नामर्द ब्वॉयफ्रेंड से चुदाई

( Premature Ejaculation)

प्री मेच्योर इजेकुलेशन स्टोरी में एक स्कूल गर्ल का बॉयफ्रेंड जब उसे चोदता था तो 10-12 धक्कों में ही उसका वीर्यपतन हो जाता था. लड़की बेचारी प्यासी रह जाती थी.

यह कहानी सुनें.

दोस्तो, मेरा नाम अनुष्का सिंह है. मैं कानपुर, उत्तर प्रदेश की रहने वाली हूँ.
मेरी उम्र 23 साल है. गोरा रंग है, अच्छा फिगर … जिसे देखकर अच्छे-अच्छे लड़कों का पानी निकल जाए.

मेरी ब्रा का साइज 36 नंबर का है और मेरी कमर भी काफी कामुक है.
मेरी मां और मेरी बड़ी बहन भी मेरे फिगर देखकर जलती हैं.

और तो और … मेरी माताजी यह तक कहती हैं कि अनुष्का तुम्हारे दूध बहुत बड़े-बड़े हो गए हैं … मुझसे भी बड़े!

तो दोस्तो, ये प्री मेच्योर इजेकुलेशन स्टोरी शुरू होती है जब मैं क्लास 12वीं में थी.

मुझे एक लड़के से काफी प्यार हो गया, जिसका नाम विकास था.
वह मेरे स्कूल के पास के एक स्कूल में पढ़ता था.
उसका पूरे शहर में बहुत नाम था.
वह काफी फेमस था हमारे पूरे क्षेत्र में.

वह मुझे देखकर मेरे पीछे पड़ गया था.
मेरी सारी सहेलियां उसके साथ रिलेशनशिप में आना चाहती थीं पर उसे सिर्फ मैं पसंद थी.

धीरे-धीरे उसने मुझसे बात की और हम रिलेशनशिप में आ गए.
फिर हमारी पढ़ाई खत्म हो गई.

और मैं समय के साथ खूब जवान हो गई, मेरी गांड फूल गई.
मेरा वजन 54 किलो है और मैं एकदम मस्त गदराई हो गई.

मुझे चुदाई के बारे में ज्यादा पता नहीं था.
शुरू में उसने मेरी चुदाई की, मुझे कुछ ज्यादा महसूस ही नहीं हुआ क्योंकि ठीक से वह मुझे कभी चोद ही नहीं पाया.

मैं पोर्न वीडियोज में चुदाई देखती तो देखकर मुझे बड़ा मजा आता, पर करने में मेरी गांड फटती थी … बहुत दर्द होता था.
फिर धीरे-धीरे हम करते गए और मुझे इसकी जानकारी होती गई. मजा भी आने लगा.

धीरे-धीरे मैं कामुक होती गई और मेरे बॉयफ्रेंड के लंड का दम खत्म होने लगा.
कई बार तो वह मेरी प्यास बुझा ही नहीं पाता.

एक बार की बात है. मेरे घर में कोई नहीं था और मैंने विकास को घर बुलाया.
मैं पूरी तरह मदहोश थी अपनी वासना में.

सारा काम जल्दी खत्म करके शाम 6 बजे ही बिस्तर पर लेट गई और मन ही मन सोचने लगी कि आज वह आएगा, जमकर चोदेगा और मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा. यही सब सोचती-सोचती मैं चुत को रगड़ने लगी और झड़ गई.

फिर रात हुई, शायद 11 बज गए होंगे.
वह आ गया.

मैंने उस दिन मम्मी की रेड कलर वाली मैक्सी पहनी थी और ब्रा नहीं पहनी थी.
मेरे पूरे बाल खुले थे और चूचे बिल्कुल कड़क तने हुए थे.

वह आया, उसने मुझे देखा और मुझ पर टूट पड़ा.
मेरे होंठों को चूमने लगा.

अह्ह्ह्ह … और मेरी गर्दन को चूमा. अह्ह्ह्ह …
मैं सिसक रही थी.
अह्ह्ह्ह्ह …

उसने 20 मिनट तक मेरे होंठ चूसे.
मुझे बहुत मजा आया.

फिर मुझसे रहा नहीं गया और मैं उसे बेड की तरफ ले गई.

मैं उसके ऊपर लेटकर उसके होंठ चूमने लगी और धीरे-धीरे उसके कपड़े उतारने लगी.
मैंने पहले ही अपनी मैक्सी उतार दी थी, उसके सारे कपड़े उतारे.

उसका अंडरवियर जैसे ही उतारा, उसका लंड एकदम तना हुआ 7 इंच लंबा और मोटाई इतनी कि फाड़ कर रख दे.
उसके लंड को देखकर मुझसे रहा नहीं गया.
मैं उसके लंड पर टूट पड़ी और चूसने लगी.

वह ‘अह्ह … अह्ह … अह्ह्ह … येस अनु बेबी … अह्ह् … अम्म्म् …’ की आवाजें कर रहा था.
‘अह्ह्ह … बेबी बस करो मेरा निकल जाएगा… अह्ह् …’

पर मैं उस दिन कहां रुकने वाली थी. मैं बहुत उतावली थी चुदाई के लिए.
मैं उसका लंड चूसती रही और वह ‘अह्ह्ह … अह्ह्ह … अनु बेबी… अह्ह ह्ह्ह्न…’ करता रहा.

जल्दी हम दोनों 69 में आ गए.
वह मेरी चूत चाटने लगा.
मैं पागल हो गई- अह्ह्ह … विकास चाटो… अह्ह … अह्ह ह … अह ह्ह्ह ह्ह … उफ्फ्… मेरे क्लिट चाटो इसे!

वह चाटता गया.

फिर मुझसे रहा नहीं गया.
अब मैं टांगें फैलाकर लेट गई.
उसने ऊपर आकर मेरी चूत पर अपना मोटा लंड रखा.

सच कहूँ दोस्तो, मुझे इतना मजा कभी नहीं आया जितना आज आ रहा था.
मैं बेहद उतावली थी.

उसने मेरे ऊपर आकर अपना लंड मेरी चूत पर रखा.
मैं सिसक गई और मन ही मन में सोचा कि आज मेरी जमकर चुदाई होगी!

उसने मेरी चूत पर अपना लंड सैट किया और जोर से अन्दर डाला.
‘अह्ह्ह्ह्ह … बाबू चोदो मुझे आज अच्छे से.’ मैंने कहा तो उसने धक्के मारना शुरू कर दिया.

मैं ‘अह्ह्ह … अह्ह्ह …’ करने लगी.

मुश्किल से 7-8 धक्के मारते ही वह रुकने लगा.
मैंने उसकी गांड पकड़ कर कहा- चोदो मुझे … पानी निकाल दो मेरा!

मैं उसकी गांड पकड़ कर चुत में धक्का मरवाने लगी.
उसका मोटा लंड मेरी चूत फाड़ रहा था.

कोई 10-12 जोरदार धक्कों के बाद उसके लंड का दम खत्म हो गया और वह ‘अह्ह … अह्ह …’ करने लगा.

मैं हवस में भरी उसकी गांड पकड़ कर उसका लंड अपनी चूत में डलवा रही थी.
तभी मैंने अहसास किया कि उसके लंड का पानी निकल गया.

प्री मेच्योर इजेकुलेशन से मैं गुस्से से पूरी लाल हो गई.
वह चुत से लंड निकाल कर हाँफने लगा.

मैंने उससे कहा- अपने कपड़े पहनो और जाओ इधर से … होता तुमसे कभी कुछ है नहीं!
वह लज्जित होकर चला गया.

उस दिन मैं सो ही नहीं पाई. पूरी रात मेरी चूत लंड लेने के लिए तड़पती रही.

मैं उससे बहुत प्यार करती हूँ.
मैं उसे धोखा कभी नहीं देती, पर मुझे चुदाई चाहिए थी … जबरदस्त चुदाई.

हमारी जिंदगी आगे बढ़ी और हमने तीन महीने सेक्स नहीं किया.
पर मैं अपने बॉयफ्रेंड को बहुत सुनाती थी

‘मरियल सा लंड है, होता तुमसे कुछ है नहीं तुम्हारे धक्कों में दम नहीं है … दो मिनट भी टिक नहीं पाते हो!’
मैं उसे दुनिया भर की बातें सुनाती.

फिर हमने 2-3 बार और किया, पर नतीजा वही रहा … प्री मेच्योर इजेकुलेशन!
वह आता, लंड डालता और 8-10 धक्कों में उसके लंड का दम खत्म.

फिर मैंने सोचा कि शायद इतना ही होता है.

पर मुझे वह पोर्न वीडियो दिखाता, उसमें चुदाई घंटों होती.
वह देखकर मेरी चूत में आग लग जाती.
वीडियोज में देखती कि डॉगी स्टाइल में सेक्स हो रहा है.
लड़की लौड़े के ऊपर बैठकर मजे ले रही गांड उछाल-उछाल कर.

जबकि सच में मेरी जिंदगी में यह होता था कि वह ऊपर आता और 10 धक्के मार कर ढह जाता … उसका काम खत्म हो जाता.
कभी-कभी उससे धक्के भी नहीं लगते तो उसकी कमर पकड़कर मैं करवाती.

जब मैंने एक बार उसके लंड के ऊपर बैठकर किया तो 2 मिनट में लंड का दम खत्म और उसका लंड मरे मेंढक की लाश की तरह मेरी चुत में सिर्फ गुलगुली करने लगा.
मुझे गुस्सा आ गया और मैंने हमेशा की तरह उसे गाली देना शुरू कर दिया.

वह चुपचाप सुनता रहा.
फिर वह धीरे से बोला- या तो तुम मुझे छोड़ दो या मेरा कोई इलाज ढूंढो!

उसकी बात सुनकर मैं सोचने लगी कि यार इसका इलाज जरूर होना चाहिए … आज मेडिकल साइंस इतनी आगे आ गई और नए नए रिसर्च सामने आ रहे हैं तो इसकी चुदाई देर तक चले, इसका भी कोई इलाज होगा.

मैंने गूगल किया तो सबसे पहले चुदाई की गोली का नाम आया. तब मुझे एकदम से समझ में आया कि साला यह तो कब से मालूम था कि ऐसी दवाओं से लंड की लास्टिंग बढ़ जाती है.

मैंने उससे अगले दिन चोदने आने के लिए कह दिया.

वह अगले दिन आया तो मैं अपनी एक परिचित की दवा की दुकान से कामवासना बढ़ाने वाली दवा ले आई.
उसके बारे में मैंने पूरा पढ़ा कि इसे कैसे यूज करते हैं. फिर जब मेरा ठोकू आया तो मैंने उसे दवा खिला दी.

आधा घंटा तक हम दोनों एक दूसरे से प्यार की बातें करते रहे और मैं उसके सीने पर हाथ फेर कर उसे गर्म करती रही.
कुछ देर बाद वह बोला- अब खड़ा हो गया है.

मैंने उसकी चड्डी में हाथ डाला और देखा तो उसका लंड काफी सख्त हो गया था.
कुछ देर बाद हम दोनों ने सेक्स करना शुरू किया. वह उस दिन मुझे काफी देर तक चोदता रहा और मैं उससे पूरी तरह से संतुष्ट हो गई.

उस दिन मैं समझ गई कि इससे चुदने के लिए गोली की जरूरत पड़ेगी.
मैं उससे बहुत प्यार करती थी तो मुझे उसकी चिंता भी होने लगी थी कि कहीं ज्यादा दवा खाने से उसके स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़ जाए.

मैंने अब तय कर लिया था कि मैं डॉक्टर से मिलूँगी और अपने ब्वॉयफ्रेंड की नामर्दानगी का पक्का इलाज खोजूँगी.

दोस्तो, मैंने अपनी इस सेक्स कहानी में एक एक लफ्ज सही लिखा है.
आपको प्री मेच्योर इजेकुलेशन स्टोरी पढ़ कर कैसा लगा?
प्लीज जरूर बताएं.
आपके मेल मिलने के बाद मैं आगे का हाल अपनी अगली सेक्स कहानी में लिखूँगी.
[email protected]

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