दोस्त की बीवी और साली मेरे लंड की दीवानी- 2

(Hot Chut Ki Sex Kahani)

हॉट चुत की सेक्स कहानी मेरे दोस्त की साली की वासना की है. पूरी रात मुझसे चुद कर भी वो मेरा लंड दोबारा लेना चाहती थी. मैं उसे उसके घर छोड़ने गया तो …

हैलो फ्रेंड्स, मैं आपका साथी हर्षद मोटे, एक बार पुन: कहानी की दुनिया में आपका स्वागत करता हूँ.
पिछले भाग
दोस्त की बीवी की दोबारा चुदाई का मौक़ा
में अब तक आपने पढ़ा था कि मैंने सरिता भाभी की मस्त चुदाई की थी. वो मेरे लंड से अपनी चुत की खुजली शान्त करवा कर अपने कपड़े ठीक करके नीचे चली गई थी.
उसके जाने के कुछ देर बाद मैं सो गया था.

अब आगे हॉट चुत की सेक्स कहानी:

जब विलास ने मुझे जगाया तो नौ बज चुके थे.

विलास बोला- नहाकर तैयार होकर नीचे आ जाओ, चाय नाश्ते के लिए. बाजू के रूम में तुम्हारे पिताजी, मम्मी और सोनाली के सास ससुर नहाकर तैयार हैं.
मैं उठकर बाथरूम में चला गया. नहाकर तैयार होकर आया, तो देखा सभी लोग नीचे चले गए थे.

मैं भी नीचे गया.
देखा तो सब लोग हॉल में बैठे थे.
विलास बोला- आओ हर्षद.

मैं भी उनके साथ बैठ गया.
सरिता भाभी और सोनाली नाश्ता लेकर आईं और सबको नाश्ता की प्लेट देने लगीं.

अब हम सब नाश्ता और चाय का स्वाद ले रहे थे.
मुझे बहुत तेज भूख लगी थी रात पर चुदाई के कारण पेट भूख से बिलबिला रहा था.

नाश्ता, चाय खत्म करने के बाद हम सब वहीं पर बैठ गए और इधर उधर की बातें करने लगे.

सब मेहमान एक साथ घुल-मिल गए थे. सब लोग इतने हंसी मजाक से बातें करने में इतने मशगूल हुए पड़े थे कि हमें समय का पता ही नहीं चला.

इतने में सरिता भाभी बोली- बाप रे … बारह बज गए सोनाली. हमें दोपहर के खाने का इंतजाम करना है.
तभी मेरी मम्मी बोलीं- हां चलो सरिता, मैं भी तुम्हें मदद करने आती हूँ.

मां ने उठकर सोहम को सरिता से लिया और मेरे पास देकर बोलीं- हर्षद, सोहम को सम्हालो … मैं किचन में जाती हूँ.
मैंने सोहम को ले लिया.

मैं और विलास बाहर आ गए.
सोहम मेरे साथ मस्त खेल रहा था.

विलास मुझसे बोला- हर्षद ,चलो हम घूमकर आते हैं.
हम दोनों विलास की बाईक पर गांव में चले गए. गांव में विलास के कोई पहचान वाले मिले, तो बातों बातों में और घूमते घूमते समय निकल रहा था.

विलास ने घड़ी देखी थी तो डेढ़ बज गए थे.
वो बोला- हर्षद, अब हमें चलना चाहिए … खाने का समय हो रहा है.

मैंने विलास से कहा- हां ठीक है. सोहम को भी भूख लगी होगी. घर चलते हुए आइसक्रीम ले लेते हैं. खाने के बाद सबको खिलाएंगे.
विलास बोला- ये तो अच्छी बात है.

हमने सबके लिए आइसक्रीम का बड़ा पैक ले लिया और घर आ पहुंचे.
सब लोग हमारा ही इंतजार कर रहे थे.

सरिता भाभी सोहम को लेने मेरे पास आकर बोली- देवर जी, सोहम ने सताया तो नहीं ना आपको?
मैंने सोहम को उसके पास देते हुए कहा- नहीं सताया. अब वो मुझे पहचानता है.

सरिता मुस्कुराकर बोली- पहचानेगा क्यों नहीं?
मैंने आइसक्रीम की थैली उसको देते हुए कहा- ये फ्रिज में रख दो, खाने के बाद सबको आइसक्रीम खिलाना.

सरिता बोली- अरे वाह आइसक्रीम … ये मुझे बहुत पसंद है.
ये कहती हुई वो अन्दर चली गयी.

बाद में हम सबने हॉल में बैठकर खाना खाया.
फिर सबने एक साथ आइसक्रीम खाई.

तब तक तीन बज चुके थे. हम सब लोग बाहर बैठे थे.

विलास और सरिता भाभी मेरे मम्मी और पिताजी से कुछ बातें कर रहे थे.
मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था.

तभी पिताजी ने मुझे बुलाया और कहा- हर्षद, तुम्हारी भाभी की दीदी को उनके गांव छोड़ कर आने का काम है. उनके पति कल वापस आ रहे हैं. उनके सास ससुर अभी दो दिन यहीं रहने वाले हैं.
मैंने कहा- ठीक है पिताजी. लेकिन कितना दूर है उनका गांव, मुझे ये नहीं मालूम है?

विलास बोला- शायद तुम्हें कार से एक घंटा लगेगा.
मैंने कहा- ओके कब जाना है?

उसने कहा- बस वो अपने बैग पैक कर रही है. उसकी पैकिंग होने के बाद तुम लोग निकल लो.
मैंने कहा- ठीक है.

मेरे मन में तो लड्डू फूट रहे थे. सोनाली के साथ जाने के लिए दिल बेकरार हो गया था.
मैंने विलास से कहा- चलो तब तक ऊपर जाकर आराम करते हैं.

हम दोनों विलास के कमरे में आकर एक दूसरे के साथ बातें करने लगे.
तभी विलास ने कहा- हर्षद, तुम लोग कल जाओगे ना?

मैंने कहा- हां विलास. वैसे तो कल संडे है, लेकिन परसों ऑफिस जाना ही पड़ेगा.
विलास बोला- मुझे तो कल ड्यूटी पर जाना पड़ेगा. दो दिन छुट्टी निकाली थी, तो मैं घर पर नहीं रहूँगा.

मैंने कहा- कोई बात नहीं विलास बाकी सब लोग है ना. तुम चिंता मत करो.
इतने में सरिता भाभी मुझे बुलाने ऊपर आयी.

मैंने भाभी से कहा- मैं पांच मिनट में तैयार होकर आता हूँ, आप चलिए.
अपने रूम में जाकर फ्रेश होकर मैंने कपड़े बदल लिए.

फिर मैं विलास के साथ नीचे आया और उससे कहा- मैं कार लेकर आता हूँ.
मैंने बाजू में ही पेड़ के नीचे कार लगायी थी. मैंने कार लाकर घर के सामने खड़ी कर दी.

सोनाली सबको नमस्कार कर रही थी.
विलास उसके बैग और कुछ सामान लेकर आया तो मैंने डिक्की खोलकर सामान अन्दर रख दिया.

सोनाली आकर पीछे की सीट पर बैठ गयी.

विलास और भाभी कार के पास खड़े थे, सरिता मुझसे बोल रही थी- आराम से जाना देवर जी. तेज मत चलाना.
इधर ही चार बज चुके थे.

मैंने उन दोनों से पूछा- अब निकलूँ?
तभी भाभी मुस्कुराकर बोली- हां अब निकलो देवर जी.

मैंने कार चालू की और निकल पड़े.
गांव के बाहर आते ही मैंने कार रोक दी.
तो सोनाली ने पूछा- क्या हुआ हर्षद?

मैंने कहा- नीचे उतरो और आगे की सीट पर बैठो.
सोनाली आकर मेरे बाजू की सीट पर बैठ गयी और हम निकल पड़े.

मैंने कहा- सोनाली, तुम पहले ही आगे क्यों नहीं बैठी?
उसने कहा- मेरे सास ससुर थे इसलिए मैं पीछे बैठी थी. ना जाने वो क्या सोचते.

मैंने कहा- अच्छा तो ये बात है. तो रात को उनका ख्याल नहीं आया क्या?
वो शर्माकर बोली- चुप करो हर्षद. बहुत बदमाश हो तुम.

मैंने उसकी तरफ देखकर कहा- आज तो एकदम करीना कपूर जैसी दिख रही हो. पति आने की खुशी में इतना सजी हो क्या सोनाली?
सोनाली बोली- वो तो कल आ रहे हैं. वैसे तुम भी मेरे पति हो ना और अब मेरे साथ भी. इसलिए इतना सजी हूँ हर्षद.

मैंने गियर बदलने के बहाने अपना हाथ उसकी जांघों पर रखा और सहलाने लगा.
सोनाली मुस्कुराकर बोली- क्यों अभी तक दिल नहीं भरा क्या? हर्षद तुमने मुझे रातभर सोने नहीं दिया. अभी भी थोड़ा दर्द बाकी है.

मैंने कहा- मैं भी कहां सोया था और मेरा भी अभी तक दर्द कर रहा है ना. हम मेडिकल स्टोर से दवाई ले लेते हैं.
सोनाली बोली- कोई जरूरत नहीं है. ठीक हो जाएगा.

हम ऐसे ही बातें करते जा रहे थे. थोड़ी देर के बाद आगे लेफ्ट साईड को मोड़ दिखायी दिया.

सोनाली ने कहा- हमें लेफ्ट साइड मुड़कर जाना है हर्षद.
मैंने कार लेफ्ट में घुमा दी.

अब मैंने कार की गति बढ़ा दी, रास्ता अच्छा था.

सोनाली बोली- कितना तेज चला रहे हो … जरा आहिस्ता चलाओ हर्षद. मुझे कोई जल्दी नहीं है.
मैंने कहा- तुम्हें नहीं है, लेकिन मुझे जल्दी है सोनाली.
सोनाली बोली- क्यों?
मैं बोला- बाद में बताऊंगा सोनाली.

थोड़ी ही देर में आगे गांव दिखायी देने लगा तो मैंने कार की गति कम करके सोनाली से पूछा- यही तुम्हारा गांव है क्या?
सोनाली बोली- नहीं इसके आगे है. इस गांव से करीब पन्द्रह किलोमीटर दूर है.

मैं गाड़ी चला रहा था. गांव से निकलते समय एक मेडिकल स्टोर दिखायी दिया तो मैंने गाड़ी रोक दी.
मैंने नीचे उतरकर सोनाली से कहा- मैं अभी आया.

मैंने मेडिकल से एक क्रीम ले ली और गाड़ी में आकर बैठ गया.
जब मैं गाड़ी चलाने लगा, तो सोनाली ने पूछा- क्या लाने गए थे हर्षद?

मैंने उसके हाथ में क्रीम की ट्यूब देकर कहा- ये तुम्हारे काम आएगी.
सोनाली ने पूछा- किस काम के लिए?

मैंने कहा- ये क्रीम तुम अपनी चुत में सोने से पहले और सुबह नहाने के बाद अच्छी तरह से लगा लेना. दर्द भी कम होगा और चुत की साइज भी पहले जैसी हो जाएगी. तुम्हारे पति को शक भी नहीं होगा सोनाली.
ये सुनकर सोनाली बोली- तुम कितना ख्याल रखते हो मेरा हर्षद.
मैंने कहा- ये तो मेरा फर्ज है सोनाली.

इतने में आगे बस्ती दिखने लगी तो सोनाली बोली- यही गांव है. अब आगे से राइट में मोड़ लेकर जाना है. हमारा घर खेत में है.
मैंने राइट मोड़ ले लिया और स्लो गाड़ी चलाने लगा.

उस मोड़ से शायद तीन किलोमीटर बाद उसका घर था.
मैंने उसके घर के गेट के सामने कार रोक दी.

सोनाली ने नीचे उतरकर गेट का ताला खोला और गेट खोल दिया.
मैंने कार की डिक्की खोलकर सोनाली का बैग और सामान निकालकर उसके हाथ में दे दिया.
फिर मैंने कार आगे छाया में पार्क कर दी.

मैं सोनाली के साथ अन्दर गया.

घर बहुत ही बड़ा था. चारों ओर पेड़ थे. पास में एक भी घर नहीं था. दो मंजिल का घर बनाया हुआ था.
हम दोनों हॉल में आ गए.

सोनाली ने कहा- तुम सोफे पर बैठो हर्षद. मैं अपना सामान ऊपर मेरे कमरे में रखकर आती हूँ.
सोनाली ऊपर गयी.

थोड़ी ही देर में वो पानी लेकर आयी और मुझे देती हुई बोली- पानी पी लो और फ्रेश हो जाओ. तब तक मैं भी फ्रेश होकर आती हूँ और चाय बनाती हूँ. तुम ऊपर वाले बाथरूम में चले जाओ.

सोनाली नीचे के बाथरूम में चली गयी और मैं पानी पीकर ऊपर चला गया.

ऊपर दो बड़े बेडरूम थे. मैं एक रूम में चला गया. बहुत बड़ा बेड था. बेडरूम से अटैच एक बड़ा बाथरूम और टॉयलेट भी था.

मैंने अपनी पैंट और टी-शर्ट निकालकर बेड पर रख दिए और सिर्फ अंडरपैंट में ही बाथरूम में जाकर फ्रेश होने लगा.
कुछ देर बाद मैं बाहर आ गया.

इतने में सोनाली ने आवाज दी- हर्षद, जल्दी से फ्रेश होकर आ जाओ, चाय रेडी है.
मैं ऐसे ही नीचे चला गया, तो सोनाली किचन में थी.

मैंने देखा तो सोनाली सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पहनी हुई थी.
उसके सफेद पेटीकोट से मांसल, गदरायी और बाहर निकली हुयी गांड, उसकी बीच की दरार देखकर, मेरा लंड अंडरपैंट में ही फड़फड़ाने लगा.
मैंने उसके पीछे से जाकर अपने दोनों हाथ उसके कड़क और गोलमटोल स्तनों पर रख दिए. नीचे मेरा तना हुआ मोटा लंड उसकी गांड की दरार में घुस चुका था.

सोनाली ने झूठा गुस्सा दिखाकर और अपनी गांड मेरे लंड पर रगड़ कर बोली- हटो ना हर्षद. मुझे चाय तो बनाने दो. शैतान कहीं के, इसलिए तुम्हें इतनी जल्दी थी क्या यहां आने की? तुमने तो चालीस मिनट में ही यहां पहुंचा दिया है. अभी सिर्फ पांच बजे हैं हर्षद.

मैं जोर से उसके स्तन ब्लाउज के ऊपर से ही मसलने लगा तो सोनाली पीछे मुड़ गयी और मेरे होंठों को चूमती हुई बोली- मेरे प्यारे पतिदेव जरा सब्र करो … जाओ सोफे पर बैठो, मैं चाय लेकर आती हूँ.

मैंने उसे चूमते हुए अपना लंड उसकी चुत पर रगड़ दिया और सोफे पर जाकर बैठ गया.

सोनाली भी हाथ में दोनों के लिए चाय लेकर आयी और मेरे पास ही बैठ गयी.
चाय पीते पीते मैं एक हाथ से सोनाली की जांघें और चूत को पेटीकोट के ऊपर से सहलाता रहा.

सोनाली भी अपने एक हाथ से अंडरपैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को सहला रही थी.
चाय खत्म होते ही सोनाली ने उठकर दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया और हम दोनों ऊपर बेडरूम में आ गए.

जैसे ही बेडरूम में आए, मैंने सोनाली को अपनी बांहों में कस लिया और उसके गाल, होंठों और माथे पर चूमने लगा.
सोनाली ने भी मुझे अपनी बांहों में कस लिया था और नीचे अपनी चुत मेरे लंड पर रगड़ रही थी.

मैंने सोनाली की पीठ सहलाते हुए उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए और नीचे हाथ डालकर उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया तो पेटीकोट जमीन पर गिर गया.

मैंने सोनाली का ब्लाउज और पैंटी भी निकालकर फेंक दी.
तभी सोनाली ने मेरी अंडरपैंट कमर से नीचे खींच दी और अपने पैर से नीचे खींचकर निकाल दी. अब हम दोनों ही नंगे थे.

मैंने अपने मुँह में उसका एक स्तन ले लिया और चूसने लगा. साथ में दूसरे स्तन को एक हाथ से मसलने लगा. साथ उसकी मांसल गांड को सहलाने लगा.

सोनाली भी अपने दोनों हाथों से मेरी गांड सहलाने लगी और साथ में वो अपनी चुत मेरे मूसल जैसे लंड पर रगड़ रही थी.
हम दोनों कामुक हो गए थे.

मैं अपनी उंगलियां सोनाली की गांड की दरार में घुमाने लगा और उसकी गांड के छेद को टटोलने लगा.
सोनाली सिहर उठी और वो भी अपनी उंगली से मेरी गांड के छेद को टटोलने लगी.
हम दोनों मदहोश होने लगे थे.

दोस्तो, एक बार फिर से सोनाली की चुत मेरे लंड से चुदने को बेकरार हो गई थी.
उसकी चुत चुदाई उसी के घर में किस तरह से हुई, वो मैं हॉट चुत की सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगा.

आप मुझे मेल जरूर करें.
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हॉट चुत की सेक्स कहानी का अगला भाग: दोस्त की बीवी और साली मेरे लंड की दीवानी- 3

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