दो लौडों की गांड प्रेम कहानी

(Do Laundon Ki Gand Prem Kahani)

हैलो दोस्तो, अभी कुछ ही दिन पहले किसी मित्र ने मुझे व्हाट्सप पर एक वीडियो भेजी जिसमें स्कूल के बाथरूम में एक लड़का तेल लगा कर दूसरे लड़के की गाँड मार रहा था। वीडियो देख के मेरे दिमाग में एक कहानी का आईडिया आया।

यह कहानी मैं लिख कर भेज रहा हूँ आपके मनोरंजन के लिए… इसे सिर्फ एक कहानी की तरह ही लीजिये, इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
मेरा नाम जोगेश्वर दत्त है और मैं दिल्ली में रहता हूँ। मेरी उम्र इस वक़्त 42 साल की है और दिल्ली में मेरा अपना घर बार है, व्यापार है, दो किशोर बेटियाँ हैं, आहना और सायशा, एक खूबसूरत बीवी है, पैसे की भी कोई कमी नहीं।

इसी वजह से बीवी के अलावा भी जब जी करता है तो बाहर भी प्रोग्राम फिट कर लेता हूँ।

ऐसे ही एक दिन ऑफिस में बैठे बैठे फोन आया, ‘हैलो…’ मैंने कहा।

उधर से आवाज़ आई- कैसा है भोंसड़ी के?
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इतनी बदतमीजी से कौन बोल रहा है, मैंने कहा- कौन बदतमीज़ है?
वो बोला- साले मादरचोद, जब आकर तेरी गाँड में लंड पेलूंगा तो पहचानेगा तू मुझे!
‘अबे योगी, तू साले कमीने कहाँ है तू?” मैंने पूछा तो वो बोला- अमरीका में हूँ, अगले हफ्ते इंडिया आ रहा हूँ, मिलना मुझे!

खैर उसके बाद काफी देर तक हम दोनों बातें करते रहे।
फोन रखने के बाद मेरे दिमाग में एक एक करके वो सब पुरानी यादें घूम गई, जो शायद अपने घर परिवार और काम के चक्कर में मैं भूल चुका था।
बात तब की है जब मैं हाई स्कूल में आया, हमारी क्लास में एक नया लड़का आया, उसका नाम योगेंदर झा था।
पहले दिन ही वो मेरे साथ आ कर बैठा, हमारी दोस्ती भी हुई। उसके पिताजी आर्मी में थे और मेरे पुलिस में, तो हम दोनों की कुछ ही दिन में बड़ी गहरी दोस्ती हो गई।
पढ़ाई लिखाई में हम दोनों ही होशियार थे, उस वक़्त हम लखनऊ में रहते थे, हम दोनों के घर भी ज़्यादा दूर नहीं थे, इस लिए अक्सर शाम को एक साथ ही पढ़ते थे, कभी मैं उसके घर कभी वो मेरे घर।

ऐसे ही एक दिन हम शाम को छत पे बैठे पढ़ रहे थे तो योगी ने मुझे एक किताब दिखाई, उसमें कई तरह की तस्वीरें थी, जिसमें मर्द औरत आपस में सेक्स कर रहे थे।
मैंने ऐसी तस्वीरें पहली बार देखी थी, सो मेरी तो लुल्ली मेरी पैंट में ही अकड़ गई, उसका भी यही हाल था।

योगी ने अपनी पेंट की ज़िप खोली और अपनी लुल्ली बाहर निकाल ली, ‘तू भी निकाल…’ वो बोला।
मुझे थोड़ा अजीब लगा, मगर मैंने भी अपनी लुल्ली बाहर निकाली।
दोनों के छोटे छोटे लंड एकदम से ऊपर को मुँह उठाए तने पड़े थे।
‘देख इसको ऐसे कर…’ उसने अपने लंड के ऊपर की चमड़ी को आगे पीछे करके दिखाया।
मैंने भी वैसा किया तो मुझे मज़ा आया, हम दोनों साथ साथ कितनी देर तक वैसे ही करते रहे। जितना हम अपनी अपनी लुल्ली से खेल रहे थे उतना ही मज़ा आ रहा था।
उस दिन मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार हस्तमैथुन किया। हम दोनों तब तक करते रहे जब हम दोनों को एक अजीब सा एहसास न हो गया, जिसमें मुझे लगा जैसे मेरे तो जिस्म से जान ही निकल जाएगी।

खैर हमारा यह तजुरबा बढ़िया रहा और अगले हफ्ते हमने फिर से वैसे किया।

फिर तो हफ्ते में दो तीन बार और उसके बाद तो रोज़ का काम हो गया। हम दोनों एक दूसरे के सामने बैठ कर ज़ोर ज़ोर से अपनी अपनी लुल्ली को फेंटते।
फिर एक दिन जोश जोश में मेरी लुल्ली की चमड़ी इतनी ज़ोर से पीछे को खींच गई के उसके ऊपर की चमड़ी छिल गई और उसमें से खून बहने लगा।
मैं डर गया मगर योगी ने मुझे बर्फ ला कर दी जिसे मैंने अपनी लुल्ली पर लगाया और खून बंद हो गया।

योगी बोली- ले आज तेरी सील टूट गई, अब तू बच्चा नहीं रहा, मर्द बन गया है, अब तो अगर तुझसे कोई लौंडिया पट जाए तो तू उसे चोद भी सकता है।

दो एक दिन के दर्द के बाद गाड़ी फिर पटरी पर आ गई। मगर एक चीज़ का फर्क पड़ गया, पहले सिर्फ गुदगुदा एहसास होता था, मगर अब हस्तमैथुन के बाद लंड से गाढ़ा सफ़ेद वीर्य भी निकलने लगा, जिसके छूटने पर बड़ा आनन्द आता था।

वक़्त बीतता गया और हमारी मुट्ठबाजी भी चलती रही। अपनी पसंद की हर औरत और लड़की को अपने ख़यालों में हम चोद चुके थे। यहाँ तक के एक दूसरे की माँ बहन को भी, और यह बात हम दोनों एक दूसरे को बता देते थे कि आज तेरी माँ या बहन के ना से मुट्ठ मारी है।
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अब हम अगली कक्षा में हो गए थे।
ऐसे ही एक दिन योगी बोला- यार अपने हाथ से अपनी मुट्ठ मारने में कोई मज़ा नहीं आता, मज़ा तो तब है जब बंदा लेटा रहे और कोई और उसकी मुट्ठ मारे!

‘तो?’ मैंने पूछा- अब तेरी मुट्ठ मरने के लिए किसे लाया जाए?
‘क्यों न हम एक दूसरे की मुट्ठ मार दिया करें, दोनों को मज़ा आएगा।’ उसने विचार सुझाया।
‘आइडिया बुरा नहीं है, ट्राई करके देखें?’ मैंने कहा तो हम दोनों ने अपनी अपनी पेंट खोली और अगल बगल बैठ कर एक दूसरे के लंड पकड़ कर सहलाने लगे, मज़ा तो आया, मगर वो वाला नहीं आ रहा था।

वो हम दोनों बेड पे एक दूसरे की उलट दिशा में लेट गए और दोनों ने एक दूसरे के लंड को पकड़ा और फेंटना शुरू किया, वाकयी यह तो बढ़िया रहा और दूसरे के हाथ से मुट्ठ मरवाने का तो मज़ा ही कुछ और था।

ऐसे ही एक दिन जब हम दोनों लेटे एक दूसरे के लंड सहला रहे थे, तब योगी ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया!
वाओ… क्या नज़ारा आया मुझे, सच में लंड चुसवाने का तो मज़ा ही कुछ और था।

योगी ने मेरा लंड चूसते चूसते मेरे सर के पीछे हाथ रखा और मेरा सर आगे को धकेला, मतलब योगी चाहता था कि अगर वो मेरा लंड चूस रहा है तो मुझे भी उसका लंड चूसना पड़ेगा।
मुझे भी कोई ऐतराज नहीं था, मैंने भी योगी का लंड अपने मुँह में लिया और वैसे ही चूसने लगा।
हम दोनों को तो काम का वो नशा सवार हुआ कि हम दोनों अपनी अपनी कमर चला कर एक दूसरे का मुँह ही चोदने लगे।
पहले योगी झड़ा और मेरे मुँह में ही उसने अपना पानी छुड़वाया।
उसके बाद उसने मेरा लंड चूस चूस के मेरा पानी निकलवाया।
अब हस्तमैथुन के साथ चुस्का-चुस्की का काम भी चल पड़ा और इसी दौरान एक दिन हमने एक ब्लू फिल्म देखी जिसमें दो लड़के आपस में सेक्स कर रहे थे।
हमने देखा के बारी बारी दोनों ने एक दूसरे की गाँड मारी।

मैंने योगी से कहा- ये भी ट्राई करके देखें!

वो बोला- चल, करते हैं।
मगर समस्या यह कि पहले गाँड कौन मरवाएगा।सो फैसला यह किया गया कि क्योंकि लंड हैं मोटे और गाँड के छेद हैं छोटे सो, पहले थोड़ा थोड़ा डाल कर देखा जाएगा, जिसके दर्द कम होगा, वही पहले पूरा लंड लेगा।

तो कपड़े उतार के हम दोनों बेड पे लेट गए, दोनों ने एक दूसरे के लंड अपने अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किए।

उसके बाद दोनों ने अपनी अपनी एक एक उंगली पे सरसों का तेल लगाया और एक दूसरे की गाँड में घुसेड़ने की कोशिश करने लगे। उँगलियाँ जब आराम से चली गई और अंगूठे डाल कर देखे गए, जब अंगूठे भी घुस गए तो दो दो उँगलियाँ एक साथ डाली गई, ये कुछ तकलीफ़देह था। मगर जब काम दिमाग में चढ़ा हो तो दर्द में भी मज़ा आता है।
मेरी दोनों उंगलिया योगी के गाँड में अंदर तक घुसी पड़ी थी और योगी अपने हाथ की दो उँगलियों से मेरी गाँड को चोद रहा था।

फिर मैंने योगी से कहा- योगी, ये तमाशा बहुत हुआ, चल ऐसा कर तू ही ऊपर आ जा।
मैं घोड़ी के पोज़ में अपने घुटने मोड़ कर खड़ा हो गया। योगी ने अपने लंड पे ढेर सारा तेल लगाया और ला कर मेरी गाँड पे रखा।
‘ले मादरचोद, आज तू चुदने जा रहा है, अपनी गाँड खोल कर अपने यार का लंड ले, मादरचोद, साले…’ कहते हुए उसने थोड़ा सा ज़ोर लगाया, मुझे दर्द तो हुआ, मगर तेल की चिकनाहट की वजह से उसके लंड का टोपा मेरी गाँड में घुस गया।

‘अरे घुस गया रे घुस गया, मादरचोद, मार दिया तूने तो, बहुत दर्द हो रहा है।” मैंने दर्द से तड़पते हुये कहा- थोड़ा रुक, फिर और डालना।
योगी थोड़ी देर तक मेरे बदन को सहलाता रहा और फिर अपने लंड पे और तेल लगा कर अंदर को ठेलता रहा और आधे से ज़्यादा लंड उसने मेरी गाँड में घुसेड़ दिया।
इतना बहुत था चुदाई के लिए।
उसके बाद शुरू हुई असली परीक्षा।
बेशक योगी को मज़ा आ रहा था मगर मुझे दर्द हो रहा था। आज मुझे एहसास हुआ था कि औरत को पहली बार चुदवाते हुये कितना दर्द होता होगा।
इतना दर्द तो तब नहीं होता जब इंसान को कब्ज़ हो रखी हो। मगर एक टाईट सुराख में चोदने का योगी भरपूर मज़ा ले रहा था।
खैर, 3-4 मिनट की चुदाई के बाद योगी ने मेरी गाँड के अंदर ही अपना माल छुड़वा दिया।
अब गाँड मरवाने के बाद मेरी हालत पतली हो रखी थी सो योगी को चोदने का प्लान नैक्सट मीटिंग पे रखा गया।

चौथे दिन मैं ऊपर था और योगी नीचे, सच में चुदाई का तो मज़ा आ गया!
अब तो यह अक्सर होने लगा। चोदते वक़्त हम दोनों एक दूसरे को बहुत गलियाँ देते, एक दूसरे की माँ बहन तक चोदने की बातें कहते।

‘जोगी, आज तेरे घर गया था, साले तेरी माँ के मम्मे देखे, साली की गाँड बहुत मस्त है मादरचोद, एक बार दिलवा दे उसकी, सच कहता हूँ, ऐसे ही चोदूँगा उसे, एक बार दिलवा दे यार… तेरी माँ को चोदना चाहता हूँ।’

जब मैं योगी को चोदता तो मैं भी ऐसे ही अनाप शनाप बोलता- योगी तेरी दीदी की जवानी बहुत कातिल है रे, उसके चूचे देखे, तू तो उसी घर में रहता है, मादरचोद, रोज़ देखता होगा, उसको नहीं छोड़ूंगा, एक दिन पटा कर ज़रूर चोदूँगा, तू बुरा तो नहीं मानेगा अगर मैं अपना लंड तेरी बहन की कुँवारी चूत में डाल कर उसको पेल दूँ, उसके छोटे छोटे कच्चे आम के जैसे चुचे चूस लूँ, सोच के देख कि तू सामने खड़ा है और मेरे नीचे तेरी जगह तेरी कुँवारी बहन लेटी दर्द से तड़प रही है, मेरा लंड उसकी चूत में घुसा है और उसकी कुँवारी चूत से खून टपक रहा है, बोल चोदने देगा अपनी बहन को?
ऐसी ही न जाने क्या क्या बकवास करते मगर जब पानी निकल जाता और एक दूसरे के घर जाते तो एक दूसरे की माँ बहन को आँख उठा कर भी न देखते।

और हमारा लौंडा प्रेम ऐसे ही आगे बढ़ता रहा। हम दोनों ने कभी किसी से इस बारे में बात नहीं की, मगर फिर भी न जाने कैसे मैथ्स वाले सर को इसका पता चल गया और उन्होंने ने जाबबूझ कर मैथ्स में हमारी सपली लगा दी, और दोबारा पेपर में पास होने के लिए शर्त रखी के हम दोनों को उनसे भी करना पड़ेगा।
खैर मरते क्या न करते, इम्तिहान थे तो हम गए मैथ्स वाले सर के पास… उस हरमजादे ने भी हम दोनों को एक ही दिन एक साथ बिना तेल लगाए चोदा।
सच कहता हूँ, साली तीन दिन गाँड दुखती रही।

कॉलेज में हमारी प्रेम कहानी वैसे ही चलती रही। मगर हमने कॉलेज में किसी और से दोस्ती नहीं की, हाँ एक दो लड़कियों से दोस्ती ज़रूर की क्योंकि औरत से संभोग का सुख भी तो देखना था।
हम चारों एक साथ फिल्म देखने और घूमने जाते, एक दूसरे के सामने ही अपनी अपनी गर्लफ्रेंड को किस करना, उनके चुचे दबाने हम दोनों की आम बात थी। सिनेमा में तो अक्सर हम अपने अपने लंड निकाल कर उनके हाथ में पकड़ाते, उनकी कमीज़ में हाथ डाल के रखते, हमारी इच्छा तो ये थी कि दोनों लड़कियों को साईड बाई साईड एक ही बेड पर चारों एकदम नंगे होकर चोदते।

मगर वो नहीं मानी तो अपनी अपनी गर्लफ्रेंड को हमने साथ साथ दो अलग अलग कमरों में एक ही दिन और एक ही वक़्त पे एक साथ चोदा।
मगर गाँड में जो करारापन होता है वो गीली भीगी सी चूत में नहीं मिला।
उसके बाद तो हमने उनको सिर्फ चुचे दबाने और चुम्मा चाटी तक ही रखा और असल वजह यह थी कि कोई हम पे लौंडे होने का
शक न करे। असल मज़ा तो हमे एक दूसरे से ही आता था, हम दोनों तो शादी करके साथ रहना चाहते थे, मगर यह सम्भव नहीं था।
योगी के मामा अमरीका में रहते थे, उन्होंने उसे वहाँ बुला लिया, जब हम जुदा हुए तो बहुत रोये।
मगर उसके बाद ज़िंदगी अपनी रफ्तार पे दौड़ पड़ी।
मैंने भी दिल्ली में अपना बिज़नस शुरू कर लिया, शादी हो गई, बच्चे हो गए, धीरे धीरे मैं यह सब कुछ भूल गया और अपनी ज़िंदगी में मसरूफ़ हो गया।
आज जब योगी का फोन आया तो मैं सोचने लगा कि अब अगर आ कर उसने कहा कि चल एक बार फिर से वही जवानी का खेल खेलते हैं, तो क्या मैं वो सब कर पाऊँगा?
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