मेरी बदचलन मां की चुदाई लीला- 1

(Nude Teacher Porn Kahani)

न्यूड टीचर पोर्न कहानी मेरी सगी मम्मी की चुदाई की है. वे एक स्कूल में अध्यापिका हैं. एक बार मैं उनके स्कूल गया तो मैंने उन्हें प्रिन्सिपल के साथ अश्लील हरकतें करती देखा.

लेखक की पिछली कहानी थी: बिहारी आंटी की चूत गांड में मेरा लंड

अब नयी न्यूड टीचर पोर्न कहानी का मजा लीजिये.

दोस्तो, मेरा नाम प्रकाश है और मैं 22 साल का हूँ.

मैं महाराष्ट्र कोल्हापुर के पास एक शहर से हूँ. मैं जगह का नाम नहीं बता सकता हूँ.

मेरे घर में मैं और मेरे पापा रमेश (48) हम 2 लोग रहते हैं.
मैं जब किशोरवय का था तभी मेरे पापा का एक्सीडेंट हो गया था और उनकी कमर में गहरी चोट आ गई थी.

इसलिए पापा से कोई काम नहीं होता था; वे पानी की बाल्टी तक नहीं उठा सकते थे.
यहां तक कि उन्हें चलते वक्त भी दर्द होता था.
इसलिए मेरे पापा घर में ही रहते थे.

मेरी मां अब हमसे अलग रहती हैं.
वे एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं.

मेरी मां दिखने में सांवली हैं पर उनका फिगर बहुत ही कमाल का है.
उनके बूब्स और गांड बहुत बड़ी है.

मेरी मां हमेशा बहुत सज संवर कर रहती हैं और वे मेरे पापा से जानबूझ कर झगड़े करती थीं.

यह सेक्स कहानी आज से 5 साल पहले की है जब मैं जवान हो गया था और हम तीनों साथ में रहते थे.

मेरी मां सुबह 9 बजे खाना बनाकर तैयार हो जाती थीं और बहुत ही सज संवर कर स्कूल जाती थीं.

मैं भी सुबह अपने स्कूल चला जाता था. घर में सिर्फ पापा रहते थे.

एक दिन दोस्तों के साथ फिल्म देखने का प्लान बना तो हम सभी पैसे जमा करने लगे.

मैंने दोस्तों से बोला कि मैं कल पैसे लेकर आता हूँ, आज मेरे पास नहीं हैं. वैसे भी हम लोग कल जाने वाले हैं.
मेरा दोस्त अक्षय बोला- हां ठीक है, कल तू सीधा थिएटर पर मिल जाना.

फिर मैंने सोचा कि क्यों ना मम्मी के स्कूल जाकर उनसे पैसे मांग लूँ.

मैं दोपहर एक बजे मम्मी के स्कूल गया और उनको ढूंढने लगा.

तभी मैंने देखा मम्मी और प्रिंसिपल स्कूल के गार्डन में टहल रहे थे.
मैं उनकी तरफ़ जाने लगा था.

मैंने देखा कि अचानक से प्रिंसिपल ने मेरी मम्मी की गांड को दबाया और हंसने लगे.

मम्मी ने उनके हाथ को हटाया और सर के सामने खड़े होकर हंसती हुई बातें करने लगीं.
मैं थोड़ी देर के लिए एक दीवार से लग कर छुप गया और उधर ही खड़े होकर उन दोनों को देखने लगा.

कुछ देर बाद प्रिसिपल सर ने इधर उधर देखा और वे मम्मी के बूब्स दबाने लगे.
मम्मी ने फिर से उनके हाथ को हटाया.

फिर मां हंसती हुई आगे को आईं और उन्होंने सर को हल्के हाथों से थप्पड़ मार दिया.
वे दोनों हंसने लगे.

मैं समझ गया था कि मेरी मां का प्रिंसिपल के साथ अफेयर चल रहा है.

तभी मैं आवाज देते हुए उनके पास जाने लगा.

मेरी आवाज सुनकर मां ने मुझे देखा.
मैं मां के पास गया.

मां- बेटा, तू यहां क्या कर रहा है?
मैं- मां, मुझे आपसे काम था.

प्रिंसिपल- सुनंदा, तुम्हारा बेटा इतना बड़ा हो गया है!
मां- हां अभी यह 11वीं क्लास में है. बेटा, ये संजय सर हैं … स्कूल के प्रिंसिपल सर.

मैं- नमस्ते सर.
संजय सर- नमस्ते बेटा.

मां- क्या काम था बेटा?
मैं- मां मुझे 500 रूपये चाहिए थे.

मां- पिछले हफ्ते ही तो दिए थे तुझे पैसे … अब नहीं मिलेंगे.
मैं- प्लीज मम्मी, मुझे काम है.

मां- मैंने बोला ना कि नहीं हैं. अब घर जा चुपचाप.
संजय सर- रुको बेटा, ये लो पैसे!

मां- आप क्यों दे रहे हो. मत दो, ये दोस्तों के साथ उड़ा देगा.
सर- अरे अभी उसकी उम्र है एंजॉय करने की.

फिर मैं पैसे लेकर घर आ गया और शाम 5 बजे मां भी घर आईं.
मैं मां और प्रिंसिपल के अफेयर के बारे में सोच रहा था और मुझे बहुत बुरा महसूस हो रहा था.

मेरे दिमाग में बहुत बुरे ख्याल आ रहे थे कि मेरी मां किसी दूसरे मर्द को ऐसे छूने दे रही है, तो उनमें चुदाई भी हुई होगी.

प्रिंसिपल दिखने में तो कितना काला है और उसके सर पर बाल भी नहीं हैं, फिर भी मेरी मां उनसे कैसी पट गईं.
मैं यही सब सोचने लगा.

फिर रात को हम सबने खाना खाया और सोने लगे.
अगले दिन रविवार था तो सुबह उठने की टेंशन नहीं थी.

इसलिए मैं मोबाइल चलाने लगा.

कुछ देर बाद मां ने मुझे सोने को बोला तो मैं मोबाइल रख कर सोने लगा.

पर मेरे दिमाग में मां और संजय सर के बारे में ही ख्याल आ रहे थे.

मेरे घर में एक ही बेडरूम था और एक हॉल और किचन.
हम सब बेडरूम में ही सोते थे.

मैं और पापा बेड पर सोते थे और मां नीचे गद्दा बिछाकर सोती थीं.

उस रात मुझे नींद नहीं आ रही थी.

तभी मैंने देखा कि नीचे मेरी मां मोबाइल चला रही थीं और मुस्कुरा रही थीं.
मैं समझ गया कि मां संजय सर से चैटिंग कर रही हैं.

कुछ देर बाद मां ने नाइट ऊपर उठाकर चड्डी निकाली और टांगें फैलाकर चूत की फोटो खींची.
मुझे उनकी जांघें दिखीं, पर चूत नहीं दिखी.

फिर वे मुस्कुराती हुई चैटिंग करने लगीं.

कुछ देर बाद मां ने बूब्स बाहर निकाले और उनकी फोटो खींचने लगीं.

वे अपने बूब्स पकड़ कर और खुद के मुँह से बूब्स चूसते हुए फ़ोटो खींच कर चैटिंग करने लगीं.
कुछ देर बाद मां सो गईं.

जब मैं सुबह उठा तो मां बेड पर नहीं थीं, वे घर का काम कर रही थीं.

मैंने उनका मोबाइल लिया और चादर के अन्दर घुस कर उनके व्हाट्सएप को चैक किया.

मैंने देखा कि वे रात में प्रिंसिपल सर से चैट कर रही थीं.
तब मैंने उनकी चैटिंग पढ़ी.

संजय सर- तुम्हारी याद आ रही है.
मां- अच्छा तो मैं आ जाऊं आपके पास?

संजय सर- हां आ जाओ, मेरी बीवी भी यहीं सोई है. थोड़ी जगह बची है बेड पर, यहीं सो जाना.
मां- सो जाना तो ऐसे बोल रहे हो, जैसे सच में सोने दोगे! मैं नहीं आती … आपकी बीवी को पता चला तो वह मेरे बाल नोच लेगी.

संजय सर- मेरी बीवी को पता नहीं चलने दूंगा. तुम आराम से लेट जाना और मैं तुम्हारी नाइटी उठाकर आराम से करूंगा.
मां- मुझे अच्छे से पता है कि आप कितना आराम से करते हो!

संजय सर- तुम्हारी याद में मेरा लंड खड़ा हो गया.
मां- अच्छा तो आपकी बीवी भी साइड में सो रही है, उसकी नाईटी उठा कर चालू हो जाओ.

संजय सर- नहीं, अब मैं सिर्फ तुम्हारे लिए अपना स्टैमिना बचा कर रखता हूँ. अब तो बस तुझे ही चोदूंगा.
मां- अच्छा जी, मैं आपको इतनी पसन्द हूँ?

संजय- मेरी बीवी से भी ज्यादा. अच्छा सुनो ना … मुझे तुम्हारी चूत देखनी है.
मां- अभी नहीं, मेरे पति और बेटा बगल में ही सोए हैं.

संजय सर- तेरा पति अब सिर्फ़ मैं हूँ … उस नल्ले से मत डर!
मां- हां, मेरे पतिदेव आप ही हो. मैं तो अब इसको चोदने भी नहीं देती. कल आया था चोदने, मैंने मना कर दिया था.

संजय सर- उसे चोदने देना भी मत, अब तेरे पूरे शरीर पर सिर्फ मेरा हक है.
मां- हां मेरे पतिदेव, मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ.

संजय सर- अच्छा अब मुझे चूत की 3-4 पिक भेजो.

फिर मैंने मां की चूत की फोटो देखी.
उनकी चूत झांटों से भरी हुई थी और काली भी थी.

मां ने उंगली से चूत फैलाकर फोटो निकाली थी तो उनका लाल छेद दिख रहा था.
फिर सर ने अपने लंड की पिक भेजी.

मैंने देखा कि उनका लंड बहुत मोटा और काला था.
संजय सर- तेरे लिए खड़ा है ये!

मां- यार, आपका बहुत बड़ा है. मन करता है कि बस चूसती रहूँ!
संजय सर- अब मुझे भी रहा नहीं जाता मेरी जान. अपना जो प्लान बना है, वह याद है ना!

मां- हां याद है, पर डर लग रहा है … कोई ने देख लिया तो क्या होगा?
संजय सर- तू डर मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ ना!

मां- पिछली बार की तरह आपके घर पर ही अपना काम करते हैं.
संजय सर- पिछली बार मेरी बीवी और बेटी नहीं थी घर पर, अब वे दोनों हैं.

मां- अच्छा ठीक है.
संजय सर- अपने बूब्स दिखाओ.

फिर मैंने अपनी मां की चूचियों की फ़ोटो देखी.
मां मुस्कुराती हुई अपनी चूचियां पकड़ कर फ़ोटो खींच रही थीं.

एक फोटो में मां अपने बूब्स चूसती हुई दिख रही थीं.

संजय सर- संजय सर तुम्हारी बॉल्स तो बहुत बड़ी हो गई हैं.
मां- ये अब आपका किया कराया है. चाहे कभी भी दबा देते हो. आज अच्छा हुआ कि मेरा बेटा 5 मिनट बाद आया, नहीं तो वह हमें हरकत करते हुए देख लेता.

संजय सर- देख लेता तो तुम बोल देतीं कि बेटा आज से ये तेरा बाप है, वह नल्ला नहीं.
मां- आपके लिए तो आसान है बोलना, मैं तो डर गई थी.

संजय सर- क्या गलत कहा मैंने … तुम्हारा बेटा अब मेरा भी बेटा है. समझी … अब वह कोई चीज मांगे, तो दे देना!
मां- ठीक है समझ गई, अब सो जाओ.

संजय सर- ओके तू भी सो जा.
फिर मैंने मोबाइल साईड में रखा और बाहर आ गया.

मां काम कर रही थीं और मुझे उन पर गुस्सा आ रहा था.
एक दिन पहले तक जिस मां को मैं इतना प्यार करता था, आज उसी से नफरत हो रही थी.

फिर मैंने तैयार होकर खाना खाया और करीब 11 बजे घर से थिएटर निकल गया.
हम सब दोस्त मूवी देखने लगे.

इंटरवल में जब मैं और मेरा दोस्त बाहर आए तो मेरी नज़र मेरी मां पर पड़ी.
मेरी मां संजय सर की स्कूटी पर बैठी थीं और वे दोनों पति पत्नी की तरह बैठे थे.

तभी मैंने अपने दोस्त से उसकी स्कूटी की चाभी मांगी.
मेरा दोस्त- क्या हुआ बे, कहां जा रहा है?

मैं- एक काम है. मैं जाता हूँ … तू रिक्शा से घर जाना. मैं स्कूटी तेरे घर ले आऊंगा.
दोस्त- अबे कौन सा काम है, ये तो बता … अन्दर सब पूछेंगे कि प्रकाश कहां गया तो?

मैं- बोल देना घर गया है.
फिर मैं उसकी स्कूटी और हेल्मेट लेकर वहां से निकला और मां और अंकल को ढूंढने लगा.

तभी मैंने देखा कि आगे के सिग्नल पर वे दोनों रूके थे.
इससे पहले वे मुझे पहचान लेते, मैंने हेल्मेट का कांच नीचे कर दिया.

मैंने उनसे 100 मीटर की दूरी बनाए हुई थी ताकि उनकी नज़र में ना आऊं.

कुछ देर बाद वे दोनों शहर से बाहर निकल गए.

संजय सर मेरी मां की चुदाई करने के लिए उन्हें कहीं ले जा रहे थे.

तभी एक खेत के पास वे दोनों रुके और उनके रुकते ही मैं भी रूक गया.
मैं उनसे बहुत दूर था.

तभी उन्होंने डिक्की से कुछ निकाला और खेत के अन्दर जाने लगे.

मैंने अपनी स्कूटी स्टार्ट की और उनके थोड़ा पास गया.
मैंने देखा एक कच्चा रास्ता दूसरे खेतों की तरफ़ जा रहा था.

मैंने कच्चे रास्ते पर अपनी स्कूटी पार्क की और उनकी तरफ़ बढ़ गया.
मैं खेत के दूसरी साईड से अन्दर जा रहा था, तभी मैंने उन दोनों को देखा और खड़ी फसल के बीच में झुक गया.

अब मैं धीरे धीरे उनकी तरफ़ बढ़ने लगा.
खेत खत्म हुए तो मैं एक झाड़ी के पीछे छुप गया.

मुझे वे दोनों साफ दिखाई दे रहे थे और वहां कोई चौथा नहीं होने के कारण उनकी आवाज भी सुनाई दे रही थी.

मां नीचे बैठ कर जगह साफ कर रही थीं और संजय ने चादर नीचे बिछाई.
सर ने बैठ कर मां के गालों को पकड़ा और होंठों पर अपने होंठ रख कर वे उन्हें किस करने लगे.

मेरी मां ने बहुत ज्यादा लिपस्टिक लगाई थी.
वे भी संजय के होंठ अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं.

संजय सर भी उनके होंठों को भंभोड़ने लगे थे.
मां भी उनके गले में हाथ डाल कर उनका साथ दे रही थीं.

फिर संजय सर ने मम्मी की साड़ी का पल्लू हटा दिया और वे उनके बूब्स दबाने लगे.
मेरी मां भी लगातार अपने आशिक के होंठ चूम रही थीं.

संजय सर ने मां का ब्लाउज निकाल दिया और ब्रा को हटा कर बूब्स चूसने लगे.
उन्होंने एक एक करके दोनों बूब्स चूसे और मां को लेटा कर उनकी कमर और नाभि को चाटने लगे.

संजय सर- जान, पूरी साड़ी निकालो.
मां- पूरी नहीं निकालूंगी यार, कोई आ गया तो गड़बड़ हो जाएगी.
संजय सर- अरे कोई नहीं आएगा मुझे पता है.

सर ने मां की साड़ी निकालनी शुरू की. फिर मां का पेटीकोट निकाल दिया.
अब मां सिर्फ चड्डी में रह गई थीं.

वे मां के पैरों को चूमते हुए आगे बढ़े और जांघों को चूमने लगे.
धीरे धीरे मां की चूत को चड्डी के ऊपर से मसलने लगे और चाटने लगे.
मां की चड्डी गीली हो गई थी.

संजय ने मां की चड्डी निकाली और चूत पर टूट पड़े.
वे किसी कुत्ते के जैसे चूत चाटने लगे.

मेरी मां आंखें बंद करके सिसकारियां लेने लगीं.

मैंने देखा कि मां की झांटों से भरी चूत पर संजय सर ने अपना मुँह रखा था और मां उनके टकले को पकड़ कर चूत पर दबा रही थीं.

तभी संजय सर अपनी एक उंगली भी चूत के अन्दर डालने लगे.
कुछ पल बाद सर ने अपनी शर्ट और पैंट भी निकाल दी.

सर का शरीर तो जैसे बालों का बगीचा था. उनके पूरे शरीर पर बाल थे.
फिर सर ने मेरी मां को किस करते हुए उन्हें अपने ऊपर ले लिया और खुद नीचे हो गए.

अब मां सर के गले को चूमती हुई नीचे आईं और उनकी बालों से भरी छाती को चूमने लगीं.
सर ने मां के बाल पकड़े और उनका सर नीचे को दबाया.

मां उनके बदन को चूमती हुई नीचे आईं और चड्डी नीचे करके लंड पर जीभ फेरने लगीं.
मां ने अपने मुँह में सर का लौड़ा लेकर चूसना आरम्भ कर दिया.

कुछ देर बाद ही सर की सिसकारियां तेज हुईं और उन्होंने मां के बाल पकड़ कर अपनी गांड उठाई.
मां ने अपनी आंखें बंद की और लंड की को दबा कर अपने मुँह में सर के लंड का पानी लेने लगीं.

फिर वे मुस्कुराती हुई सर को मुँह खोल कर दिखाने लगीं कि देख लो.
उन्होंने वीर्य को दिखाया.

संजय सर- हम्म … पी लो अब.
मां ने ना में सर हिलाया.

संजय- पी लो मेरी जान, कुछ नहीं होगा.
मां ने इशारे से किस करने को बोला.

तो सर ने मां को अपनी ऊपर खींचा और किस करने लगे.
उन दोनों ने सर के लंड का वीर्य मिल कर पीना शुरू कर दिया.

सर के मूछों को भी उन्हीं के लौड़े का पानी लग गया था.

मां ने उनकी मूँछों से वीर्य को अपनी जीभ की नोक से चाट कर साफ कर दिया.
मां- आपका हमेशा से यही है. हमेशा मुँह में माल छोड़ देते हो!

संजय सर- अभी तक कुछ हुआ?
फिर मां शर्माती हुई उनकी छाती पर सर रख कर लेट गईं और सर ने उन्हें अपनी बांहों में भर लिया.

दोस्तो, यह न्यूड टीचर पोर्न कहानी एकदम सच पर आधारित है.
इसका अगला भाग आपको मेरी मां की चुदाई की पूरी तस्वीर दिखाएगा.

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न्यूड टीचर पोर्न कहानी का अगला भाग: मेरी बदचलन मां की चुदाई लीला- 2

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