियां क्या मस्त गोरी लग रही थी. मैंने उनको मुंह में भरा और बारी बारी से उनका रस पीने लगा. वो मेरे बालों में हाथ फिराने लगी. फिर मैंने एक हाथ से उसकी पैंटी को सहलाना शुरू कर दिया.

अगले ही पल मैंने उसकी पैंटी में हाथ दे दिया और गीली चूत को छू लिया. इससे वो इतनी गर्म हो गयी कि मेरे कपड़े फाड़ने लगी. उसने मुझे जल्दी से नंगा कर दिया और मुझे अपने ऊपर लेकर मेरे होंठों को पीने लगी. मेरा लंड उसकी जांघों में टकरा रहा था.

मैं उठा और मैंने उसकी छाती पर आकर उसके मुंह के पास लंड को कर दिया. वो जानती थी कि मैं लंड चुसवाना चाहता हूं. पहले तो उसने ना में गर्दन हिलायी लेकिन मैंने उसके होंठों पर प्यार से किस करके कहा- प्लीज जान … एक बार कर दे ना!

दोस्तो, हसीनाओं को छेड़ने के नियम में मैंने ये पढ़ा था कि लड़कियों को कैसे अपनी बात के लिए मनाया जाता है. इसलिए मेरे आग्रह पर वो मेरे लंड चूसने के लिए तैयार हो गयी. उसने मेरे 6 इंची लंड को मुंह में लेने की कोशिश करते हुए उसको चूसना शुरू कर दिया.

मैं धीरे धीरे उसके मुंह को चोदने लगा. फिर मैंने लंड को निकाला और सीधा अपने होंठों का हमला उसकी चूत पर कर दिया. मैं जोर जोर से उसकी चूत को चूसने लगा. उसकी चूत में जीभ देकर उसका रस निकालने लगा.

अंजू जोर जोर से सिसकारने लगी- आह्ह … आईआ … आईहह … मम्मी … स्सस … उफ्फ … हिमांशु … आह्ह।
मैं उसकी चूत को चाटता रहा और वो मेरे सिर को अपनी चूत में दबाने लगी. अब वो पूरी तरह से चुदने के लिए तैयार थी और मैं भी इससे ज्यादा वेट नहीं कर सकता था.

मैंने उसकी टांगों को फैलाया और अपना गीला सुपारा उसकी चूत के मुंह पर रख दिया. मैंने हल्का सा धक्का दिया और मेरे लंड का टोपा उसकी चूत में उतर गया. वो थोड़ा सा उचकी.

उसके बाद मैंने एक और झटका दिया और आधा लंड उसकी चूत में जा घुसा. उसकी जोर से चीख निकली और वो मुझे हटाने लगी. मैंने उसके मुंह को हाथ से भींच लिया और उसकी दूसरे हाथ से उसकी चूचियों का मर्दन करने लगा.

मैं उसकी गर्दन को चूमते चाटते हुए उसकी चूचियों को मसलता रहा जब तक कि उसका दर्द कम न हो गया. फिर मैंने धीरे धीरे लंड को आधा ही चूत में चलाना शुरू किया. उसको थोड़ा मजा आने लगा. फिर चोदते हुए मैंने एकदम से पूरा जोर का धक्का मारा और मेरा लंड उसकी चूत को फाड़ता हुआ पूरा घुस गया.

फिर मैंने लंड अंदर बाहर करना शुरु कर दिया. मैंने अबकी बार ज़ोर का धक्का दिया. मेरा लंड लगभग पूरा बच्चेदानी तक चला गया था. उसके मुंह को मैंने पहले ही दबा लिया था इसलिए दर्द के मारे उसकी आंखों से पानी बहने लगा.

मगर अबकी बार मैं रुका नहीं. मैं लंड को अंदर बाहर करता रहा. मैंने देखा कि उसकी चूत फट गयी थी और मेरे लंड पर खून लग गया था. मगर क्या बताऊं दोस्तो, उसकी गर्म और चिकनी चूत में लंड डाल कर मैं तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था. मन कर रहा था उसको चोद चोद कर बेहोश कर दूं.

इसलिए बिना रुके मैं उसकी चूत में लंड को अंदर बाहर करके चोदता रहा. कुछ देर के बाद उसको भी मजा आने लगा और वो खुद ही अपनी टांगों को मेरे चूतड़ों पर लेपट कर चुदने लगी. हम दोनों चुदाई के मजे में खो गये.

मैंने अंजू को 10 मिनट तक चोदा. पहली बार उसकी चूत मिली थी इसलिए मैं ज्यादा देर नहीं टिक पाया और उसकी चूत में झड़ गया. मैं हाँफता हुआ उसके ऊपर पड़ा रहा. उसके बाद फिर मैं उठा और मैंने लंड को बाहर निकाला.

उसने चूत पर खून देखा तो डर गयी और फिर मैंने उसे मुश्किल से शांत किया. उसको पहली चुदाई के बारे में समझाया. फिर उसने कहा कि उसके घरवाले आने वाले हैं. फिर हमने जल्दी से रूम को ठीक किया. चादर को बदला और मैं उसको दर्द कम करने के लिए और गर्भ रोकने की गोली देकर आ गया.

उस दिन के बाद से अंजू के साथ मेरा टांका फिट हो गया और हम दोनों मौका पाकर एक दूसरे को खूब चूसते थे. चुदाई करने का छोटे से छोटा मौका हम नहीं छोड़ते थे.

एक बार मैंने उसको कॉलेज की बिल्डिंग की छत पर चोदा. उसको कॉलेज के बाथरूम में टांग उठा कर चोदा. एक बार उसको उसके घर की छत पर चोदा और कई बार अपने घर में भी चोदा.

इस तरह से अपनी पड़ोसन को गर्लफ्रेंड बना कर मैंने चुदाई के खूब मजे लिये और मैं लड़कियों की चूत चुदाई का आदी हो गया. मुझे लड़की चोदने का सही एक्सपीरियंस अंजू से ही मिला था. आज भी हम दोनों वैसा ही मजा लेते रहते हैं. हफ्ते में एक बार तो मैं उसको जरूर चोदता हूं.

दोस्तो, मेरी इस कॉलेज गर्ल सेक्स स्टोरी के बारे में आपकी क्या राय है मुझे अपने कमेंट्स में लिखें. मैं आपके रेस्पोन्स का इंतजार करूंगा. थैंक्यू दोस्तो।

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