विधवा दीदी ने मेरा लंड चूसा

(Vidhwa Didi Ne Mera Lund Chusa)

विशु कपूर 2018-06-08 Comments

सबसे पहले आप सभी पाठकों को सादर प्रणाम. अन्तर्वासना की कृपा से लंड को खड़ा कर देने वाली और चूत में उंगली करने को मजबूर कर देने वाली कामुक कहानियां यहाँ पर पढ़ने और लिखने को मिल जाती हैं.
दोस्तो, मेरा आपसे वादा है कि आप सब मेरी कहानी को पढ़कर एकदम गर्म हो उठेंगे. अगर आपके पास चूत या लंड का इंतज़ाम नहीं है तो लड़के मुट्ठ मारेंगे और लड़कियां अपनी चूत में उंगली डालकर अपनी चूत का पानी निकालेंगी.

मैं आगरा से वीशु कपूर नाम का 25 वर्षीय एक सजीला नौजवान हूँ, अहमदाबाद में एक मसाज पार्लर में मसाज ब्वॉय की हैसियत से काम कर रहा हूँ.

यह बात अभी एक हफ्ते पहले की है. मेरे घर के पास ही एक परिवार रहता है जिसमें एक बुजुर्ग दंपति और एक हाल में हुई जवान विधवा औरत, जिनका नाम काजल (बदला हुआ नाम) रहती थीं. उन बुजुर्ग लोगों को मौसी के पड़ोसी होने के नाते मैं उन्हें भी मौसी और मौसा जी ही कहा करता था और उस विधवा औरत को मैं प्यार से दीदी कहता था. उनकी उम्र करीब 22 से 24 के बीच ही होगी. उनके पति इंडियन आर्मी में थे, जिनकी कश्मीर में आतंकवादियों द्वारा हत्या कर दी गई थी. हालांकि उनके परिवार को सरकार की तरफ से काफी अच्छा पैसा मिला था. लेकिन जिस परिवार का सदस्य भरी जवानी में गुजर जाए तो वो पैसों से लौट कर नहीं आता.

मैं जब जब उन विधवा दीदी को देखता था, तब तब उन पर मुझे तरस आता था लेकिन मैं ईश्वर की मर्ज़ी के आगे क्या कर सकता था. हालांकि उनके यहाँ पैसे की कोई कमी नहीं थी लेकिन बिना साथी के पहाड़ जैसी जिन्दगी काटना बहुत मुश्किल होता है. हालांकि मेरे मन में उनके लिए कोई भी गलत भावना नहीं थी क्योंकि मैंने उनको कभी उस नज़र से देखा नहीं था.

पता नहीं उस दिन यानि 25 अप्रैल को दीदी को देखने का अंदाज़ ही एकदम से बदल गया. सुबह के समय मैं दाढ़ी बनाकर नहाने के लिए जैसे ही बाथरूम में घुसा ही था, तभी दीदी आ गईं.
दीदी का फिगर 34-30-36 का था और उनकी लंबाई 5 फुट 6 इंच और रंग दूध के समान गोरा था.. मतलब वो काम की देवी रति को भी मात दे रही थीं.

दोस्तो, जैसा कि आप जानते हैं कि मैं पेंट, जीन्स या पजामे के नीचे कुछ भी नहीं पहनता हूँ और सफ़ेद गमछा पहन कर नहाता हूँ. उस दिन बाथरूम में छिपकली होने के कारण मैं आँगन में नहा रहा था.. और जैसा आप जानते हैं कि सफ़ेद गमछा पानी से भीग जाने के कारण शरीर से चिपक जाता है. वो गमछा मेरे लंड की जगह पर चिपक गया था, जिससे मेरा मस्त मोटा लंड और मेरे बड़े बड़े पोते साफ साफ दिखाई दे रहे थे.

मैं नहाने से पहले अपने घर के मेन गेट को बंद करना भी भूल गया था. अन्यथा दीदी अचानक से घर के नहीं आ पातीं.. और वो मुझे नहाते हुए देखती ही नहीं.
खैर, दीदी की आँखों में गमछा से चिपका हुआ मेरा लंबा और मोटा लंड देखकर चमक आ गई और वो मेरे लंड को निहारती रहीं.

जब मैं नहा कर फ्री हुआ और पजामा पहना ही था कि दीदी ने मुझसे कहा- वीशु, अगर तुम्हारे पास समय हो तो इस संडे हमारा कूलर फिट कर दोगे?
दीदी की आवाज़ सुनकर मैं एकदम से चौंक गया कि अचानक से यह कौन आ गया?
मैंने सँभलते हुए अपने लंड को अपने हाथ से छिपाने की कोशिश की क्योंकि मैंने अभी ऊपर कुछ नहीं पहना था और पजामा पता होने के कारण और बिना अंदरूनी वस्त्र पहने होने के कारण पानी से भीगा लंड साफ़ दिख रहा था.

मैंने हाथ से लंड को छिपाया और दीदी से कहा- दीदी, मैं कल कुछ क्लाइंट्स की कॉल पर दिल्ली जा रहा हूँ मतलब संडे को मुझे दिल्ली पहुँचना है, तो मैं कल यहाँ (अहमदाबाद) से जाऊँगा, तब जाके संडे सुबह तक पहुँच सकूँगा.
दीदी बोली- कब तक लौटोगे?
मैंने जवाब दिया- पता नहीं.
दीदी ने पूछा- इसका क्या मतलब?
मैंने बताया कि अभी मेरे पास कुछ क्लाइंट्स के कॉल्स आये हैं और यह तो वहीं जाकर पता चलेगा कि कितनी क्लाइंट्स मेरी सर्विस लेंगी?

दीदी ने मुझसे कहा- मैं समझी नहीं कि तुम क्लाइंट्स को किस तरह की अपनी सर्विस देते हो?
दीदी मेरे लंड को देख रही थीं और अपने चूचों को अपने हाथ से बार बार खुजाते हुए कुछ चुदास भरा इशारा कर रही थीं.
तो मैंने दीदी से कुछ भी न छिपाने का फैसला किया और उनको बताया- दीदी, मैं एक जिगोलो हूँ.

दीदी ने पूछा बनते हुए अपनी चूचियों की झलक दिखाई और पूछा- ये जिगोलो क्या होता है?
मैंने अपना हाथ अपने लंड से हटाया और दीदी से पूछा कि दीदी क्या आप वाकयी जिगोलो नहीं जानतीं?
उन्होंने मेरे खड़े होते हुए लंड को ललचाई निगाहों से घूरा और जवाब दिया- नहीं.
मैंने बताया- जिगोलो एक मेल सेक्स वर्कर होता है. जो औरत अपने पति से शारीरिक रूप से संतुष्ट नहीं होती है, उसे जिगोलो संतुष्ट करता है मतलब वो उस औरत के साथ सेक्स करता है और बदले में वो उस औरत से अपनी मेहनत की फीस लेता है.
दीदी ने ‘ओह..’ कहा और उन्होंने बड़ी बेशर्मी से मेरे लंड को देखने की माँग की.

अब मैंने भी देर न करते हुए अपना पजामा नीचे खिसका दिया और जैसे ही मैंने अपना पजामा नीचे खिसकाया, तभी मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया.
लंड देख कर दीदी के मुँह से अनायास ही निकल गया- हाय राम तुम्हारा लंड तो बहुत लंबा और मोटा है, कैसे सँभालते होगे इसे?
मुझे दीदी के मुँह से लंड शब्द सुनते ही मुझे उनकी जवानी चोदने लायक लगने लगी.

दीदी ने मुझसे अपने थन उभारते हुए पूछा- वीशु, क्या मैं तुम्हारे लंड को छूकर देख सकती हूँ?
मैंने कहा- हाँ हाँ दीदी, क्यों नहीं… मेरा लंड तो आप जैसी औरतों और लड़कियों के लिए ही तो भगवान ने मुझे दिया है.

बस फिर क्या था, दीदी ने आगे बढ़ कर मेरा लंड अपनी दोनों हथेलियों में भर लिया और घुटनों के बल बैठकर दीदी ने लंड पर एक जोरदार लंबा चुम्बन जड़ दिया. मेरा लंड भी तन कर दीदी को सलाम करने लगा. फिर दीदी मेरे लंड का सुपारा खोलकर अपने मुँह में डालकर उसे जीभ से चाटने लगीं और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने और चाटने लगीं.

तभी अचानक मेरे घर की कॉलबेल बजी तो मैंने दीदी को अन्दर वाले कमरे में भेज दिया और अपना पजामा ऊपर करके मैं मेनगेट खोलने चला, लेकिन दीदी के द्वारा मेरा लंड चूसने से मेरा लंड लोहे की गरम रॉड की तरह तन गया था, जिसे मैंने बैठाने की बहुत कोशिश की. लेकिन लंड इतनी जल्दी कहां बैठने वाला था.

जैसे ही मैंने अपना मेनगेट खोला तो वहाँ पड़ोस की रहने वाली ज्योति (बदला हुआ नाम) खड़ी थी. उसकी उम्र करीब 22-23 साल होगी.
मैंने ज्योति से पूछा- क्या काम है और कैसे आना हुआ?
ज्योति ने कहा- भैया आपको मेरे पापा ने बुलाया है, जल्दी चलिए.
मैंने कहा कि तुम चलो, मैं अभी आता हूँ.

मैंने अपना मेनगेट बंद कर दिया और अन्दर आ गया. मैंने दीदी से कहा कि दीदी अभी आप जाओ, फिर कभी आ जाना क्योंकि अभी मुझे ज्योति के पापा ने बुलाया है.
दीदी ने मुझसे चिपकते हुए कहा कि वीशु तुम्हारा लंड बहुत मस्त है, तुम इसे मेरी चूत और गांड में कब डालोगे?
मैंने दीदी के मम्मे मसलते हुए कहा- दीदी मैं चुदाई करने के पैसे लेता हूँ.

दीदी से मुझसे पूछा- क्या तुम मेरी चुदाई करने के भी पैसे लोगे?
मैंने कहा- अब आप ही बताइए कि अगर घोड़ा घास से यारी करेगा तो खाएगा क्या?
दीदी ने हंस कर ओके कहा और बात बदलते हुए कहा- तो मेरा कूलर कब फिट करोगे?
मैंने दीदी से कहा- दिल्ली से लौटने के बाद कर सब फिट कर दूँगा.
दीदी ने फिर हंस कर ओके कहा और चली गईं.

उसके बाद मैं ज्योति के घर गया तो वहाँ उसके मम्मी पापा आदि सभी लोग थे तो मैंने उनसे नमस्ते की और मुझे बुलाने का कारण पूछा.
अंकल ने कहा- बेटा क्या तुम हमारा एक काम कर दोगे?
मैंने कहा- जी अंकल, अगर मेरे करने लायक होगा तो मैं जरूर करूँगा.

अंकल ने कहा- बेटा मुझे एक जरूरी काम से अभी राजकोट जाना है. इधर ज्योति के एडमिशन की कल ही अंतिम तारीख है और अभी तक इसकी एम.ए. प्रथम वर्ष की मार्कशीट नहीं आई है इसलिए बेटा तुम चाहो तो मेरी कार ले जाना, लेकिन आज ज्योति को लेकर यूनीवर्सिटी चले जाना और इसकी मार्कशीट लेकर इसे कॉलेज में दाखिला दिलवा देना.. अगर बेटा यह काम तुम आज करवा दो तो मैं तुम्हारा एहसान जिन्दगी भर नहीं भूलूँगा.

मैंने अंकल से कहा- अंकल आप ऐसी बात मत कहिए, मैं आपका यह काम कर दूँगा.
मैंने ज्योति को जल्दी से तैयार होकर चलने को कहा तो ज्योति ने कहा- भैया, आप दस मिनट रुको, मैं अभी आपके पास आती हूँ.
मैंने ज्योति से ओके कहा और अपने घर आ गया.

तभी मुझे मेरे घर में घुसते हुए दीदी ने देख लिया. वे मेरे पीछे पीछे मेरे घर आ गईं. वो जानबूझ कर मेनगेट को भेड़ कर आ गईं. मैंने उनको देखा तो मैं समझ गया कि दीदी को लंड लिए बिना चैन नहीं पड़ने वाला है.
दीदी अन्दर वाले कमरे में आकर मेरे सामने घुटने के बल बैठ गईं, उन्होंने मेरे पजामे को खिसका कर मेरा लंड बाहर निकाल लिया और उसे लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं. उनके द्वारा मेरे लंड को चूसने पर मेरे लंड का सुपारा एक बड़े मशरूम की तरह फूल गया और लंड ऐसे तन गया जैसे कि कोई लोहे की गरम मोटी रॉड हो.

दीदी मस्त होकर मेरा लंड चूस रही थीं. वो मेरा लंड चूसने में इतनी खो गईं कि न तो वो मेरा लंड छोड़ रही थीं और न ही उन्हें ये फिक्र थी कि अगर मेरे घर कोई आ जाए तो वो क्या सोचेगा?
इधर मैं भी उनके द्वारा लंड चूसे जाने से अपने ऊपर काबू नहीं रख पाया और मैं भी सीत्कारने लगा.

तभी करीब दस मिनट बाद ज्योति तैयार होकर आ गई और उसने मेरे सीत्कारने की आवाज़ सुनी तो वो अन्दर वाले कमरे के गेट के सहारे खड़ी होकर हमारी रासलीला देखने लगी.

कुछ देर के बाद मेरे जोश ने जवाब दे दिया और मैं दीदी के मुँह में ही झड़ गया. झड़ने के बाद मुझे एहसास हुआ कि अन्दर वाले कमरे के गेट के पास कोई खड़ा है. मुझे ज्योति की याद आई. मैंने झट से दीदी के मुँह से अपना लंड निकाला और भागता हुआ कमरे से बाहर आया.

मुझे ज्योति दिखी, वो अपनी सलवार और चड्डी खिसका कर अपनी चूत में उंगली को अन्दर बाहर कर रही थी और अपनी आँखें बंद करके आहें भर रही थी.
कुछ देर देखने के बाद मैंने उसकी बाँह पकड़ कर उससे कहा- ज्योति, यह सब क्या है?
ज्योति सकपकाते हुए बोली- भैया, मुझे मेरी ये आए दिन परेशान करती है और ऐसे करने से मुझे बहुत मजा आता है.

मैं समझ गया कि अभी तक ज्योति की चूत की सील नहीं टूटी है. लेकिन मैंने समय की नज़ाकत को समझते हुए उसे यूनिवर्सिटी चलने को कहा और फिर हम दोनों बाइक से उसके कॉलेज जा ही रहे थे कि रोड पर गड्ढे होने के कारण मैंने उसे पकड़ने को कहा.

उसने मेरी कमर को हाथ डालकर पकड़ लिया. उसके मम्मे मेरी पीठ पर गड़ने लगे.
तभी मैंने ज्योति से पूछा- यह सब कब से चल रहा है?
“क्या भैया?”
मैंने कहा- वही जिसके लिए तुम कह रही थीं कि तुम्हारी वो तुमको परेशान करती है.

ज्योति ने अपने चूचों को और मेरी पीठ से रगड़ते हुए कहा- अच्छा वो.. वो तो मैं अक्सर ऐसे ही अपनी प्यास को उंगली करके शाँत कर लेती हूँ.
मैंने ज्योति की चुदास को समझते हुए उससे पूछा- क्या तुम्हारा कोई ब्वॉयफ्रेंड है या नहीं?
ज्योति ने ना में जवाब दिया तो मैंने कहा कि कोई ब्वॉयफ्रेंड ढूँढ लो और उसका लंड डलवा लो.

ज्योति ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया. लेकिन वो मुझसे खुल गई थी.

इतने में हम दोनों उसके कॉलेज पहुँच गए और काउंटर पर फीस जमा करवा कर एडमीशन फॉर्म भर कर जमा कर दिया. फिर मैं ज्योति को लेकर सीधा उसके घर आ गया और उसके पापा को फोन करके उसके एडमीशन कराने की बात बताई.

उसके पापा ने मुझे खुश होकर धन्यवाद कहा, तभी उसकी मम्मी ने खुश होकर मुझे खाना खा कर जाने को कहा. मैं उनको मना नहीं कर पाया और खाना खा कर अपने घर आकर दिल्ली के लिए तैयारी करने लगा.

दोस्तो, अगले भाग में चुदाई की कहानी का पूरा रस बरसेगा. आपके मेल के इन्तजार में हूँ.
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कहानी जारी है.

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