कमसिन चचेरी बहन की चुदाई-6

(Chadhti Jawani: Kamsin Chacheri Behan Ki Chudai- Part 6)

कोमल विजय 2017-12-02 Comments

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दोस्तो, आपने चढ़ती जवानी की इस सेक्स कहानी में अब तक पढ़ा कि मुझे अपनी प्यारी चचेरी बहन बिछड़े लम्बा अरसा हो गया था, अब एक शादी में उससे मुलाक़ात होने वाली थी जिस वजह से मुझे उसकी चुत मिलने की आस जग गई थी.
अब आगे..

मैंने अपना बैग पैक किया और उसी रात की गाड़ी से निकल गया. अगले दिन जब मैं वहां पहुँचा तो मेरी आँखें सिर्फ़ अनुराधा को ही तलाश रही थीं. मगर उसका कोई अता-पता नहीं था.

फिर अब काफ़ी समय के बाद मिलने की वजह से सारे रिश्तेदार भी दिमाग़ खाने लगे थे और मैं बेसब्री से अनुराधा को ढूँढ रहा था. शादी में आई सभी लड़कियों को मैंने देख लिया और एक-दो लौंडियां तो बहुत ही पटाखा आइटम थीं. मगर मैं मेरी बहन को ढूँढ रहा था.

अब शादी के घर में ना जाने कितने लोग होते है और काम तो हजारों.. मैं काम में बिज़ी हो गया. अनुराधा अब भी मुझे नहीं दिखी थी. दरअसल उसकी बहन दिख गई.. उसे सॉरायसिस हो गया था. वो बड़ी ही अजीब दिख रही थी. मैंने उससे अनुराधा के बारे में पूछा भी.. तो बोली- आई तो है मगर पता नहीं कहाँ गई.

मेरा सब्र टूट रहा था कि तभी पीछ से मुझे सुनाई दिया- अनुराधा, जाकर लड़की वालों को लंच के लिए बुला ला.

मैंने तुरंत पीछे देखा और मेरी नजर उस लड़की पर गई, जिसे मैंने सुबह आते से ही देखा था. दूध जैसी गोरी-चिट्टी, बार्बी डॉल जैसी क्यूट, लगभग 5 फुट 2 इंच लम्बी.. कंधों तक लहराते बाल और सबसे अच्छी उसकी वही नशीली आँखें. मुझे याद आ गया कि मैंने जिस लड़की को सुबह देखते से ही हॉट समझा था वो अनुराधा ही थी. मेरा लंड खड़ा हो गया था. मैं बहुत खुश हो गया. मैंने उसकी और देखा और स्माइल करने लगा और वो भी जान गई थी कि मैंने उसे पहचान लिया है.

मैं- वाउ.. हाय अनुराधा.. मैंने तो पहचाना ही नहीं तुझे!
अनुराधा- हाँ जानती हूँ.. सुबह ही मैं समझ गई थी कि तुम अपनी बहना को भूल गए.
मैं- नहीं अनुराधा.. मैं तुझे ही ढूँढ रहा था.. दरअसल मैंने सुबह तुझे देखा भी, मगर मैं नहीं समझ पाया कि ये तू है.. तू इतनी सुंदर हो गई अब.. बिल्कुल हॉट मॉडल जैसी..

मैंने उसे गौर से देखा. उसने ब्लू कलर का कुर्ता और रेड प्लाजो पहना था. मैंने उसके फिगर को करीब से देखा. उसके चूचे इस एज में ही ऑलमोस्ट 32 सी के हो गए थे. उसकी कमर बिल्कुल पतली थी. जितनी भी चर्बी थी, सब चली गई थी, जैसे कमर का सब फ़ैट उसके हिप्स में आ गया हो.. उसके चूतड़ इतने पर्फेक्ट और टाइट दिख रहे थे कि मेरा लंड एकदम से तुनकी मारने लगा था.

लाल प्लाजो में से मैं उसके चूतड़ों को साफ महसूस कर पा रहा था और चूतड़ों के मटकने से उसकी गांड की दरार भी मजा आ रहा था. उसके सी-कप चूचे बिल्कुल खड़े, सख़्त और चूसने के लिए एकदम तैयार दिख रहे थे.
इन शॉर्ट.. मैंने उसको देख कर पक्का कर लिया कि आज तो पक्के में इसके साथ ही सुहागरात मनाऊंगा.

अनुराधा- ठीक है भैया.. मैं जाती हूँ मुझे काम है.
मैं- अरे.. कहाँ जा रही है. मैं इतनी बेसब्री से तुझे ढूँढ रहा था और तू है कि ना मुझसे गले मिली.. ना किस दी.

इतने में मैंने ही उससे कसके हग किया और आजू-बाजू कोई को ना देख कर उसके गांड को फील किया. आज भी उसकी गांड उतनी ही सॉफ्ट, स्मूद मगर बड़ी और टाइट थी और आगे से उसके चूचे मैंने अपनी चेस्ट से दबा लिए थे.
मैं धीरे-धीरे उसकी बैक पे हाथ घुमाने लगा और उससे कहा.
मैं- आई रियली मिस्ड यू अलॉट डार्लिंग.

मेरा हाथ अपनी गांड पे महसूस करके वो पीछे हट गई और अजीब सी नजरों से मुझे देखने लगी.
अनुराधा- भैया मुझे जाने दो.. काम है.
इतना कह के वो चली गई. मैं उसकी मटकती गांड को देखने लगा. सेक्सीयेस्ट गांड एवर… उसके हर कदम पे उसकी गांड हिलती थी और बाउन्स होती थी. मगर उसने बड़े अजीब तरीके से मुझे देखा. मुझे लगा काम में बिजी होगी और सबके सामने डर रही होगी, सो मैंने भी जाने दिया और अपने काम में लग गया.

शाम की शादी थी. सब रेडी हो गए और बारात निकाल चुकी थी. मैं जानता था कि इस वक़्त घर में शायद ही कोई होगा. लड़की वाले भी बिजी थे. उनके लिए गेस्ट रूम में इंतजाम किया गया था, जो घर से थोड़ा अलग था.

मैं सुबह से काम करके थक चुका था तो थोड़ी रेस्ट करने के लिए बिस्तर पर लेट गया. तभी मैंने देखा कि अनुराधा नहाने जा रही थी. मैं तुरंत उठ गया और उसे बाथरूम की ओर फॉलो करने लगा. उसके हाथ में एक छोटा बैग था, जिसमें कॉसमेटिक्स और उसके कंधे पर उसके कपड़े थे. मेरी नजर उसकी ब्लैक ब्रा पर गई और मेरा लंड एकदम से खड़ा हो गया. जैसे ही हम दोनों बाथरूम के पास पहुँचे, मैंने अनुराधा को पीछे से कमर के सहारे उठा लिया.
अनुराधा- अया.. छोड़ो.. छोड़ मुझे.. कौन है कुत्ते.. छोड़ मुझे..

अंधेरे में उसने मेरी शक्ल नहीं देखी और डर के मारे चिल्लाने लगी. मैंने उसे नीचे रखा और दीवार से सटा दिया कर उसका मुँह हाथ से बंद कर दिया. मैं- चिल्ला क्यों रही है? मैं हूँ..
अनुराधा- भैया, छोड़ो मुझे.. मुझे जाना है.
मैं- ऐसे नहीं.. एक किस तो देनी ही पड़ेगी. आख़िरकार हम इतने साल बाद मिले हैं.. और तू इतनी सुंदर हो गई है कि जी चाहता है कि अभी तुझसे प्यार करूँ.
अनुराधा- नहीं भैया.. जाने दो मैं चीखूँगी.. मैं यह सब नहीं करना चाहती. जाने दो भैया..प्लीज़..
मैं- क्या हुआ तुझे? लगता है तुझे याद दिलाना पड़ेगा तेरा प्रॉमिस?

इतना कह कर मैंने राइट हैंड से उसकी चूची को दबाया तो वो छटपटा के दूर हट गई.
अनुराधा- मैंने कहा ना कि मुझे जाने दो.. नहीं तो मैं मम्मी को सब बता दूँगी.
मुझे गुस्सा आने लगा.. मैंने उसका हाथ पकड़ा और उससे दीवार से सटा दिया.
मैं- चुपचाप रह और नाटक मत कर.. क्या हुआ है तुझे?

उसने मेरा हाथ झटका और एक जोरदार मुक्का मेरी छाती पर मार कर चली गई. मेरी कुछ समझ में आता, इससे पहले उसने बाथरूम लॉक कर लिया था.
मैंने एक-दो बार नॉक किया- खोल खोल!
मगर वो बोली- जाओ भैया यहाँ से…

मैं बहुत गुस्से में था.. मैं वहां से चला गया और रेडी होकर शादी में पहुँच गया. उस दिन ना मैं अनुराधा के सामने गया, ना वो मेरे सामने आई.
अगले दिन हम अपने-अपने घर जाने के लिए निकल पड़े. मैंने अपना सामान पैक करके कार में रखा और तभी मेरी नजर अनुराधा पे पड़ी.

वो मेरी तरफ देख रही थी. मैंने उसकी और गुस्से से देखा और अपना मुँह फेर कर अपनी कार में बैठ गया. दो घंटे में हम घर पहुँच गए. वो अपने घर चली गई थी और मैं अपने घर पर था. उस दिन के बाद मैं ना उससे मिलने गया और ना ही वो मुझसे मिली.

मेरी छुट्टियां ख़त्म होने को आई थीं. मैंने डिपार्चर की टिकट कन्फर्म की. मुझे दो दिन बाद की टिकट मिली थी. मैं घर आ गया और अपने बेडरूम में लेट गया. दस मिनट बाद किसी ने मेरे कमरे का डोर नॉक किया और मुझे एहसास हुआ जैसे ये अनुराधा हो. मैंने डोर ओपन किया तो सामने मम्मी खड़ी थीं.

मम्मी- क्या हुआ तुझे?? तबियत ठीक नहीं क्या तेरी?
मैं- ठीक हूँ मैं.. बस थोड़ी थकान है.
मम्मी- ठीक है, सोजा.. हाँ वैसे शाम को हम लोग आउट ऑफ़ स्टेशन जा रहे हैं. तेरे पापा का कुछ आफीशियल फंक्शन है और हमें इन्वाइट किया गया है. हो सका तो रात तक आ जाएंगे या कल दोपहर तक आ जाएंगे. गवर्नमेंट ने रहने का सब वहीं अरेंज्मेंट किया गया है. ज्यादातर तो कल ही आएँगे, तू चल रहा ना?
मैं- नहीं. आप लोग जाओ.. मैं ऐसी जगहों पर बोर हो जाता हूँ.
मम्मी- लेकिन अकेले क्या करेगा तू? चल ना..
मैं- नो.. और मेरे फ्रेंड्स भी तो हैं, आप लोग जाइए.
मम्मी- ठीक है.. फिर रात का डिनर बनाकर जाऊंगी.
मैं- अरे.. मैं देख लूँगा.. मत बनाओ.
मम्मी- ठीक है.

मैं फिर थोड़ी देर बाद सो गया.. शाम को उठा तो मम्मी-पापा जाने वाले थे. मम्मी ने कुछ निर्देश दिए, जो मैंने सुने ही नहीं. मैं उन्हें सी ऑफ करके फिर सो गया. बीस मिनट बाद उठा और नहाने जाने लगा. मैंने अपने कपड़े लिए और बाथरूम की ओर जाने लगा, इतने में ही डोर बेल बजी. अब मुझे नंगा रहना पसंद है तो जब भी अकेले होता हूँ न्यूड रहता हूँ. मैंने तुरंत तौलिया लपेटा और वेस्ट पहन ली.

मैं ऐसे मौके पर अगर कोई डोर पे होता है तो ज़्यादातर खिड़की में से ही बात करता हूँ. मैंने साइड विंडो से देखा और सर्प्राइज हो गया.. ये अनुराधा थी.

मैंने अपना तौलिया ठीक किया और डोर ओपन किया. अनुराधा सामने खड़ी थी.. मैं अब भी उस पर नाराज था. मैंने उससे अन्दर ना बुलाते हुए ही पूछा- क्या हुआ? क्या काम है..मम्मी नहीं हैं.
अनुराधा- हाँ पता है.. मैं तो ऐसे ही आई हूँ.. बहुत दिनों से तुम नहीं मिले तो सोचा मैं ही मिल लूँ.
मैं- मिल कर क्या करना है.. तू क्या मेरी गर्लफ्रेंड है, जो मैं तुझसे मिलने आऊं?
अनुराधा- अन्दर आ जाऊं मैं?

मैंने दरवाजा पूरा ओपन किया और साइड में हट गया.. वो घर में चली गई. मैंने किचन में से उसके लिए पानी ला दिया और सीधा बेडरूम में चला गया. वो हॉल में बैठी थी, मुझे जाता देख कर उसने अपनी आँखें नीचे झुका लीं. मैं अपने रूम में आ गया और नहाने जाने के लिए अपने कपड़े कलेक्ट करने लगा. वो मेरे रूम में आई और मुझे देखने लगी.

अनुराधा- क्या कर रहे हो भैया?
मैं- अंडे दे रहा हूँ.. दिखता नहीं क्या कि नहाने जा रहा हूँ तो कपड़े ले रहा हूँ.. और तुझे क्या लेना-देना कि मैं क्या कर रहा हूँ, क्या चाहता हूँ? तू तेरा काम कर.. नहीं तो घर जा.
अनुराधा- ऐसा क्यों बोल रहे हो भैया?
मैं- मेरी जो मर्ज़ी मैं कहूँ या करूँ..!

और वो अचानक रोने लगी.. पहले मुझे लगा कि नाटक कर रही है. मैंने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया और बाथरूम की ओर जाने लगा. वो अचानक मेरे सामने आ गई और मुझे हग करके रोने लगी. मैंने देखा कि वो सीरियस्ली रो रही थी.

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कहानी जारी है.

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