ऑस्ट्रेलिया की बुलबुल रानी -5

(Australia Ki Bulbul Rani-5)

चूतेश 2015-10-22 Comments

This story is part of a series:

बुलबुल रानी ने कहा- अरे राजे… तुम जो भी इतने प्यार से ले आते मैं उस में ही खुश हो जाती… वैसे एक बात बताऊँ… जैसे ही तुमने उस दिन पार्टी में मेरे पैर का चुम्बन लिया था मैं तभी समझ गई थी कि बस अब मेरी इस आदमी से चुदाई जल्दी ही होगी… उस एक चुम्बन में ही मेरी चूत भीग गई थी… मैंने देखा कि तुम बिल्कुल अलग किस्म के आदमी हो… तुमसे मिलने के पांच मिनट में ही मेरे दिल में प्यार की लहरें उठने लगी थीं… बहनचोद तुमने जब सीढ़ियों पर बिठाकर मेरे पैर चूमे तब तो हद ही हो गई… चूत ऐसे चू रही थी जैसे अंदर कोई नलका लगा हो… पता है सारी की सारी पैंटी तर हो गई थी… डर रही थी कि कहीं पैंट पर गीलापन दिखने न लगे!

मैंने रानी को पकड़ के दस पंद्रह चुम्मियाँ दाग दीं।
तब वो बोली-राजे अब भूख लगने लगी है… चलो खाना खा लें चल कर… या फिर इस बदमाश राजे का अपनी रानी को भूखा ही रखने का इरादा है?
मैंने कहा- नहीं रानी, भूखा क्यों रखूंगा अपनी बुलबुल रानी को… पर पहले अपना नंगा बदन तो ढक लो, फ़िर चलते हैं रेस्टोरेंट में.. शैम्पेन वापिस आकर पीएँगे।

रानी बोली- नहीं वेटर को बोल देंगे वो आकर रूम से वहीं रेस्तराँ में ले आएगा… मेरी आज की चूत चुदाई को मेरा बहुत अच्छे से सेलिब्रेट करने का मूड है… तुम्हें पता है राजे… तीन साल से ज़्यादा हो गए थे सेक्स किये… वैसे आज बहुत मज़ा आया… पूरी संतुष्टि मिली!
बुलबुल रानी ने अपने बैग से एक झक सफ़ेद फ्रॉक निकाल के पहन ली। फ्रॉक किसी डिज़ाइनर लेबल की थी, सिंपल लेकिन बहुत ही दिलकश। ऐसी सुन्दर रानी के जिस्म के लिए एकदम सही। फ्रॉक बिना बाँहों के थी और लम्बाई में बुलबुल रानी के घुटने और पैरों के बीच तक लहराती हुई आ रही थी। कमर पर एक बहुत चौड़ा बेल्ट था जिसमें एक खूबसूरत सा चमकदार बकल था, जिस पर एक मोर की आकृति थी।

बुलबुल रानी ने न ब्रा पहनी और न ही कच्छी…
मेरे दिलाये हुए सैंडल पहन कर रानी तैयार थी तथा एक तितली सी लग रही थी।

मैं कपड़े पहनते हुए बोला- माँ की लौड़ी… आज क्या पूरा होटल बेहोश करने की योजना है? बहनचोद क्या ग़ज़ब ढा रही है… कमीनी!
चहकते हुए रानी बोली- इतनी सिंपल सी तो ड्रेस है… तुम खुद तो बेहोश न हो जाओ इसका ध्यान रखना बस… पहले यह बताओ तुमने कितनी लड़कियों को चूत दिखाई दी है? मुझे शक है तुम बहुत बड़े लौण्डियाबाज़ हो!
मैं बोला- तू मेरी रानी नंबर 29 है बुलबुल रानी…
रानी- ओये ओये ओये… मैंने सच ही परखा था तुमको… तुम बहुत ज़्यादा बदमाश हो… चलो फिर कभी तुमसे डिटेल में पूछूँगी तुम्हारी पटाई लड़कियों के बारे में… अभी तो डिनर करें!
मैं- अरे रानी… पटाई लड़की ना बोल जान… वो सब मेरी रानियाँ है डार्लिंग बुलबुल रानी…

यही चुहल बाज़ी करते हुए हम हाथों में हाथ लिए रेस्टोरेंट चल दिए।
काफी देर लगी वहाँ तक पहुचने में क्योंकि मैं हर दो कदम पर रुक रुक के रानी को आलिंगन में बांध के चुम्बन ले लेता था। रानी इस पर नक़ली नाराज़गी दिखाने का ड्रामा कर रही थी लेकिन इन हरकतों का मज़ा भी खूब उठा रही थी- हरामज़ादे…क्यों गड़बड़ किये जा रहे हो…देखा था ना मैंने पैंटी नहीं पहनी.. अगर टाँगें गीली हो गईं तो?

मैंने फ्रॉक के अंदर हाथ डाल कर चूत पर लगाया तो वास्तव में बहुत तर थी… थोड़ा सा भी और गर्म किया तो पक्का था कि रस टाँगें गीली कर देगा।
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अल्ला अल्ला खैर सल्ला करते हुए हम आखिकार रेस्टोरेंट में पहुँच गए। वहाँ की मद्धम रोशनी में बुलबुल रानी एक चाँद की भांति चमक रही थी। गोरा, भरपूर जवांनी की आग से दमकता बदन, सफ़ेद फ्रॉक और एक मॉडल की तरह लहराते हुए उसका चलना !
यारों, रेस्टोरेंट में इस आंधी के प्रवेश से बहनचोद हड़कम्प सी मच गई।

दरवाज़े पर खड़े कप्तान ने रानी का अभिवादन करने के लिए इतनी कमर झुकाई कि मुझे डर लगा कहीं यह बहन का लण्ड गिर ही न पड़े।
वो हमें कोने की टेबल, जो उसके हिसाब से सबसे अच्छी टेबल थी, पर ले गया, टेबल खिड़की के पास थी और जहाँ से झील का दृश्य खूब दीखता था।
हालाँकि रात में झील तो नहीं, उस पर की गई रोशनी ही दिख रही थी।

दो वेटर दौड़ कर आए और उन्होंने मैडम के लिए कुर्सी पीछे की जिससे मैडम सुविधा से बैठ सकें।
बड़े बेमन सी उन्होंने मेरी कुर्सी भी पीछे तो की, लेकिन उन्हें मेरे लिए ऐसा करना सिर्फ ड्यूटी बजाना था जबकि मैडम के लिए ऐसा करना उनका सौभाग्य।

दो और वेटर भी आस पास मंडरा रहे थे कि कहीं मैडम को किसी और चीज़ की ज़रूरत पड़ जाए तो शायद कप्तान वो सेवा उनकी तक़दीर में दे दे।

खैर मैडम ने भी दिए जा रहे इस सम्मान का पूरा फायदा उठाया, उसने कप्तान के साथ 15 मिनट पूरा मेनू डिसकस किया। हरामज़ादी ने मुझे छेड़ने के लिए एक पांव मेरी जांघ पर रख दिया। मैंने उसके पांव को सहलाता रहा और वो कप्तान से एक एक आइटम सलाह करते हुए आर्डर करती गई।

चलो आर्डर भी हो गया और कप्तान ने मैडम के दिए हुए आदेश के अनुसार हमारे कॉटेज से शैम्पेन भी मंगवा ली।
दूर खड़े वाइन वेटर ने जैसे ही देखा कि शैम्पेन आ गई है, तो हरामी दौड़ता हुआ आया और बड़े स्टाइल से उसने वाइन हमारे ग्लासों में डाल के सर्व की।
उसके बाद बड़े बेमन से ये सब लोग हट कर अपने अपने स्थानों पर वापिस चले गए।

हमने चियर्स के साथ शैम्पेन को सिप करना शुरू किया… उसका पैर अभी भी मेरी जांघ पर था, उसे हटाते हुए बोली- राजे तू क्यों छेड़ छाड़ कर रहा था मेरे सैन्डल के साथ… कभी तो बाज़ आ जाया कर शरारत से…हूँम्म?

मैंने कहा- हाँ हाँ, तेरी टांग तो अपने आप उड़ कर आ गई थी मेरी जांघ पर!
बुलबुल रानी- मैंने तो टाँगें सीधी करनी चाही थीं.. तू पकड़ के ही बैठ गया..??

मैं- अच्छा रानी आज फिर से एक शर्त लगाते हैं… बोल लगाती है?
बुलबुल रानी ने इतराते हुए कहा- ना बाबा ना… तुझ जैसे बदमाश के साथ मैं ना लगाने वाली कभी कोई शर्त… हाथ जोड़ती हूँ… तू बख्श मुझे!
फिर थोड़ी देर रुक के बोली- वैसे बता तो सही कमीने क्या शर्त लगाने वाला था…पता तो चले तेरे खुराफाती दिमाग में क्या शैतानी सूझी?

मैंने हंसकर कहा- रानी…शर्त यह सोची थी कि मैं यहाँ रेस्टोरेंट में तेरे मम्मे भोंपू की तरह दबाऊँ जैसे दिल्ली में ऑटो वाले भोंपू बजाते हैं!
बुलबुल रानी मस्ता के बोली- बहनचोद, अब यह भी बता दे कि शर्त में हार या जीत में क्या मिलता? वैसे मुझे इसी तरह की कुछ शैतानी की उम्मीद थी तेरे से।
मैंने कहा- अगर शर्त तू जीत लेती तो तू मुझे चोदती और अगर मैं जीतता तो मैं तुझे चोदता..

बुलबुल रानी ने अट्टहास किया- बहनचोद कमीने… यह क्या हार जीत हुई… इसमें फर्क क्या हुआ… तू मुझे चोदे या मैं तुझे चोदूँ, दोनों में चूत तो मेरी ही फटेगी ना…
हरामज़ादी की क्या मनलुभावनी हंसी थी… यूँ लगता था कि मोतियों की बौछार के साथ कहीं दूर कोई नदी कल कल कल कल बह रही हो! जी में आता था कि कुतिया को वहीं के वहीं दबोच के साली की चूत का भोसड़ा बना डालूं।

लेकिन मैंने कहा- रानी तेरी माँ की चूत साली… फर्क कैसे नहीं है… जब तू चोदेगी तो चुदाई का कंट्रोल तेरे पास होगा और यदि मैं चोदूंगा तो मेरे पास में।
रानी ने फिर से हंसी और हँसते हँसते बोली- राजे… यार तू चूतिया बनाने में बहुत तेज़ है… पर अब मैं तुझे अच्छी तरह से समझ चुकी हूँ… अब ना मैं बनने वाली… बहनचोद यह बता अगर मैं तेरे चोदते हुए कहूँगी राजे धक्के हल्के से मार या ज़ोर से मार तो क्या तू मेरी बात मानेगा नहीं?
मैंने सिर ऊपर नीचे हिलाते हुए कहा कि ‘हाँ मानूँगा!’

रानी ने प्रसन्न होकर ताली बजाई- ले तो फिर? कंट्रोल मेरे हाथ में हुआ कि तेरे?
मैं कुर्सी छोड़कर उसकी सीट के पास आ गया और उसको उठ कर बाँहों में भर कर बोला- रानी कंट्रोल तो सदा तेरे ही पास है और रहेगा… मैं तो अपनी मल्लिका-ए-आलिया का एक अदना सा ग़ुलाम हूँ… जाआआआन!

मेरी छाती पर हाथ रखकर धकेलती हुई बुलबुल रानी ने कहा- अच्छा अच्छा… चलो चुप चाप अपनी सीट पर… कोई भी बदमाशी नहीं… अच्छे बच्चे बन कर बैठे रहो वहाँ… जब मम्मा कहेंगी तब उठना… समझे नन्हे मुन्ने…
मैंने कहा- हाँ हाँ मम्मी, सब समझ गया…

इसी प्रकार अपन शैम्पेन का आनन्द लेते रहे और यूँही हंसी मज़ाक भी चलता रहा।
थोड़ी देर में कप्तान पूछने आया- डिनर तैयार है सर्व कर दूँ?
मैडम जी ने हुक्म दिया- हाँ।
तो यारो, डिनर का पहला कोर्स सर्व कर दिया गया।

तभी अचानक बुलबुल रानी चौंकी और घबराई हुई आवाज़ में बोली- हौऔऔ… औऔऔ… राजे, तूने कंडोम तो लगाया ही नहीं था… अब क्या होगा… कहीं मैं गर्भवती हो गई तो?…ओह ओह ओह माय गॉड!… यार सारा मज़ा किरकिरा हो गया..
मैंने ठहाका लगाकर कहा- रानी बेफिक्र रह तू… मादरचोद रांड… मैंने दो बच्चे होने के बाद ऑपरेशन करवा लिया था… बच्चा होने का कोई रिस्क नहीं है जान-ए-मन… तू बस यूँही मस्ता मस्ता के चुदे जा बहन की लौड़ी!

रानी फिर से बढ़िया वाले मूड में आ गई… बताती रही अपने जीवन के विषय में!
शादी से पहले उसका एक बॉयफ्रेंड था जिसने उसकी सील तोड़ी थी। उसके साथ रानी का रोमांस दो साल तक चला लेकिन फिर उस हरामज़ादे ने किसी और लड़की से शादी करके इसे मंझधार में छोड़ दिया। अच्छे से बुलबुल रानी को दो साल चुदाई कर के धोखा देकर भाग गया कमीना। आदमियों के साथ रानी के दो ही अनुभव हुआ थे और दोनों ही खराब साबित हुए।

एक बहुत उम्दा और स्वादिष्ट डिनर पूरा हुआ, शैम्पेन आधी के लगभग बच गई थी। एक अच्छे टिप के साथ बिल चुका कर हम उठ खड़े हुए।
मैंने शैम्पेन की बची हुई बोतल उठा ली और कप्तान को कहा कि इसे झील के डेक पर भेज दे क्योंकि हम वहीं जायेंगे।
फिर हम लोग थोड़ा टहलने के लिए झील वाले प्लेटफार्म की ओर चल पड़े।
कहानी जारी रहेगी।

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