चुदाई का फैशन- 2
(Couple Swap Story)
कपल स्वैप स्टोरी में दो कपल में दोस्त थे, खूब पार्टी करते थे. एक रात खूब दारू पीकर चारों एक साथ बाथरूम में घुस कर नंगे नहाने लगे. उसके बाद क्या हुआ?
कहानी के पहले भाग
पश्चिमी संस्कृति से पीछे रह गए पारिवारिक मूल्य
में आपने पढ़ा कि आधुनिक दिखने की होड़ में बच्चों को जरूरत से ज्यादा स्वछंद बनाने का परिणाम यह हुआ कि घर की बेटी बिगड़ गई, पार्टियों में शराब पीकर देर से गैर लड़कों के साथ घर आने लगी.
तो उसकी शादी कर दी गयी.
अब आगे कपल स्वैप स्टोरी:
कपूर साहब और कामिनी तो इंग्लॅण्ड ही शिफ्ट हो गये.
उनकी कोठी में विवेक और शालिनी रहने लगे.
ठीक भी था, विवेक के घर पर रोज की पार्टी और शराब और शवाब का नंगा डांस संभव नहीं था.
विवेक और शालिनी दोनों को ही अभी बच्चों के चक्कर में नहीं पड़ना था.
अब तो हफ्ते में दो रात उनकी कोठी पर पार्टी होने लगी, बाकी दिनों में भी दोनों की रात किसी पब या क्लब में ही बीतती.
कोठी की पार्टी ज्यादा वाइल्ड होतीं.
वहां चूमाचाटी और लिपटा लिपटी पर किसी को ज्यादा ऐतराज नहीं होता था.
वहां विवेक के दो तीन ख़ास दोस्त ही होते.
शालिनी को विवेक की चेतावनी हमेशा याद रहती थी, वरना तो वो तो किसी मर्द को नजदीकी के लिए कभी मना करती ही नहीं थी.
हाँ अब भी घर की पार्टी में जब कुछ सेकंड के लिए लाइट बंद होती तो सबसे ज्यादा वाइल्ड शालिनी ही होती.
ऐसे ही जिन्दगी के दो तीन साल निकल गये.
अब विवेक और शालिनी बच्चे के लिए हुड़कने लगे.
विवेक का एक ख़ास दोस्त था विजय और उसकी पत्नी रूपा.
ये सभी लगभग एक ही एज-ग्रुप के थे.
विजय और रूपा के भी कोई बच्चा नहीं था.
वो भी अब बच्चा चाहते थे.
इन चारों की आपस में खूब पटती थी.
एक रात विवेक को शालिनी ने बताया कि रूपा और विजय भी कुछ महीनों से बच्चे की कोशिश कर रहे हैं.
सेक्स के दौरान विवेक ने शालिनी को ऊपर आने को कहा तो शालिनी बोली- अब जब तक मैं कंसीव नहीं करती, तुम ही ऊपर आया करो.
ऐसा उसे रूपा ने बताया होगा.
अगले शनिवार की पार्टी में केवल विजय और रूपा ही आये.
वो लोग अकेले फ्लैट में रहते थे तो कुछ भी कपड़े पहन कर आ जाते थे.
रूपा भी बहुत सेक्सी थी.
शालिनी और रूपा ने दिन में ही बात कर ली थीं कि आज शोर्ट फ्रॉक और ढीला ढाला टॉप पहनना है.
रात को सबका मूड अच्छा बना हुआ था.
शालिनी और रूपा दोनों ही मूड में थीं और ज्यादा ही हॉट लग रही थीं.
एक पेग और स्नाक्स के बाद शालिनी ने लाइट धीमी कर दी और डांस म्यूजिक लगा दिया.
विजय और विवेक पीने में लगे थे तो शालिनी और रूपा डांस करने लगी.
माहौल गर्म था.
शालिनी ने रूपा को चिपटा लिया और होंठ से होंठ मिला दिए.
अब तो उनकी ये हालत देख कर विजय और विवेक का बम्बू भी तम्बू बन गया.
विवेक बोला- यार, आज ये दोनों मूड में हैं, चल कुछ नया ट्राई करते हैं.
विजय ने भी आँखें चमका कर कहा- हाँ यार, आज तो ऐसा लगता ही कि मुझे तुझे ही गांड मारनी पड़ेगी, ये दोनों तो आपस में ही निबट लेंगी, हमें छूने ही नहीं देंगी.
विवेक ने एक लंबा घूँट मारा और कहा- तुम दोनों आज रात यहीं सोना. कुछ नया करते हैं.
दोनों ने एक नया पेग बना लिया.
अब विवेक बोला- दोनों अलग लग बेड रूम में सोयेंगे मगर किवाड़ खोल कर.
विजय हँसते हुए बोला- अपनी अपनी पार्टनर के साथ या बदल कर?
विवेक हंस दिया और बोला- यार तूने तो दिल की बात कह दी. पता नहीं ये लड़कियां मानेंगी या नहीं.
दोनों ने लड़कियों को पास बुला लिया और उन्हें ड्रिंक्स बना कर दीं.
शालिनी बोली- हमें नहीं पीना. हमारा तो हो गया.
विवेक बोला- अब बना दिया है तो पी लो, फिर लाइट बंद करके डांस करेंगे.
रूपा हंसी- लाइट बंद करके क्यों?
विजय बोला- क्योंकि अपन लोग पार्टनर बदल कर डांस करेंगे.
अबकी शालिनी हँसते हुए बोली- तो ठीक है. पार्टनर बदल लेते हैं. हमने तो डांस कर लिया, अब तुम और विवेक कर लो.
सब हंस दिए.
ड्रिंक्स ख़त्म होने पर फिर डांस चालू हो गया.
अबकी बार विवेक की बाहों में रूपा थी और विजय के साथ शालिनी.
विवेक ने लाइट बहुत धीमी बस न के बराबर कर दी थी.
पहली बार था जब पतियों की रजामंदी या कहने पर पत्नियां गैर मर्दों की बाहों में थीं.
माहौल गरमा गया.
नजदीकी बढ़ती गयी.
अब दोनों जोड़े लगभग एक दूसरे से चिपटे हुए थे.
एक दूसरे की गर्म साँसें महसूस हो रही थीं.
ऐसा लगा कि कभी कभी होंठ भी मिल गये.
बात कुछ आगे बढ़ती … पर शालिनी ने कहा- डिनर कर लो, भूख लगी है.
सब होश में आये.
लाइट ऑन हो गयी.
सब लोग डिनर टेबल पर आ गये.
डिनर निबटाते निबटाते रात के 11 बज बज गये.
विजय और रूपा बोले- अब हम चलेंगे.
विवेक ने कहा- अभी तो बात हुई थीं कि आज रात तुम लोग यहीं सो जाओ.
शालिनी के लिए ये खबर नयी थी.
पर वो बहुत चहकी और रूपा से बोली- कल तो सन्डे है. रुक जा न यहीं पर. दो बेड रूम हैं ही.
विजय बोला- क्यों हम एक ही बेड पर नहीं सो सकते?
सब हंस पड़े.
खैर ये तय हो गया कि वे लोग रात को यहीं सोयेंगे.
शालिनी ने रूपा को एक हलकी सी फ्रॉक और विजय को एक बरमुडा और टी शर्ट दे दी.
वो दोनों अपने रूम में चले गये.
विवेक ने शालिनी को चिपटाते हुए कहा- क्यों न हम चारों एक साथ नहायें.
शालिनी बोली- पागल हो गये हो?
विवेक बोला- क्यों, क्या हम दोनों ने ही अपने दोनों के अलावा किसी और के साथ मस्ती नहीं की और फिर ये तो सिर्फ साथ नहाने की बात है, इससे ज्यादा कुछ नहीं.
शालिनी बोली की पता नहीं वो दोनों तैयार होंगे या नहीं और फिर बाथरूम में सेक्स शुरू हो गया तो?
विवेक बोला- नहीं, ये तय कर लेंगे कि ऐसा कुछ नहीं होगा.
दोनों दूसरे कमरे में गए.
विवेक ने जाते ही कहा- हम दोनों का मन है कि तुम दोनों हमारे साथ ही शावर लो. एक साथ. और ये तय है की वाशरूम की लाइट पूरी बंद होंगी और कोई सेक्स नहीं होगा. सोच लो, हम इंतज़ार कर रहे हैं. मन न करे तो मत आना.
कह कर दोनों वापिस अपने रूम में आ गये.
दो मिनट तक उनके रूम में कोई नहीं आया.
बल्कि विजय के रूम की लाइट बंद हो गयी.
विवेक ने भी अपने रूम की लाइट बंद कर दी.
अब हर ओर अन्धेरा था.
विवेक ने शालिनी का हाथ थामा और बोला- चलो शावर लेते हैं.
दोनों शावर के नीचे खड़े हो गये.
मन में ख़ुशी कम थी पर जिस्म की आग भड़की हुई थी.
दोनों लिपटे हुए एक दूसरे को चूम रहे थे.
तभी गेट पर हलकी सी आहट हुई और फिर रूपा की आवाज आई- अरे हमारा इंतज़ार भी नहीं किया?
रूपा और विजय हँसते हुए उनके पास आ गये.
शालिनी ने रूपा को लिपटा लियी अपने से.
रूपा भी नंगी ही थी.
अब चारों शावर के नीचे आने लगे. शालिनी ने हैण्ड शावर से सबको भिगो दिया.
शावर की धार का घेरा कम था.
चारों नीचे आना चाह रहे थे.
नतीजन चारों आपस में टकरा रहे थे.
पहले तो सभी को संकोच हुआ फिर जिस्म की आग और अंदर उठती कामवासना ने उन्हें बेशर्म कर दिया. अब दोनों जोड़े आपस में लिपटने लगे.
मर्दों के लंड रगड़े जाने लगे और लड़कियों के मम्मे मसले जाने लगे.
होंठ और जीभे आपस में जुगलबंदी करने लगीं.
थोड़ी देर में ही शालिनी की कसमसाहट की आवाज आई- विवेक अब बर्दाश्त नहीं हो रहा. इन्हें भी जाने दो और चलो बेड पर.
रूपा भी बोली- आज तो तुम लोगों ने ऐसी आग भड़का दी कि अपने पर से काबू नहीं हो पा रहा. दोनों ने मुझे आगे पीछे से जकड़ दिया. सच कहूं तो मन किया कि बेशर्म होकर कहूं कि दोनों अंदर आ जाएँ. अब या तो चलो बेड पर या मैं तो यहीं लेट जाती हूँ, कोई भी आ जाओ.
सब हंस पड़े.
विजय बोला- क्यों न एक और एक्सपेरिमेंट करें. चारों बाहर चलते हैं. जिस लड़के के हाथ में जिस लड़की का हाथ आ जाएगा वो उसके साथ ही सोने चला जाएगा. बोलो मंजूर?
अब शालिनी बोली- यार बात घुमा फिरा कर क्यों कहना. अभी अभी तुमने मेरी चूत में उंगली की, बोली की या नहीं?
विजय हँसते हुए बोला- हाँ की. अब अँधेरे में मुझे क्या मालूम कि वो तुम थी या रूपा.
रूपा बोली- तुम दोनों ज्यादा सीधे मत बनो. विवेक ने मेरे मम्मे इतने जोर से चूसे. वो तो मैंने भी इसका लंड कस के मसल दिया, वरना तो ये मुझे छोड़ता ही नहीं.
शालिनी बोली- फिर हम चारों आज अदल-बदल कर सेक्स करेंगे पूरी रात.
पर रूपा बोली- यार हमारे पास तो प्रोटेक्शन ही नहीं है.
शालिनी बोली- अब प्रोटेक्शन न तुम यूज करती हो न मैं. शायद अदला बदली के सेक्स से कुछ बात बन जाए.
सब चिहुंक कर खुश थे.
जोरदार चीयर्स हुई और दोनों जोड़े पार्टनर्स बदल कर अपने अपने बेड पर पहुँच गये.
रूपा तो यहीं विवेक के पास रूक गयी और विजय के साथ शालिनी चली गयी.
रूपा बेड पर टांगें खोल कर लेट गयी मानो विवेक को बुला रही हो कि आओ चुदाई शुरू करें.
विवेक तो कब से रूपा का दीवाना था.
आज मौक़ा मिला तो जोश में था.
वह लपक कर बेड पर पहुंचा और रूपा के होंठों से होंठ जड़ दिए.
उसका एक हाथ रूपा की चूत पर गया.
वहां उसे ज्यादा ही गीलापन महसूस हुआ.
रूपा चुदासी हो रही थी.
विवेक नीचे खिसका और रूपा की चूत की फांकों के बीच मुंह दे दिया.
उसकी जीभ मखमली गुफा की दीवारों को चाटती चूमती अंदर हो गयी.
रूपा ने भी अपनी उँगलियों से फांकें चौड़ा दीं.
विवेक खूब थूक छोड़ता हुआ चूस रहा था फांकों को.
रूपा जल बिन मछली की तरह तड़प रही थी.
विवेक ने उसकी चूत में आग लगा दी थी.
रूपा ने विवेक के बाल पकड़ कर खींचे और बोली- मुझे भी चूसना है तुम्हारा.
विवेक 69 हो गया.
अब दोनों की जीभें मचल रही थीं और एक दूसरे को बेकरार कर रही थीं.
विवेक को लगा कि अगर उसने रूपा को नहीं हटाया तो वो उसका अपने मुंह में ही निकाल देगी.
दूसरे कमरे से शालिनी की आह उह जोरों से आ रही थी.
लगता है वे दोनों बिना देर किये सीधे चुदाई में लग गये थे.
असल में नहाते समय विजय ने शालिनी की चूत अच्छे से रगड़ी थी.
शालिनी ने उसका लंड भी पकड़ कर मसला था.
विजय का लंड विवेक के लंड के मुकाबले मोटा था तो शालिनी बेड पर आते ही विजय के मोटे लंड का मजा लेने के लिए ऊपर चढ़ गयी और उसके लंड पर मुंह से ढेर सारा थूक लगाते हुए उसे अपनी चूत में कर लिया और लगी उछलने.
विजय भी उसके मटकते मम्मों को बार बार मसल रहा था.
शालिनी के लिए गैर मर्द से चुदाई पहली नहीं थी, पर विजय के लिए शायद पहला मौक़ा था.
अब वो भी ऊपर आना चाहता था.
उसने शालिनी को नीचे कर दिया और फिर उसकी चूत में मुंह दे दिया.
शालिनी की चूत पूरी खुली हुई थी और पूरी गीली थी पहले से ही.
पर पराया मर्द तो पराया ही होता है.
शालिनी को भी बहुत दिनों बाद नया लंड मिला था.
विजय की जीभ उसकी चूत में गहराई तक उतरी.
उसका थूक चूत से बाहर आ रहा था.
विजय ने अपनी दो उंगलियाँ उसकीं चूत में करके मसाज शुरू कर दी.
शालिनी की आहें जोर से निकलने लगीं.
शालिनी चुदते समय शोर बहुत करती थी.
थूक चूत से बाहर निकला तो विजय ने थूक से लिपटी एक उंगली उसकी गांड में घुसा दी.
शालिनी चीखी, बोली- पीछे नहीं. मुझे दर्द होता है. अब तुम ऊपर आ जाओ.
विजय ने उसकी टांगें ऊपर करके फैलायीं और अपना लंड शालिनी की चूत के मुहाने पर रखा और रगड़ने लगा.
शालिनी बोली- अंदर करो, मेरी चूत में तो चीटियाँ सी चल रही हैं.
विजय ने पेल दिया अपना मूसल बिना देर किये.
शालिनी सिहरी और जोर से आह निकाली.
विजय के धक्के बढ़ते गये और शालिनी उसका पूरा साथ देने लगी.
विजय ने उसके मम्मे बिल्कुल लाल कर दिए थे.
शालिनी अब उसकी कमर पर हाथ रखे उसे जकड़े थी.
विजय की पीठ पर उसके नाखूनों की धारियां बनी हुई थीं.
कपल स्वैप सेक्स में शालिनी को बहुत मजा आ रहा था.
अब चुदाई का एक सेशन पूरा होने को था.
विजय ने शालिनी से पूछा- कहाँ निकालूं?
शालिनी ने उसे कस के लिपटा लिया और कसमसा कर बोली- अंदर ही निकालो. एक भी कतरा बाहर न जाए और ऐसे ही पड़े रहना.
विजय ने सारा माल उसकी चूत में निकाल दिया और उसके ऊपर ही लुढ़क गया.
दूसरे कमरे में भी तूफ़ान आया हुआ था.
शालिनी की कसमसाहट की आवाजें इतनी जोर से आ रही थीं उन तक कि अब विवेक भी रूपा की चूत में पेलम पाल में लग गया था.
रूपा बहुत सेक्सी थी, उसे चुदाई का बहुत शौक था, पर उसने भी अभी तक किसी गैर मर्द का लंड नहीं लिया था.
वो आज रात पराये मर्द से चुदाई का पूरा लुत्फ़ उठाने के मूड में थी.
कोई शर्म या डर तो था नहीं. विवक उसके ऊपर चढ़ा हुआ था.
उसने विवेक के बाल पकड़कर उसे अपने ऊपर लिटा सा लिया.
विवेक उसके ऊपर लेटा हुआ मछली-सा तैर रहा था.
उसकी छाती से रूपा के मम्मे दबे हुए थे.
दोनों की जीभें एक दूसरे के मुंह में घुसी हुई थीं.
विवेक ने चूम चूम कर रूपा की गर्दन पर कई जगह लाल निशान बना दिए थे.
और रूपा भी कम नहीं थी, उसने तो विवेक की पीठ पर धारियां बना दी थीं.
उसके नाख़ून लम्बे और नुकीले थे.
विवेक का लंड पूरी गहराई तक नीचे उतरा हुआ था.
धक्के जोरों पर नहीं थे पर लंड और चूत का मिलन बड़ा रसीला था.
रूपा की चूत पानी बहा चुकी थी.
अब अचानक विवेक ऊपर उठा और रूपा के टखनों को पकड़कर जोरदार तरीके से धक्के लगाने शुरू कर दिए.
अब रूपा भी जोर जोर से हर धक्के के साथ आह उह करने लगी.
विवेक के धक्कों में दम था.
वो भी दूसरे की बीवी को दमदार तरीके से चोदकर उस पर अपना प्रभाव बनाना चाह रहा था.
विवेक ने थका दिया रूपा को.
रूपा कसमसाते हुए बोली- बाहर मत निकालना. आज मेरी चूत की गोद भर दो.
विवेक ने फाइनल राउंड लगाते हुए एक जोरदार धक्के से सारा माल रूपा की चूत में निकाल दिया.
रूपा ने उसे कस के जकड़ लिया.
देर रात तक चुदाई को अंजाम देते हुए दोनों जोड़े लगभग 2 बजे करीब सोये.
तो सुबह 8 बजे करीब शालिनी की आँख खुली.
उसने कपड़े तो पहने नहीं थे.
वो टॉवेल लपेट कर अपने रूम में आई कपड़े लेने.
वहां रूपा और विवेक जगे हुए थे और मूड में थे.
रूपा विवेक का लंड चूस रही थी.
शालिनी मुस्कुरा दी.
वो टॉवेल उतार कर विवेक के मुंह पर घुटनों के बल बैठ गयी.
अब विवेक की जीभ उसकी चूत में थी.
शालिनी भी गर्म हो गयी; वो अपने मम्मे मसलने लगी.
तभी विजय भी नंग धड़ंग आ गया.
सीन देखकर उसका भी लंड तन गया.
वो रूपा के पीछे आया और उसने अपने लंड और रूपा की चूत पर थूक लगाया और घुसेड़ दिया अंदर.
अब तो इन चारों का ये हर शनिवार का शगल हो गया.
अब तो ये अलग अलग रूम में भी नहीं जाते थे, शुरुआत एक ही बेड पर करते.
शालिनी तो माहिर थी चुदाई की … वो तो एक साथ विजय और विवेक को भी अंदर कर लेती.
कुल मिलाकर अब उनके बीच कोई शर्म नाम की चीज नहीं थी.
प्रिय पाठको, यहाँ तक की कपल स्वैप स्टोरी कैसी लगी आपको?
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कपल स्वैप स्टोरी का अगला भाग:
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