और काजल बेतकल्लुफ़ हो गई-3

अरुण 2013-07-08 Comments

उससे सीट-बेल्ट नहीं लग रही थी, वो परेशान होकर बोली- न जाने क्यूँ नहीं लग रही? सीट-बेल्ट छोटी है शायद !

मैंने शरारत से उसके बूब्स दबाते हुए कहा- सीट-बेल्ट छोटी नहीं है मैडम, तुम्हारे ये बोबे बहुत बड़े बड़े हैं, एकदम मस्त और टाइट।

वो हक्की-बक्की रह गई और ‘धत्त !!! ये क्या कर रहे हो?’ कहते हुए मेरा हाथ हटा दिया। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने कहा- इसमें गलत क्या कहा मैंने? ये तो नारी की सुंदरता के ‘उभार’ हैं !

वो बोली- मुझे ऐसी बातें अच्छी नहीं लगती !

मैं चुप हो गया और फिर उस दिन कुछ नहीं बोला और अगले दिन से काजल के पास जाना बंद कर दिया। यह बात कार्तिक को बता भी दी कि इंतज़ार करो, काजल खुद ही मुझे बुलाएगी।

और सिर्फ एक दिन बाद ही काजल का फोन आ गया मेरे पास !

काजल का फोन आना ही था, मुझे पूरा यकीन था क्यूँकि जो भी लड़की या महिला मेरे संपर्क में आती है वो मुझसे जरूर प्रभावित हो जाती है, मैं सेक्सी मानसिकता का जरूर हूँ लेकिन मैंने स्त्री को कभी भी सिर्फ सेक्स का खिलौना नहीं समझा, उन्हें हमेशा सम्मान दिया, उनका मन बहलाया, जो कुंआरी और शादीशुदा लड़की या महिलायें जिनसे मैं चैट करता हूँ या फोन पर बातें करता हूँ वो यह कहानी पढ़ रही होंगी, मेरी इस स्वभाव से वाकिफ हैं।

बहरहाल काजल का फोन आया और मैं फिर उसकी सेवा में हाज़िर हो गया। कुछ देर बाद ही हम कार में थे, अब स्टेयरिंग पर उसका अच्छा कंट्रोल हो गया था, बस गेयर की प्रेक्टिस और करानी थी जो मैंने अब शुरू कर दी थी। पर उस दिन मैं सिर्फ ड्राइविंग से सम्बंधित बातें ही कर रहा था, उस दिन मैंने उससे बिना मेरे स्टेयरिंग टच किये घर तक कार चलवाई।

मैंने कहा- अब तुम परफेक्ट हो गई हो, अब चला लोगी कार !

वो भी अपनी इस उपलब्धि पर बहुत रोमांचित थी, बोली- अरुण जी, यू आर ग्रेट !

मैंने कहा- काजल, अपने इस ट्रेनर को कोई ईनाम नहीं दोगी?

वो नादान बिना मेरी मंशा जाने बोल पड़ी- ऑफ़ कोर्स दूँगी, बोलो क्या चाहते हो?

हम लोग कार पार्क करके अब घर में आ गये थे, मैंने उसके नज़दीक आते हुए कहा- ईनाम में मुझे तुम्हारा चुम्बन लेना है !

मुझे लगा था कि वो फिर से बिफर जायेगी पर आज उसका अंदाज़ और मूड एकदम अलग था, वो बोली- आप नहीं सुधरेंगे, आप क्यूँ करते हैं ऐसा?

तब तक हम दोनों लिविंग रूम में लगे सी सी टीवी कैमरे की रेंज में आ चुके थे, वो बोली- लेकिन… मुझे अज़ीब सा लग रहा है !

मैंने कहा- बाद में अच्छा भी लगेगा !

मैं उसके और नज़दीक आ गया, वो पीछे खिसकी और हाथ ऊपर करने लगी शायद मुझे रोकने लिए !

मैंने कहा- डर लगता है तो रहने दो !

और मैं वापिस मुड़ गया।

वो बोली- नहीं, प्लीज़ रुको, यहाँ नहीं !

और वो अपने बेडरूम की तरफ चल दी। कार्तिक सही कहता था, काजल को शर्म और डर बहुत था, और यही मुझे आज ख़त्म करना था।

अब मैं भी उसके पीछे आ गया और उसके कंधे पकड़ कर उसे अपनी ओर घुमा लिया, शर्म के मारे उसके चेहरे की रंगत ही बदल गई थी, मैंने उसकी गर्दन पर से बाल उठा कर उस जगह से उसे पकड़ा, गर्दन का यह हिस्सा बहुत संवेदनशील होता है, और उसे मसलने लगा, दूसरे हाथ से उसका हेयर बेंड निकाल दिया जिससे उसके बाल खुल गए, फिर उसके चेहरे के एक एक हिस्से को सहलाया।

वो शर्म के मारे मुझसे निगाह बचा रही थी, बोली- यह क्या कर रहे हो?

मैंने एक उत्तेजक सांस लेते हुए कहा- कहाँ चुम्बन लूँ, यह देख रहा हूँ !

मैं उसे बातों में लगा कर उसकी नज़दीकी का भरपूर मज़ा ले रहा था, वो अपने आप में सिमटी जा रही थी और घबरा रही थी। फिर वो थोड़ा संयत होने के लिए शिकायत के लहज़े में बोली- उस दिन आपने मेरे बूब्स क्यों दबाये? मुझे अच्छा नहीं लगा था।

मैंने कहा- हाँ, उस समय अच्छा नहीं लगा होगा ! लेकिन बाद में जब अकेले में सोचा तब?

अब वो चुप !!

मैंने बात को ज़ारी रखते हुए कहा- पता है, भगवान् ने दुनिया में जो सबसे ‘उत्कृष्ट’ और निहायत सुंदर रचना की है, वो है नारी और उसका शरीर, जिसके आकर्षण की वजह से पुरुष उसके साथ सम्भोग के लिए अग्रसर होता है और यह सृष्टि चल रही है।

वो नादान बनती हुई बोली- मुझे क्या पता !

मैंने कहा- तो तुम्हें पता होना चाहिए काजल !

और मैं उसे लगभग धकेलते हुए ड्रेसिंग रूम के बड़े शीशे के सामने ले गया। मुझे पता था कि इसके ठीक ऊपर ही छुपा हुआ सी सी टीवी कैमरा भी था जो इस समय सब रेकॉर्ड कर रहा था।

वो इस समय मेरे काबू में थी, मेरे साथ उसकी इतने दिनों की नज़दीकी और मेरी उत्तेजक और सेक्सी बातों ने कहीं न कहीं उसके जिस्म में भी कोई चिंगारी तो भड़का ही दी थी जिस वजह से वो मेरा यह व्यवहार सहन कर रही थी।

शीशे के सामने पहुँच कर मैंने उसे कहा- भगवान् ने तुम्हें जो उत्तेजक और बेशकीमती जिस्म दिया है, यह सिर्फ तुम्हारे लिए ही नहीं,

कार्तिक का भी इस पर पूरा हक़ है।

वो शर्म से नीचे देखते हुए बोली- मुझे छोड़ो प्लीज़ ! कुछ ख़ास नहीं है मेरे में !

मैंने कहा- फैसला करने वाली तुम कौन होती हो?

मैंने कहा- मैं बताता हूँ क्या ख़ास है तुम में !

और मैंने एक हाथ से उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और वो कुछ समझ पाती उससे पहले ही दूसरे हाथ से उसका कुर्ता पूरा निकाल दिया।

वो घबरा तो गई लेकिन कुछ कर न सकी, उसने गुलाबी रंग की ब्रा पहन रखी थी, उसने अपने हाथ अपने वक्ष पे क्रॉस करके रख लिए उन्हें छुपाने के लिए !

अब मैं उसके नग्न हो चुके कंधे पीठ और पेट को सहलाते हुए उसे कहने लगा- यह रेशम जैसा चिकना बदन पूरे संसार में सिर्फ नारी को ही मिला है ! समझी तुम?

वो शर्म के मारे जमीन में गड़ी जा रही थी और शीशे में अपना अक्स भी नहीं देख रही थी !

अब मैंने अपने हाथ उसके कंधे से सरकाते हुए उसकी पीठ पर ब्रा के हुक तक ले गया, वो अब क्या होने वाला है यह सोच कर मुझे रोकती, उससे पहले ही मैंने फुर्ती से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और लड़कियो की ब्रा उन्नत और मांसल वक्ष को खींच कर सम्भाले रखती है इसलिए हुक खुलते ही ब्रा झटके के साथ अलग हो जाती है, जैसे काजल की भी हो गई !

और मैंने ब्रा के स्ट्रेप्स उसके कंधों से निकाल दिए लेकिन काजल अपनी हथेलियों से अपने उभार छुपाने का असफल प्रयास अभी भी कर रही थी और साथ ही अपने आपको छुड़ाने का प्रयास भी कर रही थी लेकिन मैंने बलपूर्वक उसके दोनों हाथ उसके वक्ष स्थल से दूर कर दिए, अब मेरे सामने दो निहायत ही खूबसूरत, गोल और उभरे हुए वक्ष अनावृत हो चुके थे, उसके चुचूकों का घेरा छोटा गहरा गुलाबी जिस पर दो तीन दाने भी उभरे हुए थे और चूचियाँ थोड़ी छोटी लेकिन नुकीली थी।

मैंने कस के उसके दोनों हाथ पीछे की तरफ खींच कर अपने एक हाथ में जकड़ लिया और उसकी छातियों को बाहर की तरफ धकेल दिया ! अब उसकी अर्धनग्न अवस्था और भी ज्यादा उत्तेजक लग रही थी और अब मैं अपने दूसरे हाथ से उसके नग्न हो चुके उभारों को सहलाने, मसलने और दबाने लगा।

काजल ने मारे शर्म के अपनी आँखें ही बंद कर ली। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने उसे आँखें खोल कर अपने आप को निहारने के लिए कहा तब उसने झिझकते हुए अपनी आँखें खोली !

मैंने कहा- ये देखो, एक तो ये दो सौगातें मिली है तुम्हें जिन्हे सहलाने, मसलने और दबाने में हम पुरुषों को असीम आनन्द मिलता है !

और फिर मेरे हाथ उसके पेट और नाभि को सहलाते हुए नीचे की तरफ बढ़े !

वो मेरी मंशा शायद समझ गई क्यूँकि उसने अपने पैरों को आपस में भींचना शुरू कर दिया लेकिन…

इसके बाद उस शर्मीली काजल और मैंने जो कुछ किया वो इस कहानी के अगले भाग में जरूर पढ़ियेगा, उसे इस भाग में संक्षेप में समेटना पाठकों के साथ न्याय नहीं होगा !

कहानी जारी रहेगी।

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