बस वाली भाभी से दोस्ती और फिर की चुदाई

(Pyasi Bhabhi Ki Chudasi Kahani)

विकी सन 2024-03-13 Comments

प्यासी भाभी की चुदासी कहानी में मेरी दोस्ती बस में एक भाभी से हो गयी. मैं रोज उसकी सीट रोकता था. एक दिन भाभी ने मुझे अपने घर बुलाया और उसके उकसाने पर मैं शुरू हो गया.

नमस्कार दोस्तो, मैं आपका मित्र विक्रम सांगा. मैं माध्यम वर्गीय परिवार से आता हूँ.
मैं हरियाणा के अम्बाला जिले से 40 किलोमीटर दूर एक छोटे से शहर से हूँ.

यह मेरी पहली सेक्स कहानी है, इसलिए अगर कोई गलती हो जाए तो माफ़ कर दीजिएगा.

यह प्यासी भाभी की चुदासी कहानी सन 2012 की है, जब मैं कॉलेज में पढ़ता था.
मैं हर रोज़ बस से कॉलेज जाता था, जो कि 40 किलोमीटर दूर था.

सुबह जिस बस में मैं जाता था, हर रोज़ उसी बस से एक भाभी भी जॉब पर जाती थीं.
उनका फिगर मस्त था; मोटे मोटे तने हुए कड़क और रसभरे दूध, पतली कमर और थोड़े बाहर को निकले हुए चूतड़ थे.

गज़ब की माल थी यार वह भाभी.

एक दिन शाम को आते वक्त्त जब वह बस से उतरी तो मैंने देखा उनका पर्स सीट पर ही रह गया.

मैंने उनको आवाज भी लगाई लेकिन उन्होंने सुना नहीं.
इतने में बस चल पड़ी.

अगले स्टॉप पर उतर कर मैंने उनका पर्स खोला तो उसमें उनका आइडी कार्ड था.

घर आकर मैं अपनी बाइक से उनके आइडी कार्ड वाले पते पर पहुंचा.
मैंने दरवाजे पर लगी घंटी बजा दी.

अन्दर से किसी बूढ़ी औरत ने दरवाजा खोला और मुझसे पूछने लगी- कौन हैं आप … और किससे मिलना है?
इससे पहले मैं कुछ बोलता, उस अम्मा के पीछे से वे भाभी निकल कर आईं और मुझे देखते ही बोलीं- आप तो वही है न जो रोज़ बस में मेरे साथ ही जाते हैं!

मैंने हां में सर हिलाया और कहा कि आपका पर्स बस में ही रह गया था तो वही देने आया हूँ.
उन्होंने खुश होकर धन्यवाद बोला.

जैसे ही मैं पर्स देकर चलने लगा तो उन्होंने कहा- रुकिए ना … प्लीज आप चाय पीकर जाइएगा.
मैं भला इस मौके को कैसे छोड़ सकता था.

चाय पीकर मैं अपने घर आ गया लेकिन मेरी आंखों में बस उनका ही चेहरा था.

उनका नाम शालिनी (बदला हुआ नाम) था और चाय पीते समय उनका चेहरा मेरी आंखों में बस गया गया था.

उनकी मुस्कान भरी थैंक्स वाली शक्ल दिल से जा निकल ही नहीं रही थी.

उसी दौरान जब भाभी ने चाय के कप सामने रखे थे, तब वे हल्की सी झुकी भी थीं जिससे उनके दूध की झलक मुझे दिखाई दे गई थी और उनकी वह दूधिया झलक … कसम से मेरे लौड़े को आग लगा गई थी.

बस वही सब याद करके मैं मुठ मारने लगा और माल झाड़ कर ही शांत हुआ.

अगले दिन मैंने उनके लिए एक सीट रोक रखी थी.
जब वे बस में चढ़ीं तो मैंने उन्हें इशारे से बुलाया.

वे मेरे पास आकर बैठ गईं.
क्या कमाल की खुशबू थी उनकी!

हमारी बातें चल पड़ीं.

उन्होंने कहा- सीट रोकने के लिए धन्यवाद. बस में भीड़ होती है तो सीट नहीं मिल पाती है.
मैंने भाभी से कहा- अरे भाभी इसमें धन्यवाद वाली क्या बात है.
वे इठला कर बोलीं- हम्म … अब देवर बन गए हो तो सच में धन्यवाद देने की कोई जरूरत नहीं है.

मैं उनकी इस चुटकी पर थोड़ा झेंप गया.
भाभी मेरे साथ बातों का सिलसिला आगे बढ़ाने लगीं.

मैं बस उन्हें ही देखे जा रहा था.
हमारी बातें अब अपरिचित से परिचित में बदल कर सामान्य रूप से चलने लगीं.

उन्होंने अपने बारे में बताते हुए कहा- मैं एक सरकारी नौकरी करती हूँ और मेरे पति भी सरकारी नौकर हैं लेकिन उनकी ड्यूटी दूसरे शहर में है. हम दोनों का साल में बस तीन-चार बार ही मिलना हो पाता है.

मैंने भाभी से उन बूढ़ी माता जी के बारे में पूछा.
तो उन्होंने बताया- वे मेरी सास हैं.

उसके बाद भाभी ने मुझसे पूछा- आप किधर जाते हैं देवर जी?
मैंने कहा- आपके देवर का नाम भी है भाभी जी!

भाभी- जब तक नाम नहीं बताएंगे तब तक तो मुझे देवर जी ही कहना पड़ेगा न!
मैंने हँसते हुए उन्हें अपना नाम बताया और यह भी बताया कि मैं कॉलेज जाता हूँ.

वे हंसने लगीं- पढ़ने जाते हैं या पढ़ाने जाते हैं?
मैंने समझ लिया था कि भाभी से जीत पाना आसान नहीं है.

मैंने उनके सामने हाथ जोड़े और विनम्रता से कहा- क्यों खिंचाई करने पर तुली हैं भाभी जी!
वे हंस पड़ीं और इस तरह से मैं भाभी के साथ हंसने बोलने लगा.

अब ये सिलसिला रोज़ चलने लगा.
मैं रोज़ उनके लिए सीट रोकता था.

हमने एक दूसरे के नंबर भी ले लिए थे.
हम दोनों के बीच चैट भी होने लगी थी.

एक दिन भाभी जी मूड में थीं तो वे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पूछने लगीं.
मैंने मना किया कि भाभी जी यह सब मुझे नहीं आता कि कैसे लड़की सैट करूँ.

भाभी ने धीमे से कहा- हां आपको तो सिर्फ भाभी सैट करना आता है.
मैंने सुन लिया था कि भाभी ने क्या कहा है. तब भी मैंने अनसुना करते हुए उनसे पूछा कि क्या … क्या कहा आपने?
भाभी बोलीं- क्या कहा … कुछ भी तो नहीं कहा!

मैंने उनकी तरफ देखा तो उनके चेहरे पर एक नॉटी सी स्माइल थी.

तभी मैंने उनकी तरफ सवालिया नजरों से देखा तो भाभी ने कुछ नहीं कहा.
वे बस मुसकुराती रहीं.

मैंने कहा- वैसे मैंने सुन तो लिया था कि आपने क्या कहा है.
वे हंसने लगीं और बोलीं- जब सुन लिया था तो क्यों पूछ रहे हो?

मैंने कहा- कन्फर्म करने के लिए कि आपने वही कहा है न, जो मैंने सुना है!
वे बोलीं- और तुमने क्या सुना है?

मैंने कहा- यही कि …
भाभी मेरी तरफ देखने लगीं और जब मैंने आगे कुछ नहीं कहा.

तो वे बोलीं- हां हां पूरा कहो … रुक क्यों गए?
मैंने कहा- बस यही तो वह कमी है जो मैं किसी को सैट नहीं कर पाता हूँ.

भाभी और जोर से हंसने लगीं.
इसी तरह से हम दोनों के बीच हल्की फुल्की नॉनवेज बातें भी होने लगीं।

कुछ दिनों बाद एक रविवार शाम को भाभी का कॉल आया- गैस का सिलेंडर खत्म हो गया है. कुछ कर सकते हो क्या?
मैंने कहा- हां मेरे पास एक एक्स्ट्रा सिलेंडर है. मैं अभी ले आता हूँ.

मैं तुरंत सिलेंडर लेकर चला गया.

जब उन्होंने दरवाजा खोला तो मैं तो उन्हें देखता ही रह गया.
भाभी नाईटी में क्या कयामत लग रही थीं.

वे मुस्कुरा कर बोलीं- देखते ही रहोगे या अन्दर भी आओगे?
उस दिन वे अकेली थीं.

मैंने पूछा- आपकी सासु मां कहां हैं?
उन्होंने बताया कि वे गांव गई हैं.

मेरे मन में लड्डू फूटने लगे.

उन्होंने मुझसे पूछा- चाय पियोगे या दूध!
भाभी मेरी तरफ कामुक नजरों से देखने लगी थीं.

मैंने भी उनकी चूचियों को देखते हुए कहा- मुझे दूध पसंद है.
वे मेरे पास आकर बैठ गईं और उन्होंने मेरी जांघों पर हाथ रख दिया.

बस फिर क्या था … मैंने भाभी को कमर से पकड़ा और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए.
उफ्फ्फ … क्या मक्खन जैसे होंठ थे.

हम दोनों स्मूच कर रहे थे.
पहली बार किस करके मज़ा आया.

मैंने उनको उठाया तो उनका शरीर फूल से भी हल्का लग रहा था.

मैंने भाभी को गोदी में उठाया और चूमते हुए उन्हें उनके बेडरूम में ले गया.
उधर मैंने भाभी को लेटा दिया.

हम दोनों लगातार किस कर रहे थे.
हम दोनों ने जल्दी ही एक दूसरे के कपड़े निकाल दिए थे.

मैंने उनकी नाइटी उतार कर उनको पूरी नंगी कर दिया.
गजब के दूध थे.

मैं उनके एक दूध को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा.
क्या गज़ब का स्वाद था.

भाभी मादक सिसकारियां ले रही थीं.
उनके हाथ मेरे सर के ऊपर घूम रहा था.

भाभी के मम्मों को चूसना छोड़कर मैं नीचे की ओर बढ़ा.
उनकी गहरी नाभि और नाभि के पास काला तिल गज़ब का सेक्सी लग रहा था.

मैंने और नीचे हाथ ले जाकर उनकी चूत को हाथ लगाया, तो वह पहले ही पानी पानी हो रही थी.

मैंने भाभी की दोनों टांगों को उठाकर सफाचट चूत पर अपनी जीभ लगाई, तो वे और गर्म होने लगीं.
मैं उनकी चूत चाटने लगा. भाभी की चूत के नमकीन पानी का स्वाद मेरे मुँह में मस्त घुल रहा था.

वह मुझे चोदने के लिए बोलने लगीं.

मैंने अपना लौड़ा उनके हाथ में पकड़ा दिया और चूसने को बोला.

पहले भाभी लंड चूसने के लिए मना कर रही थीं.
मगर मेरे जोर देने पर उन्होंने कहा- मैं सिर्फ टोपा चूमूँगी.
मैंने कहा- ठीक है.

भाभी मेरे लौड़े को चुम्बन करने लगीं.
मुझे भी मजा आ रहा था.
मैं बेड पर लेटा हुआ था.

अचानक से भाभी ने मेरे लौड़े को मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
मैं तो जैसे जन्नत में था.
कुछ देर तक लंड चूसने के बाद वे रुक गईं.

मैंने इशारा किया तो वे उठीं और मेरे ऊपर आकर अपनी मखमली चूत को मेरे लौड़े पर रखकर धीरे धीरे लौड़े को अन्दर लेने लगीं.

जब मैंने गांड उठाने की कोशिश की तो शालिनी भाभी ने कहा- नहीं तुम नहीं करो, मुझे आराम आराम से करने दो. मेरे पति का सिर्फ 5 इंच का है.

जब मेरा आधा लौड़ा अन्दर चला गया, तो वे रुक गईं.
उन्हें दर्द हो रहा था.

मैंने लंड निकाल कर उन्हें बेड पर चित लेटा दिया और उनकी टांगों को अपने कंधों पर रख कर चूत के दाने पर लौड़े को रगड़ने लगा.

उनको मज़ा आ रहा था.
भाभी की आंखें मज़े में बंद हो गई थीं.

फिर मैं भाभी को किस करने लगा.
चुदाई भाभी मेरा पूरा साथ दे रही थीं.

मैंने अपने लौड़े के टोपे को चूत के मुँह पर रखा और लौड़े को अन्दर सरका दिया.
आधा लौड़ा आराम से अन्दर जा चुका था.

भाभी चूंकि 3 महीने से चुद नहीं पाई थीं तो उनकी चूत काफी टाइट थी.

मैंने उनके होंठों को अपने होंठों में कैद किया और एक जोर से झटका दे मारा.

मेरा पूरा लौड़ा उनकी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया था.
उनकी आंखों से आंसू निकल आए थे.

उनकी चूत मेरे लौड़े के ऊपर बिल्कुल कॉर्क के ढक्कन सी चिपक गई थी.

मैंने लौड़े को थोड़ा बाहर निकालने की कोशिश की तो उन्होंने भी अपने चूतड़ ऊपर उठा दिए.
उनकी आह आह की आवाज आने लगी.

मैं थोड़ा रुक गया और फिर से लौड़े को बाहर निकाल कर हल्के झटके लगाने लगा.

अब भाभी को भी चुदने में मजा आने लगा था.
हम दोनों ने करीब 20 मिनट तक चुदाई की.

मैं एकदम से चरम पर आने लगा था और जोर जोर से झटके लगाने लगा था.

प्यासी भाभी भी नीचे से गांड उठा कर मेरा साथ दे रही थीं.
अब तक भाभी 2 बार झड़ चुकी थीं.

हम दोनों पसीने से भीग गए थे.

मैंने भाभी को घोड़ी बनाया और पीछे से चोदने लगा; फिर 15-20 धक्कों के बाद मैं उनके अन्दर ही झड़ गया.

भाभी भी मस्ती से लंड के पानी से अपनी चूत की प्यास बुझवाने लगीं.

उसके बाद मैंने भाभी की गांड भी मारी.
वह सेक्स कहानी फिर कभी सुनाऊंगा.

आपको मेरी प्यासी भाभी की चुदासी कहानी कैसी लगी, प्लीज कमेंट करके जरूर बताएं.

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