मेरे दोस्त का भाई मेरा पति बन गया

(Mere Dost Ka Bhai Mera Pati Ban Gaya)

पंकज यादव 2017-01-20 Comments

हैलो फ्रेंड्स.. मेरा नाम पंकज उर्फ़ प्रिया है। मैं एक ‘गे’ हूँ.. मैं लखनऊ में अपने हज़्बेंड के साथ रहती हूँ। मुझे बचपन से ही CD यानि क्रॉस ड्रेसिंग यानि लड़कियों के कपड़े पहनने का शौक था, जब घर में अकेला होता था तो अपनी मम्मी, बहन के कपड़े पहन कर घूमता था, जब घर पर मैं अकेला होता था तो गांड में उंगली अन्दर-बाहर करता रहता था।

मेरा यह शौक उम्र से साथ-साथ और भी बढ़ गया। स्कूल में 12वीं के बाद मैं दूसरे शहर में आगे की पढ़ाई के लिए आ गया। वहाँ पर मैं अकेला रहता था।

एक दिन मेरे कॉलेज में एक नया लड़का आया.. उसका नाम कपिल था, वो देखने में बहुत आकर्षक था.. मैंने जल्दी ही उस लड़के से फ्रेंडशिप भी कर ली।

एक दिन कपिल मुझे अपने साथ अपने घर ले गया, वहाँ कपिल का बड़ा भाई भी था, जो उससे भी ज्यादा हैण्डसम था, उसका नाम अमित था.. उसको देख कर मेरे अन्दर की औरत पूरी तरह जाग गई.. और मेरी किस्मत बहुत अच्छी थी कि अमित ने भी मेरे अन्दर की लड़की को भांप लिया था।

एक दिन मैं फिल्म देखने गया तो वहाँ मेरे दोस्त का भाई अमित मुझे मिल गया, हमने एक साथ टिकेट ली और वो मेरे बगल की सीट की पर बैठा। हम दोनों फिल्म देखने लगे।

फिल्म में एक हॉट सीन आया तो मैं उस सीन को बड़े गौर से देख रहा था.. तभी मुझे लगा कि कोई मेरी पैन्ट की ज़िप खोल रहा है। मैंने देखा तो वो अमित था।
मैं कुछ नहीं बोला और वो मेरा लंड निकाल कर हिलाने लगे।

फिर उन्होंने अपने पैन्ट की ज़िप भी खोल दी और मुझे अपने लंड पर झुका लिया।

मेरे अन्दर की औरत पूरी तरह से जाग गई थी, मैं उनका लंड पूरा मन लगा कर चूसने लगा, थोडड़ी देर में उन्होंने पानी छोड़ दिया, मैं वो पानी पूरा पी गया।
उनके लंड का पानी पीने के बाद मुझे खुद में बिल्कुल औरत सा महसूस हो रहा था। इस मस्ती में मुझे पता ही नहीं चला कि कब फिल्म खत्म हो गई।

हम लोग बाहर आ गए और मैं औरतों की तरह शर्मा रहा था।
अमित बोले- शरमाओ मत.. चलो कहीं चलते हैं।
मैं बोला- क्यों.. आपको घर नहीं जाना?
वो बोले- नहीं..

मैं बोला- कहाँ चलेंगे?
वो बोला- मेरे दोस्त के फ्लैट पर चलते हैं।
मैं बोला- और वो दोस्त?
वो बोला- मेरा दोस्त बाहर गया है, एक महीने बाद आएगा।

हम दोनों उस फ्लैट पर गए.. जैसे ही मैं फ्लैट में अन्दर गया.. अमित ने मुझे पीछे से जोर से पकड़ लिया।
मैं बोला- ये क्या कर रहे हो आप?
वो बोले- कुछ नहीं.. जब से तुमको देखा है.. मैं तभी से तुम्हारी गांड मारना चाहता था.. आज मौका मिला है।

उन्होंने मेरे होंठों को किस करना शुरू कर दिया.. मुझे बहुत अच्छा लगा, कुछ ही पलों के बाद हम दोनों ने सारे कपड़े उतार दिए। अमित ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया और मैं बड़े प्यार से उनका लंड चूसने लगा।

फिर थोड़ी देर बाद उन्होंने मुझे उल्टा किया और मेरी गांड में तेल लगाया। मैं बहुत खुश था कि आज मैं पूरी औरत बन जाऊँगा.. पर मुझे थोड़ा डर भी लग रहा था कि बहुत दर्द होगा।

पर यह दर्द उस खुशी के सामने कुछ भी नहीं था.. जो मुझे आज मिलने वाली थी।
फिर अमित ने अपना लंड मेरी गांड के छेद पर रखा। लंड रखते ही मेरे जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया। फिर अमित ने अपना लंड धीरे-धीरे अन्दर करना शुरू किया।
मुझे बहुत दर्द हो रहा था.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… पर मैं सहन कर रहा था।

अमित ने पूरी ताक़त से लंड मेरी गांड में डाल दिया। मैं चिल्लाने लगा.. पर उन्होंने कुछ नहीं सुना। थोड़ी देर में मैं बेहोश हो गया।

जब मुझे होश आया तो मैंने देखा कि अमित अभी भी मुझे चोद रहा था.. पर अब मुझे मज़ा आ रहा था। मेरी चुदाई काफी देर तक चली।

मैं उठ भी नहीं पा रहा था। अमित ने ही मुझे सहारा देकर टॉयलेट तक लाया और मैंने सूसू किया।
सुबह हो चुकी थी.. उन्होंने ही मुझे चाय लाकर दी।

फिर मैं अपने कमरे पर चला आया। पर उस दिन के बाद से मैं रोज़ ही उनसे चुदवाने लगा।

एक दिन उन्होंने मुझे शादी के लिए प्रपोज किया.. तो मैंने ‘हाँ’ कर दी।
वो बहुत खुश हो गए, फिर हम दोनों ने चुपचाप मंदिर में जाकर शादी कर ली, वहाँ एक दूसरे को पति पत्नी मान लिया।

अब मैं हमेशा औरत बनकर ही रहता हूँ।

अब मैंने ऑपरेशन करा कर सेक्स चेंज करने का फैसला कर लिया है। ताकि मैं हमेशा अपने पति के साथ रह सकूँ और उन्हें औरत का पूरा सुख दे सकूं।
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