तपस्या

संता आँखे बंद किये तपस्या कर रहा था।

भगवान प्रकट हुए और बोले- वर माँगो वत्स !

संता ने फटाक से आँखे खोली और प्रणाम करके चलने लगा।

भगवान ने आवाज लगाई- …वर तो लेते जाओ वत्स !

संता- नहीं जी नहीं ! पहली बात तो यह कि मुझे वर नहीं वधू चाहिए !

दूसरी यह.. मैंने तो सुना था कि तपस्या को भँग करने के लिए पहले….. अप्सराएँ… आती हैं।



ऊंचा सुनता है

संता के पास एक 12 इंच का छोटा सा प्यारा सा घोड़ा था।

बंता- यह घोड़ा कहाँ से मिला?

संता- एक बाबा है, उसने दिया, जो मांगो, वो देता है।

बंता- मैं भी बाबा के पास जाता हूँ।

संता- जाओ पर ख्याल रहे कि बाबा एक ही मुराद पूरी करता है और ऊँचा सुनता है।

बंता ने बाबा के पास जाकर एक बोरी हीरे मांगे, बोरी जब खोली तो बंता चिल्लाया- बहनचो… बाबा ने एक बोरी खीरे दे दिए।

संता- तेरे को बोला था बाबा ऊँचा सुनता है ! साले, तूने क्या सोचा कि मैंने 12 इंच का घोड़ा माँगा था?

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