विदेशी मेहमान की यौन संतुष्टि

जूजाजी 2013-01-09 Comments

प्रेषक : ज़ूज़ा जी

मैंने कई बार सोचा कि मैं भी अपने अनुभव आपको सुनाऊँ, पर हर बार सोच कर रह जाता था, अभी रात का एक बजा है, मुझे नींद नहीं आ रही थी, सो सोचा कि आज कुछ लिखता हूँ और फिर तो मेरी यह कहानी आप तक पहुँच ही जायेगी।

अस्तु ! प्रस्तुत है मेरी कहानी :

उस समय मेरी उम्र 30 वर्ष की थी, ट्रेन में जा रहा था, झाँसी से ग्वालियर तक ही जाना था, ट्रेन में चढ़ा और एक सीट पर बैठ गया तभी एक जापानी टूरिस्ट लड़की गाड़ी में चढ़ी और मेरे बगल की खाली जगह पर बैठ गई।

तभी उसके पीछे पीछे एक दढ़ियल भी चढ़ा वो भारतीय ही था। उसने उस जापानी लड़की से कहा- इधर नहीं, उधर और आगे चलो !

पर शायद वो लड़की उससे परेशान सी हो गई थी सो उसने मुझसे कहा- हेल्प मी, दिस मैन इस टीज़िंग मी ! (यह आदमी मुझे परेशान कर रहा है !)

उसे अंग्रेजी आती थी।

मैंने उस दढ़ियल से कहा- भाई, यह अपने देश की मेहमान हैं, तुम इनको तंग मत करो !

वो साला मुझसे ही उलझ गया, बोला- तुम मुझे जानते नहीं हो, मैं सीबीआई से हूँ।

मैंने उसको घूर कर देखा, मुझे वो आदमी जेबकतरा सा दिखा। मैंने उसकी गिरेहबान पकड़ कर एक झापड़ उसको रसीद कर दिया और उसको कहा- तुम चुपचाप नीचे उतर जाओ वर्ना मैं तुमको ट्रेन के नीचे फैंक दूंगा !

वो वहाँ से चला गया।

अब मेरी बातचीत उस जापानी बाला से होने लगी, वो आगरा जा रही थी। उम्र करीब 18 साल की होगी, नाम था यूका एबी !

मस्त माल थी !

मुझसे बोली- मुझे आगरा तक छोड़ दो, मुझे डर लग रहा है।

मैंने भी सोचा कि चलो देखते हैं आज नसीब में क्या लिखा है?

गाड़ी चल दी, उससे बहुत बातें हुई, मैंने उसे अपने बारे में बताया। तभी मैंने देखा कि वो अपनी कमर को बार बार सहला रही थी।

मैंने उससे कारण पूछा तो उसने बताया कि शायद भारी बैग उठाने से ऐसा हुआ है।

मालिश करने का मेरा अच्छा अनुभव है, खासियत है मेरी, मुझे तुरंत ही मालूम हो जाता है कि दर्द कहाँ हो रहा होगा। मैंने उससे पूछा कि क्या मैंने कुछ कर सकता हूँ और बगैर उसकी इजाजत के मैंने अपनी उंगली उसकी कमर के उस पॉइंट पर रख दी जहाँ उसको दर्द हो रहा था।

उसको बहुत सुकून मिला, वो मुझे थैंक्स कहने लगी।

मैंने कहा- इसका इलाज मालिश है, यदि तुमको कोई ऐतराज न हो तो मैं तुमको पूरा आराम दे सकता हूँ।

उसने कहा- ठीक है, आगरा चल कर देखती हूँ।

इधर उधर की बातों में समय का मालूम ही नहीं पड़ा कि कब आगरा आ गया। खैर आगरा पहुँच कर उसके साथ एक होटल में पहुँच गया। उधर होटल में उसने जाते ही अपने बैग से सिगरेट निकाली और मुझे भी ऑफर की।

मैंने ले ली और फिर मैंने उससे पूछा कि कुछ बीयर वगैरह लोगी?

उसने कहा- नहीं, मेरे पास वोदका है, अगर तुमको बियर पीनी हो तो तुम मंगा लो ! मैं तो वोदका ही पीऊँगी !

मैंने भी कहा- यदि तुम को ऐतराज न हो तो मैं भी वोदका ही ले लूँ?

उसने बड़ी ख़ुशी से मुझको वोदका ऑफर की… दो गिलास में चियर्स बोल कर !

वोदका हमारी मस्ती को बढ़ाने लगी, 2-2 पैग के बाद उसने मुझे याद दिलाया कि मैं उसकी मालिश करने वाला था।

तब मुझे पहली बार उसकी आँखों में मस्ती दिखी !

मैंने भी कह दिया- देखो, तुम मेरे देश की मेहमान हो और मैं नहीं चाहता हूँ कि तुम मुझको गलत समझो ! फिर भी यदि तुमको मालिश करवानी है तो तुमको अपने कपड़े उतारने पड़ेंगे।

वो तो खिलखिला कर कर राजी हो गई, मेरा हथियार खड़ा हो गया कि आज लौंडिया पक्के में चुदने को राजी है…

मैंने कहा- ठीक है, मैं बाथरूम से होकर आता हूँ ! तब तक तुम कपडे उतारो !

मैंने सोच लिया था कि आज इसकी लेनी है, और मैं अपना लंड भी उसको चुसवाना चाहता था, तो उसको भी धोना था, मैंने सारे कपड़े उतारे और अपना लंड साबुन से ठीक से धोया और तौलिया लपेट कर बाहर आ गया।

बाहर यूका सिर्फ दो कपड़ों में बिस्तर में चित्त लेटी थी, क्या कयामत थी?

साली के दुद्दू 36 साइज के ऐसे तने थे जैसे दो पहाड़ हों, मुझे अधनंगा देख कर उसने एक मुस्कान दी और एक आँख मार कर मुझसे पूछा कि क्या मैं तैयार हूँ?

और उसने मेरी तौलिया पकड़ कर मुझे अपने पास खींचा, मेरा तौलिया खुल गया और मेरा लंड तनतना कर उसके सामने था।

मैं सन्न रह गया कि यह मादरचोदी तो मुझसे भी अधिक चुदासी है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

यूका ने मेरी तरफ मुस्कुरा कर देखा और मेरी घबराहट का मजा लेने लगी, फिर झट से ‘वाओ’ कह कर मेरा लंड पकड़ लिया और मुझे अपने ऊपर आने का इशारा किया।

मैं तौलिया फेंक कर उसके साथ बिस्तर में आ गया और अगले कुछ ही क्षणों में यूका भी मेरी तरह नंगी थी, मैं उसके दुद्दूओं की तारीफ़ करूंगा- क्या शानदार चूचियाँ थी, एकदम गोल संतरे थे, उन पर गुलाबी निप्पल मस्त छटा बिखेर रहे थे, मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को पकड़ कर मसलना शुरू कर दिया, उसकी भी सिसकारियाँ निकल रही थी। मुझे उम्मीद नहीं थी कि यूका इतनी जल्दी अपनी चूत मुझे देने को राजी हो जाएगी।

अब मेरा मकसद था अपना लंड उससे चुसवाना, सो पहल मैंने ही की, उसकी चूत जो रसीली हो गई थी, मैंने नीचे आकर उसकी चूत पर अपनी उंगली फ़िराई, वो गनगना गई, उसने मुझसे कहा कि तुम ऐसे मत करो, सीधे सीधे अपना लौड़ा मेरी बुर में डाल दो।

पर मुझे अपना लंड चुसवाना था, सो मैं नहीं माना, मैंने उसको इशारा किया कि मैं उसकी चूत को चाटना चाहता हूँ।

वो बोली- रुको, मुझे इसको साफ़ करने दो।

मैं भी समझ गया, उसने बिस्तर से उठ कर वाशरूम में जाकर खुद की चूत को साबुन से धोया, और वापस आ गई। मैंने उसको अपनी गोद में उठा कर सोफे बैठा दिया और उसकी टांगों को अपने कंधे पर रख कर उसकी चूत को अपन जुबान से चाटना शुरू किया, उसकी चूत बिल्कुल मक्खन थी, साली की चूत पर झांटे तो थी ही नहीं, मैंने अपनी पूरी जीभ उसकी बुर में पेल दी, मेरी नाक उसकी भगनासा को रगड़ रही थी, करीब 5 मिनट तक उसकी चूत को चाटा, उसकी हालात बहुत ख़राब हो गई थी, उसने अपनी पूरी टाँगें फैला दी थी और चिल्ला रही थी- यस डार्लिंग, सक इट ! सक इट !

मेरे ख्याल से अब वो इस स्थिति में आ गई थी कि बगैर चुदे रह नहीं सकती थी, मैंने उसकी टाँगे नीचे की और मैं खड़ा हो गया, अपना लंड उसके होंठों के तरफ किया, उसने एक बार भी हिचकिचाहट नहीं दिखायी और गप्प से मेरे लौड़े को अपने मुँह में ले लिया, मुझे तब लगा कि साली यह तो वैसे ही मेरा लंड चूस लेती, मुझे इसकी चूत चाटने की जरूरत ही क्या थी। खैर साब, उसकी लंड चुसाई का मैं कायल हो गया, उसने भी पूरे मनोयोग से मेरे लंड का सम्मान किया।

फिर मुझे लगा कि अब इसकी चूत का भी मान-मर्दन करना चाहिये तो बस, उसको उठा कर बिस्तर पर लेटाया और अपने लौड़े को उसकी चूत के मुहाने पर रख कर उसको एक आँख मारी और उसकी मूक सहमति पाकर लंड को उसकी चूत में ठेल दिया, अभी घुसा ही था कि उसकी आह निकल गई।

पर अब कौन रुकता.. सो बेधड़क पूरा लौड़ा हचक कर पेल दिया। साली चिचिया उठी, पर मुझे मालूम था कि अभी सब ठीक हो जाएगा, धकाधक धकाधक पेलम पाली शुरू हो गई, यूका भी अब मजे लेने लगी, उसकी चूची का निप्पल मेरे मुँह में था और लंड उसकी गुफा में था, करीब दस मिनट तक उसको चोदने के बाद मैंने उससे पूछा- और पिलाई चाहिये?

वो बोली- बस करो अब प्लीज़, अंदर मत झड़ना !

मैं भी समझदार था तो 20-25 धक्के और मार कर उसकी चूत से लंड बाहर निकाल कर उसके पेट पर अपना माल निकाल दिया। मेरा प्रारब्ध हंस रहा था और यूका सोच रही होगी कि उसका प्रारब्ध हंस रहा है।

दरअसल ये सब हम दोनों की पसंद से ही हुआ था।

मैंने यूका को अपनी गोद में उठाया और उसने भी मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी। मैं उसको लेकर वाशरूम गया, वहाँ शावर के नीचे हमारी धुलाई हो गई, बाद में हम दोनों ने खाना खाया और एक-एक सिगरेट पी और फिर बाहर आकर उसने अपने कैमरे से एक अपरिचित से हम दोनों की फोटो खिंचवाई और फिर मैंने उससे विदाई ली।

आज भी उसकी भेजी हुई फोटो मेरे पास है और अभी वो ऑस्ट्रेलिया में है, मुझसे ऑनलाइन चैट करती रहती है।

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