कुछ पुरानी यादें : चाची की चुदाई-3

(Kuchh Purani Yaaden: Chachi Ki Chudai- Part 3)

गुरु आशिक 2017-10-02 Comments

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सेक्सी चाची की चुदाई करने के बाद मैं घर आकर सीधे बाथरूम में घुस गया और नहा कर बाहर आया, कपड़े पहन रहा था कि घर में माँ आ गई और बोली- अशोक!
मैं पता नहीं पीछे से आवाज सुन के चौंक गया जिससे हड़बड़ी में मेरा तौलिया हाथ से छूट गया, मैं नंगा हो गया और मेरा लंड माँ के सामने आ गया.
लेकिन मैं तुरंत खुद को सम्हाला और तौलिया लपेटते हुए बोला- माँ मैं अभी बाहर आता हूँ!

माँ भी जल्दी से कमरे से निकल गई. मैं कपड़े चेंज कर के आया. माँ भी मेरे ओर नहीं देख रही थी.
मैं- क्या बात है माँ?
माँ- कुछ नहीं, पूछने गई थी कि तेरे पापा घर पर नहीं हैं, सब्जी भी नहीं लाया और अभी नहा रहा है?
मैं- माँ वो क्लिनिक से आने में गर्मी लग गई थी, मैं अभी सब्जी ला देता हूँ.

मैं बाजार निकल गया, बाजार में सब्जी ख़रीदी, मोबाइल में बी एफ डलवाया. फिर घर आ गया, माँ को सब्जी दे कर कहा- माँ, आज मैं नहीं खाऊंगा.
और अपने कमरे में आ गया.

अपने बेड पर लेट कर मोबाइल में बी एफ देखने लगा. बी एफ में एक आदमी एक औरत को गांड में पेल रहा था. इसे देख कर मेरा लंड में तेजी से खड़ा हो गया. मैं गांड मारने के तरीके सीखने लगा.
इसी बीच दस बज गए. माँ मेरे दरवाजे को पीट कर आवाज देने लगी, मैं मोबाइल बंद कर के दरवाजे पर गया, मेरे लंड पैन्ट के अंदर इतना टाईट था कि पैन्ट उठी हुई थी. लंड को दबाव देते हुए दरवाजा खोला- क्या है माँ?
माँ- थोड़ा खाना खा ले… दस बज चुके हैं.
मैं- माँ, मैंने कहा था ना कि आज खाना नहीं खाऊंगा.
माँ- थोड़ा खा ले…

मैंने देखा कि माँ की नजर मेरी उठी हुई पैन्ट पर थी. मैं वहाँ हाथ से ढकने के कोशिश करने के साथ बोला- आप चलो, मैं आता हूँ.

मैं जाकर खाने के लिए बैठ गया, माँ खाना ले कर आई. खाना रखते हुए माँ का नजर बार बार मेरे लंड की ओर थी, मैं माँ को भाम्प रहा था. मैं जल्दी जल्दी खाकर सोने चला गया.

रात भर मैं चाची की गांड के बारे में सोचता रहा. फिर कब सो गया पता ही नहीं चला.

सुबह उठा तो मेरे सर से वासना का भूत उतर चुका था, अब मुझे चाची के साथ किये गए बेशर्मी से मुझे शर्म महसूस हो रहा था, मैं उठ कर बाथरूम गया और तैयार होकर क्लिनिक चला गया. क्लिनिक में मैं काम तो कर रहा था पर मन नहीं लग रहा था. सोच रहा था कि कल जो हुआ वो गलत हुआ, कोई चाची के साथ भी ऐसा कर सकता है, मुझे खुद से घृणा हो रही थी.

वहाँ पर मेरे साथ काम करने वाले एक दोस्त आलोक है, आलोक ने मुझे पूछा- क्या बात है अशोक, तेरा ध्यान कहीं और है… तबियत तो ठीक है न?
मैं ये बात आलोक को कैसे बताता, मैं चुप रह गया, मन में सोचा कि शाम को जाकर चाची से माफ़ी माँग लूँगा.

शाम के 5 बज गए. मैं क्लिनिक से निकल कर घर गया और हाफ पैन्ट पहन कर सीधा चाची के घर आ गया. चाची कुर्सी पर बैठे हुई थी. चाची मुझे देख कर हल्का सा मुस्कुराई और बोली- क्लिनिक से आ गया, आ बैठ!
मैं चाची के सामने सोफे पर बैठ गया, मैं चाची से आँख मिला नहीं पा रहा था, चाची बोली- क्या बात है अशोक, शर्म आ रही है क्या?
मैं- चाची, मुझे माफ कर दीजिए, कल जो हुआ वो नहीं होना चाहिए था.

चाची कुरसी से उठ कर मेरे पास सोफे पर आ कर बैठ गई और मेरे जांघ पर हाथ रख कर बोली की- कोई बात नहीं बेटा, अगर तू नहीं करता तो मैं किसी से चुदवा लेती.
फिर मैं सेक्सी चाची के मुँह से चोदने की बात सुन कर आश्चर्य से से चाची की ओर देखने लगा. चाची आगे बोली- देख अशोक, तेरे चाचा महीने में कभी कभी ही आते हैं जिससे मेरी वासना बहुत प्यासी ही रह जाती है, देख अशोक, तूने वो कमी पूरी कर दी है… तू शर्मिन्दा नहीं हो… अब तू रोज आकर अपनी चाची को चोदा कर!

मैं चाची को और वासना की नजर से देखने लगा, चाची मुझे और सेक्सी दिखने लगी.
फिर चाची हल्का मुस्कुरा कर बोली- वैसे तुम्हारा लंड बहुत दमदार है. तेरे चाचा का लंड इतना बड़ा और मोटा नहीं है.
मैं मुस्कुरा दिया.

इस बीच चाची मेरे लंड पर हाथ ले जा कर सहलाना शुरु कर दिया था, उसने पैन्ट का जीप खोल कर लंड बाहर निकाल लिया और हाथ में लेकर सहलाते हुए बोली- वैसे तेरे बाप के लंड में तो दम नहीं है, उसका तो सबसे छोटा है, तेरे माँ को एक बेटा नहीं दे सका, तब तेरे चाचा ने तेरी माँ को चोदा, तब तू पैदा हुआ.
मैं यह सुन कर आश्चयर्य से चाची को देखने लगा.

फिर मैंने चाची से शरमाते हुए पूछा- तो क्या चाची, माँ आज भी चुदती है?
चाची- हाँ अशोक हाँ… तेरे पापा के लंड बहुत छोटा है और दम भी नहीं है.
कहते हुए चाची सोफे पर लेट गई और साड़ी उठा कर चुत को नंगी करके बोली- अब जल्दी से चोद ले, जब तक सीमा घर में नहीं है.

मैं मुस्कुराते हुए सेक्सी चाची की दोनों टांगों के बीच में आ गया और लंड को चुत के मुँह पर सटाया, मैं लंड को चाची के चूत के छेद पर ले जाकर रगड़ने लगा और चाची सेक्सी आहें भरने लगी- अहहः उम्म्ह… अहह… हय… याह… ऊऊऊऊ!
फिर उसने अपने हाथ से लंड पकड़ कर छेद पर टिका के रखा और मैं समझ गया कि चाची तैयार है, मैंने इशारा मिलते ही, एक जोर का झटका मारा और मेरा लंड अन्दर चला गया और वो चीखी- ऊऊई माँआआआ… आराम से कर!
फिर मैं उसे उचकते हुए चोदने लगा. आज बिना तेल ले ही घुस गया था.

चाची मदहोश होने लगी और सिसकारियाँ भरने लगी जिससे मैं और भी उत्तेजित हो गया और उसकी ठुकाई और भी जोर से करने लगा. वो आहें भरती रही- ओहोहो ह्होहो ऊऊऊ ह्ह्ह… ऐऐऐ… और कर… और कर… अशोक और जोर से… अहहः मुझे चोद अशोक और जोर से चोद… बस चोदता रह, मेरा मन खुश कर दे. अहहाह अहहह्ह उईईईई…

उसने अपनी आँखें बंद कर ली और मैं उसे पेलता रहा.
थोड़ी देर बाद मैं नीचे उतर गया और चाची की चूची को दबाने लगा. मैंने मस्ती में उसकी चुची पर काट दिया, वो चीखी- अहह्ह्ह्ह कुत्ते… काट मत!
मैंने कहा- सॉरी चाची!
और चाची के पैर फैला दिए. मैंने फिर अपने लंड को अन्दर धकेल दिया, वो प्यारी सी सिसकारियाँ लेने लगी- आआअह्ह्ह हम्म्म उम्मम्म सिस सिसी…
मैं अपने हाथों से उसकी चुची दबा रहा था और लंड से चोद रहा था.

फिर मैं बैठ गया और वो मेरे ऊपर आ गई. मैंने उसे एक पैर पर खड़ा किया और दूसरा पैर अपने कंधे पर रखा. अब मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला और उसकी चुदाई करने लगा.
मैं उसको जोर-जोर से चोद रहा था और वो अहह… हम्मम्म… ओयोयोयोय… करके चिल्ला रही थी और बोल रही थी- चोद मुझे साले… चोद मदरचोद… मैं रांड हूँ… चोद अहह अहह…

मुझे मज़ा तो आ रहा था, लेकिन मेरा लंड दुखने लगा था फिर भी मैं अभी भी उसे बेकाबू होकर उसे चोद रहा था. मैंने धक्का लगाना और तेज कर दिया. मैंने उसकी चीख और मेरे लंड के दर्द को नज़रंदाज़ कर दिया.
वो तड़प रही थी और उसकी सिसकारियाँ तेज हो रही थी- अहह… अहहह… आराम से कर मादरचोद… सीसीसी… ऊइ उइ उइउ माँआया… मेरी चूत… आहाहाहा ईईईई… मार डाला इस हरामी ने…

कुछ मिनट बाद जब मेरा निकलने वाला था, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और पागलों की तरह धक्का लगाने लगा. वो कहती रही- अहहह… बस कर… अहहह… ऊऊ… मेरी चूत बहुत दर्द कर रही है. रुक जा, बस कर… और मत कर… अहहह… औऔऔऔ…

आखिर में मैंने अपना माल सेक्सी चाची की चूत में छोड़ दिया और अहहः करते हुए मस्त आहें ली. वो भी आआआआआ करती हुई जमीन पर गिर गई और लेट गई. मैंने उसकी चूत की चुती हालत कर दी थी. मैंने फिर अपना लंड चाची के पेटीकोट से साफ़ किया और सोफे पर बैठ गया.

कुछ देर बाद वो उठी और अपनी चुत को पेटीकोट से साफ़ करके सोफे पर मेरे बगल में बैठ गई.
आज काम जल्दी निपट गया था.

सेक्सी चाची की चुत चुदाई की कहानी जारी रहेगी.
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