मामा का लड़के ने मेरी चूत गांड में उंगली डाली

(Finger Sex Kahani)

फिंगर सेक्स कहानी में मैं अपने मामा के घर गई तो वहाँ उनका बेटा भी था। उसकी नजर मेरे बदन पर थी। पहले उसने मुझे पानी के टैंक में नहाते हुए छेड़ा, फिर रात को मेरे पास सोया तो …

यह कहानी सुनें.

दोस्तो! कैसे हो आप?
मैं हूँ आपकी प्यारी माया।
आपका शुक्रिया आपने जो मेरी कहानी
मेरी गांड का कांड हो गया
के 3 भागों को इतना पसंद किया और मुझे आपके कई सारे मेल मिले।
अगर किसी को जवाब नहीं मिल पाया हो तो मुझे इस बात का दुख है।
मुझे माफ करना और दिल से सॉरी!

दोस्तो, मेरा फिगर तो आपको याद ही होगा।
मेरी हाइट 5 फीट 2 इंच है, रंग मीडियम गोरा है, मेरा सीना 32 इंच का है, कमर 26 इंच की है और मेरी गांड 38 इंच की है जो बहुत ही बाहर को निकली हुई है।

मुद्दे की बात पर आते हैं दोस्तों।
यह मेरी सच्ची फिंगर सेक्स कहानी है।

यह बात तब की है जब मैंने किशोरावस्था पूरी करके जवानी की दहलीज पर कदम रखा था।

मैं मम्मी के साथ ननिहाल गई थी।
मेरे मामा एक छोटे से गाँव-कस्बे में रहते हैं।
उनकी बीस एकड़ जमीन है और वे खेतीबाड़ी करते हैं।

वहाँ का माहौल एकदम शुद्ध और शांति से भरा होता है।
मुझे वहाँ गए हुए पाँच साल से ज्यादा हो गए थे।

राहुल मेरे मामा का लड़का है।
मैं आपको उसके बारे में जरा विस्तार से बता दूँ।

राहुल मुंबई में ही पला-बड़ा है।
अब तो वो बड़ा हो गया।

वो मुझसे दो साल बड़ा है, दिखने में काफी हैंडसम, पर छपरी टाइप का।
शर्ट के ऊपरी दो बटन खुले, मुर्गे जैसे बाल कटिंग, कानों में बाली, दिमाग खाली, और दाँतों में गुटखे की लाली।
हमेशा जुबान पर गाली!
और तब वो भी अपने गाँव आया हुआ था।

उसने तब मुझसे बदतमीजी कर दी थी।

हम सब खेतीबाड़ी देखने गए थे और हम सब पानी के हौज में नहा रहे थे।
राहुल ने सबको बोला, “अपनी-अपनी चड्डी उतार कर नहाओ!”

दूसरे सब मामा के भाई के लड़के-लड़कियाँ थे, सबने अपनी चड्डी उतार कर नहाना शुरू कर दिया।
लेकिन मैंने अपने बाकी कपड़े उतार दिए।
मेरे बूब्स तो नींबू जितने ही थे।
लेकिन मैंने पैंटी नहीं उतारी क्योंकि तब मेरी चूत पर बाल आ गए थे।
मुझे शर्म आ रही थी।

सब लड़के-लड़कियाँ बिना कपड़ों के नहा रहे थे।

राहुल भी अपनी चड्डी उतार कर पानी में जा चुका था।
मैंने उसे अपनी चड्डी उतारते नहीं देखा।

वो तब मुझसे दो साल बड़ा था।
उसने मुझे कहा, “माया, अपनी चड्डी उतार दो, खामखा पानी में गीली हो जाएगी!”
मैंने कहा, “कोई बात नहीं, मैं ऐसे ही नहा लूँगी!”

तो उसने सबको बोला, “सब अपनी आँखें बंद कर दो और अपना मुँह दूसरी तरफ घुमा लो!”
सबने यही किया।
सबके मुँह दूसरी तरफ थे।

तब राहुल बोला, “अब पानी में आ जाओ, कोई नहीं देख रहा!”
मैंने जल्दी से अपनी पैंटी उतारी और पानी में कूद गई।

दोस्तो, तब मुझे चुदाई के बारे में ज्यादा कुछ पता ही नहीं था और मुझे कोई इंट्रेस्ट भी नहीं था।

फिर हम सब मिलकर एक कपड़े से बने बॉल से पानी में कैच-कैच खेलने लगे।
राहुल बार-बार मेरी तरफ बॉल फेंकता और मैं कैच नहीं कर पाती।

फिर वो मेरी साइड आ गया।
जब सामने से बॉल आती, तो वो पानी में डुबकी लगाकर ढूँढकर सामने फेंकता।

वो मेरे पीछे ही खड़ा होता और जब मेरे आगे बॉल गिरती, तो वो बॉल नीचे से उठाने के बहाने मेरी चूत पर हाथ फेर देता था।
और जब बॉल मेरे पीछे गिरती, तो वो मेरी गांड में अपना लंड स्पर्श करा देता था।

कभी-कभी तो उसने मेरे चूचे थोड़ा दबाकर हाथ फेर दिया था।

दो-चार बार तो उसने मेरे होठों पर किस भी कर लिया था।
लेकिन मुझे लगा, खेल-खेल में गलती से ऐसा हो जाता होगा।

पर मेरे कुछ न कहने से उसकी हरकतें और बढ़ती गई।

फिर एक बार अचानक मेरे हाथों से कैच मिस हो जाने से बॉल मेरे पैरों के नीचे गिर गई।

तभी राहुल, जो मेरे पीछे खड़ा था, उसने पानी में आगे आके मेरे दोनों पैरों के बीच हाथ डालकर बॉल उठाया।
और उसने मेरी चूत पर हाथ फेरा।

लेकिन इस बार उसने मेरी चूत के अंदर अपनी बड़ी उंगली से थोड़ा बलपूर्वक टच करके उंगली को हिलाया और बॉल को सामने फेंक दिया।

तब मुझे अचानक मेरी चूत से रीढ़ की हड्डी में से दिमाग तक जाती हुई ऐसी सिहरन महसूस हुई, क्या बताऊँ! मेरे शरीर का रोम-रोम खड़ा हो गया।

और ये हरकत उसने इतनी जल्दी-जल्दी की कि मैं समझ पाती, उससे पहले उसने बॉल फेंक दिया था।

दोस्तो, तब मुझे शत-प्रतिशत यकीन हो गया कि राहुल जानबूझकर मेरी चूत को टच कर रहा है, मेरी गांड पर अपना लंड स्पर्श करा रहा है, मुझे किस कर रहा है, और मेरे स्तनों को भी दबा रहा है।

मैंने गुस्से में राहुल से कहा, “तुम दूर रहो, समझे!”

वो मेरे पीछे दूर ही खड़ा था।
उसने अनजान बनकर कहा, “क्या हुआ, माया?”

मैंने कहा, “दूर रहो मुझसे! मैं तुम्हारी हरकतों से सब समझ रही हूँ, समझे!”

राहुल दो कदम मेरे पीछे खड़ा था।
वो और दो कदम पीछे हो गया और बोला, “क्या हुआ, बताओ तो सही!”

मैं कुछ बोली नहीं, सिर्फ गुस्से से राहुल को तिरछी नजर से देखा।

अभी सामने से किसी ने बॉल फेंका।
मैं कैच कर रही थी और धीरे-धीरे पीछे-पीछे जा रही थी।
मेरा ध्यान बॉल पर ही था और राहुल का ध्यान शायद मेरी गांड पर।

मैं पीछे-पीछे जा रही थी।
मेरा ध्यान बॉल पर ही था।

मैं बॉल पकड़ने ही वाली थी कि मेरी गांड अनजाने में राहुल के लंड से टकरा गई।
राहुल का लंड पहले से ही मेरी गांड का निशाना साध चुका था।

मेरी गांड का राहुल के लंड से स्पर्श होना और राहुल का अपनी कमर से जोरदार झटका देना!
उसने ऐसा जोरदार झटका दिया कि मेरी कुंवारी गांड में उसके लंड का सिर्फ अग्रभाग ही जा सका।

मेरे हाथ बॉल पकड़ रहे थे लेकिन मैं बॉल को भूल ही गई।

बॉल मेरे सिर पर लगा और मेरे हाथ सीधे मेरी गांड पर आ गए।
मेरे मुँह से एक जबरदस्त चीख निकल गई, “उईई, माँ!”

मेरी आँखों से पानी निकल गया।
मैंने पीछे देखा तो राहुल अपना लंड मेरी गांड में घोंपकर और पीछे हो गया।

सब बच्चे हँसने लगे कि बॉल मुझसे कैच नहीं हुआ और सिर पर लगा, इसलिए माया रो पड़ी।

मैंने रोते हुए गुस्से से राहुल से कहा, “ये क्या किया तुमने!”
राहुल बोला, “अरे, मैंने कुछ नहीं किया! तुम ही पीछे आती गई और तुम्हारा ध्यान बॉल पर था। मैं कितना पीछे हटता, इतने में तो तुमने अपनी गांड मेरे लंड पर मार दी!”

मुझे उस पर इतना गुस्सा आ रहा था कि मेरे हाथ में कुछ होता तो मैं उसे मार देती।
मैं बोली, “मुझे नहीं खेलना, मैं जा रही हूँ!”
राहुल बोला, “जाओ, कपड़े पहनो, तब तक हम खेलते हैं!”

फिर मैंने सोचा, मैंने चड्डी तो पहनी नहीं। पानी के हौज से मैं नंगी निकलूँगी।
और तो कोई नहीं, पर ये कुत्ता राहुल मेरी बालों वाली चूत को और मेरी बाहर निकली मक्खन जैसी गांड को घूरेगा ही।

इसलिए मैं हौज में एक कोने में खड़ी हो गई।

जब शाम होने को आई, सब बच्चे खेलकर थक गए, तब सब बाहर निकलने लगे।
आखिर में मैं और राहुल ही हौज में बचे।

राहुल बोला, “क्या, इसी हौज में रात काटने का फैसला किया है क्या?”
मैं बोली, “पहले तुम निकलो!”
राहुल बोला, “ओके!”
और बाहर निकलने लगा।

वो जब हौज के घाट की सीढ़ियाँ चढ़ने लगा, तब उसके शरीर का मुझे पूरा भाग दिखा।

मुझे उसका लंड दिखा, जो एकदम तना हुआ था और उसका आगे का भाग एकदम लाल-लाल था।
उसके लंड को देखकर एक बार फिर से मेरे रोंगटे खड़े हो गए।

शायद उस लंड की अंदाजित साइज 7 इंच से ऊपर और मोटाई मेरे हाथ की कलाई जितनी होगी।

मेरी आँखें उस लंड को देखकर फटी की फटी रह गई।

ये लंड का अग्रभाग, मतलब लंड का टोपा, मेरी गांड में शायद सिर्फ आधा इंच भी नहीं गया होगा और मेरी चीख निकल गई थी। मेरी आँखों में आँसू आ गए थे और मैं रो पड़ी थी।

मैंने पानी में ही मेरी गांड पर उंगली टच की और महसूस किया कि मेरी गांड पर साधारण सूजन-सी हो गई थी और थोड़ा दर्द भी कर रही थी।

वो तो अच्छा हुआ कि मेरी गांड में ये लंड पूरा नहीं घुसा।
अगर घुस गया होता, तो मैं मर ही गई होती।

मैं ये सोचकर ही मेरे शरीर में हल्का-हल्का कंपन जैसा अनुभव हुआ।
ये मेरा पहला अनुभव था कि किसी ने मुझे टच किया हो।

दोस्तो, आपको बताऊँ, तब के समय में मेरी चूत और मेरी गांड एकदम कुंवारी हुआ करती थी।
मेरी गांड के चूतड़ आकार में बहुत बड़े हैं, एकदम बाहर की ओर और उभरे हुए।
लेकिन मेरी गांड का छेद बहुत ही छोटा था।

राहुल पानी के हौज से बाहर निकल गया और कपड़े भी पहन लिए।
उसने कहा, “माया, जल्दी निकलो, देर हो गई, शाम होने को आई!”
मैंने घूरकर राहुल को देखा।

राहुल बोला, “अच्छा, अच्छा! फिर से तुम्हारे नाटक! सब दूसरी तरफ घूम जाओ, माया मेमसाहब को शर्म आ रही है!”

और वो सामने की ओर गाँव जाने वाले रास्ते की ओर चला गया।
वो मुझे दिखाई देना बंद हो गया।
सबने दूसरी तरफ मुँह कर लिया।

जब मैंने देखा कि कोई नहीं देख रहा तो मैं धीरे-धीरे पानी से निकली और अपनी पैंटी पहनने ही वाली थी।

तभी पीछे पानी के हौज में पत्थर गिरने की आवाज आई।
मैंने अचानक चौंककर पीछे देखा।
पीछे हौज की दीवार पर राहुल खड़ा था और वो एकटक मेरी गांड को घूर रहा था।

उसकी पैंट में उसका लंड लोहे की रॉड की तरह तना हुआ साफ-साफ दिख रहा था।
वो मेरी मक्खन जैसी गांड को घूरने में इतना लीन था कि कब उसका पैर गलती से छोटे से पत्थर पर टकराया और पानी में गिरा, उसे ध्यान ही नहीं रहा।

वो मेरी गांड देखने में इतना मग्न था कि उसे पानी में गिरे पत्थर की आवाज सुनाई ही नहीं।
उसकी आँखें फटी हुई थीं।

वो वासना से मेरी गांड को ऐसे घूर रहा था कि जैसे मुझे अभी पकड़कर अपना तना हुआ लंड मेरी गांड में घुसा देगा।

राहुल को देखकर और उसके तने हुए लंड को देखकर एक बार फिर से मेरे रोंगटे खड़े हो गए।
मैं सचमुच डर गई।
मैं घबराते हुए जल्दी से काँपते हाथों से पैंटी पहनने लगी।

मैंने गुस्से से राहुल से कहा, “क्या कर रहे हो यहाँ!”
फिर भी उसका ध्यान मेरी गांड पर ही था; उसने मेरी आवाज सुनी ही नहीं।

मैंने थोड़ा जोर से बोला, “वहाँ पर क्या कर रहे हो, राहुल!”
तब जाकर वो अपने ध्यान से बाहर निकला और नजरें हटाकर कुछ सोचकर बोला, “मेरी घड़ी यहीं कहीं खो गई थी, वो मैं ढूँढ रहा था!”

अब मुझे राहुल से डर लगने लगा था।

मैं जल्दी से कपड़े पहनकर सब बच्चों के साथ घर की ओर चलने लगी।
मुझे अहसास हुआ कि राहुल मेरी गांड को घूरते हुए मेरे पीछे-पीछे आ रहा था।

हम घर पहुँचे।
गर्मी के दिन थे।
रात को खाना खाकर हम सब बच्चे मामाजी की छत पर सोने के लिए चले गए।
वैसे भी मुझे नींद बहुत गहरी आती है।

मैं सोती कहाँ हूँ और उठती कहाँ हूँ, मुझे खुद को पता नहीं रहता।
मतलब, ये मेरी मम्मी ने मुझे बताया है।

बचपन से ही मेरी मम्मी मुझे गोद में उठाकर बेडरूम में सुलाती थी और सुबह डाँटते हुए कहती थी, “माया, तू तो घोड़े बेचकर सो जाती है! कहीं भी, कभी आँगन में, कभी झूले पर! कोई उठा ले जाएगा तो हमें पता भी नहीं चलेगा!”

और आज तो मैं बहुत थकी हुई थी। मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई।

रात को तीन-चार बजे होंगे।
छत के पास के पेड़ पर उल्लू डरावनी आवाज कर रहा था, “हूहूहू… हूहूहू… हुक… हुक!” मैंने अपने शहर में ऐसी आवाज कभी सुनी नहीं थी।

मेरी नींद खुल गई।
मैंने चादर से मुँह निकालकर इधर-उधर देखा।

सब सो रहे थे।
कोई मुझसे मेरे पीछे सटकर सोया हुआ था।
उसका मुँह नहीं दिख रहा था।

मैंने सोचा होगा कोई ब.च्चा।
वो मुझसे एकदम सटकर और नजदीक मुझे छूते हुए था।

मुझे लगा, ये भी बेचारा मेरी तरह उल्लू की आवाज से डर रहा है।
फिर वो मेरी चादर में घुस गया।

फिर आहिस्ता-आहिस्ता अपना हाथ मेरे सीने पर फेरने लगा, मेरे नींबू जैसे स्तनों को धीरे-धीरे मसलने लगा।
मुझे सचमुच अच्छा लग रहा था।
मैं सोने का नाटक करती रही।

उसने मेरे सीने से हाथ सरकाकर मेरे पेट की ओर ले गया।

तभी मुझे तेज गुदगुदी हुई और मुझसे हरकत हो गई।
उसने अपना हाथ रोक लिया।
दस मिनट तक उसका हाथ ऐसे ही पड़ा रहा।

मैंने मन ही मन सोचा, गलती हो गई, कितना मजा आ रहा था!
उसके हाथों में जादू था।

मैंने सोचा शायद उसे लगा हो कि ये जाग गई।
मैंने उसको विश्वास दिलाने के लिए कि मैं नींद में हूँ, खर्राटे लेना शुरू कर दिया।

एक मिनट बाद फिर उस हाथ में हरकत हुई।
उसका हाथ मेरे पेट से सरककर मेरी लैंगिंग्स के पास रुक गया।

मैंने मन ही मन सोचा, “अबे, रुक क्यों गया!”
मैं और जोर-जोर से खर्राटे लेने लगी।
उसने धीरे-धीरे मेरी लैंगिंग्स में हाथ डाल दिया और मेरी चूत के बालों पर प्यार से उंगलियाँ फेरने लगा।

मुझे सचमुच बहुत अच्छा लग रहा था।
मेरी चूत पानी-पानी हो गई थी।
मुझे ऐसा मजा आ रहा था, मुझे ऐसा मजा पूरे जीवन में नहीं मिला।

फिर उसने धीरे-धीरे मेरी चूत में अपनी आधी उंगली डाली और आगे-पीछे करने लगा।

दोस्तो, मैं उसकी तरफ गांड करके सोई हुई थी।
उसने मेरी लैंगिंग्स उतारने की कोशिश की लेकिन उससे उतर नहीं पा रही थी।

पर उससे एक साइड उतर पाया, जैसे डॉक्टर इंजेक्शन देने के लिए उतारता है, इस तरह मेरा एक चूतड़ बाहर था।

वो मेरे चूतड़ को आहिस्ता-आहिस्ता दबाने लगा।
शायद उसे भी मजा आ रहा होगा।

दोस्तो, मेरे चूतड़ एकदम गोरे-गोरे, दूध जैसे और मोटे और मक्खन की तरह मुलायम हैं।
वो मजा ले रहा था और मैं भी।

फिर वो ऐसे ही मेरे एक चूतड़ को दबाने लगा, जैसे वो मसाज कर रहा हो।

मेरी चूत में चिपचिपा पानी निकलने लगा।
मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी चूत में हजारों की संख्या में चीटियाँ रेंग रही हों।

मुझे इस मसाज से और मजा आने लगा।

दोस्तो, मुझे सचमुच पता नहीं था कि कोई सिर्फ चूतड़ दबाकर भी खुश कर सकता है।
पर वो एक ही चूतड़ दबा पा रहा था।
मैंने सोचा, दोनों चूतड़ों की मसाज हो जाती तो अच्छा रहता।

मैंन गहरी नींद का नाटक जारी रखते हुए उलटी सो गई जिससे वो मेरी लैंगिंग्स अच्छे से उतार सके और अपना काम जारी रखे।

पर वो अचानक मेरी हरकत से डर गया।
वो भी नींद में होने का नाटक करने लगा।
मुझे पता था कि वो सोया नहीं।

एक-दो मिनट हुई और उसने धीरे से मेरी लैंगिंग्स उतारना शुरू किया।
उसने आहिस्ता से मेरी लैंगिंग्स उतारी और मेरे घुटनों से थोड़ा ऊपर मेरी जाँघों तक सरका दी।

फिर मेरे दोनों चूतड़ों के ऊपर आहिस्ता से अपने दोनों हाथ रखे और आहिस्ता-आहिस्ता दबाने लगा।

दोस्तो, मैं ऐसे ही पड़ी रही।
मुझे इतना आनंद कभी नहीं प्राप्त हुआ।

मैं मन ही मन सोचने लगी कि तभी तो मेरी सब सहेलियों के अफेयर हैं।
वो सब रोज अपने बॉयफ्रेंड से मिलने जाती थीं।
मैं उन सहेलियों से नफरत करती थी और उनसे कहती थी कि ऐसा करना गलत है।

मुझे आज सचमुच पता चला कि मेरी सहेलियाँ मेरा क्यों नहीं मान रही थीं।
आज मुझे पता चला कि पढ़ाई, पैसा, सेक्स, सब अपनी जगह सही है।
सबका एक अलग नशा होता है।
जैसे आज मैं सेक्स के नशे में थी।

मैं सोच ही रही थी कि तभी उसने मेरे चूतड़ दबाना बंद कर दिया।
मैं अपने विचारों से बाहर निकली।
मैंने सोचा, अब क्या हुआ? अभी तो मैंने कोई हरकत भी नहीं की।

वो थोड़ा नीचे हुआ और फिर से मेरे दोनों चूतड़ों पर अपने हाथ रखे और दोनों हाथों से थोड़ा दबाकर मेरे दोनों चूतड़ों को एक-दूसरे से दूर करने लगा, मतलब मेरे चूतड़ों को विपरीत दिशा में फैलाने लगा जिससे मेरी प्यारी गांड का सुराख बाहर की ओर आए।
मैं चुपचाप पड़ी रही।

तभी उसने अपना मुँह मेरी गांड पर रख दिया और थोड़ी देर रुका।
शायद वह मेरी गांड को सूँघ रहा था, क्या पता।

मुझे उसकी गर्म-गर्म साँसों का अहसास मेरी गांड पर हो रहा था।

उसकी इस घिनौनी हरकत से मुझे थोड़ी घिन हुई।
क्योंकि इस छोटे से गाँव में पानी की कमी हुआ करती थी।
टॉयलेट तो सबके थे पर कभी-कभी पानी न होने की समस्या से बाहर डिब्बा लेकर जाना पड़ता है।
मैं भी सुबह-सुबह डिब्बा लेकर पास की झाड़ियों में टॉयलेट करने गई थी।

वैसे मैं अपनी गांड को अच्छे से धोती हूँ, पर अभी यहाँ हम गेस्ट थे, हम घूमने आए थे।
क्या पता अच्छे से धुली है कि नहीं, मैं श्योर नहीं थी।

और तभी उसने अपनी जीभ मेरी गांड पर टच की और मेरी गांड के छेद को चाटने लगा।
मुझे उसकी इस घिनौनी हरकत से उस पर बहुत घिन हो रही थी लेकिन मुझे बहुत मजा आ रहा था।

वो मेरी गांड की रिंग पर जीभ ऐसे गोल-गोल घूमता और अंदर-बाहर करता, जीभ लपलपाता।
दोस्तो, इस अहसास का मेरे पास कोई वर्णन नहीं।

फिर वो रुककर मेरी गांड में अपनी उंगली डालने लगा।
उसकी उंगली का एक ही पोर जा पाया।

दोस्तो, मेरी कुंवारी गांड का छेद बहुत ही छोटा था, उसकी उंगली जा ही नहीं पा रही थी।

उसने थोड़ा दम लगाया।
दूसरा पोर जबरन घुसाया।

मैंने सोच लिया था, चाहे वो कुछ भी करे, मैं हरकत नहीं करूँगी।
पर दोस्तो, मेरी न चाहते हुए भी दर्द से मेरे मुँह से धीमी-सी “अहह!” निकल गई।

उसने तत्काल उंगली निकालकर सोने का नाटक करने लगा।
मैं ऐसे ही पड़ी रही।

कुछ देर बाद उसने मेरी चूत में वो उंगली डाली और पूरी चीपचीप करके निकाली और मेरी गांड पर अपनी थूक लगाई।
और फिर से मेरी गांड में उंगली डालने लगा।

मैंने सोचा, अब हरकत नहीं करूँगी।
हरकत से वो डरकर रुक जाता है और फिर फिंगर सेक्स का मजा किरकिरा हो जाता है।

उसने धीरे से मेरी गांड में अपनी उंगली लगाई और धीरे-धीरे अंदर दबाने लगा।

मैं साँसें रोके इंतजार कर रही थी कि कब मेरी गांड में ये जादुई उंगली घुसे।
पर साली उंगली घुसने का नाम ही नहीं ले रही थी कि आगे का कार्यक्रम आगे बढ़े।

वो मेरी गांड के छेद में उंगली डालने में मशक्कत कर रहा था।
मैंने आशा छोड़ दी कि नहीं जा पाएगी।
मेरे मुँह से दुखी मन से निराशा से निःश्वास निकल गई।
मैंने दुखी होकर गहरी साँस छोड़ी।

और मेरी साँस का छोड़ना और मेरी गांड ने खुद ही उसकी उंगली को खींच लिया।
और “पुच” सी आवाज आई।
मुझे नहीं पता ये कैसे हुआ।

शायद मैंने अपनी साँस घोंटकर रखी थी और इस वजह से मेरी गांड का छेद टाइट रहा होगा।
और मेरे साँस छोड़ते ही छेद बड़ा हो गया हो और मेरी गांड ढीली हुई हो।

मुझे नहीं पता क्या हुआ, पर जो भी हुआ, अच्छा हुआ।
उसकी उंगली आखिरकार मेरी गांड में चली ही गई।
और वो उंगली को अंदर-बाहर करने लगा।

उसने लगभग दस मिनट तक मेरी गांड में उंगली की।
नौ मिनट तक मजा आया, पर आखिरी एक मिनट में मेरी गांड की छेद की दीवारें जलने लगीं, मुझे काफी दर्द होने लगा।

अपने आप मैंने दूसरी ओर करवट ले ली।
उसने झट से उंगली निकाल ली और ऐसे ही पड़ा रहा।
अब मेरी चूत उसके सामने की ओर थी।

कुछ देर बाद उसने मेरी चूत में उंगली डाली।
वो मेरी चूत में उंगली करने लगा।
मुझे फिर से फिंगर सेक्स में मजा आने लगा।
उसकी उंगली में जादू था।

वो फच-फच से उंगली डालता और निकालता।
करीब दस मिनट तक उसने ऐसा किया।

अचानक मेरी साँसें तेज होने लगीं और उसने थककर अपनी उंगली अंदर-बाहर करना रोक दिया।
उंगली मेरी चूत में ही थी।
थोड़ी देर और करता तो मेरा हो जाता।

पर अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था और अचानक मैं अपनी कमर हिलाने लगी।
मैं उसकी उंगली से मेरी चूत टकराने लगी।

और एक मिनट में मेरा हो गया।
मैंने जल्दी-जल्दी अपनी लैंगिंग्स पहनी और सोने लगी।

तभी उसने मेरा हाथ पकड़ा और अपने तने हुए लंड पर रखा।

मैंने उसके लंड को पकड़ा तो ये क्या! उसका लंड तो लंबा और मेरी हाथ की कलाई जितना मोटा था।

तब मैंने उसके मुँह पर से चादर हटाई तो वो राहुल था।
मैंने अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली, “ये क्या बदतमीजी है!”

राहुल फिर से मेरा हाथ पकड़कर बोला, “अपना का हो गया, अब तो तुम्हें बदतमीजी ही लगेगी! बस माया, मेरे लंड का सिर्फ पानी निकाल दो!”
मैं गुस्से से बोली, “छोड़ मेरा हाथ, नहीं तो अभी चिल्लाऊँगी!”

उसने कहा, “माया, सिर्फ एक बार!”
मैंने उसकी एक भी नहीं सुनी और उसका हाथ छुड़ाकर अपनी मम्मी के पास सो गई।

दोस्तो, आपको ये फिंगर सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर मेल करके बताना!
आपकी माया
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