लन्ड की भूखी चुदासी औरतें

(Lund Ki Bhukhi Chudasi Aurten)

अज्ञात 2015-12-20 Comments

यह कहानी मेरे मित्र रवि प्रकाश यादव ने भेजी है। उसी के शब्दों में कहानी सुनिए।

दोस्तो, मैं कुछ बच्चों को अपने घर पर ट्यूशन देता हूँ और उन स्टूडेंट्स में से एक की माँ (रोशनी) मुझे एक दिन मेरी फीस देने मेरे घर पर आई और उसने मेरे साथ मन ही मन में सेक्स का प्लान बना लिया, जो मुझे बाद में पता चला।
वो बार-बार फोन करके अपनी बेटी की रिपोर्ट का पता करना (एक सप्ताह में 4 बार मुझे फोन करती) और फिर कुछ देर के बाद अपनी इधर-उधर की बातें लेकर बैठ जाना और उसने मुझे कई बार अपने घर पर भी बुलाया.. लेकिन मैं नहीं गया।

फिर आख़िर में उनसे तंग आकर एक दिन मैं उनके घर पर चला ही गया।
तब मैं सिर्फ़ 23 वर्ष का था और मैंने कभी भी किसी को नहीं चोदा था।
उन्होंने मेरा बहुत अच्छी तरह से स्वागत किया, मेरे लिए चाय बनाकर लाईं और फिर बातें करती रहीं और फिर थोड़ी ही देर के बाद वो अपने पति की बातें मुझे बताने लगीं और बहुत दु:खी सी लगने लगीं।

जब उनको लगा कि मैं उनकी बातें ध्यान से सुन रहा हूँ.. तभी उन्होंने एकदम उदास होकर रोने का नाटक किया।
इस पर मैंने उनको चुप कराया.. तो वो मुझसे चिपक गईं और मुझसे कहने लगीं- मुझे प्यार चाहिए ना कि जेल।
तो मैंने कहा- ठीक है.. मैं अंकल से बात करता हूँ.. सब ठीक हो जाएगा।

लेकिन तभी वो कहने लगी कि वो मुझसे प्यार करती हैं। मैं उनकी यह बात सुनकर एकदम हतप्रभ रह गया और फिर करीब दो मिनट में उन्होंने अपने मम्मों को अपने कपड़ों से मेरे सामने बाहर निकाल दिया और मुझसे कहा- मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ.. मेरे ये मम्मे अब तुम्हारे हैं तुम जो भी चाहो इनके साथ कर सकते हो।

मैंने पहले तो बहुत देर कंट्रोल किया.. फिर कहा- आप अपना ब्लाउज बंद कर लीजिए।
वो कहने लगीं- मैं तभी बंद करूंगी.. जब तुम मेरा प्यार कबूल करोगे।
फिर मुझे अब ‘हाँ’ कहना पड़ा और इसके बाद उसने कहा- इन्हें हल्का करो..
तो मैंने पूछा- वो कैसे?
तो उन्होंने कहा- मेरे निप्पल को चूसकर..

यह बात कहकर वो मेरे बिल्कुल पास आकर खड़ी हो गईं।
तभी मैं ज़ोर से उनके बड़े-बड़े मम्मों पर लपका.. खड़े निप्पल को मुँह में लेकर चूमने व चूसने लगा.. तो उनके मुँह से सिसकारियाँ निकल पड़ीं..
फिर वो कामुक आवाज में बोलीं- आह्ह.. तुम आज मुझे चोद भी दो.. मैं पिछले 4 महीने से चुदी नहीं हूँ।
तो मैंने कहा- नहीं.. यह ज़्यादा हो जाएगा।
लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी और मुझसे चुदने की जिद करती रहीं।
फिर मैंने उनको एक बार चोद ही डाला और फिर अपने घर पर चला गया।

उस रात में ठीक तरह से सो नहीं सका.. क्योंकि मैंने आज पहली बार सेक्स किया था।
फिर दूसरी बार मैं उनसे मिलने फिर उनके घर पर गया तो वहाँ पर सब कुछ ठीक था, अंकल आउट ऑफ स्टेशन गए हुए थे.. बच्चे अपने स्कूल गए हुए थे और 8 बजे से 3 बजे तक मैं भी बिल्कुल फ्री था.. इसलिए मैं उनके घर पर पहुँच गया और मैंने सोचा कि आज भी मुझे उनको चोदने का मौका मिलेगा।
लेकिन आज सीन कुछ और था, जैसे ही मैंने चाय पीना शुरू किया.. तो उनके दरवाजे की बेल बजी.. तो मेरे मुँह से निकला- लो.. गई भैंस पानी में.. अब आज तो कुछ भी नहीं हो सकता।

दरवाजा खोला तो तीन आंटियाँ.. उनकी पड़ोसनें आ गईं, उन सबने मेरे पास बैठकर चाय पी और फिर बातें करने लगीं।
वो कपड़ों की बातें कर रही थीं तो आंटी ने मुझसे पूछा- कपड़ों की बातें तुम्हें अच्छी नहीं लगती होगीं न?
मैंने कहा- हाँ जी बिल्कुल..
लेकिन तभी दूसरी आंटी ने कहा- ठीक है, हम अब कुछ और काम करते हैं।

उन्होंने मुझे टेप से सभी के साईज़ नापने को कहा। दोस्तों मैं बहुत चकित था.. अगले ही पल मेरे हाथ में एक टेप थी और मैं डरते हुए उनकी छाती का नाप लेने लगा। मैंने पहले कभी भी किसी का नाप नहीं लिया था।
फिर आंटी (रोशनी) ने कहा- मम्मों के ऊपर से जरा ठीक से नाप लो..!
सभी हँसने लगीं।
उधर मेरा लंड धीरे-धीरे टाईट होता जा रहा था।

फिर शिल्पा आंटी ने मेरे हाथ पकड़कर अपने मम्मों पर रख लिए और कहा- दबाओ इनको।
मैंने हाथ हटा लिए.. लेकिन तभी रोशनी ने कहा- कोई बात नहीं यार.. सब चलता है और यह कौन सा सेक्स के लिए कह रही है।
फिर मैंने हल्के से उनके मम्मे दबाए.. तो शिल्पा की मांग बढ़ गई और वो बोली- ब्लाउज के अन्दर से हाथ डाल कर दबाओ न..
मैंने उनके मुलायम मम्मों को ब्लाउज के अन्दर से दबाया, मेरी आँखें धीरे-धीरे बंद हो रही थीं।
अब मैं समझ गया था कि कुछ होने को है।

उन्होंने मुझे सोफे पर बैठाया और फिर सभी बारी-बारी से मेरे लंड को चूसने लगीं। सबसे पहले शिल्पा आई.. फिर रूशी.. फिर शीला और सबके बाद में रेखा ने मेरा लंड चूसा और तब तक मेरे लंड का पानी निकल गया और वो सीधा रेखा के मुँह में गया.. जो उसने झट से पी लिया।
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इस पर बाकी के तीन लोगों ने रेखा की निप्पल को चूस लिया और उसको बहुत गालियाँ दीं- कुतिया.. रंडी हमको भी तो लंड चूसना था.. तूने तो खेल पहले से ही पूरा खत्म कर दिया।
फिर उन सभी ने रेखा को दोबारा लंड खड़ा करने को कहा। उसने फिर से मेरे लंड को चूसना शुरू किया। वह लंड को लगातार चूसती व चाटती ही जा रही थी।

तभी रोशनी आंटी ने मेरे लंड पर थोड़ा सा शहद लगा दिया और अब रेखा ने और भी प्यार से मेरे लंड को चाटना.. चूसना शुरू कर दिया। इसी बीच उन सबने अपने-अपने मम्मों पर शहद लगा लिया और वो सभी एक-एक करके मुझसे अपने निप्पल चुसवाने लगीं।

मैं उस समय सोफे पर एकदम सीधा बैठा था.. और मेरा लंड रेखा चूस रही थी। मैं उन तीनों के मम्मों को भरपूर चूस रहा था। वो सब मुझसे अपने मम्मों चुसवाना चाहती थीं.. तो वे अपने दूध चुसवाने के लिए एक-दूसरे के मम्मों को हटा रही थीं।
फिर रोशनी ने कहा- यह मेरा दोस्त है.. मैं इससे जैसा कहूँगी.. यह सब वैसे ही करेगा।

उसने मुझे लेटने को कहा और रेखा अब तक मेरा लंड खड़ा करने की अपनी सजा पूरी कर ली थी, मतलब मेरा हथियार फिर से तनतना गया था।

फिर उन सबने अपनी-अपनी चूत में एक छोटा चम्मच शहद डाल लिया और सबसे पहले शीला मेरे मुँह पर बैठ गई और कहने लगी- चाट मेरे राजा..

अभी मैंने उनकी चूत चाटना शुरू ही किया था कि रोशनी और शिल्पा आईं और शीला को मेरे ऊपर से हटा दिया।
फिर वो बारी-बारी से बैठती गईं और मुझे उन सभी की चूत चाटनी पड़ी.. जिसकी वजह से मेरा मुँह पूरा मीठा हो गया था।

लेकिन फिर मुझे चूत का नशा हो गया था और मैंने चूत का स्वाद लेकर चाटना शुरू किया और रेखा अब तक लगातार मेरा लंड चूस रही थी और वो कामुक भी होने लगी थी। हम सभी ऐसा करते हुए करीब आधा घंटा होने को आया था।

फिर शिल्पा ने मुझसे कहा- प्लीज अब मेरी चूत को भी थोड़ा सा हल्का कर दो।
मैंने कहा- ठीक है!
और वो मेरे मुँह पर बैठ गई। फिर अपनी चूत का रस मेरे मुँह में डालने लगी।
मैं भी उनकी चूत को चूसता ही जा रहा था और अब उसकी स्पीड बढ़ती जा रही थी और वो मेरे सर को पकड़कर खींच रही थी।
तभी अचानक से उसकी चूत फट पड़ी और चूत का रस मेरे मुँह में गिर पड़ा.. जो मैंने चाट लिया। फिर उस हरामिन ने मेरे मुँह में ‘सू-सू’ भी किया जो मैंने बहुत स्वाद लेकर पी लिया।

फिर क्या था.. सबने मुझसे बारी-बारी से अपनी चूत चटवाई और मुझे अपनी अपनी चूत का रस पिलाया। मैं तो बिल्कुल निढाल हो गया था।
रेखा ने मेरा लंड खड़ा कर दिया और वो सब उस पर टूट पड़ीं और मुझसे कहने लगीं कि पहले मुझे चोदो.. पहले मुझे..
लेकिन मैं अकेला किस-किस को चोदता?

और फिर वो सब डॉगी स्टाइल में बन गईं। क्योंकि लंड एक बार खाली हो चुका था और अब मेरा जोश भी बढ़ गया था, फिर मैंने 5 मिनट तक हर एक की चूत को तृप्त किया।

मैं उसके बाद मैं जैसे ही झड़ने को हुआ.. तो उन सबने मेरे लंड के आगे अपना अपना मुँह खोलकर लगा दिया और चाटने लगीं।
मेरी तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं यह कहाँ पर हूँ और यह सब क्या हो रहा है..? मेरे लंड की यह सब इतनी प्यासी क्यों हैं?

तभी मेरे लंड से वीर्य निकल गया और उन सबने उसको चाट लिया। रेखा के मुँह में सबसे ज़्यादा वीर्य की बूंदे गिरी थीं और वो बहुत खुश भी थी। लेकिन अब तक उसको अपनी चूत चटवाने का सुख नहीं मिल पाया था.. जो कि मैंने दस मिनट बाद उसकी चूत को चाटकर दिया।

हमें ऐसा करते हुए पूरे दो घंटे बीत चुके थे और अब हम सभी साथ-साथ नहाने लगे थे। बाथरूम में मैं उन सबके मम्मों को धो रहा था और चूत को चाट रहा था।
वो सभी भी एक-एक करके मेरे लंड को चूस रही थीं।
यह प्यार का सत्र समाप्त हुआ और फिर ये सब गाहे-बगाहे चलने लगा।

मैं जब भी उनसे मिलता हूँ.. उनकी चुदाई तो करता ही हूँ.. लेकिन उनके परिवार के सुख-दु:ख को भी समझता हूँ। हमारी टीम में अब तक 11 औरतें हो चुकी हैं और सभी चुदासी हैं.. उनको जवान लौंडे से चुदवाने की बहुत चाहत रहती है।

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