सड़क पर मिली लड़की चूत लंड खेलने लगी

(Married Fuddi Chudai Ki Kahani)

मैरिड फुद्दी चुदाई की कहानी में पढ़ें कि एक दिन एक लड़की ने हाथ देकर मेरी बाइक रोकी और बैठ गयी. उसे लिफ्ट चाहिए थी. उससे मेरी दोस्ती हो गयी.

एक दिन घऱ से ऑफिस जा रहा था, तभी एक लड़की ने हाथ दिखाया.
और जैसे ही बाइक रुकी, वो तुंरत अपनी गांड उठा कर बाईक पर बैठ गयी.

फिर वो रिश्ता बाइक से लेकर सेक्स तक कैसे पहुंचा और हम दोनों अपनी इच्छा एक दूसरे से कैसे पूरी की, यह इस सेक्स कहानी में पढ़ें.

मैं ठाणे में रहता हूँ और दिखने में काफी अच्छा हूँ. मेरा कद 5 फुट 9 इंच का है.

मेरी पिछली कहानी थी: क्लासमेट की डर्टी सेक्स की तमन्ना पूरी की

यह मैरिड फुद्दी चुदाई की कहानी मेरे साथ दो साल पहले सच में घटी थी.
मैं बाईक से ठाणे से वाशी जॉब के लिए जाता हूँ.

उस दिन हर रोज कि तरह मैं बाईक से ऑफिस के लिए निकला, मुझे आज देर हो गई थी, तो कोलावा पास करते ही एक सुदंर सी लड़की ने मुझे हाथ दिखाया.
कड़क लौंडिया देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने बाइक रोक दी.

वो लड़की बिना कुछ बात किए सीधी बाईक पर बैठ गयी.
मैं हतप्रभ रह गया कि ना जान ना पहचान, मैं तेरी मेहमान … जैसी बात हुई थी.

वो बोली- सॉरी मेरी बस छूट गई है. मुझे सानपाड़ा ऑफिस जाना है. प्लीज़ मुझे उधर उतार दीजिएगा.
मैं बोला- ठीक है.

रास्ते में उसने मुझसे पूछा- आप किधर काम करते हैं?
मैंने बताया.

फिर हम दोनों ने एक दूसरे को नाम बताया, कहां जॉब करते हैं, ये सब बातचीत हुई.

उसका ऑफिस मेरे रास्ते में ही था.
मैंने उसे ड्रॉप कर दिया और मैं ऑफिस के लिए निकल गया.

इसके बाद उससे एक सप्ताह तक मुलाकात नहीं हुई.

मैं बताना भूल गया, उसका नाम शामली था, रंग गोरा, कद 5 फुट 6 इंच, शायद साईज 34-30-36 का रहा होगा.

एक हफ्ते बाद वो फिर से वहीं खड़ी मिली.

मैंने बिना उसके हाथ दिए, खुद ही बाइक रोक दी और बोला- चलिए.
वो हंस कर बोली- अरे आप क्यों तकलीफ करते हैं. मेरी बस दस मिनट में आ जाएगी.

मैंने उसे समझाया कि उससे क्या फर्क पड़ता है.
वो बाइक पर बैठ गयी.

हमारे बीच फिर से बातें होने लगीं और बातें करते करते उसका ऑफिस आ गया.
मैंने बाइक रोकी और उसे उतार दिया.

अब ऐसे ही हफ्ते में दो-तीन बार वो मेरे साथ आ जाती थी.

बाईक पर बैग मेरी पीठ पर रहता था, तो कुछ ख़ास महसूस नहीं हुआ. आप समझ रहे हैं न … उसकी चूचियों का जरा सा भी दाब मुझे महसूस नहीं हो सका.
इस तरह से एक महीना बीत गया.

फिर एक दिन उसने पूछा- तुम्हारा ऑफिस जाने का … और आने का टाईम क्या यही है?
मैंने उससे हां बोला.

वो बोली- अगर तुमको कुछ ऐतराज ना हो, तो मैं तुम्हारे साथ हर रोज आ सकती हूँ क्या? मैं आपको महीने के पैसे दे दूंगी.
मैं थोड़ा हंसा और बोला- क्या शामली, मैं इसी रास्ते से जाता हूँ. पैसे देने की बात करोगी, तो मैं तुम्हें बाईक पर लेकर नहीं जा पाऊंगा.

फिर वो बोली- चलो देखती हूँ. तुम प्लीज़ मुझे ले लिया करो.
मैंने उससे उसके ऑफिस से छूटने का टाइम पूछा तो मेरे वापस आने के टाइम से मैच हो गया.

अब मैं उसे सुबह पिकअप करता और शाम को वहीं ड्रॉप कर देता.

कुछ दिन बाद शामली मुझसे बोली- प्रकाश तुम ये बैग या तो आगे लगाया करो, नहीं तो मुझे दे दो. मुझे बैठने में कठिनाई होती है.
मैंने अपना बैग उसको दे दिया, फिर वो मुझे चिपक कर बैठ गयी.

शामली मुझे एकदम चिपक कर बैठ गयी थी. उसके चुचे मेरे पीठ पर रगड़ खा रहे थे. उससे नीचे लंड टाईट हो रहा था.
शाम का टाईम था, मेरी हालत बिगड़ने लगी.

ऐसे ही दिन निकलते गए.

एक दिन मैं लेट हो गया क्योंकि मेरे ऑफिस में कुछ ज्यादा काम आ गया था.

तभी शामली का फोन आया- तुम निकल जाना, मुझे आज ऑफिस से निकलने में देर हो जाएगी.
मैंने उससे कहा- यार, मैं अभी तुमको फोन लगाने वाला था क्योंकि आज मुझे भी देर होने वाली है.

वो हंस कर बोली- चलो फिर देखती हूँ, लेकिन आज बारिश बहुत हो रही है, तो मैं भीग भी सकती हूँ.
मैंने उससे बोला- हां ये तो है. तुम चाहो तो बस से निकल जाओ. मेरे साथ बाइक पर तो पक्के में भीग जाओगी.

उसने कहा- अभी तो ऑफिस से निकलने में टाइम है. देखती हूँ यदि बारिश रुक गई तो फोन करूंगी.
मैंने ओके कह दिया.

करीबन 8.30 बजे उसका फोन आया और उसने पूछा- कहां हो तुम?
मैंने उससे बोला कि अभी ऑफिस में ही हूँ बस दस मिनट में निकलने वाला हूँ.

वो बोली- आ जाओ, मैं राह देख रही हूँ. तुम मुझे पिक कर लेना.

फिर हम दोनों निकले, तो रास्ते पर बहुत ही भीड़ थी.
वो बोली- इधर तो काफी समय लग जाएगा.

मैंने उससे कहा कि एक रास्ता और भी है. उससे घर निकला जा सकता है. लेकिन वो जरा सुनसान है. तुम चाहो, तो उधर से चल सकते हैं.
शामली बोली- तुम जिधर से मर्जी, ले चलो.

मैंने बाइक को उसी सुनसान रास्ते की तरफ डाल दिया.
हम दोनों एम.आय.डी.सी के रास्ते से निकले.

लेकिन बारिश जोर से शुरू हो गयी.
इससे हम दोनों पूरे भीग गए.

अब भीग गए थे तो रुक भी नहीं सकते थे क्योंकि रास्ता भी सुनसान था.
तभी शामली ने मुझसे कहा- दो मिनट रुको ना, मुझे जोर की सुसु लगी है.

मैंने बाईक रोक कर बंद कर दी.
वो बोली- गाड़ी बंद मत करो … मुझे डर लगता है.

वो बाईक के सामने आ गयी.

उसने अपनी सलवार और निक्कर नीचे कर दी और मेरे सामने पेशाब करने लगी.
मुझे उसकी चूत और चूत से निकलती पेशाब की धार दिख रही थी क्योंकि वो मेरी तरफ मुँह करके नीचे बैठी थी.

उसके पेशाब कर लेने के बाद मैंने बोला- तुझे शर्म नहीं आई?
वो बोली- इसमें काहे की शर्म … जैसे तेरी बीवी का शरीर, वैसा ही मेरा है. या तुझे लगा हो कि मेरे शरीर में कुछ और लगा है तो बता. चाहो तो तुम भी पेशाब कर लो.

फिर मैंने भी उसके सामने लंड निकालकर पेशाब की.
वो बोली- वाह, तेरा तो मेरे पति से थोड़ा बड़ा है.

मैं लंड हाथ में पकड़े हुए था, उसकी बात सुनकर एकदम से भौचक्का रह गया.

फिर वो हंसने लगी और बोली- चल अभी घर जाना है कि नहीं. ऐसे तो हम लोग यहीं बारिश में भीगते रहेंगे.

रास्ता खाली था इसलिए कुछ समस्या नहीं थी.

मैंने उसको कोलाबा उतारा तो देखा आगे एक्सीडेंट हुआ था.
सब गाड़ियों का आना जाना बंद कर दिया गया था.

मैंने उससे कहा- चलो, अब मैं चलता हूँ और देखता हूँ कि कैसे जाने का.
वो बोली- तू एक काम कर, मेरे घर पर रुक जा. वैसे भी मेरे पति एक साल के लिए यूएस गए हुए हैं, घर पर कोई नहीं है.

मैं थोड़ा हिचकिचाया.

शामली बोली- चल तू अपनी वाईफ को फोन कर दे कि मैं दोस्त घर पर रुका हुआ हूँ.
मैंने बोला- अरे उसकी दिक्कत नहीं है यार … मेरी वाईफ तो गांव गयी है. वैसे भी कल तो शनिवार है तो छुट्टी है. चलो फिर तेरे घर ही चलता हूँ.

उसके घर पर आने के बाद शामली बोली- मैं तौलिया लेकर आती हूं.
दो मिनट बाद वो बाहर आयी तो उसने अपने चुचों के ऊपर से तौलिया लपेटा था.

मैं देखता रह गया, क्या दिख रही थी, शरीर का गोरा गोरा रंग, पैर तो पूरे खुले थे … एकदम आइटम दिख रही थी.
मेरे मुँह से सीटी निकल गयी और मेरा मुँह खुला का खुला रह गया.

उसने मेरे पास आकर हिलाकर कहा- ओ हैलो, कहां खो गया?
मैं थोड़ा शर्माया और उससे सॉरी बोला.

मैंने उससे पूछा- बाथरूम किधर है, मुझे पेशाब लगी है.
उसने हंस कर बाथरूम की इशारा करते हुए कहा- अभी तो मेरे सामने की थी, फिर लग आई.

मैं बाथरूम में चला गया और अन्दर जाकर मैंने सब कपड़े उतार दिए.
फिर बदन पौंछा और तौलिया लपेट कर बाहर आ गया.

मैंने शामली से कहा- अरे कुछ पहनने के लिए कपड़े हों, तो दे दो ना.
वो बोली- क्यों, ऐसे में क्या दिक्कत है … मैं क्या तेरे से जबर करूंगी? इधर देख क्या मैंने कपड़े पहने हैं? प्रकाश तू इतना डरता क्यों है?

मैंने जवाब दिया- देख शामली, मैं एक हद तक चुप रह सकता हूँ. एक बार मुझमें सेक्स की गर्मी बढ़ गयी तो मैं कुछ कर भी सकता हूँ. लेकिन तू मेरी अच्छी दोस्त है और मैं ये दोस्ती कायम रखना चाहता हूँ. तेरा पति घर पर नहीं है … इसकी वजह से मैंने तेरे ऊपर जबरदस्ती की, तो ये मेरी दोस्ती तौहीन होगी. इसलिए मैं इतना शांत बैठा हूँ. मुझे सेक्स से ज्यादा दोस्ती प्यारी है. क्योंकि तेरा स्वभाव बहुत अच्छा है.

शामली- देख प्रकाश, मैं भी रंडी किस्म की औरत नहीं हूँ. तू जो भी सोचता होगा उसकी मुझे परवाह नहीं है. फिर मेरा पति यूएस में है, तो वो वहां पर लड़कियों के साथ एंजॉय तो करता ही होगा ना. उसका हफ्ते में दो-तीन बार फोन आता है और वो मेरे साथ फोन सेक्स करता है. उसने मुझे बीच में बताया था, उसने उसके प्रोजेक्ट में साथ वाली लड़की के साथ सेक्स किया था. मैं खुली मानसिकता वाली हूँ, तो मुझे बुरा नहीं लगा.

मैं उसके मुँह से सेक्स की बात सुनकर कुछ सोचने लगा था.

वो आगे बोली= मेरे पति ने मुझसे बोला कि तू भी किसी के साथ सेक्स कर ले. लेकिन मैं कुछ बोली नहीं.

अभी वो ये सब बोल ही रही थी कि तभी उसके मोबाईल की घंटी बजी.
उसके पति को फोन यूएस से आ रहा था.

उन दोनों की बात चलने लगी.
कोई 15 मिनट बात होने के बाद शामली उससे बोली- आज इधर बहुत बारिश हो रही है. बड़ा मूड हो रहा है.

इसी तरह की उन दोनों बातें चलती रहीं.

शायद उसका पति मूड में आ गया था.
उसके पति ने उससे कहा- फोन स्पीकर पर डाल दो और चलो हम लोग फोन सेक्स करते हैं.
तभी शामली ने मुझे शांत रहने का इशारा किया.

उसके पति की आवाज मुझे सुनाई देने लगी थीं.

मुझे कुछ अजीब लग रहा था, लेकिन क्या करता.

शामली का पति बोला- शामली, कपड़े निकाल दे और बेड पर आ जाओ.
उसने मुझे इशारे से पीछे पीछे आने को कहा.

मैं उसके बेडरूम में आ गया.

वो बेड पर नंगी होकर लेट गयी.

तभी उसका पति बोला- हनी, मैं तेरी चूत चाटता हूँ.
शामली मुझे इशारा करके बोली- हां चूस लो मेरी चूत को.

मैं शामली की चूत को चाटने लगा.
तभी मैं खड़ा हुआ और रसोई में जाकर शहद खोजने लगा.
मैं शहद लेकर आया और शामली की चूत पर शहद टपका कर चूत चूसने लगा.

शामली बहुत ही ज्यादा गर्म हो गयी.
वो मेरा सर पकड़ कर कराहने लगी- आह आह जोर से चाटो ना … आ … आह … आह … और जोर से चाटो मेरी जान.
वो ये सब मेरी तरफ देख कर बोल रही थी.

तभी उसका पति बोला- वाह … शामली आज तो तू बड़ी मूड में है.
वो बोली- हां यार आज यहां बारिश हुई है तो मैं पूरी भीग गयी थी, इसलिए मूड में हूँ.

शामली फिर से ‘आह उन्ह …’ करने लगी और कामुक आवाजें भरती हुई ही बोली- मेरा पानी निकलने वाला है.
मैंने समझ लिया था कि वो ये कहना चाहती है कि हट जाओ.

मगर फिर भी मैंने उसकी चूत चूसना नहीं छोड़ा.
उसने रस झाड़ा तो मैं उसका पूरा पानी पी गया.

फिर शामली पति से बोली- चलो बाय … मुझे कुछ खाना भी है. कल बात करते हैं.
फोन कट गया फिर वो नंगी ही उठी और किचन की तरफ गयी.

वो उधर से एक ही प्लेट में रोटी और सब्जी लेकर आयी.
वो बोली- चलो खाना खा लेते हैं.
तभी मैंने कहा- एक ही प्लेट में?
वो बोली- मेरे साथ खाना खाने को नहीं चलेगा क्या … चूत चाट ली तब तुझे कुछ नहीं हुआ?

तभी मैं शांत हो गया, तो बोली- क्या हुआ प्रकाश एकदम क्यों शांत हो गए. मेरी बात बुरी लग गई क्या?

मैंने उसे बताया- नहीं यार, मैं और मेरी बीवी शादी के बाद दो साल तक एक की थाली में खाते थे, लेकिन उसके बाद से उसे कुछ भी अच्छा नहीं लगता था. बच्चे होने के बाद वो पूरी बदल गयी. जाने दो … मैं भी क्या लेकर बैठ गया.

वो मुझे उदास देख कर मेरी जांघ पर बैठ गयी.
एक निवाला लेकर मुझे खिलाया और एक खुद खाया.
फिर उसने मुझसे कहा- मुँह खोलो.

मैंने मुँह खोला तो उसने चबाया हुआ निवाला मेरे मुँह में डाल दिया और मुझे किस करने लगी.
मुझे सनसनी होने लगी.

ऐसे ही हम दोनों एक दूसरे को खिलाते गए और खाना खत्म कर दिया.
फिर वो बोली- तुमने तो स्वीट खा ली. मुझे कौन खिलाएगा.

ऐसा बोल कर वो मेरी टॉवल खींच कर मेरा लंड चूसने लगी.
लंड चूसने से मैं तो सातवें आसमान में उड़ने लगा था.

दस मिनट बाद मेरा भी पानी छूट गया.

शामली ने आखिरी बूंद तक मेरा लंड चूसा और चटखारा लेती हुई बोली- वाह, तेरी रबड़ी तो बहुत ही स्वादिष्ट है, खाना खाने के बाद स्वीट खाने कुछ और ही मजा रहता है.
फिर उसने सब बर्तन समेटे और रसोई में चली गयी.

बर्तन रख कर वैसे ही नंगी वापस आ गयी. क्या गजब की लग रही थी, जैसे तराशी हुयी मूरत हो.
मैं उसे देखता ही रह गया.

वो आते वक्त चॉकलेट लेकर आयी थी.

हम दोनों थोड़ी देर गप्प मारते रहे.
बातें करते हुए हम दोनों एक दूसरे के शरीर के साथ खेल भी रहे थे.

मैं कभी उसके चुचे चूसने लगता था, कभी उसकी नाभि में उंगली करने लगता था.

तभी मैंने झुक कर उसकी नाभि पर किस किया और चाटने लगा.

मालूम नहीं क्या हुआ, वो एकदम हिल गयी और बोली- यार, क्या कर रहे हो?
मैंने उसे नीचे लिटाया और सर से लेकर पांव के तलवे तक उसे चाटता और चूसता चला गया.

वो अभी सेक्स करने के मूड में आ चुकी थी. वो बोली- यार, तुम तो बहुत चालू चीज निकले. तुम्हें सब मालूम है कि औरतों की कौन सी जगह छेड़ने से औरत गर्मा जाती है.
मैंने उससे कहा- चलो तुझे मैं पसंद तो आया.

वो मुझे देखती रह गयी और शायद उसे पता चल गया था कि मैं ऐसा क्यों बोल रहा था.
उसने थोड़ी सी चॉकलेट ली और मेरे लंड पर लगा कर लंड चूसने लग गयी.

मैंने भी थोड़ी चॉकलेट ली और उसकी चूत और गांड पर लगा दी.
फिर मैंने पहले उसकी गांड चाटनी शुरू कर दी.

शायद इसका अंदाजा शामली को नहीं था.
उसे एकदम करंट सा लगा.

वो सिहर उठी. वो सीत्कार भरकर बोली- आंह प्रकाश तुझे एक बात बोलूं … तेरी और मेरी सोच बहुत हद तक मिलती जुलती है. मुझे भी एक चाह थी कि मेरा पति मेरी गांड चाटे और ये सब करे, जो तूने किया है. फिर भी अच्छा है कुदरत ने हमें ऐसे नहीं मिलाया शायद कुछ कुछ होना होगा कि जैसी तेरी इच्छा, वैसी मेरी इच्छा.

हम लोग हंसने लगे.
फिर मैंने उसकी चूत चाटी और फिर से चूत का पूरा पानी पी लिया.
उसने भी मेरा लंड चूस कर मेरी रबड़ी खा ली.

थोड़ी देर गपशप करने के बाद मैं बोला- चलो … अब असली काम करते हैं.
हम दोनों ने एक दूसरे को चूस चाट कर मूड में कर लिया.

वो बोली- चलो मेरे शेर, अब घुस जाओ अपनी मांद के अन्दर.
मैंने धीरे धीरे अभी अपना लंड उसकी चूत में डालना शुरू ही किया था कि उसको दर्द होने लगा क्योंकि करीब छह महीने से उसने सेक्स नहीं किया था.

मैं थोड़ा रुका और धीरे धीरे लंड चूत में डालना शुरू कर दिया.
चूत बेहद कसी हुई थी.
उसको थोड़ा दर्द हो रहा था लेकिन उसने कुछ नहीं कहा, सहन करती रही.

थोड़ी देर बाद वो मस्त हो गई और बोली- मेरे घोड़े, अब जोर से मार मेरी चूत … आह … साले और जोर से पेल भोसड़ी के आहह … आह … चोद और जोर से फुद्दी चुदाई कर!
वो कराहती जा रही थी और लंड लेती रही थी.

दस मिनट बाद वो बोली- तेरा होने वाला है कि नहीं, मेरी चूत में जलन होने लगी है. मैं आने वाली हूँ.
मैं बोला- हां मैं भी आने वाला हूँ.
वो बोली- तो साथ में आज जा. आह मैं गई.

उसी समय मैं भी झड़ गया.
हम दोनों एक साथ स्खलित हो गए थे.

बारिश के ठंडे मौसम में भी हम दोनों को पसीना आ गया था.
मैं उसके ऊपर लेट गया था.

हम दोनों की आंख लग गयी.
मेरा लंड उसकी चूत में ही फंसा था.

उसकी चूत का पानी और मेरा वीर्य बाहर बहकर बेड पर गिर गया था.

करीब आधा घंटा बाद नींद खुली तो शामली मेरा लंड चूस रही थी.

मेरा लंड उसके और मेरे रस से सना हुआ था.

फिर हम दोनों साथ में नहाये और सो गए.

सुबह होते ही मैंने शामली से कहा- चलो शामली, मैं निकलता हूँ.
वो बोली- यार तुम भी ना … पूरे चूतिया हो. आज तो छुट्टी है ना, तो रुको. कल हम दोनों यहीं से ही ऑफिस निकल जाएंगे. आज तो दिनभर हम लोग नंगे ही रहेंगे.

मैंने उसकी बात मान ली और सारे दिन चुदाई का मंजर चलता रहा.
घर का एक कोना भी नहीं छोड़ा था जहां मैंने उसे नहीं चोदा हो.

दूसरे दिन के सुबह तक हमने चार बार सेक्स किया था.
हम दोनों ने हमारी सारी इच्छाएं पूरी कर ली थीं.

ये कामनाएं मैं मेरी पत्नी से और शामली उसके पति से पूरी नहीं कर सकी थी.

एक दिन ऑफिस में देर हो गयी थी. बारिश चल रही थी और ट्रॅफिक भी बहुत ज्यादा था.

हम दोनों घर के लिए निकले, तभी शामली बोली- यार हम पीछे वाले रास्ते से चलते हैं.
मैं बोला- यार, उस रास्ते पर कोई नहीं रहता.
वो बोली- तभी तो मैं बोल रही हूँ.

मेरी कुछ समझ में नहीं आया कि इसके मन में क्या चल रहा है.
हम पीछे के रास्ते जा रहे थे. पूरा सुनसान रास्ता था. बारिश भी जोरों से चल रही थी.

शामली मुझसे एकदम चिपक कर बैठी थी और पैंट के ऊपर से मेरे लंड से खेल रही थी.

थोडी देर बाद शामली बोली- रुक जा ना!
मैंने पूछा- पेशाब लगी है क्या?
वो बोली- नहीं, पर तू रुक तो सही.

मैंने बाईक साईड में कर ली.

दूर दूर तक कोई भी गाड़ी की लाईट नहीं दिख रही थी.
वो बाईक पर झुकी और बोली- चल अपना लंड डाल चूत के अन्दर, आज चूत सुबह से बहुत तंग कर रही है.

मैंने बोला- यार, तेरे को तेरी पैंट नीचे करनी पड़ेगी.
वो बोली- सही से देख बे, यहां पर मैंने छेद बनाया है और अन्दर पेंटी है ही नहीं. चल जल्दी से पेल … और जोर जोर से मेरी फुद्दी को चोद. जब तक कोई आता नहीं, तब तक पेलते रहना.

मैंने समय न गंवाते हुए लंड चूत में डाल दिया और जोर जोर से चूत चोदने लगा.

मैं ज्यादा देर टिक नहीं पाया और बोला- मैं आने वाला हूँ.
तो शामली बोली- आह मैं भी आने वाली हूँ. मार जोर जोर से.
मैंने पूरा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और हम दोनों हांफने लगे.

मैंने उससे बोला- तुम भी कुछ भी करवाती रहती हो. अगर कोई आ जाता तो?
वो बोली- अबे साले तुझे मजा आया कि नहीं बोल!

मैं कुछ बोल ही नहीं सका.
बस रास्ते पर उसे किस करने लगा और जोर जोर से उसके बोबे दबाता रहा.

वो बोली- क्या विचार है प्रकाश और एक बार मन है तो अब घर चलें?
मैं हामी भर दी.

हम दोनों घर आकर मस्ती करने लगे और उसे एक बार पूरी मस्ती से चोद कर मैं अपने घर निकल गया.

उसके बाद जब भी हमें मौका मिलता, हम दोनों सेक्स कर लेते थे.

फिर एक साल बाद उसका पति भारत आ गया.
आज भी हम लोग अच्छे दोस्त हैं.
हहम अब सेक्स नहीं करते लेकिन दोस्ती कायम है.
क्योंकि दोस्ती से बढ़कर कुछ भी नहीं है.

आपको मेरी मैरिड फुद्दी चुदाई की कहानी अच्छी लगी होगी. मुझे मेल करें.
[email protected]

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