प्रतिशोध की ज्वाला-1

(Pratishodh Ki Jwala- Part 1)

पूनम चोपड़ा 2018-07-21 Comments

This story is part of a series:

मेरे प्यारे दोस्तो, मैं आपकी सेवा में अपनी नयी सेक्स कहानी पेश कर रही हूँ. इस कहानी में हो सकता है कि कई जगह ग़लतियां हों, जो हिन्दी में लिखते हुए ना चाहते हुए भी हो जाती हैं. इसलिए पहले ही निवेदन है कि गलतियों को नजरअंदाज करते हुए कहानी का आनन्द लीजिएगा और इस कहानी को लेकर अपने विचार ज़रूर मेल कीजिएगा. यह कहानी मेरे द्वारा ही लिखी गई है.

अगर किसी पाठक को ये कहानी पसंद ना आए तो प्लीज़ वो इसे बीच में ही पढ़ना छोड़ दें, क्योंकि अगर अच्छी नहीं है तो फिर इसको आगे पढ़ने में अपना समय किस लिए बेकार में लगाना.

मैं उन पाठकों के सुझावों का दिल से स्वागत करूँगी, जो मुझे अपनी कहानी के लिखने में सुधार का कोई भी सुझाव दें. उन पाठकों से जो मुझे कोई कॉलगर्ल, रंडी या दलाल समझते है, वो कृपया मुझे कोई मेल भेजने का कष्ट ना करें क्योंकि मैं उन सभी मेल्स को बिना पूरा पढ़े डिलीट कर देती हूँ और आगे भी यही करूँगी.

यह कहानी बिल्कुल सच्ची है और जिसके साथ घटित हुआ है, उसे मैं जानती हूँ… और क्योंकि उसकी पहचान को पूरी तरह से छुपाना था, इसलिए मैंने खुद पूनम को (मेरा अपना नाम) इस कहानी की नायिका बनाना ही उचित समझा ताकि यही समझा जाए कि यह मेरी कहानी है. एक लड़की के साथ किस तरह से लोग उसकी दुर्दशा करते हैं… इस बात को समझा जाए, यहाँ तक कि उसके अपने सगे भी उसे मुसीबत के समय डूबने के लिए छोड़ जाते हैं.

दोस्तो, लड़की को यहाँ इस दुनिया में लगभग सभी देशों में एक वस्तु माना जाता है. जिसका काम अपनी चूत से लंडों की सेवा करना है. यही सोच रख कर आम तौर पर लोग अपना जीवन गुजारते हैं. मुझे याद है, जब मैंने हाईस्कूल पास किया था, तो सभी लोग बहुत खुश हुए थे. क्योंकि मेरे अच्छे नंबर आए थे, इसलिए बिना किसी मुसीबत के मुझे कॉलेज में दाखिला भी मिल गया. चूंकि हमारे गाँव में कोई कॉलेज नहीं था, इसलिए मुझे सिटी में जाकर पढ़ना पड़ा. शहर हमारे गाँव से काफ़ी दूर था और रोज़ आना जाना बहुत मुश्किल था. मेरे एक चाचा वहीं सिटी में रहते थे, इसलिए मैं उनके घर पर जाकर रहने लग गई. उनके पड़ोस में एक परिवार हमारी ही बिरादरी का रहता था, जिनका एक लड़का भी था. वो आते जाते मुझ पर कुछ ना कुछ उल्टा सीधा बोलता था.

एक दिन मैंने उसको एक कस के थप्पड़ दे मारा… क्योंकि उस दिन उसने कुछ ज़्यादा ही बोल दिया था. वो जाते हुए बोला कि इस थप्पड़ की मुझे बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी.

मैंने यह बात अपने घर में किसी से भी नहीं कही. कुछ दिनों बाद उस लड़के ने मुझसे अपनी शादी के लिए अपने माँ बाप को मना लिया. क्योंकि वो हमारी ही बिरादरी का था, इसलिए किसी को भी कोई ऐतराज़ नहीं हुआ. मैं इस शादी से खुश नहीं थी. मगर मुझसे कुछ भी ना पूछा गया, क्योंकि मैं उन सबकी नज़रों में एक वस्तु जैसी थी, जो उन पर भार बनी हुई थी. इसलिए उनका सोच था कि इससे छुटकारा पाना ही अच्छा है. फिर उनको मेरे लिए कोई लड़का ढूँढना की मेहनत भी नहीं करनी पड़ी और इस तरह से मेरी शादी हो गई.

शादी के बाद हर लड़की कुछ सपने संजोए होती है कि उसके साथ उसका पति किस तरह से उससे अपने प्यार का इज़हार करेगा. उससे किस तरह से अपने संबंध बनाएगा.
खैर… आधी रात को वो मेरे कमरे में आया और बोला कि आज बदले का दिन आ गया है… तुम तैयार हो जाओ, जो थप्पड़ मारा था… उसका बदला आज चुकाना होगा.

मैंने कहा- अब मैं आपकी पत्नी हूँ ना कि कोई अंजान लड़की. मेरी इज़्ज़त का ख़याल रखना, अब आप का काम है.
उसने कहा- उसी काम की ही तो तैयारी करने लगा हूँ.

उसने मुझे नंगी करके पहले तो मेरे मम्मों पर थप्पड़ मार मार कर दबाना शुरू किया. जब मेरे मम्मे थप्पड़ों की मार से से लाल हो गए तो वो ज़ोर जोर से दबा दबा कर चूसने लगा और दांतों से काटने भी लगा. मैं चिल्ला रही थी. घर के बाहर भी आवाज जा रही थी और घर वाले समझ रहे थे कि लड़की को लड़का चोद रहा होगा और लड़की की चूत में मुश्किल से लंड जा रहा होगा, इसलिए चिल्ला रही है.

उसके बाद उसने अपना मूसल लंड मेरी चूत में डाल कर मुझे बुरी तरह से चोदा. सुबह जब मैं कमरे से बाहर निकली तो मेरी छाती बुरी तरह से दर्द से भरी थी. उसके घर में रिश्ते की आई हुई जवान लड़कियां और बहुएं कहने लगीं- लल्ली, यह सब तो होता ही है. लल्ला ने तेरे मम्मों को तो दबाना ही था और अपना लंड भी तेरी चूत में डालना था. इसलिए यह सब तो अब रोज़ रोज़ होगा.

मैं किसी से कुछ भी ना कह पाई क्योंकि मैं सच बोलने लायक नहीं थी.

अगले दिन घर पर यह बोल कर वो मुझे ले गया कि हम लोग हनीमून मनाने जा रहे हैं और कुछ दिनों बाद आएंगे.

शाम को मुझे ले जाकर वो एक होटल में ले आया. जब खाना खा लिया तो मुझे कमरे में लेकर आ गया. वहाँ उसके तीन दोस्त पहले से ही बैठे थे. मैं उन्हें देख कर पहले तो घबरा गई मगर फिर सोचा जब पति साथ है, तो फिर किस बात का डर.

रूम में उन्होंने शराब पीनी शुरू कर दी. जब उन्होंने दो दो तीन तीन पैग पी लिए तो एक दोस्त बोला- यार भाबी को क्यों भूल गए… उसभी तो यह अमृत पिलाओ.

फिर क्या था, मेरा पति ने पूरी बोतल ले कर मेरे मुँह में लगा कर बोला- लो पियो इसे.
मैंने कहा- नहीं… मैं नहीं पी सकती.
इसके बाद जो कुछ हुआ, मैं यहाँ नहीं लिख सकती क्योंकि वो नियम विरूद्ध होगा.

अगले दिन सुबह ही वो मुझे घर पर वापिस ले आया और बोला- संभालो अपनी इस लाड़ली बहू को, मुझे नहीं रहना इस रंडी के साथ. अगर आपको यकीन ना हो तो यह सीडी देख लो, जो इसने रात को किया है. मैं इससे बोल कर गया था कि 2-3 घंटों में वापिस आता हूँ… मगर इसने अपने यार बुला रखे थे वहाँ पर. उन्होंने ही मुझसे धमकी देकर कहा था कि अगर जान सलामत चाहते हो तो सुबह आकर बीवी को ले जाना. सुबह उन्होंने मुझे यह सीडी देकर कहा कि अगर इसे रखना हो तो रख लो, वरना हम इसे संभाल लेंगे. मैं तो इसके साथ रह नहीं सकता, आप जो चाहो करो.

मेरी सास सबसे ज़्यादा उछल उछल कर मेरे लिए जो ना कहना था, वो भी कह रही थी.
इसके बाद मेरे सारे कपड़े और जेवर मेरे साथ रख कर मुझे वापिस माँ बाप के घर भेज दिया और साथ में कहा कि देख लो अपनी बेटी की करतूत.

मैंने सब को सच सच बताया मगर किसी ने भी मेरी बात नहीं सुनी. मुझे घर से बाहर कर दिया. मैंने तब कहा कि ठीक है, मैं इस रात को कहीं नहीं जा सकती मगर कल सुबह ज़रूर चली जाऊंगी.

मैंने रात को अपने पति को फोन किया कि जो तुम ने करना था, सो कर लिया. अब मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगी. मुझे तुमने एक रंडी बना दिया है, अब देखना मैं तुम्हारे घर की सभी औरतों को कैसे रंडी बनाती हूँ.

इस पर उसका जवाब था कि तुम अपने को संभालो… मेरी छोड़ो.
मैंने यह कहते हुए फोन बंद कर दिया कि ठीक है… मगर याद रखना जो मैंने कहा है.

अब मुझे सोचना था कि आगे क्या करूँगी. फिलहाल मुझे कोई रास्ता नहीं नज़र आ रहा था. मैं रात को सोचती रही कि अब क्या करूँ.

फिर मैंने अपने साथ कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की को फोन किया, जो बहुत बदनाम थी. उसके बारे में ये चर्चा सुनती थी कि यह रात रात भर अपने यारों के साथ होटलों में जाती है.

फोन पर उसने मुझसे कहा- मैं तुम को पहचान नहीं पाई. खैर तुम कल मेरे ऑफिस में आ जाना, वहीं पर बात करते हैं.
उसका नाम तबस्सुम था.

मैं ऑफिस के टाइम से पहले वहाँ पहुँच कर उसका इंतज़ार करने लगी.
मुझे देखते ही वो बोली- तुम पूनम ही हो ना?
मैंने कहा- हाँ अच्छा हुआ जल्दी ही पहचान लिया. कल फोन पर तो तुम पहचान ही नहीं पाई.
वो बोली- आओ बैठ कर बातें करते हैं. वो मुझे अपने केबिन में ले गई और बोली- बैठो… मैं अभी आती हूँ.

वो दस मिनट बाद आई, उस समय उसकी लिपस्टिक होंठों से ऐसे हो चुकी थी कि किसी ने उसको बुरी तरह से चूमा चाटा है. वो शीशा के सामने जा कर उसको ठीक करने के बाद मुझ से बोली- हां अब बताओ… साथ ही बोली- यार प्राइवेट ऑफिस है ना… यहाँ बॉस को खुश रखना पड़ता है.

मैंने उससे अपनी प्रॉब्लम बता कर कहा- मुझे तुमसे दो तरह की सहायता चाहिए. एक तो मुझे कोई रूम किराए पर ढूँढने के लिए सहायता और दूसरी नौकरी ढूँढने की.

वो बोली- पहेली तो समझो हो गई… तुम मेरे घर पर रहो क्योंकि मैं अकेली ही रहती हूँ… और दूसरी के बारे में रात तो घर पर बात करते हैं.

इसके बाद उसने किसी को बुलाया और बोला कि मेमसाहब को मेरे घर पर छोड़ कर आओ और साथ ही घर की चाबियां उसे दे दीं.

घर जाकर मुझे नींद आ गई क्योंकि चिंता के मारे मुझे पूरी रात नींद ही नहीं आई थी. कोई एक बजे मेरी नींद उखड़ी, तब उसका फोन बज रहा था. मैंने जब उठाया तो वो बोल रही थी- क्या हुआ… मैं बहुत देर से तुमसे बात करना चाह रही थी, तुम फोन को उठा ही नहीं रही हो… क्या हुआ?
मैंने उसे सब बताया.

उसने कहा- चिंता ना करो और देखो मैं रात को दस बजे के बाद ही घर वापिस आऊंगी, तब तक तुमको भूख लगे तो फ़्रिज़ से कुछ निकाल कर खा लेना, खाने के लिए मेरा इंतज़ार ना करना क्योंकि मैं खा कर ही आऊंगी. और हाँ देखो… अगर बोर होने लगो तो मेरे पीसी के टेबल की लेफ्ट ड्रॉवर से फिल्म निकाल कर देख लेना.

मैंने वही किया मगर फिल्म में कोई मज़ा नहीं आया.

फिर मैंने दाएँ तरफ वाली ड्रॉज खोली तो उसमें भी बहुत सी सीडी पड़ी थीं. मैंने उनमें से एक निकाल कर लगा दी. जैसे ही वो शुरू हुई तो कंप्यूटर पर लंड और चूत के खेल शुरू हो गए. मैं मज़े से देखने लग गई. फिर क्या एक के बाद एक देखने लगी, वहाँ सभी चुदाई की पिक्चर्स थीं.

रात तो दस बजे तक मैं यही देखती रही और खाना भी भूल गई. तब मुझे याद आया कि वो वापिस आने वाली होगी. क्योंकि उसने मुझे इन पिक्चर्स के बारे में नहीं बताया था, तो मुझे यही दिखलाना था कि मुझे कुछ नहीं पता.

वो साढ़े दस बजे आई. उसके मुँह से शराब की गंध आ रही थी, मगर वो पूरे ही होश में थी. उसे देख कर कोई कह नहीं सकता कि वो शराब पी कर आई है. खैर उसने आते ही पूछा कि खाना खा लिया?
मैंने कहा- नहीं मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी.
उसने कहा कि उसने तो बता दिया था कि वो खा कर आएगी.

खैर उसने डबलरोटी और अंडे निकाल कर ऑमलेट बना कर मुझे दिया और बोली- अभी तो यह खाओ… सुबह कुछ और व्यवस्था करती हूँ.

फिर वो चेंज करके आई तो मैंने उसे देखा कि वो एक नाइटी में थी, जो ऑलमोस्ट ट्रांसपेरेंट थी और उसमें से उसका सब कुछ नज़र आ रहा था.

आप मेरी कहानी बदले की आग के लिए अपने ईमेल भेज सकते हैं.
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मेरी यह सच्ची चुदाई की कहानी जारी है.

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