Sex Stories Archive for November, 2010

उर्मिला भाभी के साथ मधुमिलन

On 2010-11-30 Category: पड़ोसी Tags:

भाभी खुद ही मेरे सामने अपनी चूत को फैला कर लेट गई और मुझे अपनी ओर खींचने लगी। मैंने भी उनके दोनों पैरों को अपने कन्धों पर ले लिया और अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर टिका दिया

सम्भोग प्रबन्धन-2

On 2010-11-29 Category: चुदाई की कहानी Tags:

सबसे पहले मैं अन्तर्वासना का धन्यवाद करूँगा जहाँ मेरी कहानी सम्भोग प्रबन्धन प्रकाशित हुई। मैं पाठकों का धन्यवाद करना चाहूँगा, जिनके मुझे काफी प्यार भरे मेल आए। पिछली कहानी में मैंने बताया था कि कैसे मैंने अपना कुंवारापन खोया, लेकिन कॉलेज ख़त्म होने के बाद उसने तो आई ऍम टी गाज़ियाबाद में दाखिला ले लिया […]

मेरी पत्नी की बहनें-3

On 2010-11-28 Category: जीजा साली की चुदाई Tags:

मेरी पत्नी की बहनें-1 मेरी पत्नी की बहनें-2 मैं चोदता रहा. थोड़ी देर में मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया, मुझे काफी मजा आ रहा था लेकिन मैंने गौर किया कि अन्नू भी काफी अंगड़ाई ले रही थी, इसका मतलब कि अब उसकी चूत में भी खुजली हो रही थी. मैंने मोनिका को कहा- अब […]

मेरी पत्नी की बहनें-2

On 2010-11-27 Category: जीजा साली की चुदाई Tags:

मेरी पत्नी की बहनें-1 मैंने कहा- यह बताओ कि तुम दोनों में से किसकी चूत पर बाल अधिक हैं? मोनिका ने कहा- जीजू, आप खुद हमारी पेंटी खोल कर देख लो! मैंने दोनों की पैंटियों में हाथ डाला और खींच कर उतार डाली. दोनों अब मेरे सामने नंगी थी. दोनों के चूत पर घने बाल […]

मेरी पत्नी की बहनें-1

On 2010-11-26 Category: जीजा साली की चुदाई Tags:

बात उस समय की है जब मेरी शादी को दो साल हो चुके थे और मेरी बीवी को पहला बच्चा हुआ था. वो उस समय अपने मायके कानपुर में ही थी. मैं इलाहाबाद में पोस्टेड था. जब काफी दिन हो गए तो मैं अपने आफिस से छुट्टी ले कर अपने ससुराल गया ताकि बीवी और […]

मेरी दीदी लैला -2

On 2010-11-25 Category: कोई देख रहा है Tags:

मेरी दीदी बैड पर घोड़ी बनी हुई थी, एक लड़के ने अपना लण्ड पीछे से दीदी के अंदर डाला हुआ था और वो हिल-हिल के अपना लण्ड दीदी के अंदर-बाहर कर रहा था और एक लड़का दीदी के सामने खड़ा था और दीदी उसका लण्ड चूस रही थी और जोर जोर से चीख रही थी।

मेरी दीदी लैला -1

बात तब की है जब लैला दीदी 18 साल की नवयौवना हो चुकी थी। बला की खूबसूरत तो लैला दीदी थी ही, ऊपर से कुदरत ने दीदी को यौवन के कटाव और उठान भी भरपूर दिये थे, मतलब दीदी की छाती और कूल्हे अपनी हमजोलियों के मुकाबले ज्यादा ही बड़े थे। लैला दीदी उन दिनों दो ही जगह मिलती थी, या तो शीशे के सामने या घर के मेन गेट पर।

दो बूंद आँसू

On 2010-11-23 Category: कोई मिल गया Tags:

राजवीर दोस्तो, मेरी पिछली कहानियाँ पढ़ के आपने जो अपने कीमती मेल भेजे उसके लिए शुक्रिया। तो मैं अपनी नई कहानी पर आता हूँ। एक मेरी दोस्त है उसके घर में एक दिन पार्टी थी, काफी लोग आये थे, ज्यादतर लड़कियाँ ही थी। उसकी एक सहेली आयशा के साथ उसकी बड़ी बहन रूपा भी आई […]

दाखिला

मेरी पिछली कहानी मेरी बहन की प्रवेश परीक्षा में आपने पढ़ा कि कैसे मेरी और सुगन्धा की प्रवेश परीक्षाएँ अधूरी रह गई थीं। अब आगे… काशी हिंदू विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा के दो सप्ताह बाद सुगन्धा को इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा देनी थी। मैंने पिछली कहानी में ही जिक्र कर दिया था कि उन […]

रेशु आण्टी ने सिखा दिया-2

On 2010-11-21 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

प्रेषक : प्रेम सिंह सिसोदिया “अरे बाप रे, रेशू आण्टी, मुझे तो देर हो गई।” कॉलेज में देर हो जाने से मैं घबरा गया था। “रेशू जी, लौट कर आऊँगा तो प्यार करेंगे।” “अरे नहीं, उनके सामने नहीं करना, अकेले में चुपके से, यानि कल सुबह को, उनके ऑफ़िस जाने के बाद।” “हाँ ठीक है… […]

रेशु आण्टी ने सिखा दिया-1

On 2010-11-20 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

प्रेषक : प्रेम सिंह सिसोदिया मैं अपनी कॉलेज की पढ़ाई के लिये गांव से अपनी आण्टी रेशू के यहाँ शहर में आ गया था। अब तक मुझे सेक्स के बारे में जरा भी ज्ञान नहीं था, यहाँ तक कि मेरा कभी वीर्य पात तक नहीं हुआ था। पर हाँ, मेरे दोस्त लण्ड चूत की बात […]

मेरी बहन की प्रवेश परीक्षा-2

मैंने उसकी पैंटी की इलास्टिक में अपनी ऊँगली फँसाई और उसे नीचे खींचने लगा। उसने अपने नितंब ऊपर उठा दिए और मेरा काम आसान हो गया। पैंटी उतारने के बाद मैं अपना मुँह उसकी योनि के पास ले गया।

जब वी मेट-2

On 2010-11-19 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

लेखक : प्रेम गुरु प्रथम भाग आप अन्तर्वासना पर पढ़ ही चुके हैं, अब उससे आगे : वो मुझे गोद में उठाये ही कमरे में आ गया। अन्दर जीरो वाट का बल्ब जल रहा था। उसने मुझे बेड पर लेटा दिया पर मैंने अपने पैरों की जकड़न ढीली नहीं होने दी तो वो मेरे ऊपर […]

मेरी बहन की प्रवेश परीक्षा-1

सुगन्धा की स्कर्ट और ऊपर उठ गई थी और अब उसकी नीले रंग की पैंटी थोड़ा थोड़ा दिखाई पड़ रही थी। उसकी जाँघें बहुत मोटी नहीं थीं और उरोज भी संतरे से थोड़ा छोटे ही थे।

जब वी मेट-1

On 2010-11-18 Category: रिश्तों में चुदाई Tags:

दोस्तो ! मैं अपने मित्र सुमित को विशेष रूप से धन्यवाद कहना चाहता हूँ जिसने इस कहानी के हिंदी रूपांतरण में मेरी सहायता की। …… प्रेम गुरु की कलम से अरे तुम नहीं जानते ये अनुभवहीन चिकने लौंडे झड़ते जल्दी हैं पर दुबारा तैयार भी फटाफट हो जाते हैं। मुझे ये छत्तिसिये और चालिसिये तो […]

मुझसे दोस्ती करोगे-2

On 2010-11-17 Category: कोई मिल गया Tags:

शमीम बानो कुरेशी मैंने उसका लण्ड पकड़ा और जोरदार मुठ्ठ मारी… फिर मुँह में भर कर उसे खूब चूसा…। उसके लण्ड से भी जवानी के स्त्राव की तेज गन्ध आ रही थी। मैंने उसका लण्ड खूब चूसा… उसे तड़पा कर रख दिया। लण्ड चूसने में मेरा अपना अनुभव काम में आया। उसका खूब माल निकला… […]

मुझसे दोस्ती करोगे-1

On 2010-11-16 Category: कोई मिल गया Tags:

शमीम बानो कुरेशी मैं सुहाना से मिलकर बाहर निकली ही थी कि एक सुन्दर से जवान लड़के से टकरा गई। मैं एकदम से घबरा गई- हाय अल्लाह…! “माफ़ करना मोहतरमा…” उसने तुरन्त माफ़ी मांगी। “जी, कोई बात नहीं…” मैंने अपना दुपट्टा का कोना अपने मुँह के कोने में दबा लिया और मुस्करा कर उसे तिरछी […]

दिल्ली से चण्डीगढ़

On 2010-11-15 Category: कोई मिल गया Tags:

मैं जीत शर्मा फिर से आपके सामने एक कहानी ले कर आया हूँ। यह कहानी मुझे मेरी एक महिला मित्र ने भेजी है, उम्मीद है कि आप सबको पसंद आएगी। तो दोस्तो कहानी पेश है मेरी दोस्त की जुबानी। मैं शिप्रा हूँ, दिल्ली में एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करती हूँ। अपने काम के सिलसिले […]

एक रात मां के नाम-2

On 2010-11-14 Category: पड़ोसी Tags:

प्रेषिका : दिव्या डिकोस्टा मम्मी तो राजू से जोर से अपनी चूत का पूरा जोर लगा कर उससे लिपट गई और और अपनी चूत में लण्ड घुसा कर ऊपर नीचे हिलने लगी। अह्ह्ह ! वो चुद रही थी… सामने से राजू मम्मी की गोल गोल कठोर चूचियाँ मसल मसल कर दबा रहा था। उसका लण्ड […]

एक रात मां के नाम-1

On 2010-11-13 Category: पड़ोसी Tags:

मुक्ता बेंजामिन ने यहीं से यानि गोवा (पंजिम) से ही अपने मेल में अपनी एक दिलचस्प कहानी भेजी है, उनका कहना है कि मैंने ये सब अपनी आँखों से देखा है। वे आजकल यही रहती हैं, उन्होंने यह कहानी अंग्रेजी में भेजी थी जिसका हिन्दी अनुवाद करके मैं आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रही हूँ। […]

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