प्यासी कली- 1

समीर खान 2010-04-01 Comments

मैं समीर गुड़गाँव वाला फ़िर से कच्ची कलियों, गर्म भाभियों, प्यासी आंटियों, और चुदक्कड़ मुण्डों को अपना एक और अनुभव सुनाने जा रहा हूँ।

हाल ही की बात है, मेरे कम्पनी के डायेरेक्टर ने अपने बंगले पर एक शानदार पार्टी दी थी।

बड़ी रौनक थी पार्टी में, एक से बढ़ कर एक बड़े लोग पार्टी में शामिल हो रहे थे। थोड़ी देर मे मेरी नजर एक काफ़ी अमीर आदमी पर पड़ी जो अपनी पत्नी के साथ लोगों से मिल रहा था, वो आदमी 40 से 42 साल का होगा और उसकी बीबी स्वर्गलोक की अप्सरा से कम नहीं लग रही थी।

वो औरत मेरी तरफ़ काफ़ी ध्यान से देख रही थी, उसकी और मेरी नजर बार बार एक हो रही थी।

उसके शरीर की बनावट देख कर लग रहा था कि उसको भगवान ने काफ़ी समय देकर बनाया होगा।
उसका कद 5’8″, रंग गोरा और फ़िगर क्या कहूँ, 36-28-37 होगा और उसके चूचे देखते ही मेरे लण्ड मे हलचल सी मचने लगी।

उसने काले रंग की पारदर्शी साड़ी पहन रखी थी और वो भी नाभि के काफ़ी नीचे, जो मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है।

मेरी नजर उस पर से हट ही नहीं रही थी, लगातार मैं उसकी ओर ही देखता रहा, और वो भी मुझे देख रही थी। मेरा अब पार्टी में कहीं ध्यान नहीं लग रहा था।

मुझे इस तरह देखकर वो औरत मन ही मन मुस्कुराने लगी।

मैं देख रहा था कि सब लोग इधर उधर बातें कर रहे थे पर उस औरत की नजर अब भी मेरी ही तरफ़ आ रही थी।
यह देखकर मेरा लण्ड ही खड़ा होने लगा।

फ़िर उस औरत ने अपने पति से कुछ कहा, सोफ़े पर बैठ गई और एक शर्बत का गिलास लेकर चुस्कियाँ लेने लगी।

मैंने भी एक शर्बत का गिलास लिया और चुस्कियाँ लेने लगा।
मैं जहाँ पर खड़ा था वहाँ पर एक वेटर आ रहा था, मैंने उसको देखा नहीं और उसके साथ में मेरा गिलास टकरा गया तो सारा शर्बत मेरी पैंट और शर्ट पर गिर गया।

वो वेटर तो सॉरी बोलकर चला गया, पर मेरी पैंट और शर्ट खराब होने के कारण मैं बाथरूम में जाकर अपने कपड़े साफ़ करने लगा।

थोड़ी देर में मैंने देखा कि वो औरत बाथरूम की तरफ़ आ रही थी, बाथरूम में मेरे अलावा और कोई नहीं था।

वो मेरी तरफ़ आई और मुझे देखकर मुस्कुरा कर बोली- पैंट शर्ट खराब हो गया?
मैंने कहा- हाँ, वो वेटर ने शर्बत गिरा दिया।

तो वो हंसते हुए बोली- थोड़ा ध्यान अपने पर भी रखना चाहिये!
और मुस्कुराने लगी।

मैंने सोचा कि यह मुझे लाइन दे रही है तो मैंने उससे पूछा- पार्टी से बोर हो गई हैं क्या आप?
उसने कहा- हाँ!

और वो मेरे बारे में पूछने लगी, फ़िर मैंने उसके बारे में पूछा तो उसने अपना नाम रूपाली बताया और बताया उसके पति उसको प्यार से कली पुकारते हैं।

मैंने कहा- मैं भी आपको कली बुला सकता हूँ?
तो वो खुश हो गई और बोली- जरूर! तुम मुझे कली ही बुलाओ।

मैं अपने शर्ट पर पानी लगा रहा था तो उसने कहा- शर्ट उतार कर साफ़ कर लो, यहाँ कोई देखने वाला तो है नहीं!

फ़िर मैं अपने शर्ट को उतार कर साफ़ करने लगा, इस दौरान हम बात करते रहे, वो मुझसे काफ़ी खुल गई थी।

शर्ट भीगने के कारण मैं पहन नहीं सकता था तो उसने कहा- सुखा लो।
मैंने कहा- कहाँ सुखाऊँ?

तो उसने मुझे छत की तरफ़ इशारा किया, मैंने कहा- यह आइडिया अच्छा है।
मैंने कहा- आप भी चलो!

उसने कहा- मेरे पति मुझे ढूंढते होंगे, हो सका तो थोड़ी देर में जरूर आऊँगी।

मैं छत पर चला गया। वहाँ कोई नहीं था, बिल्कुल अन्धेरा था।

10 मिनट बाद मुझे किसी के आने की आहट सुनाई दी। मैंने रुपाली को आते देखा।

रूपाली मेरी तरफ़ आ गई, बोली- शर्ट सूखा या नहीं?
मैंने कहा- सूख रहा है।

वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि मेरे से अपने ऊपर काबू रखना मुश्किल हो रहा था।

फ़िर हम लोग बातें करने लगे। इतने में मुझसे उसका हाथ छू हो गया तो मैंने सॉरी बोला, तो वो बोली- सॉरी क्यों बोले? इसमें शर्माने की क्या बात है?

मैं तुरन्त ही समझ गया कि उसने हरी झण्डी दिखा दी है, ब्रेक मत लगाओ।

तो मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया तो उसने कुछ नहीं कहा। फ़िर तो मैंने उसको अपनी बाहों में खींच लिया तो वो मेरे बाहों में समाने लगी, और उसी ने चुम्बन करना चालू कर दिया।

मैं समझ गया कि यह औरत काफ़ी प्यासी है और गर्म भी हो गई है। तो मैं उसके स्तन दबाने लगा, वो आ आआ अह्ह्ह करने लगी।

मैं उसको अन्धेरे में ही दबोच कर उसके होठों को चूसना चालू कर दिया।

इतने में उसके फोन की घण्टी बजने लगी तो चौंक पड़ी और देखने लगी, बोली- इस गधे को भी इसी वक्त फोन करना था!

वो काफ़ी गुस्से में भर गई और फोन रिसीव करके बोली- आती हूँ।

और मुझे बोली- जाना होगा, मेरे पति जा रहे हैं। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

फ़िर उसने मुझे चूमा और मेरा मोबाईल लेकर अपना नम्बर डायल कर दिया और कहा- मैं तुझे कल फोन करुँगी और तुम आ जाना। मैं किसी भी समय कल तुम्हें फोन करुंगी।

फ़िर मैंने उसको एक जोरदार किस मारी और वो बाय बोल कर निकल गई, मैं भी शर्ट पहन कर नीचे आ गया।

फ़िर मैंने पार्टी में खाना खाया और घर आकर सोने की कोशिश करने लगा पर नींद कहां से आने वाली थी, आँखों में वही दिखाई दे रही थी।

फ़िर मैंने उसको याद करके मुठ मार ली और सो गया।

दूसरे दिन मैं ऑफ़िस चला गया था और ऑफ़िस के काम की वजह से टाइम पास हो गया।

तकरीबन दो बजे मेरे मोबाईल पर घण्टी बजी पर नम्बर दूसरा था।
मैंने हेल्लो बोला तो सामने से सीधा जवाब आया- हाय! कैसे हो?

मैंने जवाब दिया- ठीक हूँ!

मैं आवाज पहचान गया था।

उसने पूछा- अभी तुम क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- ऑफ़िस में हूँ।
उसने कहा- क्या तुम मुझे अभी मिल सकते हो?
मैंने कहा- हाँ, क्यों नहीं? कहाँ पर आऊँ?
तो उसने मुझे साउथ दिल्ली का एक पता दिया और बोली- तुम वहाँ पर खड़े रहना, मैं तुम्हें ले लूँगी।
मैंने कहा- ठीक है!

मैंने ऑफ़िस से छुट्टी ली और उस पते पर जाकर उसकी प्रतीक्षा करने लगा।

थोड़ी देर में वो कार में आई उसके पास स्कोडा लारा कार थी। उसने मुझे साइड सीट पर बैठने का इशारा किया, फ़िर वो खुद ड्राईव करके शहर से बाहर एक शान्त जगह ले गई, किसी का फ़ार्म हाउस लग रहा था, बहुत ही शानदार बना हुआ था, पर सुनसान था।

रुपाली ने फ़ार्म हाउस के अन्दर गाड़ी रोक दी, बंगले का गेट खोला और मुझे अन्दर आने के लिये कहा। उसने दरवाजा बन्द कर लिया तो मैंने पूछा- हम कहाँ पर आये हैं?

तो उसने बताया- यह फ़ार्म हाउस मेरी एक सहेली का है और यहाँ पर कोई आता जाता नहीं है।

और बोली- हम लोग अकेले हैं, क्या सोच में पड़ गये?
मैंने कहा- कुछ नहीं!

मैंने उसको अपनी बांहों में खींच लिया और एक फ़्रेन्च किस कर दी और पूछा- क्या सब काम खड़े होकर ही करना है?

तो वो हंस कर बोली- चलो, बेडरूम हमारा इन्तजार कर रहा है।
मैं भी हंसने लगा।

कहानी का अगला भाग: प्यासी कली- 2

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