चाचा चाची की चुदाई देखकर बहन चोद दी- 2

(Live Xxx Show )

लाइव Xxx शो में मेरी चचेरी बहन की जवानी मेरे लंड को परेशान कर रही थी. वह भी चुदना चाहती थी तो उसने एक रात अपने माँ बाप की लाइव चुदाई मुझे दिखाई.

दोस्तो, मैं अपनी देसी सेक्स कहानी के अगले भाग को लेकर पुनः हाजिर हूँ.
कहानी के प्रथम अंक
मेरी बहन की चूत देखने की तमन्ना
में अब तक आपने पढ़ लिया था कि हम दोनों भाई बहन छुप कर चाचा चाची की चुदाई की शुरुआत को देख रहे थे. उस वक्त वे दोनों प्यार भरी बातें कर रहे थे.

अब आगे लाइव Xxx शो:

चाची बोली- झूठ मत बोलिए, आपको जब ताव चढ़ता है तो खेतों में काम करने वाली किसी औरत को पकड़ कर चोद लेते हैं. हमको सब पता चलता रहता है. परसों दिन में भी आपने गनौरी के पुतोहिया को रहरी के खेत में घसीट कर चोद लिया था!
चाचा ने झेंपते हुए कहा- क्या कहती हो? बचपन से ही आदत बिगड़ी हुई है, अब क्या सुधरेगी. इस उम्र में भी हर उम्र की औरतों को चोद लेता हूँ. लेकिन कसम से, सच कहता हूँ कि जो स्वाद तुम्हारी चुत को चोदकर मिलता है, वह मजा और कहीं नहीं मिलता है. इसलिए तुम्हारे पास आना ही पड़ता है. अब दिखा भी दो, मेरा माल किधर है!

‘अरे, आप तो अपनी गर्मी किसी पर भी उतार लेते हैं, सास को चोदते हैं तो उसकी पुतोह को भी चोद लेते हैं. मां की चुदाई करते हैं तो उसकी बेटी पर भी चढ़ जाते हैं … लेकिन ताव आने पर मैं क्या करूँ? मुझको तो अपने इसी प्यारे मोटे सोंटे जैसे लंड की आस रहती है. मैं तो चाहे जिस किसी के सामने अपनी टांगें नहीं फैला सकती हूँ. जरूरत पड़ने पर हर तरह का मर्द मिल सकता है. कोई भी मर्द हो, कुत्ता ही होता है जरा सा इशारा करो, तो जीभ लपलपाता हुआ … लंड फनफनाता हुआ दौड़ पड़ता है और पकड़ कर दबोच लेता है. लेकिन मैं ऐसा कर ही नहीं सकती. मुझे तो यही लंड प्यारा है!

ऐसा कहकर चाची चाचा के लंड को चूमने लगीं.

चाचा बोले- जरा मुँह में लेकर चूसो न!

चाची ने मना कर दिया- न जाने किस-किस से आप चटवाते रहते हैं, किस-किस के छेद में घुसाते रहते हैं. ऐसा लंड मैं नहीं चाट सकती!

‘गुस्से में तुम और सुंदर लगने लगती हो!’ ऐसा कहकर चाचा फिर चाची को चूमने लगे और उनके होंठों को चूसने लगे.
चाची भी उनसे चिपट कर उनका मुँह चूसने लगीं.

चाचा कभी चाची के गाल को चूमने-चाटने लगते, तो कभी उनके संतरों की फांकों की तरह रस भरे होंठों को चूसने लगते, तो कभी उनकी मस्त बड़ी-बड़ी चूचियों की टोंटी पकड़ कर चूसने लगते.

फिर वे धीरे-धीरे नीचे सरकने लगे और केले के पेड़ की तरह मोटी-मोटी चिकनी जांघों के बीच में अपना मुँह ले गए और वहां चुम्मा देने लगे.

मैं समझ गया कि वह चाची का खूब उभरा हुआ, फूला-फूला भोसड़ा चूम रहे थे.
चूमने-चाटने की आवाज साफ-साफ सुनाई दे रही थी.

मैं पूरी उत्तेजना के कारण पसीने से भीग गया था.
मेरा लंड मेरी लुंगी के भीतर जोर-जोर से उछल रहा था.

मैंने बगल में बैठी बेला बहन को कसकर पकड़ लिया.
लग रहा था कि बेला पर भी पूरी गर्मी चढ़ गई थी.
इसलिए इस बार उसने विरोध नहीं किया और मेरी बगल से चिपकी हुई बैठी रही.

बड़े संतरे के जैसी उसकी एक चूची मेरी पीठ पर दब रही थी, फिर भी उसने अपने को मुझसे अलग करने की कोशिश नहीं की.

उधर चाचा उठकर खड़े हो गए.
उनका मोटा तगड़ा लंड फनफना रहा था.

उन्होंने चाची के तरबूज जैसे मोटे मोटे चूतड़ों को पकड़ कर नीचे खिसकने का इशारा किया.
खिसकती हुई चाची की कमर बिछावन के किनारे पर आ गई.
चाची ने अपने दोनों घुटने मोड़ लिए और जांघें फैला दीं.

सिरहाने से चाचा ने टॉर्च को उठा लिया और उनकी जांघों के बीच पर रोशनी डाली.
चाची का फूला-फूला गोरा चिट्टा छेद, बड़े पाव सा … टॉर्च की रोशनी में नहा गया.
चाची की चुत पर काले-काले बड़े-बड़े उलझे हुए झांट के बाल खूब चमक रहे थे.

मैं पहली बार किसी चुत का पूरा-पूरा छेद इतना साफ-साफ देख रहा था.

मैंने छोटी बहनों के छोटे-छोटे छेद देखे थे लेकिन उनको देखकर कोई फीलिंग नहीं होती थी.
बाथरूम में मां को और बड़ी बहनों को हगते, मूतते या नहाते हुए भी कई बार देखा था.
लेकिन तब मैं केवल काली काली झांटों के बाल ही देख पाता था, या फिर उनके छेद से सुर्र्र्र्र्र… की आवाज के साथ निकलती उनकी मूत की धार दिखाई पड़ती थी.

हालांकि उतने से ही मेरा लौड़ा तनकर कड़ा हो जाता था और बिना मुट्ठ मारे शांत ही नहीं होता था.

टॉर्च की रोशनी में कुछ देर छेद को चाचा निहारते रहे और बोले- अपनी रानी के इसी शानदार छेद का तो मैं दीवाना हूँ … न जाने कितनी छिनाल औरतों की चुत मैंने देखी हैं, लेकिन मेरी प्यारी रानी की ऐसी सुंदर रसीली चुत के समान कोई नहीं.

फिर चाचा नीचे बैठ गए और चाची की चुत के छेद पर मुँह रखकर उसकी दोनों फांकों को मुँह में लेकर चूसने लगे.
चाची आह-आह करती हुई चूतड़ ऊपर-नीचे करने लगीं.
उनकी गुलाबी गांड भी ऊपर-नीचे हो रही थी.

थोड़ी देर चूसने के बाद चाचा जी ने छेद पर से मुँह हटाया और छेद के ठीक सामने बिछावन पर जलता हुआ टॉर्च रख दिया.
अपने दोनों अंगूठों से चुत की दोनों फांकों को फैला दिया.

मुझे जीवन में पहली बार चुत का छेद इतना साफ तरीके से दिखाई पड़ा था.
चाची की चुत का छेद काफी बड़ा था, मैं समझ गया कि लोग इसी छेद में लौड़ा पेलकर चुदाई करते हैं.

मुझे लगा कि चाचा अब चाची के छेद में अपना लंड घुसाएंगे.
चाची पूरी तरह कसमसा रही थीं और लगातार आह-आह, ऊंह-ऊंह कर रही थीं.

चाचा चुत का छेद सूँघने लगे और बोले- मेरी सोनू रानी की चुदासी (चुदवाने को बेचैन) चुत की सुगंध लेने के लिए मैं सदा बेचैन रहता हूँ. क्या मस्त कर देने वाली सुगंध है. लगता है, किसी फुलवारी में आ गया हूँ!

फिर उन्होंने अपनी लंबी नाक चाची की चुत में घुसा दी और पूरे छेद पर अपनी नाक रगड़ने लगे.

चाची की चुत के छेद के ऊपर एक मटर के छोटे दाने जैसा कुछ गोल-गोल था, जिस पर चाचा बार-बार नाक रगड़ रहे थे और बीच-बीच में उसको चूसने भी लगते थे.

बाद में बेला बहन ने बताया कि उस गोल दाने को ही बोलचाल की भाषा में टीट (भगांकुर/Clitoris) कहते हैं.
टीट शब्द मैंने पहले भी कई बार सुना था.

गांव-घर की औरतें जब झगड़ती हुई आपस में गाली-गलौज करती हैं, तो एक-दूसरे के चुत की टीट को लेकर खूब कमेंट करती हैं.
मैं तब सोचता था कि चुत तो समझा, लेकिन यह टीट क्या होता है. लेकिन आज टीट भी देखने को मिल गई.

जब चाचा टीट को चूसने लगे तो चाची बहुत ताव में आ गईं और चाचा के बालों को पकड़ कर उनके मुँह पर कसके अपनी चुत को ऊंह-ऊंह करती हुई रगड़ने लगीं.

वे ऊँह आंह करती हुई बोलने लगीं- आंह अब पेलिए न … कितना तड़पाइएगा?
चाचा ने कहा- मुझे चुदासी चुत के छेद के स्वादिष्ट रस का भी मजा लेना है!

बहुत अधिक चुदास होने के कारण चाची की चुत में से रस बाहर टपकने लगा था जो टॉर्च की रोशनी में साफ-साफ दिखाई दे रहा था.
मैंने गाय-भैंस की चुत से शीरा की तरह टपकते हुए रस को बहुत बार देखा था.

उसी रस को देखकर लोग समझ जाते थे कि गाय-भैंस चुदवाना चाह रही है.

यदि लोग छेद से टपकते शीरा को नहीं देख पाते थे तो गाय या भैंस जोर-जोर से बोलने लगती थी.

तब लोग गाय को सांड के पास या भैंस को भैंसे के पास ले जाते थे. गाय-भैंस की चुदाई गांव में बचपन से ही देखता रहा हूँ.
औरत की चुदाई पहली बार देख रहा था.

भैंसा, सांड या बोतू भी लौड़ा पेलने के पहले चुदास मादा की चुत को इसी तरह सूँघते, चूमते और चाटते हैं, जैसा कि चाचा जी चाची के रस भरी चुदासी चुत के साथ खेल रहे थे.
चाचा अपनी सोनू रानी (चाची) के छेद के भीतर अपनी पूरी जीभ डालकर उसको उसी तरह अन्दर-बाहर कर रहे थे, जैसे कुत्ता पानी पीते हुए अपनी जीभ को अन्दर-बाहर करता है.

चाची पूरी ताव में थीं और ऊंह-ऊंह करती हुई जोर-जोर से अपनी गांड उछाल रही थीं.
वे चाचा से मिन्नत करती हुई कह रही थी- अब चोदिए न … चोदिए आह चोदिए … जल्दी अपना लौड़ा मेरी चुत में पेल दीजिए, अब नहीं रहा जा रहा है!

तब चाचा खड़े हो गए.
चाची अभी भी उसी तरह दोनों जांघें फैलाकर पड़ी हुई थी, जिससे उनकी चुत के छेद के भीतर का रस से भीगा हुआ गुलाबी भाग साफ-साफ दिखाई दे रहा था.

चाचा ने अपना फनफनाता हुआ लंड चाची की चुत के छेद पर रखा और हौले से अपने बड़े-बड़े चूतड़ों को हिलाते हुए आगे की ओर एक धक्का दिया.
चाचा का पूरा लंड एक ही बार में घप् से चाची की चुत में घुस गया.

चाची को जैसे बहुत मजा आया और वे ‘अं … हं … हं … अं …’ करती हुई उसी हालत में उठ बैठीं और चाचा से लिपटती हुई बोलीं- घुसता हुआ लौड़ा जितना मजा देता है, उतना मजा तो झड़ते समय भी नहीं आता है!
यह कहती हुई वे चाचा के सीने को चूमने लगीं और उनकी छाती पर कड़क निप्पलों पर जीभ फेरने लगीं.

चाचा के धक्के की गति धीरे-धीरे बढ़ने लगी तो चाची को बैठे रहने में असुविधा होने लगी.
उन्होंने अपनी चुत को खींच लिया, पैर समेटे और ऊपर खिसकती हुई पूरे बिछावन पर चित होकर लेट गईं.
फिर टांगें फैलाकर चाची ने अपनी भोस के छेद को चौड़ा किया और चाचा को ऊपर चढ़कर पेलने का इशारा किया.

चाचा ने टॉर्च बुझा दी और उसको बिछावन के नीचे रख दिया.
वे खुद बिछावन पर चढ़ गए.

लालटेन की रोशनी में सब दिखाई दे रहा था.
चाची ने लौड़े को पकड़ा और अपनी चुत के छेद पर रखा.

चाचा ने धक्का देते हुए समूचे लौड़े को छेद के अन्दर पेल दिया और चाची के ऊपर चढ़ कर उनके होंठों को मुँह में लेकर चूसने लगे.

चाची ने दोनों टांगों से चाचा की कमर को कैंची की तरह अपने लपेटे में ले लिया.
चाचा ने चाची की दोनों चूचियों को हथेली में जकड़ लिया. फिर दोनों पैरों को बिछावन पर टिकाते हुए और दोनों चूचियों को हाथों से खींचने लगे.

अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे करते हुए चाचा चाची की चुत में ऐसे धक्का मारने लगे, जैसे झूले में पींगें मारी जाती हैं.

चाची हर धक्के पर जोर-जोर से ‘अं … हं … ह … ऊं … हूँ …’ कर रही थीं.
वे अपनी बड़ी सी गांड को उछाल-उछाल कर चाचा के हर बार के धक्कम पेल का बराबर से जवाब दे रही थीं.

चाचा और चाची दोनों लंबे कद के थे, बहुत ही गुलथुल और भारी शरीर के थे. लेकिन एक-दूसरे को पूरी ताकत लगाकर जोर-जोर से धक्का मारे जा रहे थे

चाची की चुत खुद के रस से भर गई थी इसलिए लंड के बाहर-भीतर होने से फच्-फच् की आवाज हो रही थी.
चाचा के लौड़े से चुत के आजू बाजू धक्के लगने के कारण थप्-थप् की आवाज भी हो रही थी.
फच्-फच्, थप्-थप् की आवाजों के साथ-साथ दोनों की तेज चलती सांसों की आवाजें केवल कमरे में ही नहीं गूँज रही थीं, शायद बाहर भी जा रही थीं.

हमने देखा कि किवाड़ों की ओट से इस जोरदार चुदाई को सबुजिया भी झांककर देख रही थी.

चाचा-चाची अपनी चुदाई में मगन थे, उन्हें दीन दुनिया की कोई सुध-बुध नहीं थी.
वे एकदम बेफ़िक्र थे कि कोई उन्हें देख भी रहा है.

अब चाची बोलने लगीं- आह आह … खूब तेज तेज चोदो मेरे राजा … आह जोर-जोर से चोदो … अपने मस्त लंड से चुत को धुनते रहो … आह चटनी बना दो मेरी चुत की … आह चोदो … चोदो … और चोदो राजा … अंहं … ऊंहूँ!
चाचा भी मदहोशी में जवाब देने लगे- ले मेरी बुरचोदी रानी मेरा मोटा लंड खा ले, आह चूस ले मेरे सुपारे को … ले रानी … छेद से मेरे लंड का सारा रस चूस लो आह साली बुर चोदी!

चाचा धक्का देते जा रहे थे और हर धक्के पर ‘ले बुरचोदी … ले बुरचोदी … और ले … और ले …’ इस तरह बोलते जा रहे थे.
धीरे-धीरे चाचा और चाची के धक्कों की स्पीड तेज होती जा रही थी.

मैं पहली बार चुदाई देख रहा था.
मुझे बहुत मजा आ रहा था और उत्तेजना से मन बेचैन भी हो रहा था.
मन कर रहा था, अभी के अभी बेला बहिन को पटक कर चोद लूँ.

बेला बहन की हालत भी कुछ वैसी ही थी.
वह अपनी दोनों चूचियों को मेरी पीठ पर रगड़ रही थी. मैं उसकी गर्म-गर्म सांसों की महक से और उत्तेजित हो रहा था.

मैंने उसका हाथ लुंगी के भीतर ले जाकर अपने तने हुए लौड़े पर रखा तो इस बार कोई विरोध नहीं हुआ.
वह मेरे लौड़े को सहलाती रही और बीच-बीच में दबा भी देती थी.

मैंने भी धीरे-धीरे अपना हाथ उसकी सलवार के भीतर सरकाया और उसके छेद को सहलाने लगा.
थोड़ा और नीचे हाथ गया तो सीधे उसकी चुत के भीतर चला गया.
बहिन की चुत पूरी तरह गीली हो गई थी.
मैं समझ गया कि बेला बहिन पूरी तरह चुदासी हो रही है.

अभी-अभी चाचा चुदासी चुत के रस की गंध और उसके स्वाद की बड़ी तारीफ कर रहे थे.
तो जब मेरी उंगलियां बेला बहिन की चुदासी चुत के रस से भीग गईं, तो मैंने भी अपना हाथ बेला बहिन की चुत से बाहर निकाल कर सूँघा.
मुझे तो केवल पेशाब की गंध समझ में आई.

बेला बहिन मेरे कान के पास मुँह लाकर फुसफुसाती हुई पूछ रही थी- कैसा लगा? कैसी गंध है?
तो मैं बोला- मूताईन गंध है, लेकिन नशीली है!

बेला बहिन मुझसे पूरी तरह चिपक गई और उसने मेरे गालों का चुम्मा ले लिया.

उधर चाचा-चाची की चुदाई चल ही रही थी.
मुझे आश्चर्य हो रहा था.

हम सभी बच्चे चाचा-चाची से बहुत डरते थे क्योंकि दोनों बहुत रौबीले स्वभाव के थे और हमेशा गंभीर बने रहते थे.
शायद ही कभी किसी से हंसी-मजाक करते थे.

लेकिन अभी किस तरह निर्लज्ज होकर बोले जा रहे थे और धकापेल चोदे जा रहे थे, वह सब देख कर तो मैं हैरान था.

जब उन दोनों के धक्के बहुत तेज हो गए, तब चाचा एक तरह से चिल्लाते हुए बोले- आह … आह … अब झड़ूँगा रानी … आह … आह … तैयार हो जा मेरी बुरचोदी सोनू रानी … तैयार हो जा … आह … आह!

चाची भी उसी तरह बोलने लगीं- आजा राजा … आह … ओह … आह … आह … आ जा … आ जा सोना … मैं भी झड़ने वाली हूँ … आह … आह!

वे दोनों इसी तरह चीखते-चिल्लाते हुए एक-दूसरे से पूरी तरह चिपट गए. धक्के बंद हो गए. दोनों के शरीर पूरी तरह तन गए.
दोनों केवल आह … आह … कर रहे थे और फिर शांत हो गए.

अब सिर्फ तेज-तेज सांसों की आवाजें आ रही थीं.
चाचा चाची की चूचियों के बीच चेहरा रखकर निढाल हो गए.

चाची उनके बालों में उंगलियां फेरती हुई ‘मेरे राजा … मेरे सोना …’ कहती जा रही थीं.

चाचा थोड़ी देर तक चाची के शरीर पर पड़े रहे, फिर एक ओर बगल में आ गए.
चुत में से चाचा का लंड बाहर निकल कर छुहारा बन गया था और उसमें से गाढ़ा-गाढ़ा माल अभी भी रिस रहा था.

इधर चाची ने एक छोटा तौलिया चुत के नीचे रख लिया, शायद इसलिए कि चुत के अन्दर का माल बाहर गिरकर बिछावन को खराब न कर दे.

दोनों बहुत देर तक पड़े रहे.
फिर चाची ने सबुजिया को बुलाया.

वह तो सब देख ही रही थी.
दोस्तो, आपको मेरी इस देसी लाइव Xxx शो कहानी में कितना मजा आ रहा है?
प्लीज जरूर बताएं.
अभी मैं भाई बहन की चुदाई को भी लिखूँगा.
rukmini.devi01011945@gmail.com

लाइव Xxx शो कहानी का अगला भाग:

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